अमेरिका की चौखट पर पाकिस्तान ने लगाई गुहार, 25 करोड़ नागरिकों की दुहाई देकर मांगी सिंधु जल संधि की बहाली पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका में आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सिंधु जल संधि बहाल कराने की अपील की है। अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया था। सिंधु जल संधि को लेकर भारत की सख्त नीति से घबराया पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर मदद की गुहार लगा रहा है। वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास द्वारा आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि सिंधु नदी प्रणाली उनके देश के 25 करोड़ से अधिक लोगों की जीवनरेखा है और भारत द्वारा इसे स्थगित किए जाने से पाकिस्तान के सामने गहरा जल संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका में सेमिनार के दौरान पाकिस्तान की गुहार वॉशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित इस विशेष ऑनलाइन कार्यक्रम में इशाक डार ने भारत के फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल जल आपूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि और पूरी अर्थव्यवस्था की नींव है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा अप्रैल 2025 में संधि को एकतरफा रूप से स्थगित करना संधि के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी के अस्तित्व, खाद्य सुरक्षा और आजीविका पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का कड़ा रुख भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि में आई इस बड़ी दरार की मुख्य वजह अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ दर्दनाक आतंकी हमला था। इस आतंकवादी घटना में 26 बेकसूर नागरिकों की जान चली गई थी। हमले की जांच के दौरान सीमा पार पाकिस्तान से संचालित आतंकी तंत्र की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण सामने आए थे। इसके बाद भारत सरकार ने कड़ा कूटनीतिक रुख अपनाते हुए संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। नई दिल्ली ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। भारत की नीति रही है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से भारत के खिलाफ जारी सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को पूरी तरह नष्ट नहीं करता और उस पर प्रामाणिक कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को दोबारा चालू करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। 25 करोड़ आबादी की जीवनरेखा और जल संकट का दबाव पाकिस्तान की कृषि, बिजली उत्पादन और घरेलू जल आपूर्ति मुख्य रूप से सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। विदेश मंत्री इशाक डार ने सेमिनार में विस्तार से बताया कि कैसे देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक ताना-बाना इस जल प्रणाली से जुड़ा हुआ है। पानी का प्रवाह बाधित होने या अनिश्चित होने से फसलों की सिंचाई ठप हो सकती है, जिससे पाकिस्तान में गंभीर खाद्यान्न संकट पैदा होने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान के कई प्रमुख जलविद्युत संयंत्र इसी नदी प्रणाली के पानी से संचालित होते हैं। बिजली उत्पादन प्रभावित होने से देश के औद्योगिक क्षेत्र और आम नागरिकों की दैनिक दिनचर्या पर विपरीत असर पड़ना तय है। यही कारण है कि इस्लामाबाद इस समय भीषण आंतरिक और कूटनीतिक दबाव महसूस कर रहा है। जलवायु परिवर्तन और घटती प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता अपनी अपील के दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन के खतरों का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ जल संसाधनों की भारी कमी है। पिछले कुछ दशकों के दौरान देश में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इशाक डार के अनुसार, मानसून के बदलते चक्र, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, बार-बार आने वाली विनाशकारी बाढ़ और लंबे सूखे के दौर ने स्थिति को और भी विकट बना दिया है। इन प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भारत द्वारा जल संधि के स्थगन ने पाकिस्तान की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन पर अधिक सहयोग की आवश्यकता थी, न कि एकतरफा स्थगन की। सहयोग की अपील के साथ क्षेत्रीय स्थिरता की चेतावनी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हाथ फैलाने के साथ-साथ पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने चेतावनी भरा स्वर भी अपनाया। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को किसी संघर्ष का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। इशाक डार ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान को उसके जल अधिकारों से वंचित किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि सिंधु नदी सदियों से इस क्षेत्र की सभ्यता, आजीविका और जीवन का मुख्य आधार रही है, इसलिए इसे द्विपक्षीय तनाव की बलि नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। हालाँकि, भारत का स्पष्ट मानना है कि क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है, और जब तक उस पर नकेल नहीं कसी जाती, तब तक किसी भी संधि पर बातचीत बेमानी है। सिंधु जल संधि का इतिहास और मौजूदा गतिरोध सिंधु जल संधि पर वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इस समझौते के तहत पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। छह दशकों से अधिक समय तक कई युद्धों और तनावों के बावजूद यह संधि कायम रही। लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले ने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत ने साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक भारत अपने रणनीतिक और जल अधिकारों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है। पाकिस्तान अब अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, परंतु भारत अपने रुख पर पूरी तरह अडिग है। इसका आप पर असर सिंधु जल संधि के स्थगन से दक्षिण एशियाई कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। • भारत में: भारत द्वारा जल संसाधनों पर नियंत्रण मजबूत करने से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश गया है और देश की सुरक्षा नीति अधिक प्रभावी हुई है। • पाकिस्तान में: 25 करोड़ से अधिक लोगों के लिए कृषि, सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। • ऊर्जा क्षेत्र पर: जल प्रवाह प्रभावित होने से जलविद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन कम हो सकता है, जिससे लोड शेडिंग और औद्योगिक नुकसान बढ़ेगा। • पर्यावरण एवं कृषि: जलवायु परिवर्तन और सूखे के बीच पानी की कमी से फसलों की पैदावार घटने और खाद्यान्न की कीमतें बढ़ने की संभावना है। सवाल-जवाब 1. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने अमेरिका में क्या अपील की? इशाक डार ने वर्चुअल सेमिनार के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत द्वारा स्थगित की गई सिंधु जल संधि को बहाल कराने में हस्तक्षेप की मांग की। 2. भारत ने सिंधु जल संधि को कब और क्यों स्थगित किया? भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। 3. सिंधु नदी प्रणाली से पाकिस्तान के कितने लोग प्रभावित हो रहे हैं? पाकिस्तान के विदेश मंत्री के अनुसार, देश की 25 करोड़ से अधिक आबादी जीवनयापन, कृषि और बिजली के लिए इस जल प्रणाली पर निर्भर है। 4. सिंधु जल संधि पर भारत का मुख्य रुख क्या है? भारत का स्पष्ट रुख है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते, और 'खून तथा पानी एक साथ नहीं बह सकते'। https://trendkia.com/pakistan/america-ki-chaukhata-para-pakistan-ne-lagai-guhara-25-crore-nagarikon-ki-duhai-dekara-mangi-indus-waters-treaty-ki-bahali-23938 TrendKia — Har trend, sabse pehle.