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  "type": "article",
  "title": "चीनी संकट के बीच भारत को 12 लाख टन शक्कर बेचने की होड़ में जुटीं पाकिस्तान की चीनी मिलें",
  "summary": "भारत में चीनी की कीमतें बढ़कर ₹44 से ₹54 प्रति किलो पहुंचने पर सरकार 10 लाख टन आयात करने की योजना बना रही है, जिसे देखकर पाकिस्तान की मिलें 12 लाख टन सरप्लस चीनी बेचने की कोशिशों में जुट गई हैं।",
  "content": "भारत के घरेलू बाजारों में पिछले कुछ महीनों के दौरान चीनी की कीमतों में दर्ज की गई बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर सीधा दबाव डाला है। कुछ समय पहले तक जो चीनी स्थानीय बाजारों में ₹38 से ₹42 प्रति किलो के दायरे में उपलब्ध थी, उसकी रिटेल कीमतें अब बढ़कर ₹44 से ₹54 प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं। थोक मंडियों में भी चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर को छू रहे हैं। आगामी त्योहारों के सीजन में घरेलू मांग को पूरा करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासन ने विदेशों से 10 लाख टन चीनी आयात करने की योजना बनाई है। भारत द्वारा चीनी आयात किए जाने की इस संभावित तैयारी की खबर से सीमा पार पाकिस्तान के चीनी उद्योग में हलचल तेज हो गई है, जहां मिल मालिक अपने विशाल स्टॉक को भारतीय बाजार में खपाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।\n\nपाकिस्तान में चीनी का रिकॉर्ड सरप्लस और मिलों की आर्थिक बदहाली\nपाकिस्तान का चीनी उद्योग इस समय अत्यधिक सरप्लस स्टॉक और नकदी के भारी संकट का सामना कर रहा है। पाकिस्तान सुगर मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अपनी सरकार के समक्ष औपचारिक मांग रखी है कि उन्हें भारत को कम से कम 12 लाख टन चीनी तुरंत एक्सपोर्ट करने की अनुमति दी जाए। हुंजा सुगर मिल के वरिष्ठ प्रतिनिधि चौधरी मोहम्मद वहीद ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तानी चीनी मिलों के पास भारी मात्रा में शक्कर बिना बिकी पड़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 अगस्त तक पाकिस्तान के गोदामों में लगभग 28.1 लाख टन चीनी का बैकअप स्टॉक मौजूद था। इसके विपरीत, पाकिस्तान की घरेलू मासिक खपत केवल 5.5 लाख टन के आसपास है। इसका सीधा गणित यह है कि दिसंबर 2026 तक पूरे देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बावजूद पाकिस्तान के पास लाखों टन अतिरिक्त चीनी बची रहेगी।\n\nयह अतिरिक्त स्टॉक मिलों के गोदामों में पड़ा हुआ है और गन्ने की अगली पेराई का नया सीजन शुरू होने वाला है। गोदामों में माल फंसा होने के कारण चीनी मिलों के पास कार्यशील पूंजी समाप्त हो गई है, जिससे वे गहरे वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। यही कारण है कि जब भारतीय बाजार में 10 लाख टन चीनी के आयात की संभावना की जानकारी सामने आई, तो पाकिस्तानी मिल मालिकों को अपना फंसा हुआ स्टॉक निकालने का एक बेहतरीन अवसर दिखाई देने लगा।\n\nपाकिस्तानी बाजार में शक्कर के दाम और भारतीय मुद्रा से तुलना\nएक तरफ जहां पाकिस्तान का चीनी उद्योग अपनी शक्कर को बाहर बेचने के लिए आतुर है, वहीं खुद पाकिस्तान के घरेलू बाजारों में आम जनता को चीनी काफी महंगी दरों पर खरीदनी पड़ रही है। पाकिस्तान के आम रिटेल दुकानों पर चीनी की कीमत 150 से 170 PKR प्रति किलो चल रही है। यदि सुपरमार्केट्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पैक्ड चीनी के दामों की बात करें, तो यह दर 180 से 200 PKR प्रति किलो तक पहुंच जाती है।\n\nमुद्रा विनिमय दर के दृष्टिकोण से देखें तो पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में आई गिरावट के कारण 160 PKR की कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग ₹45 से ₹52 के बराबर बैठती है। इस प्रकार, पाकिस्तान में आम नागरिकों के लिए चीनी भले ही 160 PKR प्रति किलो से ऊपर बिक रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दरों पर अपनी मिलों को दिवालिया होने से बचाने के उद्देश्य से पाकिस्तानी व्यापारी भारत को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर चीनी बेचने के सपने देख रहे हैं।\n\nभारत को ही चीनी बेचने के पीछे के तीन बड़े व्यावसायिक कारण\nपाकिस्तान के सुगर मिल मालिकों का मानना है कि भारतीय बाजार उनके सरप्लस स्टॉक को खपाने के लिए सबसे आदर्श और लाभदायक विकल्प है। इसके पीछे मुख्यतः तीन रणनीतिक कारण बताए गए हैं\n\n• कम लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट खर्च: भारत और पाकिस्तान की भौगोलिक सीमाएं आपस में सटी हुई हैं। यदि पाकिस्तान अपनी चीनी को दूरदराज के देशों में भेजता है, तो समुद्री जहाजों का माल भाड़ा बहुत अधिक आता है। इसके विपरीत, वाघा बॉर्डर के सड़क मार्ग से या संक्षिप्त समुद्री रास्ते से भारत को चीनी भेजना अत्यंत सस्ता और सुगम साबित होगा।\n• ₹5,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा अर्जित करने का अवसर: पाकिस्तानी मिल मालिकों के अनुमान के अनुसार, यदि वे भारत को 12 लाख टन चीनी बेचने में सफल रहते हैं, तो इससे पाकिस्तान को लगभग 5,000 करोड़ रुपये (करीब 600 मिलियन USD) की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। वर्तमान आर्थिक स्थिति में यह राशि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।\n• भारतीय बाजार का विशाल दायरा: भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। त्योहारों के मौसम की शुरुआत के साथ ही भारतीय बाजार में चीनी की मांग में जबरदस्त उछाल आता है, जिसका लाभ उठाने के लिए पाकिस्तानी निर्यातक उत्सुक हैं।\n\nइसी वित्तीय दबाव के बीच पाकिस्तान की कैबिनेट समिति ने हाल ही में अपने सरकारी रिजर्व स्टॉक में रखी 1.08 लाख टन चीनी को अंतरराष्ट्रीय टेंडर के माध्यम से एक्सपोर्ट करने की मंजूरी दी है, ताकि स्थानीय मिलों को कुछ तात्कालिक नकदी मिल सके।\n\nभारत में चीनी उत्पादन घटने और दाम बढ़ने के मुख्य कारण\nभारतीय बाजार में चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी के पीछे देश के भीतर हुए कुछ नीतिगत और मौसमी बदलाव प्रमुख कारक रहे हैं\n\n• इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम: भारत सरकार ने स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस नीति के तहत गन्ने के रस और सिरप का एक बड़ा हिस्सा शक्कर बनाने के बजाय इथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट कर दिया गया, जिससे चीनी का शुद्ध उत्पादन कम हुआ।\n• मौसम और मानसूनी अनिश्चितता: देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों, जैसे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और बदलते मौसम के मिजाज ने गन्ने की फसल तथा चीनी की रिकवरी दर को प्रभावित किया।\n• सीजन की शुरुआत में निर्यात: पेराई सीजन के शुरुआती चरणों में भारत से कुछ मात्रा में चीनी का निर्यात किया गया था, जिसके कारण घरेलू बफर स्टॉक में थोड़ी कमी दर्ज की गई।\n\nकूटनीतिक चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं\nभले ही पाकिस्तानी चीनी मिलें लगभग $600 मिलियन कमाने की उम्मीद लगाए बैठी हों और भारत को शक्कर बेचने की कोशिश कर रही हों, लेकिन दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध काफी जटिल हैं। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त्रीकरण के पश्चात पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को एकतरफा रूप से निलंबित कर दिया था।\n\nऐसी स्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारत अपनी घरेलू चीनी दरों को नियंत्रित करने के लिए पड़ोसी देश से आयात पर विचार करेगा या फिर ब्राजील जैसे अन्य वैश्विक चीनी उत्पादक राष्ट्रों से आपूर्ति जुटाएगा। फिलहाल भारतीय अधिकारी घरेलू कीमतों की निगरानी कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी मिलें भारतीय बाजार तक पहुंच बनाने का रास्ता तलाश रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें ₹44 से ₹54 प्रति किलो बनी हुई हैं, लेकिन 10 लाख टन आयात योजना से त्योहारों के दौरान दाम स्थिर रहने की उम्मीद है।\n• घरेलू बजट पर असर: आगामी त्योहारों के सीजन में आम उपभोक्ताओं को पिछले महीनों की तुलना में चीनी की खरीदारी पर थोड़ा अधिक बजट रखना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत में हाल के महीनों में चीनी के दाम कितने बढ़ गए हैं?\nभारत में कुछ महीने पहले तक ₹38 से ₹42 प्रति किलो मिलने वाली चीनी की रिटेल कीमत बढ़कर ₹44 से ₹54 प्रति किलो तक पहुंच गई है।\n\n2. पाकिस्तान की चीनी मिलें भारत को कितना शक्कर बेचना चाहती हैं?\nपाकिस्तान सुगर मिल एसोसिएशन अपनी सरकार से भारत को तुरंत कम से कम 12 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति मांग रहा है।\n\n3. पाकिस्तान में आम जनता को चीनी किस भाव मिल रही है?\nपाकिस्तान के आम रिटेल बाजारों में चीनी 150 से 170 PKR प्रति किलो और सुपरमार्केट्स में पैक्ड चीनी 180 से 200 PKR प्रति किलो बिक रही है।\n\n4. पाकिस्तान भारत को ही चीनी क्यों बेचना चाहता है?\nपाकिस्तान के लिए भारत पड़ोसी देश होने के कारण ट्रांसपोर्ट भाड़ा बहुत कम पड़ता है, और 12 लाख टन चीनी बेचकर वे लगभग ₹5,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा कमा सकते हैं।\n\n5. भारत में चीनी के उत्पादन में कमी क्यों आई है?\nपेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य के कारण गन्ने के रस को इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया गया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश से भी फसल प्रभावित हुई।\n\n6. क्या भारत और पाकिस्तान के बीच शक्कर का व्यापार आसानी से हो सकता है?\n2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार खुद रोक दिया था, इसलिए कूटनीतिक तनाव के कारण व्यापार होना अनिश्चित है।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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