# खुद चुनाव हारे इफ्तिखार अली गिलानी को इस्लामाबाद के इशारे पर बनाया गया पीओके का नया प्रधानमंत्री

> पीओके के आम चुनाव में हारने के बाद भी बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को टेक्नोक्रेट सीट के जरिए विधानसभा में शामिल कर प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में जनादेश के अपमान को लेकर भारी गुस्सा है।

**Type:** article · **Category:** पाकिस्तान · **Published:** 2026-08-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/pakistan/khuda-chunava-hare-iftikhar-ali-gillani-ko-islamabad-ke-ishare-para-banaya-gaya-pok-ka-naya-pradhanamntri-23827 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीओके, इफ्तिखार अली गिलानी, नवाज शरीफ, मुजफ्फराबाद, पीएमएल-एन, पाकिस्तान राजनीति, पीपीपी, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक नाटक के बीच बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया है। मुजफ्फराबाद स्थित विधानसभा में आयोजित चुनाव प्रक्रिया के दौरान शुक्रवार को उन्हें यह पद सौंपा गया। हालांकि, इस चयन ने पूरे क्षेत्र में लोकतंत्र और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इफ्तिखार अली गिलानी हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में अपनी सीधी सीट पर चुनाव हार गए थे। जनता द्वारा पूरी तरह खारिज किए जाने के बावजूद, उन्हें नामांकित श्रेणी के तहत चोर दरवाजे से विधानसभा का सदस्य बनाया गया और बाद में इस्लामाबाद के राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन से शीर्ष पद पर बैठा दिया गया। इस फैसले के बाद से स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों में तीव्र असंतोष देखा जा रहा है।

## विधानसभा में शक्ति परीक्षण और वोटों का पूरा गणित
मुजफ्फराबाद की विधानसभा में प्रधानमंत्री चुनाव के लिए एक विशेष बैठक बुलाई गई थी, जिसमें मतदान प्रक्रिया के दौरान कुल 44 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस मतदान में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के उम्मीदवार इफ्तिखार अली गिलानी को कुल 30 वोट हासिल हुए। दूसरी तरफ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रत्याशी मुख्तार अहमद को केवल 14 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। इस तरह 16 वोटों के अंतर से गिलानी ने चुनाव जीत लिया।

पीओके की इस विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 53 निर्धारित है। हालांकि, मौजूदा समय में सदन के अंदर कुल 46 सदस्य ही मौजूद हैं। पुंछ और सुधनोती जिलों के अंतर्गत आने वाली 7 सीटों पर चुनाव आयोजित नहीं किए जा सके थे। इन इलाकों में भारी चुनावी हिंसा और कानून-व्यवस्था की अत्यंत खराब स्थिति के कारण मतदान को स्थगित कर दिया गया था। शुक्रवार को हुई वोटिंग के दौरान मौजूद 46 विधायकों में से केवल 44 ने ही हिस्सा लिया, जो इस समूची चुनावी प्रक्रिया की विवादित और अधूरी स्थिति को स्पष्ट करता है।

## 'चोर दरवाजे' से एंट्री और 'लूजर पीएम' कहे जाने के मुख्य कारण
राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नागरिकों द्वारा इफ्तिखार अली गिलानी को व्यापक रूप से एक कठपुतली और जनादेश-विहीन नेता माना जा रहा है। उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल उठाने वाले कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। सबसे प्राथमिक कारण जनता की अदालत में उनकी सीधी हार है। पीओके में तीन अलग-अलग चरणों में 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त को आम चुनाव आयोजित किए गए थे। इन चुनावों में स्थानीय मतदाताओं ने गिलानी को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था और वे अपनी प्रादेशिक सीट पर बुरी तरह पराजित हुए थे।

सीधे चुनाव में मिली हार के बाद विधानसभा में प्रवेश पाने के लिए गिलानी ने आरक्षित कोटे का सहारा लिया। पीओके विधानसभा में महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए कुल 8 सीटें आरक्षित रखी जाती हैं। गिलानी को इन्हीं में से एक 'टेक्नोक्रेट सीट' पर मनोनीत करके सदन के अंदर पहुंचाया गया। 53 सीटों वाली विधानसभा में 45 सीटों पर जनता सीधे मतदान के जरिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। इनमें से एक भी सीट जीतने में नाकाम रहने वाले नेता को सरकार का मुखिया बनाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि बिना किसी सीधे वोट बैंक के वे स्वतंत्र निर्णय कैसे ले सकेंगे।

इसके अलावा, गिलानी को अपनी ही पार्टी के भीतर सर्वसम्मत समर्थन प्राप्त नहीं है। पीएमएल-एन के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने गिलानी को प्रधानमंत्री बनाने के फैसले का खुलकर विरोध किया। अपना विरोध दर्ज कराने के लिए उन्होंने मुजफ्फराबाद में आयोजित मतदान सत्र का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया और वोट डालने नहीं पहुंचे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का भरोसा खो देने के कारण भी गिलानी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

## नवाज शरीफ का फैसला और पार्टी के भीतर उभरी बगावत
इस पूरे घटनाक्रम की रूपरेखा लाहौर में तैयार की गई थी। बृहस्पतिवार को पीएमएल-एन के सर्वोच्च नेता नवाज शरीफ ने लाहौर में एक बैठक के दौरान इफ्तिखार अली गिलानी के नाम को अंतिम मंजूरी दी थी। इसके बाद मुजफ्फराबाद की विधानसभा में केवल औपचारिक वोटिंग का नाटक पूरा किया गया।

अगर प्रत्यक्ष चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो अब तक गिने गए 38 प्रत्यक्ष निर्वाचन क्षेत्रों में पीएमएल-एन ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि पीपीपी के खाते में 12 सीटें आई थीं। इसके अतिरिक्त, अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने 1 सीट हासिल की थी और बाद में पीएमएल-एन को अपना समर्थन दे दिया था। direct सीटों के अलावा, 8 आरक्षित सीटों में से 6 सीटें नियमों का फायदा उठाकर पीएमएल-एन को आवंटित कर दी गईं। इसी रणनीति के बल पर चुनाव हार चुके नेता को आरक्षित सीट के माध्यम से शीर्ष पद तक पहुंचाना संभव हो सका।

## जून से भड़का जनाक्रोश और 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' का आंदोलन
पीओके में यह राजनीतिक फेरबदल एक ऐसे समय में हुआ है जब पूरा क्षेत्र भीषण जन-असंतोष की आग में झुलस रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस्लामाबाद के प्रशासनिक नियंत्रण, अत्यधिक महंगाई, भारी-भरकम बिजली बिलों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। जून की शुरुआत से ही 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के बैनर तले हजारों नागरिक सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इस जनांदोलन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा की गई बल प्रयोग की कार्रवाइयों में कई आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है। हालांकि सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर आधिकारिक प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। अब एक ऐसे नेता को सत्ता सौंपे जाने से, जिसे जनता ने चुनाव में खारिज कर दिया था, सड़कों पर दोबारा व्यापक हिंसा और संघर्ष भड़कने की आशंका काफी बढ़ गई है।

## इसका आप पर असर
यह राजनीतिक फैसला पीओके के स्थानीय नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों और क्षेत्रीय स्थिरता को सीधे प्रभावित करता है।

- **भारत में:** सीमा पार जारी राजनीतिक अस्थिरता और जन-आंदोलनों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां बारीक नजर बनाए रखेंगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा रणनीति पर असर पड़ सकता है।
- **पीओके क्षेत्र में:** जनता द्वारा खारिज किए गए नेता को शीर्ष पद देने से नागरिक आंदोलन और तेज हो सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन, बाजार बंद और दैनिक जनजीवन में भारी रुकावट देखने को मिल सकती है।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** बिना जनादेश वाले प्रधानमंत्री के सत्ता में होने से स्थानीय समस्याओं जैसे बिजली दरों और महंगाई पर ठोस फैसले रुक सकते हैं। नागरिकों को बुनियादी राहत मिलने में देरी होगी।
- **कानून-व्यवस्था पर:** मुजफ्फराबाद और आसपास के जिलों में दोबारा धारा 144 लागू होने या सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से आम आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. पीओके के नए प्रधानमंत्री कौन चुने गए हैं?
बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को पीओके का नया प्रधानमंत्री चुना गया है।

### 2. इफ्तिखार अली गिलानी को 'लूजर पीएम' क्यों कहा जा रहा है?
वे हाल के आम चुनावों में अपनी सीधी सीट से चुनाव हार गए थे। जनता द्वारा खारिज किए जाने के बावजूद उन्हें आरक्षित सीट से लाकर प्रधानमंत्री बनाया गया है।

### 3. विधानसभा में वोटिंग के दौरान किसे कितने वोट मिले?
इफ्तिखार अली गिलानी को 30 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पीपीपी के मुख्तार अहमद को 14 वोट मिले।

### 4. पीओके विधानसभा की 7 सीटों पर मतदान क्यों नहीं हुआ?
पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर चुनावी हिंसा और खराब कानून-व्यवस्था के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया था।

### 5. पीओके में जून से किस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं?
स्थानीय नागरिक भारी महंगाई, महंगे बिजली बिलों और प्रशासनिक अत्याचारों के खिलाफ 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे हैं।

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