ईरान के शाहेद ड्रोन की तर्ज पर पाकिस्तान ने तैयार किया D-248, 3000 किमी रेंज के दावों ने बढ़ाई भारत की चिंता हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला ने डेल्टा विंग लॉइटरिंग D-248 नाम का एक नया अनमैन्ड एरियल सिस्टम प्रदर्शित किया है, जो ईरान के शाहेद-136 ड्रोन का क्लोन माना जा रहा है। इसकी 3000 किलोमीटर तक की दावा की गई मारक क्षमता ने नई दिल्ली समेत कई भारतीय शहरों के लिए रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान के रक्षा उद्योग ने हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला के माध्यम से डेल्टा विंग लॉइटरिंग (D-248) नामक एक नया लंबी दूरी का अनमैन्ड एरियल सिस्टम सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है। बाहरी बनावट में यह ड्रोन ईरान के प्रसिद्ध शाहेद-136 कामिकेज ड्रोन का हुबहू जुड़वां रूप दिखाई देता है। आर्थिक चुनौतियों से जूझने के बावजूद पाकिस्तान अपने सैन्य हथियारों के बेड़े को लगातार आधुनिक बनाने में लगा हुआ है। हालांकि, इस नए ड्रोन की क्षमता को लेकर किए जा रहे बड़े दावों ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के बीच इसके तकनीकी स्रोतों और असल मारक क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। D-248 यूएएस के तकनीकी दावे और विशेषज्ञों का संदेह दावों के अनुसार D-248 ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 2200 किलोमीटर से 3000 किलोमीटर के बीच बताई जा रही है, जबकि इसका एंड्योरेंस 12 से 14 घंटे का है। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो इस ड्रोन की मारक क्षमता पाकिस्तान की मौजूदा मिसाइल प्रणाली से भी ज्यादा हो जाएगी। यह रेंज पाकिस्तान की बाबर क्रूज मिसाइल और शाहीन बैलिस्टिक मिसाइल श्रृंखला की क्षमता को भी पीछे छोड़ देती है। इस दूरी का मतलब यह है कि भारत की राजधानी दिल्ली समेत देश के लगभग सभी प्रमुख शहर इसकी सैद्धांतिक पहुंच में आ सकते हैं। बहरहाल, रक्षा विशेषज्ञ इन दावों पर संदेह जता रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान ने इसके प्रोपल्शन सिस्टम, गाइडेंस पैकेज या वर्तमान ऑपरेशनल स्थिति की कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रमाण साझा नहीं किया है। ईरानी शाहेद और चीनी एयरोस्पेस तकनीक से तालमेल संरचनात्मक रूप से D-248 ड्रोन में त्रिकोणीय डेल्टा विंग, एक कॉम्पैक्ट फ्यूजलेज, पीछे की तरफ लगे कंट्रोल सरफेस और पुशर-प्रोपेलर कॉन्फिगरेशन शामिल हैं। यह पूरी डिजाइन बाहरी तौर पर ईरान की शाहेद-136 श्रृंखला से मेल खाती है, जबकि इसके कुछ पहलू चीनी अनमैन्ड सिस्टम से भी मिलते-जुलते हैं। पिछले 20 वर्षों में पाकिस्तान का रक्षा उद्योग आधार चीनी एयरोस्पेस और मिसाइल तकनीक से गहराई से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसका कोई प्रत्यक्ष सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, फिर भी माना जा रहा है कि इसके फ्लाइट कंट्रोल, सैटेलाइट नेविगेशन, कंपोजिट सामग्री और प्रोपल्शन सबसिस्टम चीनी सप्लायर्स द्वारा प्रदान किए गए हो सकते हैं। शाहेद-136 ड्रोन का युद्ध इतिहास और हवाई रक्षा प्रणालियों पर प्रभाव साल 2021 में पहली बार सामने आया ईरान का शाहेद-136 एक घातक कामिकेज या आत्मघाती ड्रोन है, जो अपने साथ विस्फोटक ले जाकर सीधे लक्ष्य से टकरा जाता है। 1000 किलोमीटर से 2500 किलोमीटर की रेंज वाला यह ड्रोन रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। रूसी सेना ने ईरान से भारी संख्या में ये ड्रोन खरीदकर यूक्रेन के बुनियादी ढांचे पर हमले किए। इस सस्ते ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को थका देता है। अमेरिका द्वारा दिए गए पैट्रियट सिस्टम और THAAD जैसी अरबों डॉलर की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को इन बेहद सस्ते ड्रोनों को रोकने के लिए अत्यधिक कीमती मिसाइलें दागनी पड़ीं। इसके अतिरिक्त, इजरायल के साथ हुए संघर्ष के दौरान भी शाहेद ड्रोन ने आयरन डोम जैसी बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली को चकमा देकर अपनी मारक क्षमता साबित की थी। दक्षिण एशियाई हवाई सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर असर ईरानी मॉडल पर आधारित इस प्रकार के लॉइटरिंग हथियारों का विकास क्षेत्रीय हवाई सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश करता है। पारम्परिक बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों की तुलना में ये ड्रोन कम ऊंचाई और धीमी गति से उड़ान भरते हैं, जिससे रडार द्वारा इनकी पहचान करना और इन्हें समय रहते नष्ट करना एक कठिन कार्य बन जाता है। यदि पाकिस्तान D-248 का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सफल होता है, तो दक्षिण एशिया में हवाई रक्षा रणनीतिकारों को ड्रोन विरोधी प्रणालियों और निगरानी नेटवर्क को और अधिक मजबूत करना होगा। इसका आप पर असर भारत की पश्चिमी सीमा के निकट लंबी दूरी के लॉइटरिंग ड्रोन प्रणालियों के विकास से सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में एकीकृत वायु रक्षा और ड्रोन विरोधी क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता बढ़ गई है। • भारत में: सशस्त्र बल सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन विरोधी रक्षा प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पहचान नेटवर्क की तैनाती को तेज करेंगे। यह सैन्य आधुनिकीकरण प्रयास कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करता है। • दिल्ली और उत्तरी भारत में: राजधानी क्षेत्र और उत्तरी सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा एजेंसियां रडार निगरानी और रणनीतिक हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को और सख्त करेंगी। इससे उत्तरी भारत के प्रमुख शहरों में नागरिक सुरक्षा बुनियादी ढांचे और हवाई निगरानी प्रोटोकॉल को नया बल मिलेगा। • रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए: भारत में घरेलू रक्षा निर्माताओं को स्वदेशी काउंटर-स्वाम तकनीक बनाने के लिए अधिक नीतिगत प्रोत्साहन और शोध अनुदान मिलने की संभावना है। इससे एयरोस्पेस स्टार्ट-अप और ड्रोन इंटरसेप्शन में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। • सुरक्षा नीति योजनाकारों के लिए: रणनीतिक विश्लेषकों को लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोनों से निपटने के लिए अपनी खतरे के आकलन की नीतियों को फिर से व्यवस्थित करना होगा। यह बदलाव खुफिया जानकारी जुटाने और त्वरित प्रतिक्रिया रणनीतियों को सुनिश्चित करता है। सवाल-जवाब 1. पाकिस्तान द्वारा प्रदर्शित D-248 ड्रोन क्या है? D-248 हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला द्वारा विकसित एक लंबी दूरी का अनमैन्ड एरियल सिस्टम है, जिसकी त्रिकोणीय डेल्टा विंग संरचना ईरान के शाहेद-136 ड्रोन से मिलती-जुलती है। 2. पाकिस्तान के D-248 ड्रोन की मारक क्षमता कितनी बताई जा रही है? दावों के अनुसार इस ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 2200 से 3000 किलोमीटर और एंड्योरेंस 12 से 14 घंटे का बताया गया है। 3. सैन्य विशेषज्ञ D-248 के दावों पर क्यों संदेह जता रहे हैं? विशेषज्ञों को संदेह इसलिए है क्योंकि यह रेंज पाकिस्तान की बाबर और शाहीन मिसाइल प्रणालियों से अधिक है, और प्रोपल्शन व गाइडेंस सिस्टम के कोई आधिकारिक प्रमाण जारी नहीं किए गए हैं। 4. ईरान का शाहेद-136 ड्रोन युद्ध में किस प्रकार काम करता है? शाहेद-136 एक कामिकेज ड्रोन है जो विस्फोटक लेकर सीधे लक्ष्य पर जाकर फट जाता है और पैट्रियट, THAAD तथा आयरन डोम जैसी महंगी एयर डिफेंस प्रणालियों को थका देता है। 5. D-248 में किन विदेशी तकनीकों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है? पाकिस्तान के दो दशक पुराने रक्षा संबंधों के आधार पर फ्लाइट कंट्रोल, सैटेलाइट नेविगेशन, कंपोजिट सामग्री और प्रोपल्शन में चीनी सप्लायर्स के घटकों के इस्तेमाल का अंदेशा है। https://trendkia.com/pakistan/iran-ke-shahed-drona-ki-tarja-para-pakistan-ne-taiyara-kiya-d-248-3000-kimi-renja-ke-davon-ne-barhai-india-ki-chinta-26910 TrendKia — Har trend, sabse pehle.