# शशि थरूर ने लोकसभा में उठाई प्राकृतिक खेती की मांग, किसानों की आय और लागत पर दिया जोर

> शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उन्होंने लोकसभा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के लिए खेती आर्थिक रूप से लाभकारी होनी चाहिए और इसके लिए उपज व श्रम लागत जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/shashi-tharura-ne-lokasabha-men-uthai-prakritika-kheti-ki-manga-kisanon-ki-aya-aura-lagata-para-diya-jora-33093 · **Language:** Hindi
**Tags:** ShashiTharoor

लोकसभा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसे किसानों के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में संसद के सत्र के दौरान विभिन्न विधायी कार्यों और सरकारी योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिसमें कृषि विकास के आंकड़े भी सामने आए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान व्यापक कृषि विकास से जुड़े आंकड़े साझा किए थे, जिससे देश में खेती की स्थिति स्पष्ट होती है।

## प्राकृतिक खेती और किसानों की चुनौतियां
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बात का जिक्र किया कि उन्होंने संसद के पटल पर प्राकृतिक खेती की वकालत की है। उनका मुख्यत: यह कहना था कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना तभी सार्थक है जब यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो। खेती की ओर रुख करने से पहले किसानों को उपज के नुकसान, मजदूरी की लागत और सही मूल्य मिलने जैसी वास्तविक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

## कृषि क्षेत्र में नीतिगत कदम और संसद की कार्यवाही
संसद में कृषि और अन्य अहम मुद्दों पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं, जैसे कि हाल ही में लोक सभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल और टैक्सेशन एमेंडमेंट बिल जैसे विधेयकों को विचार के लिए लिया गया है। इसके अलावा देश में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए शोध और प्रयोगशालाओं से लेकर खेतों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती को तभी अपनाया जा सकता है जब किसानों को उनकी उपज का उचित और समय पर लाभ मिले।

## जनता की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और आम जनता की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कई लोगों ने किसानों की आय और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की महत्ता का समर्थन किया।

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## इसका आप पर असर
यह मुद्दा सीधे तौर पर देश के किसानों की आय, खेती की लागत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

- **भारत में:** प्राकृतिक खेती को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने से देश भर के किसानों को लागत कम करने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
- **किसानों के लिए:** यह नीतिगत बहस यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि पारंपरिक से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने वाले किसानों को उपज में कमी या अधिक श्रम लागत का नुकसान न उठाना पड़े।

## सवाल-जवाब

### 1. शशि थरूर ने लोकसभा में किस मुद्दे को उठाया?
उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसे किसानों के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने का मुद्दा उठाया।

### 2. किसानों के लिए किन मुख्य चुनौतियों का जिक्र किया गया?
उपज में उतार-चढ़ाव, श्रम लागत और सही कीमत मिलने जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया।

### 3. यह बयान किस मंच पर साझा किया गया?
शशि थरूर ने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।

### 4. संसद में कृषि से जुड़े अन्य कौन से विषय चर्चा में रहे?
कृषि विकास के आंकड़े और विभिन्न आर्थिक व विधायी विधेयक लोकसभा में विचार के अधीन रहे हैं।

## नेता परिचय: शशि थरूर
- **पद:** सांसद, तिरुवनंतपुरम
- **जन्म:** 9 मार्च 1956, लंदन, यूके
- **पार्टी:** भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- **शिक्षा:** फ्लेचर स्कूल, टफ्ट्स से पीएचडी

2009 से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और 25 से अधिक पुस्तकों के पुरस्कृत लेखक।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव (2002–2007)
- सांसद, तिरुवनंतपुरम (2009 से)
- विदेश राज्य मंत्री (2009–2010)
- विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष
- 25+ पुस्तकों के लेखक; साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता

### रोचक तथ्य
- 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे।
- 22 वर्ष की आयु में पीएचडी पूरी की — फ्लेचर स्कूल के इतिहास में सबसे कम उम्र में।


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