# दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी को भारत में स्थित बताने पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र को लगाई कड़ी फटकार

> संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट में 'डी-कंपनी' को भारत-आधारित समूह कहे जाने का जोरदार विरोध किया। भारत ने स्पष्ट किया कि दाऊद इब्राहिम 1993 के आतंकी हमलों के बाद ही देश से भाग चुका था और पाकिस्तान में शरण लिए हुए है।

**Type:** article · **Category:** ओडिशा · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/odisha/dawood-ibrahim-ki-d-company-ko-bharata-men-sthita-batane-para-bharata-ne-united-nations-ko-lagai-kari-phatakara-50469 · **Language:** Hindi
**Tags:** संयुक्त राष्ट्र, भारत, दाऊद इब्राहिम, डी कंपनी, रघु पुरी, पाकिस्तान, आतंकवाद

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने भगोड़े आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के आपराधिक गिरोह 'डी-कंपनी' को 'भारत-आधारित' समूह बताए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के सत्र के दौरान भारतीय मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने इस दावे का सख्त प्रतिवाद करते हुए कहा कि वैश्विक संगठन को तथ्यों की अनदेखी कर ऐसी गंभीर भूल करने से बचना चाहिए।

## तथ्यहीन रिपोर्ट पर भारत का कड़ा विरोध
यह पूरा विवाद संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की एक दस्तावेज के बाद शुरू हुआ। आतंकवाद का मुकाबला करते हुए मानवाधिकारों की रक्षा पर तैयार अपनी रिपोर्ट में बेन सॉल ने लिखा कि साल 2003 में सुरक्षा परिषद ने भारत-आधारित डी-कंपनी के सरगना को अल-कायदा से संबंधों के कारण प्रतिबंधित सूची में डाला था। भारतीय राजनयिक ने इस बात को पूरी तरह भ्रामक बताया और कहा कि इस तरह की अधूरी पंक्तियाँ वास्तविक स्थिति को गलत तरीके से पेश करती हैं।

भारतीय प्रतिनिधि रघु पुरी ने स्पष्ट किया कि दाऊद इब्राहिम और उसका गिरोह वर्ष 1993 में भारत में हुए भयावह आतंकी हमलों के बाद से ही भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों का वांछित अपराधी है। वास्तविक इतिहास को नजरअंदाज कर इसे भारत से जोड़ना अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग के मानकों के पूरी तरह खिलाफ है।

## पाकिस्तान की पनाहगाह पर सीधा निशाना
संयुक्त राष्ट्र मंच पर आधिकारिक रिकॉर्ड रखते हुए पुरी ने बताया कि दाऊद इब्राहिम 2003 में 1267 अल-कायदा प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध होने से बहुत पहले ही भारत छोड़कर भाग चुका था। विदेश में रहते हुए ही उसने अल-कायदा तथा उसके सरगना ओसामा बिन लादेन के साथ मिलकर भारत विरोधी और वैश्विक आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया था।

भारतीय राजनयिक ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि दाऊद इब्राहिम उसी देश में छिपा हुआ है जहाँ अल-कायदा का शीर्ष नेता ओसामा बिन लादेन पाया गया था। ओसामा बिन लादेन को साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में अमेरिकी नेवी सील्स ने एक विशेष अभियान में मार गिराया था। संयुक्त राष्ट्र के अपने विवरण में भी 1267 समिति ने इन सभी तथ्यों को साफ तौर पर दर्ज किया है।

## अंतरराष्ट्रीय संस्था की साख पर उठे सवाल
विशेष जनादेश धारकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रघु पुरी ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विशेष प्रतिवेदक बार-बार तथ्यात्मक रूप से गलत विवरण पेश करते हैं और इसके लिए किसी को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता। इससे सदस्य देशों के सामने एक ऐसी स्थिति बन जाती है जिसे सुधारना मुश्किल होता है।

भारत ने चेतावनी दी कि पहले से ही कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था के लिए ऐसी लापरवाही बेहद नुकसानदेह है। सुरक्षा परिषद के स्पष्ट दस्तावेजों में जब दाऊद इब्राहिम के भारत से भागने और बाहर रहकर आतंकी गतिविधियां चलाने का उल्लेख है, तो रिपोर्ट में उन तथ्यों को छोड़ देना प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। इससे वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को गहरा धक्का पहुँचता है।

## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और आतंकवाद विरोधी वैश्विक नीतियों से जुड़े मामलों में भारत के कड़े रुख को रेखांकित करता है।

- **भारत के लिए:** वैश्विक मंच पर आतंकवाद से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने से भारत को आतंकवाद प्रायोजक देशों और भगोड़ों के खिलाफ अपना पक्ष मजबूती से रखने में मदद मिलती है।
- **आम नागरिकों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय निकायों में भारतीय राजनयिकों द्वारा तथ्यों की रक्षा करने से देश की सुरक्षा छवि मजबूत होती है और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनती है।
- **वैश्विक सहयोग पर प्रभाव:** संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में तथ्यात्मक सटीकता सुनिश्चित होने से अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं में तेजी आती है।
- **भविष्य की कूटनीति:** इस कड़े प्रतिवाद से वैश्विक संगठनों के जांचकर्ताओं और प्रतिवेदकों पर रिपोर्ट तैयार करते समय निष्पक्षता और जवाबदेही बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष रिपोर्ट में 1993 के मुंबई धमाकों के मुख्य आरोपी से जुड़ी गलत ऐतिहासिक जानकारी प्रस्तुत करने के कारण उत्पन्न हुआ।

- **रिपोर्ट में त्रुटि:** संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम के संगठन को गलती से 'भारत-आधारित' आपराधिक समूह बता दिया था।
- **ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी:** दाऊद इब्राहिम 1993 में भारत से फरार हो गया था और 2003 में जब उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया, तब वह देश के बाहर से गतिविधियां चला रहा था।
- **जवाबदेही का अभाव:** भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार विशेष प्रतिवेदक अक्सर बिना पूर्ण सत्यापन के दस्तावेज जारी कर देते हैं, जिससे सदस्य देशों को भ्रामक स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
- **सुरक्षा परिषद रिकॉर्ड की उपेक्षा:** संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति के अपने दस्तावेजों में दर्ज सच्चाई को बेन सॉल की रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में किस बात का विरोध किया?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम के गिरोह 'डी-कंपनी' को 'भारत-आधारित' समूह बताए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

### 2. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का पक्ष किसने रखा?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने भारतीय पक्ष को मजबूती से पेश किया।

### 3. दाऊद इब्राहिम को किस वर्ष अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया था?
दाऊद इब्राहिम को वर्ष 2003 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति द्वारा सूचीबद्ध किया गया था।

### 4. दाऊद इब्राहिम भारत से कब फरार हुआ था?
दाऊद इब्राहिम वर्ष 1993 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद ही भारत से फरार हो गया था।

### 5. भारतीय राजनयिक ने दाऊद के ठिकाने को लेकर क्या संकेत दिया?
भारतीय राजनयिक ने संकेत दिया कि दाऊद इब्राहिम उसी देश (पाकिस्तान) में शरण लिए हुए है जहाँ अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन मारा गया था।

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