उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची संशोधन को लेकर चुनाव आयोग पर बरसे अखिलेश यादव, प्रक्रिया में गड़बड़ी का लगाया आरोप समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा बताई गई तकनीकी खामियों के पीछे व्यवस्थागत विसंगतियां छिपी हैं। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियों को केवल छोटी-मोटी त्रुटि बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान और ड्राफ्ट रोल से करोड़ों नाम हटने को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है। मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठे सवाल मतदाता सूची के संशोधन यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव मशीनरी के बीच तनातनी बनी हुई है। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से गायब किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि उन्होंने बाकायदा साक्ष्यों के साथ निर्वाचन आयोग के समक्ष आधिकारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आयोग का तर्क रहा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के नियमों के तहत मृत, स्थानांतरित और दोहरे पंजीकरण वाले नामों को हटाना एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक कदम है। हालांकि, विपक्षी खेमा इसे प्रशासनिक चूक से कहीं अधिक मान रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अखिलेश यादव ने आयोग से पूछे तीखे सवाल अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी करते हुए चुनाव आयोग के रुख को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के इस स्पष्टीकरण को पल भर के लिए मान भी लिया जाए कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में मामूली गलतियां हुई हैं, तब भी यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि इन गलतियों का असर इतना एकतरफा क्यों दिखता है। इससे पहले भी उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नंदलाल नाम के एक व्यक्ति को मीडिया के सामने पेश कर मतदाता सूची में हेरफेर के सीधे आरोप लगाए थे। सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सामान्य नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे बूथ स्तर पर सतर्क रहें और मतदाता सूची के हर पन्ने की गहन जांच करें। समाजवादी पार्टी की राजनीतिक पृष्ठभूमि समाजवादी पार्टी भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों में शुमार है, जिसका मुख्य जनाधार उत्तर प्रदेश में है। इस दल की स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को हुई थी। इसके संस्थापक मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में देश के रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं और राज्य की राजनीति में मुख्य विपक्षी धुरी बने हुए हैं। जनता की प्रतिक्रिया अखिलेश यादव के इस बयान के बाद जनता और समर्थकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच का पुरजोर समर्थन किया, जबकि अन्य का कहना था कि चुनाव पूर्व नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेवजह राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। इसका आप पर असर मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद का सीधा असर आम नागरिकों के मताधिकार और पहचान सत्यापन पर पड़ता है। • उत्तर प्रदेश में: राज्य के प्रत्येक नागरिक को ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम तत्काल जांचना चाहिए। यदि नाम सूची से हट गया है या गलत दर्ज है, तो समय सीमा समाप्त होने से पहले फॉर्म भरकर संशोधन कराया जा सकता है। • भारत में: देश भर के मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपने पंजीकरण की नियमित पुष्टि करें। समय पर विवरण दुरुस्त रखने से मतदान के दिन किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकता है। • दस्तावेजी प्रक्रिया: पते या विवरण में किसी भी बदलाव के लिए वैध निवास प्रमाण पत्र तैयार रखना अनिवार्य है। सही कागजात के साथ समय रहते आवेदन करने से नाम सूची में सुरक्षित रहता है। • बूथ स्तरीय सत्यापन: स्थानीय बूथ स्तर अधिकारी से संपर्क कर ड्राफ्ट पर्चियों की पुष्टि की जा सकती है। इससे किसी भी अनाधिकृत विलोपन या विसंगति का तुरंत पता चल जाता है। सवाल-जवाब 1. अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में जानबूझकर अनियमितताएं की जा रही हैं और आयोग द्वारा इसे मामूली गलती बताना नाकाफी है। 2. चुनाव आयोग का मतदाता सूची में संशोधन को लेकर क्या रुख है? आयोग का कहना है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मृत, स्थानांतरित और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाना एक सामान्य प्रशासनिक नियम है। 3. समाजवादी पार्टी की स्थापना कब और किसने की थी? समाजवादी पार्टी की स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव द्वारा की गई थी। 4. क्या मतदाता अपने नाम के हटने पर दोबारा आवेदन कर सकते हैं? हां, नागरिक चुनाव आयोग के नियमों के तहत निर्धारित समय सीमा में उचित दस्तावेज जमा करके दोबारा नाम शामिल करने का दावा कर सकते हैं। नेता परिचय: अखिलेश यादव • पद: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष • जन्म: 1 जुलाई 1973, सैफई, उत्तर प्रदेश • पार्टी: समाजवादी पार्टी • शिक्षा: मैसूर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद। वे उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री (2012–17) रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • सांसद (पहली बार 2000 में निर्वाचित) • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2012–2017) • समाजवादी पार्टी अध्यक्ष (2017 से) • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो बनवाई • कन्नौज से सांसद (18वीं लोकसभा) रोचक तथ्य • 38 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। • पेशे से सिविल इंजीनियर; फुटबॉल में गहरी रुचि। https://trendkia.com/neta-ji/uttar-pradesh-men-matadata-suchi-snshodhana-ko-lekara-chunava-ayoga-para-barase-akhilesha-yadava-prakriya-men-garabari-ka-lagaya-a-47838 TrendKia — Har trend, sabse pehle.