वैश्विक संकट और 4F चुनौतियों पर एशिया सोसाइटी में बोले एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय सप्ताह के समापन पर एस जयशंकर ने एशिया सोसाइटी में दुनिया भर में जारी संघर्षों और खाद्य, ईंधन, उर्वरक व वित्त के गंभीर संकट पर विस्तृत बातचीत की। संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय सप्ताह के समापन अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसाइटी में एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। इस सत्र में भाग लेते हुए एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती गंभीर चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने सत्र के संचालक डैनी रसेल के साथ हुई बातचीत की सराहना की और दुनिया की मौजूदा दशा को रेखांकित किया। दुनिया भर में जारी संघर्ष और 4F संकट की चुनौती सत्र के दौरान एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में विश्व बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। कई क्षेत्रों में एक साथ चल रहे हिंसक टकरावों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चार प्रमुख संकटों यानी 4F (भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति, खाद और वित्तीय तरलता की कमी विकासशील और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव डाल रही है। वैश्विक व्यवस्था के विरोधाभास पर मंथन संवाद के दौरान अंतरराष्ट्रीय संबंधों और समकालीन वैश्विक व्यवस्था के अंतर्विरोधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बदलती भू-राजनीति के बीच विभिन्न देशों की प्राथमिकताओं और वास्तविक वैश्विक समस्याओं के बीच के अंतर को प्रमुखता से उठाया गया। संयुक्त राष्ट्र सत्र के अंतिम चरण में हुई इस परिचर्चा में व्यावहारिक कूटनीति के महत्व पर जोर दिया गया। जनता की प्रतिक्रिया इस संबोधन के सार्वजनिक होने के बाद नागरिकों और ऑनलाइन मंचों पर मिली-जुली राय सामने आई। कई उपयोगकर्ताओं ने वैश्विक मंच पर खाद्य और ईंधन सुरक्षा जैसे बुनियादी मसलों को उठाने की प्रशंसा की, जबकि कुछ लोगों ने क्षेत्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संतुलन को लेकर अपने सवाल और सुझाव साझा किए। इसका आप पर असर वैश्विक स्तर पर खाद्य, ईंधन और वित्त से जुड़ा संकट आम नागरिकों की दैनिक लागत और जीवनयापन के खर्च को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति में व्यवधान से देश में घरेलू मुद्रास्फीति और कृषि लागत पर सीधा असर पड़ता है। इससे सरकार के लिए ऊर्जा सब्सिडी और व्यापार घाटे को संतुलित रखना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। • खाद्य और रसोई बजट पर असर: दुनिया भर में खाद और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से आम उपभोक्ताओं के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। परिवारों को दैनिक बजट में संभावित मूल्य वृद्धि के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। • ऋण और वित्तीय लागत: वैश्विक स्तर पर वित्तीय संकट बढ़ने से विदेशी निवेश और मुद्रा विनिमय दरों पर दबाव गहराता है। इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों और व्यावसायिक कर्ज की दरों पर दिखाई देता है। • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के जारी रहने से आयात-निर्यात में देरी और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम स्थानीय बाजारों में वस्तुओं की उपलब्धता और समय पर डिलीवरी पर पड़ता है। सवाल-जवाब 1. एस जयशंकर ने किस मंच पर यह संबोधन दिया? उन्होंने संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय सप्ताह के अंत में न्यूयॉर्क स्थित एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में यह वक्तव्य दिया। 2. इस सत्र में चर्चा का संचालन किसने किया? इस परिचर्चा का संचालन डैनी रसेल द्वारा किया गया। 3. जयशंकर द्वारा उल्लिखित 4F संकट क्या है? 4F संकट का तात्पर्य भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertiliser) और वित्त (Finance) की वैश्विक कमी और दबाव से है। 4. चर्चा में दुनिया की वर्तमान स्थिति के बारे में क्या कहा गया? उन्होंने बताया कि दुनिया वर्तमान में अनेक संघर्षों और गंभीर आर्थिक विरोधाभासों के कारण एक अत्यंत कठिन दौर से गुजर रही है। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/vaishvika-snkata-aura-4f-chunautiyon-para-eshiya-sosaiti-men-bole-esa-jayashnkara-40018 TrendKia — Har trend, sabse pehle.