अदियाला जेल से देर रात इमरान खान के अस्पताल तबादले पर सियासी तूफान, बहन उज्मा खान ने प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस्लामाबाद के अस्पताल ले जाए गए इमरान खान के मामले में उनकी बहन उज्मा खान ने सरकार पर गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, जबकि शहबाज शरीफ सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। पाकिस्तान की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब देर रात पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान को इस्लामाबाद स्थित अदियाला जेल से बाहर निकाला गया। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन को इमरान खान को चिकित्सीय जांच और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जिस तरह की गोपनीयता बरती गई और जिस अंदाज में सुरक्षा तंत्र ने काम किया, उसने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। आधी रात के बाद भारी सुरक्षा काफिले के बीच शहर की बत्तियां बुझाकर इमरान खान को ले जाने की खबर जैसे ही फैली, इस्लामाबाद में अफरा-तफरी मच गई। PTI कार्यकर्ता और मीडियाकर्मी बताए गए अस्पताल की ओर दौड़े, लेकिन बाद में सामने आया कि जिस काफिले को दिखाया जा रहा था, उसमें इमरान खान मौजूद ही नहीं थे और उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया। उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेश और अस्पताल में बदलाव पर गहराया विवाद इस पूरे मामले की जड़ पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश में निहित है, जिसमें इमरान खान की गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में भर्ती कराने और विशेषज्ञों की टीम से उनकी जांच कराने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने इस अदालती आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद सरकार के पास इमरान खान को जेल से बाहर लाकर अस्पताल पहुंचाने के अलावा कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था। गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि के दौरान प्रशासन ने अदियाला जेल के कड़े सुरक्षा घेरे से इमरान खान को निकाला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा बलों का काफिला शिफा अस्पताल की दिशा में बढ़ा, जिससे वहां मीडिया और समर्थकों का जमावड़ा लग गया। परंतु, सरकार ने अचानक रणनीति बदलते हुए इमरान खान को शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में स्थानांतरित कर दिया। इस स्थानांतरण के लिए मुख्य मार्गों के स्थान पर एक गुप्त और वैकल्पिक रास्ते का चयन किया गया, जिसकी भनक किसी को नहीं लगने दी गई। अंधेरे के बीच चिकित्सा जांच और डॉक्टर उज्मा खान के सनसनीखेज खुलासे अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए तरीकों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, जिस वक्त इमरान खान को PIMS अस्पताल ले जाया जा रहा था, उस समय रास्ते की तमाम स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी गई थीं। हद तो तब हो गई जब PIMS अस्पताल परिसर में भी बिजली आपूर्ति बंद रखी गई। आरोप है कि अस्पताल के भीतर पूर्ण अंधेरे के बीच केवल टॉर्च की रोशनी का सहारा लेकर इमरान खान की आंखों की मेडिकल जांच की गई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत इमरान खान की बहन डॉक्टर उज्मा खान को मेडिकल पैनल में शामिल किया गया था। उन्हें भी अस्पताल ले जाने के लिए एक अलग सरकारी वाहन में बिठाया गया। डॉक्टर उज्मा खान ने बताया कि पूरे सफर के दौरान उन्हें अधिकारियों द्वारा यह तक नहीं बताया गया कि इमरान खान को वास्तव में किस अस्पताल ले जाया जा रहा है और उनका काफिला कहां रुकने वाला है। मीडिया से दूरी बनाने का दबाव और छह घंटे चला पूरा घटनाक्रम अधिकारियों द्वारा परिजनों को गुमराह किए जाने का सिलसिला अस्पताल पहुंचने के बाद भी जारी रहा। डॉक्टर उज्मा खान के अनुसार, उन्हें पहले यह आश्वासन दिया गया था कि PIMS अस्पताल में इमरान खान की आंखों का केवल प्रारंभिक या रूटीन चेकअप किया जाएगा और उसके तुरंत बाद उन्हें पूर्व निर्धारित शिफा अस्पताल ले जाया जाएगा। हालांकि, जैसे ही PIMS में टॉर्च की रोशनी में आंखों की जांच प्रक्रिया संपन्न हुई, प्रशासन ने उन्हें शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय सीधे वापस अदियाला जेल भेजने का फैसला किया। अदियाला जेल से बाहर निकाले जाने से लेकर पुनः जेल की कोठरी में बंद किए जाने तक यह पूरा घटनाक्रम लगभग छह घंटे तक चलता रहा। उज्मा खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इलाज का ढोंग करके उनके भाई को घंटों अंधेरे में बिठाकर रखा गया और पुलिस प्रशासन लगातार गलत जानकारी देता रहा। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने इमरान की बहनों को मीडिया से बात करने पर सख्त पाबंदी लगाने की चेतावनी दी। पुलिस का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की शर्तों के तहत परिवार का कोई भी सदस्य मीडिया में बयान नहीं दे सकता और यदि ऐसा किया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन चेतावनियों के बावजूद उज्मा खान और इमरान की दूसरी बहन नूरीन नियाजी ने मीडिया के सामने आकर पूरे घटनाक्रम की पोल खोली। शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना के आरोप और बहन का छलका दर्द मीडिया से बातचीत करते हुए डॉक्टर उज्मा खान अत्यंत भावुक हो गईं और बोलते-बोलते रो पड़ीं। उन्होंने दावों के साथ कहा कि इमरान खान की शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद चिंताजनक है। जेल में मुलाकात के दौरान इमरान खान ने अपनी बहन से साझा किया कि उन्हें एकांत कारावास में रखकर लगातार मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जा रही हैं। उज्मा खान ने बताया कि जब उन्होंने इमरान खान को देखा तो उनकी आंख पर पट्टी बंधी हुई थी और उनका पूरा चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ नजर आ रहा था। लंबे समय तक एक अंधेरी और अलग-थलग सेल में बंद रखे जाने के कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है। स्थिति की विडंबना यह थी कि इमरान खान को यह तक याद नहीं रह गया था कि वर्तमान में कौन सा महीना चल रहा है, वे इस बात को लेकर पूरी तरह भ्रमित थे कि अगस्त का महीना है या जून-जुलाई का समय। उज्मा ने रोते हुए आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ सरकार उनके भाई के खिलाफ एक बहुत बड़ी साजिश रच रही है और जेल के भीतर उनकी जान को सीधा खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार इमरान खान की विशाल जनप्रियता और जनता के समर्थन से थर-थर कांपती है, इसी डर के कारण उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। सरकार का स्पष्टीकरण: सुरक्षा चिंताओं के कारण बदला गया अस्पताल इमरान खान के परिजनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर शहबाज शरीफ सरकार की ओर से तुरंत सफाई पेश की गई। पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि इमरान खान को शिफा अस्पताल न ले जाने का निर्णय केवल और केवल उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था। सरकार का दावा है कि शिफा अस्पताल एक भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित है, जहां इमरान खान की सुरक्षा को लेकर बड़ा जोखिम पैदा हो सकता था। मंत्री ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मूल उद्देश्य इमरान खान को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसलिए सरकार ने विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए उन्हें अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और भीड़भाड़ से दूर PIMS अस्पताल में स्थानांतरित किया। तारिक फजल चौधरी ने स्पष्ट किया कि इमरान खान के सभी आवश्यक मेडिकल टेस्ट पूरी विशेषज्ञता के साथ संपन्न कराए गए हैं और उनकी सेहत बिल्कुल ठीक है। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि सरकार ने सर्वोच्च अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का पलटवार: इमरान खान पूरी तरह फिट हैं सरकार के बचाव में उतरे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इमरान खान की बहनों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष द्वारा जानबूझकर एक राजनीतिक बवंडर खड़ा किया जा रहा है ताकि आम जनता की भावनाओं को भड़काया जा सके। ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि इमरान खान जेल के भीतर पूरी तरह स्वस्थ और फिट हैं। वे नियमित रूप से दैनिक कसरत और व्यायाम करते हैं, सही समय पर पौष्टिक भोजन लेते हैं और सरकार उनके खान-पान तथा स्वास्थ्य देखभाल का पूरा ध्यान रख रही है। रक्षा मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने मानवीय आधार पर उनकी बहन को उनसे मिलने की अनुमति दी थी। इसके साथ ही ख्वाजा आसिफ ने अतीत का जिक्र करते हुए इमरान खान के शासनकाल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे, तब उनकी सरकार ने विपक्षी नेताओं को बिना वजह जेलों में ठूंसा था और उनके साथ अत्यधिक अत्याचार किया था। ख्वाजा आसिफ के अनुसार, आज इमरान खान जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, वह उनके अपने अतीत के कर्मों का ही परिणाम है। PTI का कड़ा रुख और जनरल असीम मुनीर से जुड़े विदेश प्रस्ताव का सच शहबाज शरीफ सरकार और रक्षा मंत्री के बयानों को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पूरी तरह से झूठ का पुलिंदा करार दिया है। PTI के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौहर अली खान ने कहा कि वर्तमान हुकूमत इमरान खान की लोकप्रियता से घबराई हुई है और इसी बौखलाहट में उन्हें सलाखों के पीछे प्रताड़ित कर रही है। गौहर अली खान ने स्पष्ट किया कि इमरान खान एक स्वाभिमानी पठान हैं और वे किसी भी कीमत पर अपने राजनीतिक सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। वे न तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कोई अनुचित राजनीतिक लाभ उठाएंगे और न ही अपनी जान बचाने के लिए सरकार या सेना के आगे घुटने टेकेंगे। वहीं, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि देश की हुकूमत ही देश की सबसे बड़ी अदालत के फैसलों की अनदेखी करेगी, तो पाकिस्तान में कानून के शासन का कोई अस्तित्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तानाशाही का जवाब पाकिस्तान की जनता आने वाले समय में खुद तय करेगी। इसके साथ ही, राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी तेज चर्चाएं हैं कि पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ओर से इमरान खान को विदेश जाकर इलाज कराने का एक गुप्त प्रस्ताव दिया गया था। इन चर्चाओं के मुताबिक, इस प्रस्ताव के साथ कुछ सख्त राजनीतिक शर्तें जुड़ी हुई थीं, जिन्हें इमरान खान ने तुरंत ठुकरा दिया। इमरान समर्थकों का मानना है कि इमरान खान का पाकिस्तान की धरती पर मौजूद रहना ही सेना और शहबाज शरीफ सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि उन्हें किसी भी सूरत में जेल से बाहर नहीं आने दिया जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले दिनों में अपने आदेशों की अवहेलना पर सरकार के खिलाफ क्या रुख अपनाता है। इसका आप पर असर भारत में: पड़ोसी देश पाकिस्तान में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और अदालती आदेशों की अनदेखी सीमा पार सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर गहरा असर डालती है। पाकिस्तान मामलों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए: इमरान खान के स्वास्थ्य और सरकार-सेना के रुख से पाकिस्तान के आगामी राजनीतिक घटनाक्रम और जन-आंदोलनों की दिशा तय होगी। सवाल-जवाब 1. इमरान खान को अदियाला जेल से बाहर क्यों निकाला गया था? पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की डॉक्टरी जांच और इलाज के स्पष्ट आदेश जारी किए थे, जिसके पालन में उन्हें रात के समय जेल से अस्पताल ले जाया गया। 2. इमरान खान को शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय PIMS क्यों भेजा गया? संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी के मुताबिक शिफा अस्पताल में सुरक्षा को बड़ा खतरा था, इसलिए सरकार ने सुरक्षा कारणों से उन्हें भीड़भाड़ से दूर PIMS अस्पताल स्थानांतरित किया। 3. इमरान खान की बहन उज्मा खान ने क्या प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं? उज्मा खान ने आरोप लगाया कि इमरान खान को अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में रखा गया, उनका चेहरा सूजा हुआ था, आंख पर पट्टी थी और वे तारीख व महीने को लेकर भ्रमित थे। 4. सरकार और रक्षा मंत्री ने इन आरोपों का क्या जवाब दिया है? रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इमरान खान जेल में पूरी तरह फिट हैं, नियमित कसरत करते हैं और विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। 5. PTI का इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख है? PTI चेयरमैन गौहर अली खान और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन और इमरान खान को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। 6. क्या इमरान खान को विदेश भेजने की कोई चर्चा हुई थी? राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की ओर से शर्तों के साथ विदेश में इलाज का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे इमरान खान ने कथित रूप से खारिज कर दिया। https://trendkia.com/pakistan/adiala-jail-se-dera-rata-imran-khan-ke-aspatala-tabadale-para-siyasi-tuphana-bahana-uzma-khan-ne-pratarana-ke-gnbhira-aropa-lagae-19887 TrendKia — Har trend, sabse pehle.