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  "title": "PoJK में सेना के खिलाफ भड़की नाराजगी, JAAC नेता बोले: 'यह कब्जे वाला इलाका है, पाकिस्तान का हिस्सा नहीं'",
  "summary": "संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने नए ऑडियो संदेश में दावा किया कि पीओजेके पाकिस्तान का कब्जा है और उसे प्रांतों में मिलाने की तैयारी हो रही है, जबकि बिजली दरों और महंगाई को लेकर इलाके में विरोध तेज है।",
  "content": "पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओजेके) में सेना के प्रति आम लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी माहौल में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े एक प्रमुख नेता ने दो टूक कहा है कि यह इलाका पाकिस्तान का अपना हिस्सा नहीं, बल्कि उसके कब्जे में लिया गया क्षेत्र है। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तान अब इस पूरे क्षेत्र को स्थायी तौर पर अपने देश में समेटने की कोशिश में जुटा हुआ है।\n\nछिपते हुए जारी किया गया ऑडियो संदेश\nTrendKia की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC से जुड़े वरिष्ठ नेता शौकत नवाज मीर ने एक नया ऑडियो संदेश सामने रखा है। इस संदेश में उन्होंने बताया कि सरकारी कार्रवाई के डर से वे फिलहाल छिपकर रह रहे हैं। मीर ने साफ शब्दों में कहा कि पीओजेके कोई आजाद मुल्क नहीं है, बल्कि एक “कब्जे वाला क्षेत्र” है।\n\nसेना के अधिकारियों का कथित कबूलनामा\nमीर का दावा है कि पाकिस्तानी सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी बातचीत में यह माना है कि 1947 में यहां कबायली हमले कराए गए थे और उसके बाद सेना की कार्रवाई के जरिये पाकिस्तान ने इस इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि मुजफ्फराबाद के सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फाइक अयूब ने वहां के नेताओं से कहा था कि आजाद जम्मू-कश्मीर कोई देश नहीं है, यह पाकिस्तान के कब्जे वाला इलाका है और अब इसे पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों में मिलाने की योजना बनाई जा रही है।\n\nपुराने रुख से उलट बयान\nमीर के मुताबिक यह सोच पाकिस्तान के दशकों पुराने आधिकारिक रुख से बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने याद दिलाया कि बरसों तक यहां के लोगों को यही बताया जाता रहा कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है, जिसका हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के जरिये निकलेगा। ऐसे में अगर अब इलाके को सीधे पाकिस्तान में मिलाने की बात उठ रही है, तो यह उन्हीं पुराने दावों को झुठलाने जैसा है।\n\nमहंगाई और बिजली दरों पर सुलगता गुस्सा\nपिछले कुछ महीनों में पीओजेके में बिजली की बढ़ी हुई दरों, सब्सिडी में कटौती, बेलगाम महंगाई और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। शुरुआत में ये आंदोलन सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे इन्होंने राजनीतिक तेवर भी अपना लिए हैं।\n\nगिरफ्तारियां, छापे और इंटरनेट बंदी\nहालात को काबू में रखने के नाम पर पाकिस्तान प्रशासन ने कई इलाकों में गिरफ्तारियां कीं, छापेमारी की, इंटरनेट सेवाएं ठप कीं और सुरक्षा अभियान चलाए। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया, जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों की दलील है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम उठाने पड़े।\n\nअंतरराष्ट्रीय दखल की अपील\nअपने ऑडियो संदेश में मीर ने सेना पर लोगों को जबरन गायब करने, मनमानी गिरफ्तारियां करने और कार्यकर्ताओं के परिवारों को परेशान करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में दखल देने की अपील की और कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग रखी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: पीओजेके में सेना के खिलाफ बढ़ता असंतोष और कब्जे को लेकर खुलते बयान सीमा पार के हालात पर नजर रखने वालों और कश्मीर मुद्दे पर भारत के रुख को नई पुष्टि देते हैं।\n• पीओजेके के लोगों पर: बिजली दरों में बढ़ोतरी, सब्सिडी कटौती और इंटरनेट बंदी का सीधा असर वहां के आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शौकत नवाज मीर कौन हैं और उन्होंने क्या दावा किया?\nवे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े एक प्रमुख नेता हैं, जिन्होंने ऑडियो संदेश में दावा किया कि पीओजेके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बल्कि कब्जे वाला क्षेत्र है।\n\n2. मीर के मुताबिक सेना अधिकारी ने क्या कहा?\nमीर का दावा है कि मुजफ्फराबाद सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फाइक अयूब ने नेताओं से कहा कि आजाद जम्मू-कश्मीर कोई देश नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाला इलाका है जिसे प्रांतों में मिलाने की योजना है।\n\n3. पीओजेके में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?\nबिजली दरों में बढ़ोतरी, सब्सिडी में कटौती, महंगाई और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर वहां बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, जो अब राजनीतिक रूप भी ले चुके हैं।\n\n4. मीर ने किससे अपील की है?\nउन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से दखल देने की अपील की और कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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    "संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी",
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    "बिजली दर बढ़ोतरी"
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