# चीन के 42 हजार करोड़ रुपये के कर्ज से बना नीलम-झेलम प्रोजेक्ट बंद, पीओके में भड़का जनाक्रोश

> चीन के 448 मिलियन डॉलर के कर्ज से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में तैयार 969 मेगावाट का नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तकनीकी खामियों के कारण पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे क्षेत्र में भारी जनविरोध शुरू हो चुका है।

**Type:** article · **Category:** पाकिस्तान · **Published:** 2026-08-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/pakistan/china-ke-42-hajara-karora-rupaye-ke-karja-se-bana-neelum-jhelum-project-bnda-pok-men-bharaka-janakrosha-14392 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीओके, नीलम-झेलम प्रोजेक्ट, चीन पाकिस्तान कर्ज, शहबाज शरीफ, मुजफ़्फराबाद प्रदर्शन, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ चीन

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने जनता के गुस्से को सड़कों पर ला दिया है। चीन की आर्थिक मदद और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की निगरानी में तैयार किया गया 969 मेगावाट क्षमता का नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट आज एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी संकट की वजह बन चुका है। जिस महत्वाकांक्षी परियोजना को इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक कायाकल्प और पाकिस्तान की राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वह चालू होते ही गंभीर तकनीकी खराबी के चलते पूरी तरह ठप हो गई है। लगभग 42 हजार करोड़ रुपये यानी 448 मिलियन डॉलर की भारी लागत से बनी यह जलविद्युत परियोजना अब शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व वाले पाकिस्तानी तंत्र के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है, जबकि स्थानीय नागरिक बिजली की किल्लत और भारी बिलों के खिलाफ लंबे समय से सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं।

## नीलम-झेलम परियोजना के बड़े दावे और तकनीकी संरचना
पीओके की प्राकृतिक जल संपदा और नदियों को विकास के नाम पर बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना है। इस परियोजना की शुरुआत के समय दावा किया गया था कि क्षेत्र में बहने वाली नदियों पर विशाल बांध बनाकर करीब एक हजार मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी। इस बिजली को सीधे पाकिस्तान के राष्ट्रीय पावर ग्रिड से जोड़ा जाना तय हुआ था। जल विकास प्राधिकरण (वाबडा) ने इस परियोजना के तहत 67 किलोमीटर लंबी जटिल सुरंगों का निर्माण किया और आधे से अधिक खुदाई का काम पूरा करके ट्रांसफार्मर हॉल और भूमिगत पावरहाउस स्थापित किए।

पाकिस्तानी प्रशासन का अनुमान था कि इस परियोजना से हर साल लगभग 5.15 अरब यूनिट सस्ती बिजली का उत्पादन होगा, जिससे पाकिस्तान को सालाना 45 अरब रुपये का सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना का एक मुख्य उद्देश्य नीलम नदी पर पानी के प्राथमिकता अधिकार यानी वॉटर राइट को स्थापित करना भी था। हालांकि, यह पूरी ढांचागत योजना अपने मूल लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रही है और आज एक सफेद हाथी बनकर खड़ी है।

## विवादित क्षेत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय बैंकों का इनकार और चीन का कर्ज
नीलम-झेलम परियोजना की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति इसके निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बनी थी। चूंकि यह परियोजना एक विवादित क्षेत्र में बनाई जा रही थी, इसलिए दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक बैंकों ने इस 969 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट के लिए कर्ज देने से साफ इनकार कर दिया था। वित्तीय संसाधनों की भारी कमी के कारण इस परियोजना का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप होने के कगार पर पहुंच गया था।

ऐसी स्थिति में चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के माध्यम से 448 मिलियन डॉलर यानी करीब 42 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज का समझौता किया गया। इस चीनी कर्ज की मदद से परियोजना का काम तो आगे बढ़ा, लेकिन निर्माण गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर ध्यान न दिए जाने के कारण प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर शुरुआती दौर से ही सवाल उठने लगे थे।

## स्थानीय जनता पर दोहरी मार: अंधेरा, भारी महसूल और ठप सेवाएं
जिस इलाके के प्राकृतिक जल संसाधनों का उपयोग करके यह बिजली तैयार की जा रही है, वहां के स्थानीय निवासी ही आज बूंद-बूंद और मिनट-मिनट बिजली के लिए तरस रहे हैं। परियोजना से बनने वाली पूरी 969 मेगावाट बिजली को सीधे बाहरी क्षेत्रों और पाकिस्तान के ग्रिड में भेज दिया जाता है, जबकि जिन घाटियों से ये नदियां गुजरती हैं, वहां के घर अंधेरे में डूबे रहते हैं।

स्थानीय आबादी को न केवल लंबे पावर कट का सामना करना पड़ता है, बल्कि जो थोड़ी-बहुत बिजली उपलब्ध कराई जाती है, उसके लिए पूरे क्षेत्र में सबसे ऊंची दरें वसूली जाती हैं। इसके अलावा, वोल्टेज बेहद कम रहने के कारण घरेलू और व्यापारिक बिजली उपकरण काम नहीं कर पाते। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी ने भी क्षेत्र में महीनों से जारी लोड-शेडिंग, कम वोल्टेज और मोबाइल व इंटरनेट सेवाओं के बार-बार ठप होने की कड़े शब्दों में आलोचना की है।

## ढाई साल से जारी जनआंदोलन और भ्रष्टाचार की पारदर्शी जांच की मांग
अधिकारों की अनदेखी और संसाधनों के दोहन के खिलाफ पीओके में जनआक्रोश की लहर व्यापक रूप ले चुकी है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के झंडे तले क्षेत्र के नागरिक पिछले ढाई साल से ज्यादा समय से सड़कों पर उतरकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि अपनी ही नदियों से उत्पन्न बिजली के लिए उन्हें वर्षों तक सड़कों पर धरना देना पड़ रहा है, जो विकास के नाम पर सीधे तौर पर शोषण को दर्शाता है।

तथाकथित प्रांतीय राजधानी मुजफ़्फराबाद में व्यापारियों, नागरिक संगठनों और आम लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि नीलम-झेलम प्रोजेक्ट में हुई भारी वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं की पारदर्शी जांच कराई जाए। प्रोजेक्ट के चालू होते ही बंद हो जाने ने पाकिस्तानी तंत्र की नीतियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** सीमा पार बन रहे विवादित और असुरक्षित बांधों के ढांचागत संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके असर पर रणनीतिक नजर बनी हुई है।
- **पीओके में:** स्थानीय निवासियों को पानी और बिजली की कमी, अत्यधिक बिजली दरों और लगातार पावर कट की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट क्या है और इसकी क्षमता कितनी है?
नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नीलम नदी पर निर्मित 969 मेगावाट क्षमता की एक जलविद्युत परियोजना है।

### 2. इस प्रोजेक्ट के लिए चीन ने कितनी वित्तीय सहायता प्रदान की थी?
चीन के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने इस परियोजना के निर्माण के लिए 448 मिलियन डॉलर (लगभग 42 हजार करोड़ रुपये) का ऋण दिया था।

### 3. अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने नीलम-झेलम प्रोजेक्ट को लोन देने से इनकार क्यों किया था?
यह परियोजना एक विवादित क्षेत्र में स्थित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक बैंकों ने इसे फंडिंग देने से मना कर दिया था।

### 4. मुजफ़्फराबाद और पीओके के नागरिक सड़कों पर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?
स्थानीय नागरिक लगातार पावर कट, अत्यधिक बिजली दरों, नेटवर्क ठप होने और नीलम-झेलम प्रोजेक्ट में हुई वित्तीय व तकनीकी गड़बड़ियों की पारदर्शी जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

### 5. इस प्रोजेक्ट से सालाना कितना बिजली उत्पादन और वित्तीय लाभ अनुमानित था?
परियोजना से सालाना 5.15 अरब यूनिट बिजली उत्पादन और पाकिस्तान को 45 अरब रुपये का आर्थिक फायदा होने का दावा किया गया था।

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