ओडिशा के पूरी में स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर जलाऊ लकड़ी का भारी संकट, परिजनों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार ओडिशा के पूरी स्थित पवित्र स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर लगातार बारिश के कारण जलाऊ लकड़ी की भारी किल्लत हो गई है। आपूर्ति बाधित होने से अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। भगवान जगन्नाथ की पावन नगरी पूरी में स्थित ऐतिहासिक स्वर्गद्वार श्मशान घाट इन दिनों एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। देश भर के सनातन धर्मावलंबियों के लिए मोक्ष की भूमि माने जाने वाले इस पवित्र स्थल पर जलाऊ लकड़ी की भारी किल्लत हो गई है। लकड़ी उपलब्ध न होने के कारण अपनों को अंतिम विदाई देने आए शोकाकुल परिजनों को कई घंटों तक शवों के साथ इंतजार करना पड़ रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते आपूर्ति बाधित होने से यह विकट स्थिति पैदा हुई है। मंगलवार सुबह शवों के दाह संस्कार में हुई कई घंटों की देरी मंगलवार की सुबह स्वर्गद्वार की व्यवस्था उस समय पूरी तरह चरमरा गई जब तड़के 5 बजे से 6 बजे के बीच छह अलग-अलग शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। श्मशान घाट पर लकड़ी का रत्ती भर भी स्टॉक मौजूद नहीं था। इसके कारण सुबह 9 बजे तक एक भी शव की अंत्येष्टि शुरू नहीं की जा सकेगी। अपनों को खोने के गम में डूबे परिजनों को बारिश के बीच तीन से चार घंटे तक दाह संस्कार शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। स्थानीय निवासियों और सेवायतों के अनुसार, श्मशान परिसर में लकड़ी की इतनी भीषण किल्लत हाल के वर्षों में पहली बार देखी गई है। प्रतिदिन 15 से 20 टन लकड़ी की खपत और आपूर्ति का गणित स्वर्गद्वार में प्रतिदिन होने वाले दाह संस्कारों का आंकड़ा बेहद बड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन 100 से भी अधिक शव अंतिम संस्कार के लिए पूरी पहुंचते हैं। एक सामान्य शव के विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न कराने के लिए लगभग 1.5 क्विंटल से लेकर 2 क्विंटल तक सूखी जलाऊ लकड़ी की आवश्यकता होती है। इस गणित के अनुसार, स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर प्रतिदिन 15 टन से 20 टन लकड़ी की नियमित खपत होती है। हालांकि, मौजूदा समय में ओडिशा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ओएफडीसी) की ओर से मिलने वाली आपूर्ति मांग के मुकाबले बेहद कम साबित हो रही है, जिससे दैनिक स्टॉक पूरी तरह शून्य पर पहुंच गया है। लगातार बारिश बनी लकड़ी आपूर्ति बाधित होने की मुख्य वजह वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से जारी निरंतर बारिश इस पूरे संकट की मूल वजह है। गीले मौसम के कारण जंगलों से लकड़ियों की कटाई, कटाई के बाद उन्हें सुखाना और परिवहन करना कठिन हो गया है। स्वर्गद्वार के प्रबंधक सिद्धार्थ रॉय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान समय में ओडिशा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही झाऊ की लकड़ी से काम चलाया जा रहा है। जिन परिवारों को शीघ्र अंत्येष्टि करनी होती है, वे खुद भी निजी स्रोतों से बाहर से लकड़ी का प्रबंध करने को मजबूर हो रहे हैं। पाँच वर्षों में दोगुना हुआ दबाव, समाधान के लिए 90 लाख रुपये की योजना लंबित स्वर्गद्वार पर शवों की संख्या पिछले पांच सालों में दोगुनी से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2019 तक जहां प्रतिदिन औसतन 50 शव अंत्येष्टि के लिए आते थे, वहीं अब यह संख्या 100 के पार पहुंच गई है। इस बढ़ते दबाव को देखते हुए स्वर्गद्वार के पुनर्विकास के समय लगभग 90 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक बिजली या गैस आधारित दाह संस्कार भट्ठी स्थापित करने का खाका तैयार किया गया था। प्रशासनिक सुस्ती और बजट आवंटन की कमी के कारण यह आधुनिक परियोजना अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है। हरिश्चंद्र योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की उठी मांग स्थानीय नागरिकों और स्वर्गद्वार सेवा समिति के सदस्यों का मानना है कि इस तरह की किल्लत को रोकने के लिए दूरगामी कदम उठाने आवश्यक हैं। ओएफडीसी को सोमवार को ही आपात स्थिति की जानकारी दे दी गई थी। जानकारों का कहना है कि यदि राज्य सरकार द्वारा संचालित 'हरिश्चंद्र योजना' को ग्रामीण इलाकों और ब्लॉक स्तर पर मजबूती से लागू किया जाए, तथा गांवों के स्थानीय श्मशान घाटों का बुनियादी ढांचा सुधारा जाए, तो पूरी के स्वर्गद्वार पर दाह संस्कारों का अत्यधिक बोझ कम किया जा सकता है। फिलहाल, श्रद्धालुओं ने राज्य प्रशासन से मांग की है कि लकड़ी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और 90 लाख रुपये की भट्ठी परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए। इसका आप पर असर भारत भर में: देश भर से पूरी में अपने स्वजनों का अंतिम संस्कार करने आने वाले श्रद्धालुओं को श्मशान घाट पर आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में समय और रहने की अतिरिक्त समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ओडिशा में: स्थानीय निवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ब्लॉक स्तर के स्थानीय श्मशान घाटों तथा हरिश्चंद्र योजना की सुविधाओं का उपयोग करने की सलाह दी जाती है ताकि स्वर्गद्वार पर अत्यधिक भीड़ कम हो सके। सवाल-जवाब 1. पूरी के स्वर्गद्वार पर अंतिम संस्कार में देरी क्यों हो रही है? लगातार मूसलाधार बारिश के कारण जंगलों से जलाऊ लकड़ी की कटाई और आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर लकड़ी का स्टॉक खत्म हो गया है। 2. एक शव के दाह संस्कार के लिए कितनी जलाऊ लकड़ी की आवश्यकता होती है? स्वर्गद्वार में एक शव का विधि-विधान से दाह संस्कार संपन्न कराने के लिए लगभग 1.5 से 2 क्विंटल (150 से 200 किग्रा) जलाऊ लकड़ी की जरूरत पड़ती है। 3. स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर रोजाना कितनी लकड़ी की खपत होती है? यहां रोजाना 100 से अधिक शव आने के कारण हर दिन लगभग 15 से 20 टन जलाऊ लकड़ी की नियमित खपत होती है। 4. लकड़ी की किल्लत से निपटने के लिए क्या स्थायी योजना प्रस्तावित है? स्वर्गद्वार में लगभग 90 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक दाह संस्कार भट्ठी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो प्रशासनिक सुस्ती के कारण लंबित है। https://trendkia.com/odisha/odisha-ke-puri-men-swargadwar-shmashana-ghata-para-jalau-lakari-ka-bhari-snkata-parijanon-ko-ghnton-karana-para-raha-intajara-14498 TrendKia — Har trend, sabse pehle.