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  "type": "article",
  "title": "1984 दंगा पीड़ितों के जख्म हरे, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सुनी आपबीती",
  "summary": "दिवाली से पहले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों से मुलाकात की। इस दौरान पीड़ितों ने अपने दर्द साझा किए और सरकार ने अब तक करीब 150 लोगों को नौकरी देने की जानकारी दी।",
  "content": "नई दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अपने जख्मों को ताजा पाया। त्योहार के माहौल के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के आधिकारिक आवास पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं, जहां पीड़ितों ने अपने प्रियजनों को खोने की दर्दनाक दास्तान साझा की।\n\nनरसंहार और सुनियोजित हिंसा पर चर्चा\nइस संवाद के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस त्रासदी को महज दंगे की संज्ञा देना गलत होगा, बल्कि यह एक सुनियोजित नरसंहार था। उन्होंने कहा कि आजाद देश में इस तरह की बर्बरता देखकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 2018 के अपने एक फैसले में इस सामूहिक हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था। पुरी ने आरोप लगाया कि हमलावरों के पास पहले से ही वोटर लिस्ट जैसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से विशेष समुदायों के घरों की पहचान की गई थी। राजा गार्डन, सीमापुरी और सुल्तानपुरी जैसे इलाकों में हुई इन घटनाओं के निशान आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।\n\n \n\nमहिलाओं ने सुनाई दिल दहलाने वाली कहानियां\nकार्यक्रम में मौजूद पीड़ित महिलाओं ने अपनी जिंदगी के सबसे काले दिनों को याद किया। कमलेश कौर ने बताया कि उनके परिवार के छह से सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी और आज तक उन्हें न्याय की प्रतीक्षा है। राजिंदर कौर, जो उस समय सेंट जॉन्स एंबुलेंस से जुड़ी थीं, ने रातभर लोगों की सेवा करने और भयावह माहौल में अपनों को तलाशते बिलखते लोगों का जिक्र किया। नंदनगरी की एक अन्य पीड़िता ने सवाल उठाया कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के आरोपियों को सजा मिली, तो उनके निर्दोष परिजनों का क्या कसूर था। मनजीत कौर ने बेहद भावुक होकर बताया कि जब वह मात्र सवा महीने की थीं, तब उनके पिता को उनकी मां के सामने से खींचकर ले जाया गया और बेरहमी से मार डाला गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया कि इस प्रशासन ने उनके परिवार को रोजगार का संबल दिया।\n\nदिल्ली सरकार की सहायता और नौकरी देने की पहल\nमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि दिल्ली प्रशासन उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं के अनुरूप, सरकार ने अब तक लगभग 150 पीड़ित परिवारों के आश्रितों को नौकरियां मुहैया कराई हैं। दिल्ली सरकार द्वारा नवंबर 2025 में इस संबंध में एक नीति को मंजूरी दी गई थी, जिसके तहत उम्रदराज हो चुके मूल आश्रितों को अपनी अगली पीढ़ी के पात्र सदस्य को नौकरी के लिए नामित करने की अनुमति दी गई है। उल्लेखनीय है कि 1984 में हुई इस हिंसा के दौरान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 2,733 लोगों की जान गई थी और भारी संख्या में संपत्ति का नुकसान हुआ था।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटनाक्रम और सरकारी नीतियां सीधे तौर पर 1984 के सिख विरोधी दंगों के उन परिवारों को प्रभावित करती हैं जो आज भी मुआवजे, न्याय और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।\n\n• भारत में: देश भर के विभिन्न हिस्सों में रह रहे 1984 की हिंसा के पीड़ितों के लिए यह संवाद न्याय और सरकारी सहायता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन परिवारों को भी उम्मीद बंधती है जो अब तक प्रशासनिक मदद से वंचित रहे हैं।\n• दिल्ली में: दिल्ली के स्थानीय निवासियों और विशेषकर पीड़ित परिवारों के लिए सरकार द्वारा अनुकंपा के आधार पर नौकरी दिए जाने की नीति काफी राहत लेकर आई है। प्रशासन ने अब तक लगभग 150 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है और बुजुर्ग आश्रितों को अपनी अगली पीढ़ी को नामित करने का अधिकार दिया है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदशकों बाद भी 1984 की हिंसा के जख्मों के हरे रहने और इस तरह की बैठकों के आयोजन के पीछे कई ऐतिहासिक और प्रशासनिक कारण जुड़े हुए हैं।\n\n• सुनियोजित हमले: अदालती फैसलों और नेताओं के बयामों के अनुसार, 1984 की हिंसा कोई स्वतःस्फूर्त दंगा नहीं बल्कि वोटर लिस्ट के जरिए पहचान कर की गई लक्षित और सुनियोजित हत्याएं थीं।\n• न्याय और पुनर्वास में देरी: हिंसा के तुरंत बाद पीड़ितों को पर्याप्त कानूनी न्याय और जीवन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए जरूरी आर्थिक संबल नहीं मिल पाया था, जिसके कारण दशकों तक संघर्ष जारी रहा।\n• हालिया नीतिगत बदलाव: वर्तमान सरकारों द्वारा पीड़ितों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरियां देने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के नए कदमों के कारण यह संवाद फिर से चर्चा में आए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. हरदीप सिंह पुरी और रेखा गुप्ता ने किससे मुलाकात की?\nउन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाकात की।\n\n2. यह बैठक कहां आयोजित की गई थी?\nयह संवाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के आधिकारिक आवास पर आयोजित किया गया था।\n\n3. दिल्ली सरकार ने पीड़ितों के लिए नौकरियों को लेकर क्या कदम उठाया है?\nदिल्ली सरकार ने लगभग 150 लोगों को अनुकंपा के आधार पर नौकरियां दी हैं और मूल आश्रितों को अगली पीढ़ी के सदस्य को नामित करने की अनुमति दी है।\n\n4. 1984 की हिंसा के संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की थी?\nदिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में अपने फैसले में 1984 की सामूहिक हत्याओं को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था।\n\n5. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में कितने लोगों की जान गई थी?\nसरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 2,733 लोगों की जान गई थी।",
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