साझेदारी की असली कसौटी क्या है? Narendra Modi ने X पर रखा भारत का नज़रिया प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि असली साझेदारी वह नहीं जो हम दूसरों के लिए बनाते हैं, बल्कि वह है जो दूसरों को अपने लिए बनाने में सक्षम बनाती है। प्रधानमंत्री Narendra Modi (@narendramodi) ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट साझा करते हुए साझेदारी और विकास सहयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी रिश्ते की असली परख इस बात में नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या खड़ा करते हैं, बल्कि इसमें है कि हम दूसरों को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए कितना सक्षम बनाते हैं। साझेदारी की असली कसौटी अपनी पोस्ट में Modi ने अपने ही शब्दों में यह विचार रखा: India believes that the true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves. Our development partnerships reflect the same spirit. Our efforts have focused on capacity building and skill development in partner countries. उनके इस संदेश का मूल भाव यही है कि भारत किसी पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में यकीन रखता है। उनके अनुसार भारत की विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को दर्शाती हैं। क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर ध्यान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के प्रयास साझेदार देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रहे हैं। यानी ध्यान सिर्फ परियोजनाएँ सौंपने पर नहीं, बल्कि लोगों को हुनरमंद बनाने और स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने पर है, ताकि वे देश आगे चलकर खुद अपना भविष्य गढ़ सकें। किस संदर्भ में आई यह बात प्रधानमंत्री ने यह विचार ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ विषय पर हुए Outreach Session में रखे, जो Evian में आयोजित G7 Summit के दौरान हुआ। उन्होंने रेखांकित किया कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर होती जा रही है, ऐसे में यह विषय और भी अहम हो जाता है। जनता की प्रतिक्रिया पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कई यूज़र्स ने भारत के इस आत्मनिर्भरता वाले रुख की सराहना की, तो कुछ ने इन शब्दों को ज़मीन पर उतारने को लेकर सवाल और जिज्ञासा भी जताई। इसका आप पर असर आपके लिए इसका क्या मतलब है: • यह भारत की उस विदेश नीति का संकेत है जिसमें दूसरे देशों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर है, जिससे साझेदार देशों में भारतीय हुनर और प्रशिक्षण की माँग बढ़ सकती है। • कौशल विकास पर ज़ोर का मतलब है कि विदेशों में काम कर रहे या ट्रेनिंग देने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए आगे चलकर नए अवसर खुल सकते हैं। सवाल-जवाब 1. Narendra Modi ने अपनी पोस्ट में साझेदारी की असली कसौटी किसे बताया? उन्होंने कहा कि साझेदारी की असली परख यह नहीं कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह कि हम दूसरों को अपने लिए क्या बनाने में सक्षम बनाते हैं। 2. भारत के प्रयास किस पर केंद्रित रहे हैं? Modi के अनुसार भारत के प्रयास साझेदार देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रहे हैं। 3. यह बात किस मौके पर कही गई? यह विचार Evian में हुए G7 Summit के दौरान ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ विषय पर हुए Outreach Session में रखे गए। https://trendkia.com/neta-ji/sajhedari-ki-asali-kasauti-kya-hai-narendra-modi-ne-x-para-rakha-bharata-ka-naza-1299 TrendKia — Har trend, sabse pehle.