सऊदी अरब को धोखा देना पाकिस्तान को पड़ा भारी, अब लाल सागर में खुद हूती विद्रोहियों के चक्रव्यूह में फंसा सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के बाद भी हूती हमलों के वक्त खामोश रहने वाले पाकिस्तान पर अब खुद बड़ा आर्थिक संकट आ गया है। यमन के विद्रोहियों की घेराबंदी के कारण लाल सागर में उसका तेल टैंकर फंस गया है। इस्लामाबाद की कूटनीति और फैसलों ने एक बार फिर उसे ऐसे चौराहे पर ला खड़ा किया है जहां से निकलना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। रियाद के साथ मक्का डिफेंस पैक्ट पर हस्ताक्षर कर दुनिया भर में अपनी करीबी मित्रता का दावा करने वाले पाकिस्तानी हुक्मरानों की नीयत पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जब यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब की धरती और रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए थे, तब इस्लामाबाद ने केवल औपचारिक विरोध जताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था। उस वक्त अपने अजीज साथी की मदद से पीछे हट जाने का नतीजा अब पाकिस्तान को खुद भुगतना पड़ रहा है। हालात इतनी तेजी से बदले हैं कि अब वही देश खुद हूती विद्रोहियों के बिछाए गए सैन्य और आर्थिक जाल में बुरी तरह उलझ चुका है। लाल सागर में अटका तेल टैंकर और पेट्रोलियम संकट इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पाकिस्तान का एक खाली तेल टैंकर है जो इस समय लाल सागर के ठंडे पानी में बुरी तरह फंसा हुआ है। सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बिल्कुल करीब खड़े इस जहाज को वहां से निकालना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। विद्रोही गुटों के लगातार हमलों की वजह से यह अहम पाइपलाइन पहले ही ठप हो चुकी है और इसके अगले छह हफ्तों तक दोबारा शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं बची है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस जलयान को सुरक्षित बाहर निकालना उनकी सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन रियाद के अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से इसे फिलहाल स्टैंडबाय पर रखने की सख्त हिदायत दी है। ओमान, यूएई या लीबिया के वैकल्पिक मार्गों से कच्चे तेल की आपूर्ति बहाल करना पाकिस्तान के लिए भारी आर्थिक बोझ बन चुका है। अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा डीजल का गंभीर खतरा इस समुद्री गतिरोध ने पाकिस्तान की पहले से बदतर हालत वाली अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से यह चेतावनी दी गई है कि यदि ईंधन की आपूर्ति का यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो देश के पास डीजल का स्टॉक सिर्फ एक महीने का ही शेष बचेगा। बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास विद्रोही ताकतों ने अपनी पकड़ इतनी आक्रामक बना ली है कि वहां से गुजरने वाले हर एक समुद्री जहाज पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। यह फंसा हुआ टैंकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की फजीहत और उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था का एक नया प्रतीक बनता जा रहा है। डिफेंस पैक्ट और एक्ट ऑफ वॉर की चेतावनी जब आर्थिक बर्बादी का खतरा सिर पर मंडराने लगा, तब जाकर पाकिस्तान को रियाद के साथ हुए उस रक्षा समझौते की सुधि आई जिसे कुछ समय पहले बड़े तामझाम के साथ अमली जामा पहनाया गया था। रक्षा मंत्री खवाजा आसिफ ने एक कड़े बयान में कहा है कि मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट को अब बिना किसी देरी के पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इस समझौते के तहत किसी एक देश की संप्रभुता पर आंच आने पर सभी साझेदार मिलकर मुकाबला करेंगे। इसी समझौते की आड़ में पाकिस्तान अब अपनी जमीन बचाने और दुनिया के सामने इस खतरनाक संघर्ष में खुद के मजबूर होने का दावा पेश कर रहा है। अनसुलझे सवाल और क्षेत्रीय अस्थिरता हूती हमलों की वजह से सऊदी अरब के कई शहर थर्रा चुके हैं और इस संघर्ष में कई नागरिक घायल हुए हैं। ओआईसी और मुस्लिम वर्ल्ड लीग जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इन हमलों की कड़ी निंदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस डिफेंस पैक्ट के बावजूद हमलों को केवल शर्मनाक बताकर औपचारिकता पूरी कर ली थी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सिर्फ बयानों की राजनीति तक सीमित रहेगा या फिर इस सैन्य दलदल में कूदकर खुद के लिए और बड़ी मुसीबतें खड़ी करेगा। इसका आप पर असर यह पूरा घटनाक्रम सीधे तौर पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों और आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। • भारत में: भारत पर इस घटना का कोई सीधा नकारात्मक आर्थिक प्रभाव नहीं है, क्योंकि देश के पास अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए विविध और सुरक्षित आपूर्ति मार्ग मौजूद हैं। • पाकिस्तान में: पाकिस्तान में डीजल और पेट्रोल का स्टॉक सिर्फ एक महीने का बचा है, जिससे परिवहन लागत और रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। • ईंधन की कीमतें: आपूर्ति बाधित होने से पाकिस्तान में ईंधन के दाम आसमान छू सकते हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का भारी बोझ पड़ेगा। • व्यापारिक मार्ग: लाल सागर में जहाजों की आवाजाही रुकने से आयात और निर्यात महंगा हो गया है, जिसका असर उद्योगों के कामकाज पर पड़ रहा है। • औद्योगिक उत्पादन: डीजल की भारी किल्लत के कारण पाकिस्तान के परिवहन और विनिर्माण क्षेत्र ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसा क्यों हुआ लाल सागर में उत्पन्न यह संकट यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर लगातार किए जा रहे हमलों और कूटनीतिक समझौतों की विफलता का परिणाम है। यमन के इन विद्रोही समूहों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास अपनी सैन्य पकड़ बेहद मजबूत कर ली है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। • हूती विद्रोहियों की आक्रामक नाकेबंदी: यमन के लड़ाकों ने लाल सागर से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे प्रमुख तेल पाइपलाइन और नौवहन मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं। • कूटनीतिक वादों से पीछे हटना: पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता करने के बावजूद जमीनी संघर्ष के समय सैन्य सहायता देने से परहेज किया, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक अविश्वास पैदा हुआ। • वैकल्पिक मार्गों की कमी: ओमान और यूएई के रास्ते जहाजों को डायवर्ट करने या लीबिया से कच्चा तेल मंगाने में भारी तकनीकी और वित्तीय बाधाएं आ रही हैं। सवाल-जवाब 1. पाकिस्तान का तेल टैंकर इस समय कहाँ फंसा हुआ है? पाकिस्तान का खाली तेल टैंकर लाल सागर में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पास फंसा हुआ है। 2. पाकिस्तान में डीजल का स्टॉक कितने दिन का बचा है? पाकिस्तान के पास केवल मौजूदा और आने वाले एक महीने भर का डीजल स्टॉक ही बचा हुआ है। 3. किस पाकिस्तानी मंत्री ने ईंधन संकट की पुष्टि की है? पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस संकट और जहाज फंसे होने की बात स्वीकार की है। 4. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कौन सा समझौता लागू करने की मांग की है? रक्षा मंत्री खवाजा आसिफ ने मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट को तुरंत लागू करने की मांग की है। 5. लाल सागर में किस मार्ग के पास हूतियों ने अपनी पकड़ मजबूत की है? हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास अपनी पकड़ बहुत मजबूत कर ली है। https://trendkia.com/pakistan/how-pakistan-facing-houthi-trap-in-red-sea-after-saudi-oil-tanker-standoff-33010 TrendKia — Har trend, sabse pehle.