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  "title": "जोधपुर में गरजे भारत और अमेरिका के लड़ाकू विमान, तरंग शक्ति युद्धाभ्यास से सीमा पार मची हलचल",
  "summary": "राजस्थान के जोधपुर में बहुपक्षीय वायुसेना युद्धाभ्यास तरंग शक्ति शुरू हो गया है, जिसमें अमेरिका के F-35A समेत 8 देशों के विमान सीमा के करीब अभ्यास कर रहे हैं।",
  "content": "पश्चिमी सीमा के ठीक समीप राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास की जोरदार गूंज सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई ताजा बातचीत के तुरंत बाद सीमाई इलाके में भारतीय और अमेरिकी लड़ाकू विमानों की गर्जना ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के सैन्य हलकों में भारी खलबली पैदा कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर पार्ट 2 के संभावित डर और घरेलू मोर्चे पर जारी गंभीर चुनौतियों के बीच पाकिस्तानी नेतृत्व मुनीर और शहबाज की बेचैनी साफ नजर आ रही है। उधर घर के भीतर चौतरफा दबाव से घिरे होने के बीच तालिबान द्वारा पेशावर में अफगान झंडा फहराने की योजना जैसी खबरें भी सामने आ रही हैं, जबकि सीमा पर आठ मित्र राष्ट्रों के 80 से अधिक आधुनिक विमान और 1,500 से ज्यादा जांबाज सैनिक सघन सैन्य तालमेल में जुटे हैं।\n\nजोधपुर में तेजस और अमेरिकी F-35 की ऐतिहासिक संयुक्त उड़ान\nइस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और संयुक्त राज्य अमेरिका के 5th जनरेशन स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35A की संयुक्त उड़ान रही। दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक लड़ाकू विमानों में शुमार F-35A और भारत के तेजस ने राजस्थान के आसमान में पहली बार एक साथ फॉर्मेशन बनाकर उड़ान भरी। अमेरिका ने इस युद्धाभ्यास के लिए अपने 6 उन्नत F-35A लड़ाकू विमानों का जत्था जोधपुर भेजा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इन अत्याधुनिक विमानों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं। इस दल के साथ 200 से अधिक अमेरिकी वायुसैनिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी युद्धाभ्यास में भाग लेने पहुंचे हैं।\n\n \nअमेरिकी वायुसेना के F-35 विमानों का भारत की धरती पर युद्धाभ्यास करना रक्षा कूटनीति के लिहाज से बेहद असाधारण माना जा रहा है। अमेरिका ने अब तक यह घातक प्लेटफॉर्म केवल अपने गिने-चुने रणनीतिक सहयोगियों को ही उपलब्ध कराया है। यहां तक कि नाटो के स्थायी सदस्य तुर्की को भी F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि उसने रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदी थी। हालांकि, भारत के पास भी रूस का वही S-400 एयर डिफेंस सिस्टम पहले से तैनात है, लेकिन इसके बावजूद वाशिंगटन द्वारा भारत को F-35 की क्षमताएं प्रदर्शित करने और इसे पेश करने में गहरी दिलचस्पी दिखाना दोनों देशों के बदलते रक्षा समीकरणों की मजबूती को दर्शाता है।\n\nआठ देशों का बहुपक्षीय हवाई जमावड़ा और 32 से ज्यादा पर्यवेक्षक\nजोधपुर में आयोजित तरंग शक्ति युद्धाभ्यास केवल भारत और अमेरिका तक सीमित नहीं है। 'पावर इन पार्टनरशिप' की व्यापक थीम के तहत संचालित यह युद्धाभ्यास 12 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इस वृहद अभ्यास में आठ देशों की वायुसेनाएं सीधे तौर पर अपने अत्याधुनिक और संहारक विमानों के साथ हिस्सा ले रही हैं। इनमें भारत और अमेरिका के अलावा फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), श्रीलंका और बांग्लादेश की वायु सेनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही दुनिया भर के 32 से अधिक देश इस युद्धाभ्यास की कार्यप्रणाली और हवाई रणनीतियों का अध्ययन करने के लिए आधिकारिक पर्यवेक्षक के तौर पर उपस्थित हुए हैं। इस अभ्यास में कुल मिलाकर 30 से अधिक मुख्य लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं।\n\nभारतीय वायुसेना ने इस अभ्यास में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिसमें स्वदेशी तेजस के अलावा अग्रिम पंक्ति के सुखोई, मिराज 2000, मिग-29 और डीप-पेनेट्रेशन स्ट्राइक लड़ाकू विमान जगुआर शामिल हैं। दूसरी ओर, फ्रांस की वायुसेना ने अपने 6 सबसे आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों को जोधपुर भेजा है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों के बेड़े के साथ इस रणनीतिक अभ्यास में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास कर रही है। इसके साथ ही भारतीय थलसेना के रुद्र, ध्रुव और चेतक जैसे बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर भी जमीनी और हवाई अभियानों के लिए पूरी तरह तैनात हैं।\n\nआकाश एयर डिफेंस का अमेरिकी सैनिकों को प्रशिक्षण\nइस बड़े सैन्य अभ्यास के दौरान केवल हवाई हमले का ही अभ्यास नहीं हो रहा, बल्कि मजबूत रक्षा दीवार खड़ी करने की तकनीकों को भी साझा किया जा रहा है। भारतीय सशस्त्र बल अमेरिकी वायुसैनिकों को स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली, ट्रैकिंग क्षमता और मारक क्षमता का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह वही वायु रक्षा प्रणाली है जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार से होने वाले किसी भी संभावित हमले के प्रयास को पूरी तरह नाकाम कर दिया था। अब अमेरिकी सैनिकों को इसकी तकनीकी बारीकियों और युद्धक्षेत्र में त्वरित तैनाती के गुर सिखाए जा रहे हैं, जो भारतीय रक्षा निर्माण की बढ़ती साख का प्रमाण है।\n\nलड़ाकू विमानों के अलावा विशेष सहायक विमानों का सघन अभियान\nयुद्धक्षेत्र में सिर्फ लड़ाकू जेट ही नहीं, बल्कि पीछे रहकर निर्णायक भूमिका निभाने वाले सात विशेष रणनीतिक विमान भी पाकिस्तान सीमा के करीब अपना कौशल दिखा रहे हैं। इन विमानों के जरिए जटिल हवाई परिस्थितियों में ईंधन भरने और विरोधी के हर मूवमेंट पर 24 घंटे नजर रखने का युद्धाभ्यास किया जा रहा है। इनमें शामिल प्रमुख विमान इस प्रकार हैं\n\n• अमेरिका का KC-135: हवा में ही लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने में सक्षम यह विशाल टैंकर विमान लंबी दूरी के मिशनों को निरंतर जारी रखने में मदद करता है।\n• फ्रांस का A330 MRTT: यह मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लंबी दूरी के ऑपरेशनों के दौरान ईंधन आपूर्ति और सैन्य परिवहन दोनों कार्य एक साथ संभालता है।\n• जर्मनी का A-400M: भारी सैन्य साजो-सामान और सैनिकों को युद्धक्षेत्र के पास तेजी से उतारने वाला आधुनिक रणनीतिक ट्रांसपोर्ट विमान।\n• ऑस्ट्रेलिया के C-130 और KC-30A: ऑस्ट्रेलिया ने अपने भरोसेमंद C-130 ट्रांसपोर्ट विमान के साथ-साथ हवा में ईंधन भरने वाला विशाल KC-30A मल्टी-रोल टैंकर भी इस अभ्यास के लिए भेजा है।\n• UAE का ग्लोबल 6000: लंबी दूरी की टोह लेने और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में माहिर यह विशेष विमान विरोधी की हरकतों पर निरंतर नजर रखता है।\n• श्रीलंका का किंग एयर 350: समुद्री और तटीय इलाकों के साथ-साथ सीमाई क्षेत्रों में निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने वाला विशेष एयरक्राफ्ट।\n• बांग्लादेश का C-130J: सामरिक सैन्य साजो-सामान को दुर्गम क्षेत्रों तक तुरंत पहुंचाने वाला विश्वसनीय ट्रांसपोर्ट विमान।\n\nभारत समेत आठों देशों के ये वायुसैनिक 12 अक्टूबर तक दिन और रात के समय संयुक्त हवाई स्ट्राइक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग जैसे अत्यधिक जटिल अभ्यासों को अंजाम देंगे। इस वृहद ड्रिल का मुख्य उद्देश्य सभी भागीदार वायुसेनाओं के बीच आधुनिक सैन्य तकनीकों का आदान-प्रदान करना, परस्पर तालमेल को सुदृढ़ बनाना और भविष्य में किसी भी आकस्मिक सुरक्षा चुनौती से मिलकर निपटने की सामूहिक क्षमता को सिद्ध करना है।\n\nइसका आप पर असर\nजोधपुर में हो रहे इस विशाल हवाई युद्धाभ्यास से भारत की पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा तंत्र अत्यधिक अभेद्य हो गया है।\n\n• भारत में: यह युद्धाभ्यास साबित करता है कि भारतीय सेना दुनिया की शीर्ष महाशक्तियों के साथ मिलकर आधुनिकतम युद्ध तकनीक साझा कर रही है। इससे देश के नागरिकों को भरोसा मिलता है कि राष्ट्रीय हवाई सुरक्षा और स्वदेशी हथियार पूरी तरह परिपक्व हैं।\n• राजस्थान में: सीमावर्ती जोधपुर और आसपास के इलाकों में नागरिक सुरक्षा तंत्र और सीमा सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। हालांकि नियमित नागरिक उड़ानों के समय में आंशिक बदलाव हो सकता है, लेकिन इलाके में सीमा पार से घुसपैठ का खतरा शून्य हो गया है।\n• रक्षा उद्योग के लिए: स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान और आकाश मिसाइल प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन भारतीय विनिर्माण के लिए मील का पत्थर है। इससे भविष्य में रक्षा उपकरणों के निर्यात और घरेलू रक्षा क्षेत्र में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।\n• अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए: पश्चिमी सीमावर्ती हवाई क्षेत्र में सख्त निगरानी और सैन्य अभ्यास के चलते नागरिक विमानों को विशिष्ट हवाई गलियारों से गुजारा जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे जोधपुर या आसपास के हवाई अड्डों से यात्रा करते समय शेड्यूल की पहले पुष्टि कर लें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह युद्धाभ्यास भारत और मित्र राष्ट्रों के बीच वायुसैनिक रणनीतियों के तालमेल को मजबूत करने और पश्चिमी सीमा पर सामरिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।\n\n• रणनीतिक साझेदारी और सैन्य तालमेल: आठ देशों की वायुसेनाओं को एक साझा मंच पर लाकर जटिल हवाई अभियानों, रात के हमलों और ईंधन भरने जैसी तकनीकों का अभ्यास करना इसका प्राथमिक कारण है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में बहुपक्षीय सेनाओं का आपसी समन्वय सुगम हो जाता है।\n• हालिया शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक संवाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई वार्ता के तुरंत बाद यह संयुक्त युद्धाभ्यास दोनों देशों के बीच मजबूत होते रक्षा सहयोग और सामरिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।\n• स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का सत्यापन: ऑपरेशन सिंदूर में सफल भूमिका निभाने के बाद भारत अपने तेजस विमान और आकाश मिसाइल प्रणाली की वास्तविक युद्ध क्षमताओं को वैश्विक साझेदारों के सामने प्रदर्शित करना चाहता था।\n• क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी आवश्यकताएं: पश्चिमी सीमा पर लगातार बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और पड़ोसी देश की आंतरिक उथल-पुथल को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में लगातार हवाई गश्त और निगरानी अभ्यास अनिवार्य हो गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तरंग शक्ति युद्धाभ्यास कहां और कब तक आयोजित किया जा रहा है?\nयह युद्धाभ्यास राजस्थान के जोधपुर में पाकिस्तान सीमा के नजदीक आयोजित किया जा रहा है और 12 अक्टूबर तक चलेगा।\n\n2. इस युद्धाभ्यास में कुल कितने देश हिस्सा ले रहे हैं?\nइसमें भारत और अमेरिका समेत कुल 8 देशों की वायुसेनाएं भाग ले रही हैं, जबकि 32 से अधिक देश पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हैं।\n\n3. अमेरिका ने इस अभ्यास के लिए कौन से लड़ाकू विमान भेजे हैं?\nअमेरिका ने अपने 6 सबसे उन्नत F-35A स्टील्थ लड़ाकू विमान और 200 से अधिक वायुसैनिक भेजे हैं।\n\n4. भारतीय वायुसेना के कौन से लड़ाकू विमान इस अभ्यास का हिस्सा हैं?\nभारतीय वायुसेना के स्वदेशी तेजस, सुखोई, मिराज 2000, मिग-29 और जगुआर लड़ाकू विमान इसमें हिस्सा ले रहे हैं।\n\n5. अमेरिकी सेना को भारत के किस मिसाइल सिस्टम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है?\nभारतीय सेना अमेरिकी वायुसैनिकों को स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली और तैनाती का प्रशिक्षण दे रही है।\n\n6. हवा में ईंधन भरने के लिए कौन से विशेष विमान अभ्यास में शामिल हैं?\nअमेरिका का KC-135, फ्रांस का A330 MRTT और ऑस्ट्रेलिया का KC-30A हवा में ईंधन भरने का अभ्यास कर रहे हैं।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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