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  "type": "article",
  "title": "ईरान सीमा बंद होने से पाकिस्तान में एलपीजी का भयानक संकट, ऑटो चालकों की दैनिक कमाई में भारी गिरावट",
  "summary": "पाकिस्तान और ईरान सीमा सील होने के बाद एलपीजी की कीमतें 56 प्रतिशत उछलकर 7,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति सिलेंडर पहुंच गई हैं। इस वजह से लाहौर समेत कई शहरों में हजारों ऑटो चालकों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और टकराव का व्यापक असर अब केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति अथवा वैश्विक कच्चे तेल के बड़े वित्तीय सौदों तक सीमित नहीं रहा है। इस भू-राजनीतिक टकराव का सीधा असर अब साधारण नागरिकों के घरों, चूल्हों और उनके दैनिक रोजगार पर पूरी तीव्रता से पड़ने लगा है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के परिवहन क्षेत्र में तरल पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी की दरों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी ने शहरी सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ माने जाने वाले तिपहिया चालकों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। गैस की बढ़ती कीमतों और सीमा पर आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण अनगिनत परिवारों को दो वक्त का भोजन जुटाने के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ रहा है।\n\nलाहौर के ऑटो चालकों की दैनिक कमाई पर सीधी मार\nलाहौर शहर की व्यस्त सड़कों पर बीते 13 वर्षों से तिपहिया ऑटो-रिक्शा चला रहे 33 वर्षीय रशीद अली की दिनचर्या हर रोज तड़के 6 बजे से शुरू होकर आधी रात 12 बजे तक अनवरत चलती है। कुछ समय पूर्व तक रशीद प्रतिदिन लगभग 6.50 डॉलर यानी पाकिस्तानी मुद्रा में तकरीबन 1,800 से 2,000 रुपये तक आसानी से बचा लेते थे। इस आमदनी से उनके चार सदस्यों वाले परिवार की बुनियादी आवश्यकताएं और घरेलू खर्च बिना किसी बड़ी बाधा के पूरे हो जाते थे।\n\nलेकिन हाल के दिनों में एलपीजी के बढ़े हुए दामों ने उनकी शुद्ध बचत को आधा से भी कम कर दिया है। रशीद अली दिन भर की कड़ी मशक्कत और 18 घंटे की लंबी ड्राइविंग के बाद शाम को बमुश्किल 3 डॉलर यानी लगभग 700 से 800 पाकिस्तानी रुपये ही अपने घर ले जा पा रहे हैं। घटती कमाई के सामने उनके निश्चित खर्चों का बोझ जस का तस बना हुआ है।\n\nकिराए के मकान में रहने वाले रशीद को प्रत्येक महीने 11,000 पाकिस्तानी रुपये मकान मालिक को किराए के रूप में चुकाने होते हैं। इसके साथ ही, जिस ऑटो-रिक्शा को वह चलाते हैं, उसके दैनिक किराये के रूप में उन्हें हर दिन 600 रुपये का भुगतान वाहन मालिक को करना पड़ता है। सबसे बड़ा अतिरिक्त भार ईंधन का है, जहां उन्हें दिन भर में 4 से 5 बार 300 से 400 रुपये की गैस भरवानी पड़ जाती है। ईंधन के इस भारी खर्च के कारण परिवार की माली हालत इस कदर बिगड़ चुकी है कि रशीद और उनके आश्रितों को अब दिन में केवल दो बार ही भोजन मिल पा रहा है।\n\nपाकिस्तान में एलपीजी की स्थिति और सीमा बंदी का झटका\nपाकिस्तान में आम जनजीवन और किफायती परिवहन के संदर्भ में एलपीजी को पारंपरिक रूप से गरीबों का ईंधन माना जाता है। अवामी रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष मजीद घौरी के अनुसार, उनके संगठन से जुड़े लगभग 43,000 ऑटो-रिक्शा में से करीब 70 प्रतिशत वाहन तथा चिंगची नाम से जानी जाने वाली मोटरसाइकिल चालित थ्री-व्हीलर्स पूरी तरह एलपीजी सिलेंडरों पर ही निर्भर हैं। शहरी आबादी को बेहद कम लागत में यात्रा कराने वाला यह पूरा तंत्र गैस की उपलब्धता पर टिका हुआ है।\n\nयह संकट 17 अक्टूबर से अचानक उस वक्त गहरा गया, जब ईरान से सटी दो प्रमुख सीमा चौकियों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। सीमा सील होने से ईरान की तरफ से पाकिस्तान आने वाली एलपीजी की नियमित खेप पूरी तरह ठप हो गई।\n\n• आयात में तेज गिरावट: सीमाओं पर आवाजाही रोके जाने से पूर्व पाकिस्तान नियमित तौर पर ईरान से औसतन लगभग 7,000 मीट्रिक टन एलपीजी प्रतिदिन मंगाता था। यह आपूर्ति रुकते ही स्थानीय बाजारों में गैस का भारी अभाव पैदा हो गया।\n• कीमतों में अप्रत्याशित उछाल: पाकिस्तान एलपीजी एसोसिएशन और स्थानीय खुदरा व्यापारियों के आंकड़ों के मुताबिक, सीमा बंद होने के कुछ ही दिनों के भीतर 12 किलोग्राम वाले एलपीजी घरेलू सिलेंडर की कीमत में 56 प्रतिशत का भारी उछाल आया और यह 7,000 पाकिस्तानी रुपये के स्तर तक पहुंच गई। खुले खुदरा बाजार में अब एलपीजी लगभग 583 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है।\n\nबलूचिस्तान प्रशासन और ईरानी पक्ष के मध्य कूटनीतिक गतिरोध\nसीमा चौकियों के बंद होने और गैस आपूर्ति के थमने के कारणों को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग स्पष्टीकरण सामने आए हैं। पाकिस्तान के सीमावर्ती बलूचिस्तान प्रांत के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं और व्यापक स्तर पर होने वाली गैरकानूनी तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से सीमा को अस्थायी तौर पर बंद किया गया है।\n\nइसके विपरीत, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति को एक तकनीकी समस्या करार दिया है। वहीं, इस्लामाबाद स्थित ईरान के राजदूत ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि तेहरान की ओर से निर्यात पर किसी प्रकार का प्रतिबंध या पाबंदी लागू नहीं की गई है। ईरानी पक्ष ने इसके लिए पाकिस्तान के आयात नियमों और उससे जुड़े दस्तावेजी प्रक्रियाओं में किए गए नए बदलावों को जिम्मेदार ठहराया। इस प्रशासनिक और राजनयिक खींचतान का वास्तविक खामियाजा लाहौर और कराची जैसे बड़े शहरों में वाहन चलाकर पेट पालने वाले निर्धन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।\n\nसवारियों और वाहन चालकों के बीच किराए को लेकर तकरार\nगैस सिलेंडरों की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल के बावजूद चालकों के लिए सवारियों से अतिरिक्त किराया वसूलना नामुमकिन साबित हो रहा है। आम नागरिक पहले से ही चौतरफा महंगाई से त्रस्त हैं, इसलिए वे बढ़े हुए किराये का भुगतान करने को तैयार नहीं होते।\n\nचालक रशीद अली के अनुसार, जिस सफर का जायज किराया 200 से 250 रुपये होना चाहिए, उसके लिए यात्री केवल 80, 100 या अधिक से अधिक 150 रुपये की पेशकश करते हैं। अगर चालक घाटे का सौदा समझकर मना करता है, तो लोग वाहन छोड़ने में संकोच नहीं करते। लाहौर के एक स्थानीय निवासी मोहम्मद रमजान का उदाहरण इस स्थिति को स्पष्ट करता है। रमजान ने बताया कि जब एक ऑटो चालक ने शहर के भीतर छोटी दूरी के सफर के लिए 500 रुपये मांगे, तो उन्होंने 250 रुपये देने की पेशकश रखी। जब चालक सहमत नहीं हुआ, तो वह किराया देने के बजाय पैदल ही अपनी मंजिल के लिए रवाना हो गए।\n\nरिकॉर्ड स्तर पर पेट्रोल और गहराता आर्थिक दबाव\nपाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अत्यंत गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर के दौरान देश में मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर 9.6 प्रतिशत दर्ज की गई। इस अनियंत्रित महंगाई को थामने के उद्देश्य से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाकर 12 प्रतिशत पर पहुंचा दिया है।\n\nअमेरिका और ईरान के मध्य छिड़े तनाव ने तेल और गैस के अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भारी अस्थिरता में डाल दिया है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें बीते अप्रैल महीने में 458 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। वर्तमान समय में भी यह ईंधन युद्ध पूर्व की दरों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक कीमत पर बिक रहा है। पेट्रोल की अत्यधिक महंगाई के कारण ही लाखों ड्राइवरों ने एलपीजी को एक सस्ते विकल्प के रूप में अपनाया था, लेकिन अब यह वैकल्पिक ईंधन भी उनकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है।\n\nदोपहर के समय रशीद अली जब कुछ पलों के लिए अपने घर का रुख करते हैं, तो उनके दो मासूम बच्चे भोजन की उम्मीद लगाए बैठे मिलते हैं। वे भारी मन से दोबारा अपने वाहन की सीट संभालते हैं और देर रात तक सड़कों पर चक्कर लगाते रहते हैं, ताकि अपने बच्चों के लिए रात के खाने का इंतजाम कर सकें। यह व्यथा अकेले रशीद की नहीं, बल्कि पाकिस्तान के हजारों ऑटो चालकों के परिवारों की रोजमर्रा की हकीकत बन चुकी है। जब तक ईरानी सीमा पर आपूर्ति बहाल नहीं होती और गैस के दाम नीचे नहीं आते, तब तक इन मेहनतकश चालकों को राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nईरान से एलपीजी की आपूर्ति रुकने और गैस सिलेंडरों के दाम 56 प्रतिशत तक बढ़ने का सीधा असर आम जनता के दैनिक सफर और ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर पड़ा है।\n\n• आम मुसाफिरों पर: सार्वजनिक परिवहन का किराया बढ़ने या ऑटो चालकों द्वारा अधिक पैसे मांगने से दैनिक यात्रा काफी महंगी हो गई है। लोग बढ़े हुए किराए के कारण छोटी दूरियों के लिए पैदल चलने को मजबूर हैं या फिर निजी बजट पर अतिरिक्त दबाव झेल रहे हैं।\n• ऑटो और टैक्सी चालकों पर: ईंधन खर्च अचानक दोगुना होने से चालकों की दैनिक बचत 1,800-2,000 रुपये से घटकर महज 700-800 रुपये रह गई है। इस घटी हुई कमाई से वाहन का दैनिक किराया, मकान का किराया और परिवार का राशन चलाना असंभव हो रहा है।\n• रसोई और घरेलू बजट पर: खुले बाजार में गैस की कीमत 583 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने से उन मध्यम और गरीब परिवारों का खाना पकाना मुश्किल हो गया है जो पाइपलाइन गैस के अभाव में सिलेंडरों पर निर्भर हैं। कई घरों में भोजन की कटौती करनी पड़ रही है।\n• शहरी सार्वजनिक यातायात पर: लाहौर जैसे बड़े शहरों में 70 प्रतिशत तिपहिया वाहन एलपीजी पर चलते हैं, जिससे गैस की अनुपलब्धता के कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो सकती है। इससे कार्यालय, स्कूल और बाजार जाने वाले लोगों को समय पर सवारी मिलने में भारी परेशानी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपाकिस्तान में एलपीजी का अचानक संकट ईरान सीमा चौकियों के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी तनाव के सीधे टकराव से पैदा हुआ है।\n\n• सीमा चौकियों की अचानक बंदी: 17 अक्टूबर को पाकिस्तान और ईरान को जोड़ने वाले दो अहम बॉर्डर क्रॉसिंग बंद कर दिए गए, जिससे रोजाना आने वाली 7,000 मीट्रिक टन गैस का आयात पूरी तरह रुक गया। बलूचिस्तान प्रशासन ने इसे सुरक्षा और तस्करी रोकने का कदम बताया, जबकि ईरान ने इसे तकनीकी दिक्कत और आयात दस्तावेजों में बदलाव का मामला कहा।\n• सस्ते ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता: अप्रैल में जब पेट्रोल की कीमतें 458 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं, तो लगभग 70 प्रतिशत ऑटो-रिक्शा चालकों ने पेट्रोल छोड़कर एलपीजी को मुख्य ईंधन बना लिया था। आपूर्ति में अचानक रुकावट आते ही इस वैकल्पिक ईंधन पर भारी दबाव आ गया।\n• अमेरिका-ईरान व्यापक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और टकराव ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय व्यापार को गंभीर रूप से अस्थिर कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबावों के कारण आपूर्ति श्रृंखला लगातार बाधित हो रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडरों के दाम अचानक क्यों बढ़े?\nईरान के साथ लगती दो सीमा चौकियों के बंद होने से प्रतिदिन होने वाला करीब 7,000 मीट्रिक टन एलपीजी का आयात पूरी तरह रुक गया, जिससे कीमतों में 56 प्रतिशत का उछाल आया।\n\n2. वर्तमान में पाकिस्तान में 12 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की क्या कीमत है?\nसीमा बंद होने के बाद 12 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है, और खुले बाजार में यह करीब 583 रुपये प्रति किलो बिक रही है।\n\n3. इस संकट से ऑटो चालकों की आमदनी पर क्या असर पड़ा है?\nलाहौर के चालकों की दैनिक शुद्ध कमाई 1,800-2,000 रुपये से घटकर महज 700 से 800 पाकिस्तानी रुपये रह गई है, जिससे वे अपने परिवार के लिए बुनियादी खर्च भी नहीं जुटा पा रहे हैं।\n\n4. पाकिस्तान और ईरान की सीमा कब बंद की गई थी?\nईरान से लगती दो सीमा चौकियों को 17 अक्टूबर से बंद किया गया है।\n\n5. पाकिस्तान में कितने प्रतिशत ऑटो-रिक्शा एलपीजी पर चलते हैं?\nअवामी रिक्शा यूनियन के मुताबिक संघ से जुड़े 43,000 ऑटो-रिक्शा में से लगभग 70 प्रतिशत और चिंगची थ्री-व्हीलर्स एलपीजी पर ही चलते हैं।\n\n6. सीमा बंद होने को लेकर बलूचिस्तान सरकार और ईरान का क्या रुख है?\nबलूचिस्तान सरकार ने सुरक्षा और तस्करी रोकने के लिए सीमा सील करने की बात कही है, जबकि ईरान ने इसे तकनीकी खामी और आयात दस्तावेजों में बदलाव बताया है।",
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