अदियाला जेल में इमरान खान की मौत के दावों से मचा हड़कंप, पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में गहरी गुटबाजी की खबर रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर दावों के बाद हड़कंप मच गया है, जबकि पीटीआई ने इस्लामाबाद की ओर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। पाकिस्तान की सियासत का इतिहास लंबे समय से तख्तापलट, राजनीतिक साजिशों और जेल की सीलन भरी दीवारों के साए में लिखा जाता रहा है। इस बार पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में एक ऐसी खबर फैली है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता और सनसनी पैदा कर दी है। रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल में महीनों से सख्त पहरे के भीतर बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान खान की सलामती को लेकर आशंकाएं गहराने लगी हैं। जेल प्रशासन की तरफ से लागू की गई पूर्ण गोपनीयता और मुलाकातियों पर रोक के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या इमरान खान के साथ जेल के भीतर कोई अनहोनी हो चुकी है। अमेरिका में रहने वाले वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान के खुलासे के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है, जिससे पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय में भी घबराहट का माहौल दिख रहा है। सैन्य मुख्यालय से आए दावों और प्रशासनिक सन्नाटे की स्थिति पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने हालिया यूट्यूब प्रसारण के जरिए यह सनसनीखेज दावा पेश किया कि रावलपिंडी स्थित थल सेना के जनरल हेडक्वार्टर्स (जीएचक्यू) के कम से कम तीन उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों का मानना है कि इमरान खान जेल के अंदर अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि इस खबर की आधिकारिक रूप से किसी संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है, फिर भी सैन्य मुख्यालय के भीतर चल रही असाधारण हलचल और बैठकों का दौर किसी बहुत बड़े घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहा है। वजाहत सईद खान ने अपने वीडियो वक्तव्य में कहा, "जीएचक्यू के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग बातचीत में यह संकेत दिया है कि इमरान खान अब जीवित नहीं हैं, और यही मुख्य कारण है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर उन्हें पूरे देश की नजरों से दूर रख रहे हैं।" इस बयान के सामने आने के बाद पीटीआई समर्थकों के बीच आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल और ज्यादा गहरा गया है। अगस्त 2023 से कैद और 190 मिलियन पाउंड का मामला इमरान खान को अगस्त 2023 से हिरासत में रखा गया है। उनके खिलाफ 190 मिलियन पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले सहित दर्जनों कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। बीते कई महीनों से अदियाला जेल प्रबंधन ने उनकी बहनों, वकीलों, पार्टी पदाधिकारियों और उनके व्यक्तिगत डॉक्टरों तक को उनसे मिलने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। जब भी उनका परिवार या कानूनी टीम मुलाकात की अर्जी लेकर जेल पहुंचती है, उन्हें सुरक्षा कारणों का हवाला देकर वापस लौटा दिया जाता है। इस रहस्यमयी नाकेबंदी और बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखे जाने के कारण उनके परिजनों और पीटीआई नेतृत्व में यह आशंका मजबूत हुई है कि अधिकारियों द्वारा उनकी वास्तविक स्थिति को छिपाया जा रहा है। कड़े सुरक्षा प्रतिबंधों और नियमित मेडिकल जांच की अनुपस्थिति ने अफवाहों को और अधिक बल दिया है। इमरान खान और जनरल आसिम मुनीर के बीच पुरानी रंजिश इमरान खान और वर्तमान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बीच कड़वाहट की जड़ें तब से जुड़ी हैं जब इमरान खान देश के प्रधानमंत्री पद पर थे और आसिम मुनीर खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। अक्टूबर 2018 में आईएसआई प्रमुख का पदभार संभालने के केवल 8 महीने बाद इमरान खान ने उन्हें अचानक पद से हटा दिया था। सैन्य व प्रशासनिक गलियारों में प्रचलित जानकारियों के अनुसार, आसिम मुनीर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री की पत्नी बुशरा बीबी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों को इमरान खान के सामने उठाया था। इससे नाराज होकर इमरान खान ने अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें आईएसआई प्रमुख के पद से बर्खास्त कर दिया। यह पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में किसी भी आईएसआई चीफ का सबसे छोटा कार्यकाल माना जाता है, जिससे दोनों के बीच व्यक्तिगत रंजिश की शुरुआत हुई। बाद में जब अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिर गई, तब शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली नई सरकार ने प्रशासनिक नियमों में संशोधन करके आसिम मुनीर को सेना प्रमुख के पद पर नियुक्त कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच टकराव सीधा और तीखा हो गया। इमरान खान ने सार्वजनिक मंचों से सेनापति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि देश की बागडोर सरकार के हाथ में न होकर सिर्फ सेना प्रमुख चला रहे हैं और उनके खिलाफ हो रही तमाम दंडात्मक कार्रवाई केवल व्यक्तिगत बदले की भावना से प्रेरित है। खैबर पख्तूनख्वा से 20 लाख लोगों के मार्च की चेतावनी जेल के भीतर इमरान खान की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच राजनीतिक मोर्चे पर स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और पीटीआई के वरिष्ठ नेता सोहेल अफरीदी ने पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व को सीधे तौर पर सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि इमरान खान को डॉक्टरों और परिजनों से न मिलने देने के कारण जनता और युवाओं का गुस्सा चरम सीमा पर पहुंच चुका है। सोहेल अफरीदी ने हुंकार भरते हुए कहा, "हमारे लोग पूरी तरह से एकजुट और तैयार हैं। हमारे पास 20 लाख से अधिक ऐसे समर्थक मौजूद हैं जो एक इशारे पर इस्लामाबाद की ओर कूच करने और सड़कों पर उतरने के लिए तत्पर हैं।" पीटीआई ने इस विरोध प्रदर्शन को संगठित रूप देते हुए 27 सितंबर को राजधानी इस्लामाबाद की तरफ एक विशाल 'लॉन्ग मार्च' निकालने की औपचारिक घोषणा की है, जिससे देश में व्यापक प्रशासनिक संकट खड़ा हो सकता है। सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर गुटबाजी और बगावत के संकेत इमरान खान की लोकप्रियता का असर न केवल सड़कों पर दिख रहा है बल्कि रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय के भीतर भी इसके गहरे असर देखे जा रहे हैं। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, इमरान खान के प्रति अपनाए गए बेहद कड़े रुख और जनभावनाओं को लेकर सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच राय बंटी हुई है। 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के दौरान जब उनके समर्थकों ने लाहौर में कोर कमांडर के आवास में घुसकर तोड़फोड़ की थी, तब भी कुछ कमांडरों ने नागरिकों पर बल प्रयोग का विरोध किया था। अधिकारियों के बीच आंतरिक मतभेद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाहौर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज घानी को उनके पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने इमरान खान के खिलाफ सीधे टकराव की नीति पर अपनी असहमति व्यक्त की थी। इसके अतिरिक्त, जनरल आसिफ गफूर और जनरल साहिबजादा साहिर शमशाद मिर्जा जैसे वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने भी जनरल मुनीर को इमरान खान के साथ सीधी भिड़ंत से बचने और राजनीतिक मामले को असैन्य तरीके से सुलझाने की सलाह दी थी। इन मतभेदों के कारण सेना के भीतर अंदरूनी असंतोष की अटकलें तेज हो गई हैं। अतीत की अफवाहें और एकांत कारावास की कड़वी सच्चाई इमरान खान के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर इस प्रकार की खबरें पहली बार सामने नहीं आई हैं। पिछले वर्ष नवंबर के महीने में भी ऐसी ही अफवाहें सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में फैली थीं। हालांकि उस समय उनकी बहन उजमा खानम को बाद में जेल में मुलाकात की अनुमति दी गई थी, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ था कि वह जीवित हैं, लेकिन उन्हें अत्यंत कठोर परिस्थितियों में रखा जा रहा है। उस मुलाकात के बाद सामने आई जानकारियों में बताया गया था कि महीनों तक अंधेरी कोठरी में अकेले बंद रखे जाने के कारण उनकी आंखों की रोशनी पर गंभीर प्रभाव पड़ा था और वह आवश्यक चिकित्सा देखभाल के लिए तरस रहे थे। उन्हें मानवीय संपर्क से पूरी तरह दूर रखकर जिस एकांत माहौल में रखा गया, उसने उनके समर्थकों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। वर्तमान में जिस तरह से पुनः नाकेबंदी लागू की गई है और अफवाहों का बाजार गर्म है, उससे पाकिस्तान का राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इसका आप पर असर भारत में: पाकिस्तान के भीतर गहराता राजनीतिक संकट और सैन्य गुटबाजी सीमा पार सुरक्षा चिंताओं तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा असर डाल सकती है। ग्लोबल पाठकों के लिए: पाकिस्तान में तख्तापलट या बड़े जनआंदोलन की आशंका से दक्षिण एशिया में कूटनीतिक हलचल और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. इमरान खान की मौत के दावों की शुरुआत कैसे हुई? अमेरिका में मौजूद पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने यूट्यूब पर दावा किया कि रावलपिंडी जीएचक्यू के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इमरान खान जेल में दम तोड़ चुके हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 2. इमरान खान कब से और किस मामले में जेल में बंद हैं? इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और उन पर 190 मिलियन पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले सहित कई मुकदमे दर्ज हैं। 3. इमरान खान और जनरल आसिम मुनीर के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या था? अक्टूबर 2018 में आईएसआई चीफ बने आसिम मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसके बाद इमरान खान ने 8 महीने में ही उन्हें पद से हटा दिया था। 4. पीटीआई ने इस्लामाबाद में किस तारीख को लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है? खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की चेतावनी के बाद पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की तरफ लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की है। 5. क्या पाकिस्तानी सेना के अंदर इमरान खान को लेकर कोई मतभेद है? रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज घानी को इमरान खान के खिलाफ सख्त नीति का विरोध करने पर हटाया गया था, जबकि जनरल आसिफ गफूर और जनरल साहिबजादा साहिर शमशाद मिर्जा ने भी टकराव से बचने की सलाह दी थी। https://trendkia.com/pakistan/adiyala-jela-men-imran-khan-ki-mauta-ke-davon-se-macha-haraknpa-pakistani-sena-ke-mukhyalaya-men-gahari-gutabaji-ki-khabara-16002 TrendKia — Har trend, sabse pehle.