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  "title": "लाहौर में संवरेगा पूर्ण स्वराज के गवाह ऐतिहासिक नेहरू पार्क का रूप, प्रशासन ने शुरू किया कायाकल्प",
  "summary": "पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित लाहौर के ऐतिहासिक नेहरू पार्क के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है, जहां 1929 में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ था।",
  "content": "पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अहम यादों को समेटे ऐतिहासिक नेहरू पार्क को नया रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कृष्णा नगर क्षेत्र में मौजूद यह स्थल इतिहास के पन्नों में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 31 दिसंबर, 1929 के अपने ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन के दौरान यहीं पर 'पूर्ण स्वराज' का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव के जरिए भारत के लिए संपूर्ण स्वशासन और ब्रिटिश हुकूमत से मुकम्मल आजादी का औपचारिक संकल्प लिया गया था। उस ऐतिहासिक अवसर पर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने इस अहम घोषणा के प्रतीक के रूप में इसी जगह भारतीय ध्वज फहराया था।\n\nप्रशासन ने संभाला कायाकल्प का जिम्मा\nपार्क्स एंड हॉर्टिकल्चर अथॉरिटी (पीएचए) के महानिदेशक अहमद उस्मान जावेद ने बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए इस परियोजना की आधिकारिक जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस ऐतिहासिक पार्क के संपूर्ण जीर्णोद्धार का निर्णय लिया है और मौके पर व्यावहारिक कार्य आरंभ हो चुका है। अहमद उस्मान जावेद के अनुसार, बागवानी शाखा पार्क को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से हरी-भरी घास बिछा रही है और विभिन्न प्रकार के मौसमी रंग-बिरंगे फूल लगाने में जुटी है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग विंग को भी विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो रात के समय बेहतर रोशनी के प्रबंध, बैठने के लिए नई बेंचों और बच्चों के खेलने हेतु आकर्षक झूले लगाने का काम तेजी से पूरा कर रही है, जिससे यह स्थल स्थानीय परिवारों के लिए अत्यंत सुविधाजनक साबित हो सके।\n\nसजावटी फव्वारे और विरासत का संरक्षण\nपार्क के सौंदर्य को और अधिक निखारने के लिए परिसर में कई सजावटी फव्वारे भी लगाए जाने की योजना है। अहमद उस्मान जावेद ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू पार्क केवल आम जनता के टहलने का सामान्य बगीचा नहीं है, बल्कि यह गहरी ऐतिहासिक अहमियत रखने वाला एक प्रमुख विरासत स्थल है। उन्होंने कहा कि एक हरे-भरे सार्वजनिक स्थल के तौर पर इसे संवारने के साथ-साथ इसके मूल ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि जीर्णोद्धार से जुड़ी सभी गतिविधियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।\n\nलाहौर के 800 से अधिक पार्कों का नवीनीकरण\nयह ऐतिहासिक परियोजना दरअसल शहर के विभिन्न इलाकों में मौजूद पार्कों को सुधारने के एक बड़े अभियान के तहत क्रियान्वित की जा रही है। अहमद उस्मान जावेद ने बताया कि यह कदम लाहौर नगर में पीएचए के प्रशासनिक दायरे में आने वाले 800 से अधिक छोटे सामुदायिक पार्कों के नवीनीकरण और जीर्णोद्धार की व्यापक योजना से सीधे जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि इसी वर्ष की शुरुआत में पंजाब की प्रांतीय सरकार ने लाहौर शहर की तमाम पुरानी सड़कों और गलियों के भारत विभाजन से पूर्व के ऐतिहासिक नामों को दोबारा बहाल करने का बड़ा ऐलान किया था। हालांकि, उस समय स्थानीय चरमपंथी तत्वों के कड़े विरोध और दबाव के चलते इस ऐतिहासिक नामकरण योजना को टाल दिया गया था।\n\nइसका आप पर असर\nलाहौर में नेहरू पार्क के पुनरुद्धार से विरासत संरक्षण और स्थानीय नागरिक सुविधाओं पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• लाहौर निवासियों के लिए: कृष्णा नगर और आसपास के परिवारों को एक बेहतर हरा-भरा सामुदायिक पार्क मिलेगा। नए झूले, रोशनी, बेंच और सजावटी फव्वारे लगने से स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित सार्वजनिक जगह उपलब्ध होगी।\n• साझा विरासत के लिहाज से: भारतीय उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े साझा इतिहास को संरक्षण मिलेगा। 1929 के पूर्ण स्वराज प्रस्ताव से जुड़े इस स्थल की पहचान सुरक्षित रहने से दोनों देशों के शोधकर्ताओं और इतिहासकारों का जुड़ाव बना रहेगा।\n• सामुदायिक पार्कों का विस्तार: लाहौर नगर में कुल 800 से अधिक पार्कों की दशा सुधारी जा रही है। इससे शहर के पर्यावरण स्तर और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खुले मैदानों की उपलब्धता बढ़ेगी।\n• पुराने नामों की बहस: विभाजन-पूर्व के नामों को लेकर सार्वजनिक विमर्श फिर चर्चा में आ सकता है। चरमपंथी दबाव के बावजूद ऐतिहासिक स्थलों के रख-रखाव से सांस्कृतिक विरासत को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nलाहौर प्रशासन ने ऐतिहासिक महत्व और शहरी हरित क्षेत्र विस्तार योजना के तहत नेहरू पार्क के जीर्णोद्धार का फैसला किया है।\n\n• विरासत संरक्षण की अनिवार्यता: कृष्णा नगर का यह पार्क 31 दिसंबर, 1929 के पूर्ण स्वराज प्रस्ताव और जवाहरलाल नेहरू द्वारा ध्वज फहराने का गवाह रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे ऐतिहासिक स्थल की विरासत और पहचान को संरक्षित करना आवश्यक था।\n• शहरी नवीनीकरण अभियान: पार्क्स एंड हॉर्टिकल्चर अथॉरिटी पूरे लाहौर शहर में हरित क्षेत्रों को सुधारने का अभियान चला रही है। यह परियोजना पीएचए के अधिकार क्षेत्र वाले 800 से अधिक छोटे पार्कों के नवीनीकरण की योजना का हिस्सा है।\n• विभाजन-पूर्व विरासत पर पूर्व प्रयास: इस वर्ष की शुरुआत में पंजाब सरकार ने पुरानी सड़कों के विभाजन-पूर्व नाम बहाल करने का फैसला किया था। हालांकि चरमपंथियों के दबाव के बाद उस निर्णय को स्थगित करना पड़ा था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लाहौर का नेहरू पार्क किस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है?\nइस पार्क में 31 दिसंबर, 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित हुआ था, जहां जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय ध्वज फहराया था।\n\n2. नेहरू पार्क लाहौर के किस इलाके में स्थित है?\nयह पार्क पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर के कृष्णा नगर क्षेत्र में स्थित है।\n\n3. पार्क के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी किस संस्था के पास है?\nइस पार्क के जीर्णोद्धार का काम पार्क्स एंड हॉर्टिकल्चर अथॉरिटी (पीएचए) द्वारा किया जा रहा है, जिसके महानिदेशक अहमद उस्मान जावेद हैं।\n\n4. नेहरू पार्क के नवीनीकरण में क्या सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं?\nपार्क में हरी-भरी घास, मौसमी फूल, सजावटी फव्वारे, रात के लिए रोशनी की व्यवस्था, नई बेंच और बच्चों के लिए झूले लगाए जा रहे हैं।\n\n5. लाहौर में कुल कितने सामुदायिक पार्कों के जीर्णोद्धार की योजना है?\nपीएचए के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 800 से अधिक छोटे सामुदायिक पार्कों के नवीनीकरण की योजना के तहत यह काम हो रहा है।\n\n6. लाहौर की सड़कों के विभाजन-पूर्व नाम बहाल करने के फैसले का क्या हुआ था?\nसाल की शुरुआत में पंजाब सरकार ने यह घोषणा की थी, लेकिन चरमपंथी तत्वों के दबाव के बाद इस निर्णय को टाल दिया गया था।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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