# ग्वादर के रास्ते INSTC में दाखिल होने की फिराक में पाकिस्तान, रूस ने बढ़ाया हाथ — समझिए भारत के लिए इसके मायने

> जिस ट्रेड कॉरिडोर को भारत ने ईरान और रूस के साथ मिलकर पाकिस्तान को किनारे करने के लिए खड़ा किया था, अब उसी INSTC में ग्वादर पोर्ट के जरिए घुसने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा है और रूस इसका समर्थन कर रहा है।

**Category:** पाकिस्तान · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/pakistan/gvadara-ke-raste-instc-men-dakhila-hone-ki-phiraka-men-pakistana-rusa-ne-barhaya-211

एक ऐसा व्यापारिक रास्ता, जिसे भारत ने सोच-समझकर पाकिस्तान को बाहर रखने के मकसद से तैयार किया था, अब वही पाकिस्तान की प्राथमिकता बन गया है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC में दाखिल होने के लिए इस्लामाबाद रास्ते तलाश रहा है, और हैरानी की बात यह है कि भारत का पुराना साझेदार रूस इस कोशिश के पीछे खुलकर खड़ा दिख रहा है।

## पाकिस्तान का इरादा और रूस का साथ
पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री सरदार अवैस अहमद खान लेघारी ने एक वेबिनार के दौरान साफ कहा कि उनका देश INSTC का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक के उस बयान की तारीफ की, जिसमें पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को इस कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। यानी जिस गलियारे की बुनियाद ही पाकिस्तान को दरकिनार करने पर रखी गई थी, अब उसमें सेंध लगाने की पूरी तैयारी चल रही है।

## आखिर है क्या यह INSTC
यह करीब 7200 किलोमीटर लंबा एक मल्टी-मोडल व्यापारिक नेटवर्क है, जिसमें समुद्री, रेल और सड़क — तीनों तरह के रास्ते शामिल हैं। इसकी पूरी सोच यही है कि भारत, ईरान, रूस, मध्य एशिया और उत्तरी यूरोप के बीच माल की आवाजाही तेज भी हो और सस्ती भी। भारत इस परियोजना के संस्थापक देशों में गिना जाता है और ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए इसे आगे बढ़ा रहा है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यही रहा है कि पाकिस्तान को बीच में लाए बगैर मध्य एशिया और रूस तक सीधी पहुंच बन जाती है।

## ग्वादर के जरिए घुसने की कोशिश क्यों
पाकिस्तान चाहता है कि ग्वादर पोर्ट इस नेटवर्क की चाबी बन जाए। ग्वादर पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे CPEC और चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव BRI का अहम केंद्र है। ऐसे में अगर रूस की योजना के मुताबिक ग्वादर को INSTC से जोड़ दिया गया, तो चीन, पाकिस्तान और रूस के बीच एक नया और मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क आकार ले सकता है। यही वजह है कि यह खबर रणनीतिक नजरिए से अहम मानी जा रही है।

## क्या भारत की बढ़त पर असर पड़ेगा
फौरी तौर पर ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा, फिर भी यह घटनाक्रम भारत को रणनीतिक रूप से सतर्क रहने का इशारा जरूर देता है। INSTC की असली रीढ़ आज भी भारत-ईरान-रूस का रास्ता ही है। ईरान का चाबहार पोर्ट इस परियोजना का केंद्रीय हिस्सा बना हुआ है, जहां भारत ने भारी निवेश किया है और उसकी रणनीतिक अहमियत ज्यों की त्यों कायम है। हां, पाकिस्तान की यह कवायद इतना जरूर बताती है कि वह खुद को क्षेत्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए नए दरवाजे खटखटा रहा है।

## भारत के पास और भी विकल्प
जानकारों की राय में कनेक्टिविटी की इस होड़ में भारत किसी एक परियोजना के भरोसे नहीं बैठा है। उसके पास विशाल घरेलू बाजार, मजबूत समुद्री नेटवर्क, हिंद महासागर में दबदबा, पश्चिम एशिया से गहरे रिश्ते और कई वैकल्पिक कनेक्टिविटी परियोजनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही भारत, मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे IMEC जैसी बड़ी योजनाओं पर भी काम कर रहा है, जिन्हें आने वाले समय के व्यापारिक मार्गों के तौर पर देखा जा रहा है।

## रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी
लेघारी ने यह भी बताया कि रूस और पाकिस्तान 2030 तक के लिए एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर दस्तखत करने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान और रूस के संबंध 'अनफ्रेंडली कंट्री' के दर्जे से निकलकर 'ट्रस्टेड फ्रेंड' तक पहुंच गए हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और शंघाई सहयोग संगठन SCO जैसे मंचों पर भी आपसी तालमेल लगातार बढ़ा रहे हैं।

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