पीओके में पाकिस्तानी सेना की नाकेबंदी के खिलाफ बड़ा आंदोलन, स्कूलों और अस्पतालों से कब्जा हटाने की मांग जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सुरक्षा बलों की नाकेबंदी और शिक्षण संस्थानों पर सैन्य कब्जे के विरोध में बड़े पैमाने पर नए प्रदर्शनों की घोषणा की है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आम नागरिकों और स्थानीय नागरिक संगठनों का असंतोष और आक्रोश अब एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले चुका है। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) ने क्षेत्र में तैनात पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की नाकेबंदी और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते सैन्य नियंत्रण के खिलाफ व्यापक स्तर पर नए विरोध प्रदर्शनों का ऐलान किया है। संवेदनशील इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख चिकित्सा केंद्रों को सैन्य छावनी में तब्दील किए जाने तथा लगातार लगाई जा रही प्रशासनिक पाबंदियों के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। इस दमनकारी स्थिति के विरोध में नागरिक समाज ने चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शनों को गति देने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। रावलाकोट की रणनीतिक बैठक में आंदोलन का नया रोडमैप तैयार आंदोलन की आगे की रूपरेखा और रणनीति तय करने के उद्देश्य से रावलाकोट में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, छात्र संगठनों, स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए आंदोलन के प्रमुख नेता उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और जगह-जगह की गई नाकेबंदी के कारण स्थानीय आबादी अपने मौलिक शिक्षा और स्वास्थ्य अधिकारों से वंचित हो रही है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रस्तावित बड़े धरना-प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। संगठन के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि नागरिक प्रशासन की बेरुखी और सैन्य दबाव के कारण स्थानीय लोगों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। इस क्षेत्रीय मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के मकसद से ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों में भी एकजुटता रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों पर सैन्य कब्जे से गंभीर संकट पीओके में इस नए विरोध प्रदर्शन का प्राथमिक कारण पूंछ और आसपास के संवेदनशील जिलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा सरकारी बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण स्थापित करना है। जेकेजेएएसी का आरोप है कि सैन्य अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण स्कूलों, कॉलेजों और क्षेत्रीय अस्पतालों पर अपना कब्जा जमा लिया है और वहां सैन्य चौकियां बना दी हैं। लगातार लागू कर्फ्यू और सुरक्षा नाकेबंदी के कारण बीमार और गंभीर रूप से घायल नागरिकों को आवश्यक इलाज प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सुरक्षा जांच और घेराबंदी के कारण मरीजों को अस्पतालों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है और उन्हें मजबूरी में बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, शैक्षणिक परिसरों के सैन्य नियंत्रण में चले जाने के कारण हजारों छात्र-छात्राओं की नियमित कक्षाएं ठप हो गई हैं और वे अपनी शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। धीरकोट में अनोखा प्रदर्शन: स्कूल ड्रेस और बस्तों के साथ सड़कों पर उतरेंगे बच्चे प्रशासनिक अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व पर दबाव बनाने के लिए जेकेजेएएसी ने बहुस्तरीय प्रदर्शन कार्यक्रम तैयार किया है। इस विरोध योजना के अंतर्गत मुख्य प्रदर्शन पूंछ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले धीरकोट इलाके में आयोजित किया जाएगा। इस वृहद प्रदर्शन का समय दोपहर 1:30 बजे निर्धारित किया गया है। आयोजकों ने इस विरोध प्रदर्शन को एक भावनात्मक और प्रभावी स्वरूप देने के लिए महिलाओं, माताओं और छात्राओं से अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व संभालने की विशेष अपील की है। अभिभावकों से कहा गया है कि वे अपने बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म पहनाकर और कंधों पर स्कूल बैग टंगवाकर प्रदर्शन स्थल पर लेकर आएं। इसे सुरक्षा बलों द्वारा बच्चों को शिक्षा से वंचित रखे जाने के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक विरोध के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि प्रशासन पर स्कूल खाली करने का दबाव बनाया जा सके। मीरपुर, मुजफ्फराबाद और यूरोप में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता रैलियां आंदोलनकारियों ने इस विरोध की गूंज को केवल पूंछ डिवीजन तक सीमित न रखकर पूरे क्षेत्र में फैलाने की योजना बनाई है। जिन इलाकों में शैक्षणिक संस्थान अभी आंशिक रूप से खुले हुए हैं, वहां के नागरिकों से भी पूंछ के प्रभावित लोगों के समर्थन में आवाज बुलंद करने की अपील की गई है। जेकेजेएएसी ने मीरपुर और मुजफ्फराबाद डिवीजन के आम लोगों तथा विद्यार्थियों से अनुरोध किया है कि वे एक ही समय पर एकजुटता रैलियां आयोजित करें और पूंछ की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों। इसके साथ ही, जेकेजेएएसी ने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और मानवाधिकार उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करने के लिए विदेशी अभियानों की घोषणा की है। संगठन ने ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर और इटली में बड़े पैमाने पर एकजुटता मार्च आयोजित करने का फैसला किया है। संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने यूरोप में रह रहे कश्मीरी प्रवासियों से अपील की है कि वे इन रैलियों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सुरक्षा बलों की नाकेबंदी और प्रशासनिक ज्यादतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा शांतिपूर्ण संघर्ष पीओके में विरोध प्रदर्शनों का यह नया दौर स्थानीय नागरिक समाज संगठनों और सुरक्षा बलों के बीच पिछले कई महीनों से चले आ रहे गतिरोध का परिणाम है। क्षेत्र में लगातार लगाई जा रही सुरक्षा नाकेबंदी और इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों से स्थानीय व्यापार, आवाजाही और दैनिक कामकाज पर बहुत बुरा असर पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों और परिवहन चालकों ने भी इस सैन्य घेराबंदी के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। जेकेजेएएसी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह शांतिपूर्ण जनआंदोलन थमेगा नहीं। संगठन की मुख्य मांगों में शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सा केंद्रों से सुरक्षा बलों की तुरंत वापसी, सभी बंद पड़े स्कूलों और अस्पतालों को बहाल करना, कड़े सुरक्षा नाकों को हटाना तथा पुलिस या सैन्य हिरासत में लिए गए सभी स्थानीय कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई शामिल है। इसका आप पर असर पीओके में सुरक्षा बलों के खिलाफ नागरिक आंदोलन तेज होने से क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और आम लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। • शिक्षा प्रणाली पर असर: स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हुई है। इसके चलते छात्र नियमित कक्षाओं से वंचित हैं और उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। • स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट: अस्पतालों के सैन्य नियंत्रण में होने से गंभीर मरीजों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। कई लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट झेलना पड़ रहा है। • आवाजाही पर प्रतिबंध: सुरक्षा नाकों और कड़े प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही सीमित हो गई है। लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और व्यापारिक कार्यों के लिए आसानी से आ-जा नहीं पा रहे हैं। • इंटरनेट और संचार ठप: क्षेत्र में बार-बार इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद होने से स्थानीय व्यापार और संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। • क्षेत्रीय तनाव: पीओके में प्रशासनिक असंतोष बढ़ने से पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच गतिरोध गहराने से अशांति का माहौल बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. पीओके में ताजा विरोध प्रदर्शन का आह्वान किसने किया है? यह आह्वान जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) द्वारा किया गया है। 2. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं? उनकी मुख्य मांगों में स्कूलों और अस्पतालों से सेना का कब्जा हटाना, शैक्षणिक संस्थान खोलना, नाकेबंदी खत्म करना और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई शामिल है। 3. मुख्य विरोध प्रदर्शन कहां और किस समय आयोजित किया जाएगा? मुख्य प्रदर्शन पूंछ डिवीजन के धीरकोट में दोपहर 1:30 बजे आयोजित किया जाएगा। 4. धीरकोट प्रदर्शन की क्या विशेषता रखी गई है? इसमें महिलाओं और छात्राओं को नेतृत्व सौंपने की अपील की गई है, और बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म व बैग के साथ लाने को कहा गया है। 5. क्या इस आंदोलन का समर्थन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रहा है? हां, ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर और इटली में भी कश्मीरी प्रवासियों द्वारा एकजुटता मार्च आयोजित किए जाएंगे। 6. रावलाकोट में हुई बैठक में क्या फैसला लिया गया? रावलाकोट बैठक में आंदोलनकारी नेता उमर नजीर कश्मीरी ने बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता रैलियों का प्लान बनाया। https://trendkia.com/pakistan/pok-men-pakistan-sena-ki-nakebndi-ke-khilapha-bara-andolana-skulon-aura-aspatalon-se-kabja-hatane-ki-manga-23929 TrendKia — Har trend, sabse pehle.