उत्तर प्रदेश के शहरों में जलभराव पर अखिलेश यादव का हमला, नदियों के किनारे विकसित सभ्यताओं का दिया हवाला समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के शहरों में मानसून के दौरान जलभराव और खराब जल-निकासी व्यवस्था पर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए नागरिक अवसंरचना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश के साथ ही शहरी इलाकों में जलभराव की समस्या एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य के प्रमुख शहरों में पानी भरने की स्थिति पर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का सहारा लेते हुए कहा कि जहां प्राचीन काल से नदियां सभ्यताओं के विकास का आधार रही हैं, वहीं आज प्रशासनिक कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण प्रमुख शहरों की सड़कें ही नदियों जैसी नजर आने लगती हैं। नदियों के किनारे बसे ऐतिहासिक शहरों का महत्व भारत के इतिहास में नदियों के किनारे बसे शहरों का एक विशेष स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर नदियों के तट पर ही फले-फूले हैं। यमुना नदी के किनारे बसा आगरा शहर, जिसका इतिहास सिकंदर लोदी से लेकर मुगलों के काल तक विस्तृत है, अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान रखता है। इसी तरह गोमती नदी के किनारे स्थित लखनऊ को नवाबों के शहर और उत्तर भारत के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। वहीं गंगा और यमुना के संगम पर बसा प्रयागराज धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नागरिक अवसंरचना और जल-निकासी पर उठते सवाल प्रयागराज के जॉर्ज टाउन जैसे रिहायशी इलाकों में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरें सामने आई थीं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य के प्रमुख नगरों में जल-निकासी की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। अखिलेश यादव के अनुसार, विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद नालों की सफाई और उचित ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करने में भारी ढिलाई बरती गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में हुई अनियमिताओं के कारण ही आम जनता को हर साल जलजमाव की मुसीबत झेलनी पड़ती है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक दावे उत्तर प्रदेश में कुंभ मेला और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान नागरिक सुविधाओं के सुधार पर भारी राशि खर्च की गई थी। इसके बावजूद बारिश के मौसम में मुख्य मार्गों पर जलजमाव होने से विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शहरों को आधुनिक स्तर पर विकसित करने के जो वादे किए गए थे, वे जमीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो रहे हैं। दूसरी ओर, शासन के समर्थकों का तर्क है कि अत्यधिक तेज बारिश के कारण अस्थायी रूप से पानी जमा होना एक सामान्य बात है और इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उनका दावा है कि सरकार शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जनता की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया और आम जनता के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिला। कई स्थानीय निवासियों ने बारिश के बाद होने वाले जलभराव और अव्यवस्था पर अपनी नाराजगी जाहिर की, जबकि कुछ लोगों ने इस स्थिति के लिए अत्यधिक वर्षा को जिम्मेदार मानते हुए विपक्षी बयानों को राजनीति से प्रेरित करार दिया। इसका आप पर असर भारत में: यह मामला भारत के प्रमुख शहरी केंद्रों में मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए मजबूत जल-निकासी प्रणाली और बेहतर नागरिक नियोजन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उत्तर प्रदेश में: प्रयागराज, लखनऊ और आगरा जैसे शहरों के निवासियों को भारी बारिश के दौरान आवागमन में परेशानी और जलजमाव की चुनौती का सामना करना पड़ता है। सवाल-जवाब 1. अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में जलभराव पर क्या टिप्पणी की? उन्होंने कहा कि इतिहास में नदियां सभ्यताओं का केंद्र थीं, लेकिन वर्तमान में कुप्रबंधन के कारण शहरों की सड़कें पानी से भर रही हैं। 2. इस विवाद में किन प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र हुआ? उत्तर प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक शहरों जैसे प्रयागराज, आगरा और लखनऊ का जिक्र किया गया जो नदियों के किनारे बसे हैं। 3. जल-निकासी प्रणाली पर विपक्ष का मुख्य आरोप क्या है? विपक्ष का आरोप है कि नागरिक निकायों में भ्रष्टाचार और खराब योजना के कारण हल्की सी भारी बारिश में भी सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। 4. इस मुद्दे पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रही? सोशल मीडिया पर लोगों ने विभाजित प्रतिक्रिया दी, जहां कुछ निवासियों ने जलभराव की शिकायत की तो दूसरों ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। नेता परिचय: अखिलेश यादव • पद: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष • जन्म: 1 जुलाई 1973, सैफई, उत्तर प्रदेश • पार्टी: समाजवादी पार्टी • शिक्षा: मैसूर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद। वे उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री (2012–17) रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • सांसद (पहली बार 2000 में निर्वाचित) • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2012–2017) • समाजवादी पार्टी अध्यक्ष (2017 से) • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो बनवाई • कन्नौज से सांसद (18वीं लोकसभा) रोचक तथ्य • 38 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। • पेशे से सिविल इंजीनियर; फुटबॉल में गहरी रुचि। https://trendkia.com/neta-ji/uttar-pradesh-ke-shaharon-men-jalabharava-para-akhilesha-yadava-ka-hamala-nadiyon-ke-kinare-vikasita-sabhyataon-ka-diya-havala-17591 TrendKia — Har trend, sabse pehle.