# वाराणसी में जलभराव पर अखिलेश यादव का तंज, क्योटो मॉडल पर उठाए गंभीर सवाल

> सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वाराणसी में भारी बारिश के बाद हुए जलभराव पर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर निशाना साधा है। उन्होंने काशी को क्योटो बनाने के दावों और ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली को लेकर कई सवाल खड़े किए।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/varanasi-men-jalabharava-para-akhilesha-yadava-ka-tnja-kyoto-modala-para-uthae-gnbhira-savala-31479 · **Language:** Hindi
**Tags:** yadavakhilesh

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी वाराणसी में बारिश के बाद पैदा हुई जलभराव की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने काशी में ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली और स्मार्ट सिटी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार के उस लंबे समय से चले आ रहे दावे पर तंज कसा जिसमें वाराणसी को जापान के ऐतिहासिक शहर क्योटो की तर्ज पर विकसित करने की बात कही गई थी। अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारी मानसूनी बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख रास्ते और नए निर्माण स्थल जलमग्न नजर आए।

 

## वाराणसी में जलभराव और क्योटो मॉडल पर तंज

अखिलेश यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि देश की 'प्रधान नगरी' में जलमग्न विकास की तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों के सामने उजागर हो गई हैं। उन्होंने तंजिया अंदाज में टिप्पणी की कि जब तक वाराणसी की हालत को बारिश के मौसम में गोरखपुर जैसा नहीं बना दिया जाएगा, तब तक लखनऊ में बैठी सरकार शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था और विकास के दावों का यह विवाद अब केवल दिल्ली बनाम लखनऊ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'क्योटो बनाम स्पेन' की चर्चा बन चुका है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ विज्ञापनों और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों में तरक्की दिखाती है, जबकि धरातल पर बुनियादी सुविधाएं चरमराई हुई हैं।

 

## वाराणसी में बारिश से बेहाल नागरिक सुविधाएं

हाल के दिनों में वाराणसी में हुई मूसलाधार बारिश ने शहर के ड्रेनेज नेटवर्क की पोल खोल दी है। शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे रोप-वे स्टेशन के पास घुटनों से ऊपर तक पानी भर जाने के दृश्य सामने आए, जिससे 'नई काशी' की परिकल्पना पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में काशी में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया था, जिससे यह देश के सबसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल रहा। हालांकि, मानसून के मौसम में पुरानी और सीमित जल निकासी व्यवस्था और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच तालमेल न होने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों को जलजमाव, यातायात जाम और गंदगी से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

## गंगा में अटका विदेशी पर्यटकों का क्रूज

मानसून की बारिश और गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जल परिवहन सेवाओं पर भी बड़ा असर डाला है। विदेशी सैलानियों को लेकर भागलपुर के रास्ते वाराणसी की ओर आ रहा 'राजमहल क्रूज' नदी में आई बाढ़ और अत्यधिक गाद जमा होने की वजह से बीच रास्ते में ही फंस गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सैलानियों की सुरक्षा और मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को मोर्चा संभालना पड़ा। गंगा में जलस्तर के अचानक बढ़ने और नौकायन में आ रही बाधाओं के कारण इस लग्जरी क्रूज को अंततः बिहार के भागलपुर से ही वापस मोड़ना पड़ा। इस घटना ने मानसूनी परिस्थितियों के दौरान जल पर्यटन के प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।

 

## गोरखपुर के बारे में

अखिलेश यादव के बयान में संदर्भित गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख प्रशासनिक, राजनीतिक और व्यापारिक केंद्र है। भौगोलिक सीमा की बात करें तो गोरखपुर जिला पूर्व में देवरिया और कुशीनगर, पश्चिम में संत कबीर नगर, उत्तर में महराजगंज और सिद्धार्थनगर तथा दक्षिण में मऊ, आज़मगढ़ और अम्बेडकर नगर जिलों से घिरा हुआ है। यह शहर पूर्वांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी, चिकित्सा और शिक्षा का मुख्य केंद्र है और राज्य की राजनीति में भी बेहद अहम स्थान रखता है।

 

## जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आम जनता और राजनीतिक समर्थकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बड़ी संख्या में नागरिकों ने शहर की जल निकासी व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग करते हुए विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन किया और कहा कि वैश्विक पहचान रखने वाले शहर में ऐसा जलभराव दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के समर्थकों का तर्क था कि रिकॉर्ड मानसूनी बारिश के कारण सामयिक जलजमाव एक सामान्य प्राकृतिक चुनौती है, और सरकार लगातार बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए काम कर रही है।

>

## इसका आप पर असर
वाराणसी में जलभराव और परिवहन में रुकावट से स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है।

- **भारत में:** प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों में जलभराव और लग्जरी क्रूज सेवाओं के बाधित होने से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर पड़ता है। मानसून के दौरान यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

- **उत्तर प्रदेश और वाराणसी में:** स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों को जलमग्न सड़कों और रोप-वे स्टेशनों के पास घुटने तक पानी भरने से भारी परेशानी होती है। इससे स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में जल निकासी प्रणाली को दुरुस्त करने की आवश्यकता उजागर होती है।

## सवाल-जवाब

### 1. अखिलेश यादव ने वाराणसी के जलभराव पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके काशी में जलभराव की स्थिति को लेकर सरकार के 'क्योटो' मॉडल के दावों पर तंज कसा और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए।

### 2. वाराणसी में भारी बारिश से क्रूज सेवा क्यों प्रभावित हुई?
गंगा नदी में बाढ़ और अत्यधिक गाद जम जाने के कारण विदेशी सैलानियों को लेकर आ रहा राजमहल क्रूज भागलपुर से आगे नहीं बढ़ सका और उसे वापस लौटना पड़ा।

### 3. जलभराव का असर शहर के किन प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर दिखा?
भारी बारिश के कारण वाराणसी में नवनिर्मित रोप-वे स्टेशन और मुख्य सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया।

### 4. गोरखपुर का संदर्भ इस विवाद में क्यों आया?
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए बारिश के दौरान गोरखपुर में होने वाले जलभराव से वाराणसी की स्थिति की तुलना की।

## नेता परिचय: अखिलेश यादव
- **पद:** समाजवादी पार्टी अध्यक्ष
- **जन्म:** 1 जुलाई 1973, सैफई, उत्तर प्रदेश
- **पार्टी:** समाजवादी पार्टी
- **शिक्षा:** मैसूर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद। वे उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री (2012–17) रहे।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- सांसद (पहली बार 2000 में निर्वाचित)
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2012–2017)
- समाजवादी पार्टी अध्यक्ष (2017 से)
- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो बनवाई
- कन्नौज से सांसद (18वीं लोकसभा)

### रोचक तथ्य
- 38 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने।
- पेशे से सिविल इंजीनियर; फुटबॉल में गहरी रुचि।


---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._