अरब सागर में टकराव के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ा कूटनीतिक तनाव, द्विपक्षीय समझौते के उल्लंघन पर आमने-सामने आए नौसैनिक बल अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच हुए सीधे टकराव के बाद कूटनीतिक विवाद गहरा गया है। भारत ने तीन नॉटिकल मील की अनिवार्य दूरी न रखने और खतरनाक पैंतरेबाजी का आरोप लगाया, वहीं दूसरे पक्ष ने अपने अभ्यास में रुकावट का दावा किया है। खुले समंदर में दोनों पड़ोसी मुल्कों की नौसेनाओं के बीच उपजे नए टकराव ने कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज कर दी है। अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गश्त पर तैनात भारतीय युद्धपोत आईएनएस कोलकाता और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज पीएनएस हुनैन के बीच हुई अप्रत्याशित भिड़ंत के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस पूरी घटना के बाद दशकों पुराने द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा समझौतों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। समुद्र में खतरनाक पैंतरेबाजी और सीधा टकराव यह गंभीर घटनाक्रम 15 सितंबर को उस वक्त पेश आया, जब दोनों नौसैनिक पोत बेहद नजदीकी दायरे में आ गए। समुद्री नेविगेशन के स्थापित मानकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय जल में किसी भी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए जहाजों को सुरक्षित दूरी बरतनी होती है। प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी गश्ती पोत ने अचानक दिशा बदलकर भारतीय पोत के अत्यंत निकट आने का जोखिम उठाया, जिसके चलते दोनों के बीच सीधी टक्कर की नौबत आ गई। इस लापरवाह और गैर-पेशेवर कदम को समुद्री सुरक्षा नियमों के सीधे उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है। राजनयिकों की तलबी और आरोपों का दौर घटना के तुरंत बाद कूटनीतिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी अधिकारी को विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया। वार्ता के दौरान खुले जलक्षेत्र में इस तरह के जोखिम भरे व्यवहार पर सख्त ऐतराज जताया गया। इसके जवाब में इस्लामाबाद ने भी भारतीय प्रभारी राजनयिक को बुलाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पड़ोसी देश के विदेश मंत्रालय ने अपने रुख का बचाव करते हुए दावा किया कि भारतीय युद्धपोत और उसके साथ तैनात हेलीकॉप्टर उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र के निकट उकसाने वाले युद्धाभ्यास कर रहे थे, जिससे तनाव की स्थिति पैदा हुई। सीस्पार्क अभ्यास और तारीखों का विवाद विवाद की पृष्ठभूमि में पड़ोसी देश का द्विवार्षिक नौसैनिक अभ्यास SEASPARK-26 भी शामिल है, जिसकी शुरुआत 1 सितंबर से हुई थी। वहां के अधिकारियों का तर्क है कि 7 सितंबर से ही भारतीय पोत लगातार उस समुद्री इलाके में प्रवेश कर रहा था। उनका यह भी कहना है कि बार-बार चेतावनी संदेश जारी किए जाने के बावजूद इलाके में अपनी मौजूदगी नहीं हटाई गई। हालांकि, भारतीय पक्ष ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आईएनएस कोलकाता अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में पूरी तरह कानूनी और नियमित गश्ती अभियान पर था, जहां आवाजाही का अधिकार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सुरक्षित है। 1991 के ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन इस ताजा समुद्री गतिरोध ने 6 अप्रैल 1991 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक समझौते को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों की सीमाओं और जलक्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गलतफहमी या अप्रत्याशित संघर्ष को समय रहते रोकना था। समझौते के महत्वपूर्ण प्रावधानों के तहत किसी भी बड़े सैन्य अभ्यास, सैनिकों के बड़े जमावड़े या असामान्य गतिविधि की पूर्व सूचना दूसरे पक्ष को साझा करना अनिवार्य बनाया गया था। विशेष रूप से इस दस्तावेज का अनुच्छेद 10 यह स्पष्ट निर्देश देता है कि अंतरराष्ट्रीय जल में गश्त के दौरान दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों तथा पनडुब्बियों को आपस में कम से कम 3 नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखनी होगी। इस अनिवार्य दूरी के नियम की उपेक्षा ही 15 सितंबर को अरब सागर में हुए इस खतरनाक टकराव की सबसे बड़ी वजह बनी। इसका आप पर असर खुले समुद्र में दो परमाणु संपन्न देशों के नौसैनिक जहाजों की भिड़ंत क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिरता पर सीधा असर डालती है। • सामरिक सुरक्षा पर: अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह के हादसों से दोनों देशों के बीच गलतफहमी और सैन्य टकराव का खतरा अचानक बढ़ जाता है। दोनों पक्षों की नौसेनाओं को अब अरब सागर में अपनी नियमित गश्त के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। • कूटनीतिक बातचीत पर: दोनों राजधानियों में उच्चायोग स्तर पर अधिकारियों की तलबी से द्विपक्षीय वार्ता के रास्ते और अधिक जटिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में सैन्य विश्वास बहाली के पुराने ढांचों की समीक्षा की मांग जोर पकड़ सकती है। • व्यापारिक जलमार्गों पर: अरब सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षा सतर्कता का स्तर बढ़ाया जा सकता है। शिपिंग कंपनियों को संवेदनशील गलियारों में नौवहन करते समय संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी चेतावनियों पर पैनी नजर रखनी होगी। • द्विपक्षीय समझौतों पर: तीन दशक पुराने सुरक्षा समझौतों के कथित उल्लंघन से दोनों देशों के बीच भविष्य में होने वाले समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। दोनों पक्षों को विश्वास बहाली के लिए मौजूदा रक्षा संचार चैनलों को सक्रिय करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा नियमों की अवहेलना और अभ्यास क्षेत्र के पास निर्धारित सुरक्षित दूरी का पालन न करने के कारण घटित हुई। • नियमों की अनदेखी: 15 सितंबर को दोनों पोतों के बीच अनिवार्य 3 नॉटिकल मील का सुरक्षित दायरा नहीं रखा गया, जिससे अचानक मुड़ने पर सीधी टक्कर की नौबत आ गई। दोनों देशों ने नेविगेशन के नियमों की अनदेखी के लिए एक-दूसरे के संचालन को जिम्मेदार ठहराया है। • जारी सैन्य युद्धाभ्यास: 1 सितंबर से शुरू हुए द्विवार्षिक नौसैनिक अभ्यास SEASPARK-26 के चलते इलाके में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल था। एक पक्ष ने आरोप लगाया कि 7 सितंबर से नियमित रूप से चेतावनी के बावजूद दूसरे पोत ने अभ्यास क्षेत्र के पास अपनी मौजूदगी बनाए रखी। • समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन: 6 अप्रैल 1991 के समझौते के तहत सैन्य गतिविधियों की पूर्व सूचना देना और अंतरराष्ट्रीय जल में सुरक्षित अंतर रखना जरूरी है। इस सुरक्षा तंत्र के जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ने से समुद्री क्षेत्रों में दोनों जहाजों के आमने-सामने आने की परिस्थितियां बनीं। सवाल-जवाब 1. अरब सागर में किन जहाजों के बीच टक्कर हुई? यह घटना भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस कोलकाता और पाकिस्तानी नौसेना के गश्ती जहाज पीएनएस हुनैन के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। 2. यह समुद्री घटना किस तारीख को घटित हुई? दोनों नौसैनिक जहाजों के बीच यह सीधा टकराव 15 सितंबर को हुआ था। 3. 1991 का द्विपक्षीय समझौता क्या कहता है? 6 अप्रैल 1991 को हुए समझौते के अनुसार दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जल में एक-दूसरे से कम से कम 3 नॉटिकल मील की सुरक्षित दूरी बनाए रखनी होती है। 4. इस घटना के बाद दोनों देशों ने क्या कूटनीतिक कदम उठाए? भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के प्रभारी को तलब किया, जबकि इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिक को बुलाकर आपत्ति दर्ज कराई। 5. विवाद में किस नौसैनिक अभ्यास का जिक्र किया गया है? विवाद में 1 सितंबर से चल रहे पाकिस्तानी नौसेना के द्विवार्षिक अभ्यास SEASPARK-26 का उल्लेख किया गया है। https://trendkia.com/pakistan/araba-sagara-men-takarava-ke-bada-donon-deshon-ke-bicha-barha-kutanitika-tanava-dvipakshiya-samajhaute-ke-ullnghana-para-amane-sam-33894 TrendKia — Har trend, sabse pehle.