{
  "type": "article",
  "title": "इस्लामाबाद में एससीओ सम्मेलन के दौरान भारतीय राजनयिक आलोक डिमरी के सौहार्दपूर्ण रुख ने खींचा ध्यान",
  "summary": "पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ राजनयिक आलोक डिमरी ने क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया और पाकिस्तान के अन्य शहरों की यात्रा करने की इच्छा जताई।",
  "content": "पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों के तीन दिवसीय सम्मेलन में भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आलोक डिमरी के नेतृत्व में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने शिरकत की। पहलगाम में हुए हमले और उसके उपरांत शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के घटनाक्रम के बाद यह किसी औपचारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का पहला पाकिस्तान दौरा है। सम्मेलन के गलियारों में भारतीय राजनयिक के सकारात्मक और सहज व्यवहार ने राजनयिक हलकों में विशेष ध्यान आकर्षित किया है।\n\nपाकिस्तानी टीवी पर साझा किए अपने अनुभव और विचार\nआलोक डिमरी ने पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन चैनल के साथ बातचीत में अपनी इस यात्रा के सुखद अनुभवों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने जीवन में पहली बार पाकिस्तान की धरती पर आने का सुअवसर मिला है और राजधानी इस्लामाबाद का अनुभव उनके लिए काफी सुखद रहा। अपनी बातचीत के दौरान उन्होंने आगे इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में उन्होंने केवल इस्लामाबाद की झलक देखी है, परंतु उनका मन है कि वे भविष्य में लाहौर, फैसलाबाद और सियालकोट जैसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण शहरों की भी यात्रा कर सकें। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने डिमरी के इस साक्षात्कार और वक्तव्य को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा किया।\n\nसंयुक्त राष्ट्र में तीखी तल्खी के ठीक बाद महत्वपूर्ण बैठक\nराष्ट्रीय समन्वयकों का यह 3 दिवसीय सम्मेलन 29 सितंबर को औपचारिक रूप से प्रारंभ हुआ। यह बैठक ऐसे जटिल कूटनीतिक मोड़ पर आयोजित हुई जब कुछ ही दिनों पूर्व संयुक्त राष्ट्र महासभा के वैश्विक मंच पर भारत और पाकिस्तान के मध्य तीखा वाकयुद्ध देखा गया था। उस मंच पर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने परस्पर कड़े आरोप लगाए थे। कूटनीतिक तनातनी के बावजूद बहुपक्षीय मंच एससीओ की जिम्मेदारियों के तहत दोनों देशों ने बैठक में भागीदारी सुनिश्चित की। बैठक से सामने आए दृश्यों में आलोक डिमरी को पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार से गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए भी देखा गया।\n\nक्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और सभ्यतागत संवाद पर बल\nसम्मेलन के समग्र उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए आलोक डिमरी ने कहा कि यह बहुपक्षीय मंच यूरेशियाई और एशियाई भूभाग के मुल्कों को एक साझा पटल पर एकत्र करता है। सभी सदस्य देशों ने साझा समृद्धि, विकास और जन कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त एजेंडा तय किया है। उन्होंने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, सीमा पार व्यापार और पारगमन (ट्रांजिट) को अत्यंत अहम प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। डिमरी ने एससीओ को एशिया के विभिन्न अंचलों को परस्पर जोड़ने वाला एक मजबूत और प्रभावी सेतु करार दिया।\n\nएससीओ का स्वरूप और दोनों देशों की कूटनीतिक स्थिति\nशंघाई सहयोग संगठन में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान और बेलारूस समेत कुल 10 स्थायी सदस्य राष्ट्र शामिल हैं। भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में इस प्रभावशाली संगठन के पूर्ण सदस्य बने थे। यह बहुपक्षीय ढांचा दोनों देशों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों को द्विपक्षीय तनाव के बावजूद निरंतर विचार-विमर्श का औपचारिक अवसर उपलब्ध कराता है। डिमरी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित सभ्यतागत संवाद मंच की पहल का विशेष उल्लेख किया और रेखांकित किया कि एससीओ के सदस्य देश इस दिशा में एक साझा व्यवस्था निर्मित करने पर अपनी सहमति जता चुके हैं। लंबे समय से बने तनावपूर्ण संबंधों के बीच आलोक डिमरी द्वारा लाहौर, फैसलाबाद और सियालकोट घूमने की उत्सुकता ने दोनों मुल्कों में नई चर्चा छेड़ दी है।\n\nइसका आप पर असर\nएससीओ सम्मेलन में भारतीय दल की उपस्थिति से दोनों देशों के नागरिकों के लिए बहुपक्षीय कूटनीतिक संपर्क के नए अवसर दिखाई दिए हैं।\n\n• भारत में: बहुपक्षीय मंचों पर औपचारिक उपस्थिति से क्षेत्रीय व्यापार, ऊर्जा पारगमन और मध्य एशियाई संपर्क से जुड़े रणनीतिक संवाद जारी रहते हैं। आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए यह संकेत है कि तीखे राजनीतिक बयानों के बावजूद अनिवार्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संस्थागत संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।\n• पाकिस्तान में: भारतीय राजनयिक के सकारात्मक व्यवहार और लाहौर व सियालकोट जैसे शहरों की यात्रा की इच्छा ने पाकिस्तानी समाज और मीडिया में शांतिपूर्ण संपर्क की नई उम्मीद जगाई है। दोनों देशों के बीच औपचारिक संवाद की संभावनाओं से भविष्य में सीमा पार वीजा, यात्रा और व्यापारिक रुकावटों में कमी की आकांक्षाएं बढ़ सकती हैं।\n• क्षेत्रीय सहयोग: मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच संपर्क और पारगमन गलियारों पर सहमति बनने से भविष्य में पूरे क्षेत्र में माल ढुलाई और व्यापारिक आवागमन सुगम हो सकता है। इससे भारतीय और क्षेत्रीय उद्योगों को नए व्यापारिक मार्गों की सुविधा मिलने का रास्ता खुल सकता है।\n• कूटनीतिक माहौल: दोनों पक्षों के अधिकारियों के आमने-सामने मिलने से द्विपक्षीय गलतफहमियों को न्यूनतम रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव घटने की दिशा में परोक्ष रूप से सकारात्मक माहौल बनता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनयिक दौरा शंघाई सहयोग संगठन के अनिवार्य बहुपक्षीय दायित्वों और हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में हुआ है।\n\n• एससीओ की तय समयसारणी: राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक पूर्व निर्धारित एससीओ कैलेंडर के तहत 29 सितंबर को इस्लामाबाद में आयोजित की गई थी। इस संगठन का पूर्ण सदस्य होने के नाते भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व भेजना उसकी स्थापित कूटनीतिक प्रतिबद्धता का हिस्सा था।\n• तनावपूर्ण कूटनीतिक पृष्ठभूमि: यह यात्रा पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के घटनाक्रम के बाद हुई, जिससे उपजे तनाव के बीच दोनों देशों के बीच लंबे समय से उच्चस्तरीय दौरे रुके हुए थे। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप दर्ज किए गए थे।\n• बहुपक्षीय मंचों की उपयोगिता: द्विपक्षीय वार्ताएं ठप होने की स्थिति में एससीओ जैसा 10 सदस्यीय मंच दोनों देशों को एक ही मेज पर आने और संवाद बनाए रखने का औपचारिक ढांचा प्रदान करता है। इस मंच पर आर्थिक भलाई, क्षेत्रीय संपर्क और सभ्यतागत संवाद के साझा एजेंडे पर चर्चा अनिवार्य होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस्लामाबाद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन कर रहा था?\nभारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आलोक डिमरी कर रहे थे।\n\n2. इस्लामाबाद में किस संगठन की बैठक आयोजित की गई थी?\nवहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की गई थी।\n\n3. भारतीय प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?\nपहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह किसी आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल की पहली पाकिस्तान यात्रा है।\n\n4. आलोक डिमरी ने पाकिस्तान के किन शहरों में जाने की इच्छा जताई?\nउन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ इस्लामाबाद देखा है और उनकी इच्छा लाहौर, फैसलाबाद तथा सियालकोट घूमने की भी है।\n\n5. शंघाई सहयोग संगठन में कुल कितने स्थायी सदस्य हैं?\nएससीओ में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान और बेलारूस समेत कुल 10 स्थायी सदस्य देश हैं।\n\n6. भारत और पाकिस्तान किस वर्ष एससीओ के पूर्ण सदस्य बने थे?\nभारत और पाकिस्तान दोनों वर्ष 2017 में शंघाई सहयोग संगठन के पूर्ण सदस्य बने थे।",
  "url": "https://trendkia.com/pakistan/islamabad-men-sco-sammelana-ke-daurana-bharatiya-rajanayika-alok-dimri-ke-sauhardapurna-rukha-ne-khincha-dhyana-40995",
  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
  "tags": [
    "एससीओ बैठक",
    "आलोक डिमरी",
    "भारत पाकिस्तान संबंध",
    "इस्लामाबाद",
    "शंघाई सहयोग संगठन",
    "विदेश मंत्रालय"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}