# पाकिस्तान की राजनीति में सिंध के बंटवारे पर घमासान, बिलावल भुट्टो और आसिफ अली जरदारी ने भरी हुंकार

> पाकिस्तान की राजनीति में सिंध प्रांत के संभावित बंटवारे को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लंदन में हुई अहम बैठकों के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह सिंध की एकता से कोई समझौता नहीं करेगी।

**Type:** article · **Category:** पाकिस्तान · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/pakistan/political-drama-erupts-in-pakistan-over-sindh-division-plans-as-zardari-and-bilawal-reject-separation-28221 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाकिस्तान राजनीति, सिंध बंटवारा, बिलावल भुट्टो, आसिफ अली जरदारी, पीपीपी, कराची, मुराद अली शाह

पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसकी गूंज सात समंदर पार लंदन तक सुनाई दे रही है। इस नए राजनीतिक घमासान के केंद्र में सिंध प्रांत का मुद्दा है, जहां प्रशासनिक बदलावों और नए प्रांतों के गठन की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। लंदन में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच करीब पांच घंटे तक लंबी चर्चा चली। इस महत्वपूर्ण बैठक में बख्तावर भुट्टो जरदारी भी मौजूद थीं। बैठक के बाद पार्टी ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए ऐलान किया है कि सिंध के विभाजन या उसकी सीमाओं में फेरबदल की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

## सिंध को लेकर क्यों मचा हुआ है बवाल
पाकिस्तान में लंबे समय से प्रशासनिक सुधारों के नाम पर नए और छोटे प्रांत बनाने की मांग उठती रही है। समर्थकों का तर्क है कि छोटे प्रशासनिक इलाकों से जनता को बेहतर शासन और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। लेकिन सिंध के मामले में यह बहस केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राजनीतिक वर्चस्व, क्षेत्रीय पहचान और सत्ता के समीकरणों से है। समय-समय पर कराची को सिंध से अलग करने या इस प्रांत के दक्षिणी हिस्से को एक स्वतंत्र प्रशासनिक इकाई बनाने के कयास लगाए जाते रहे हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इन प्रस्तावों को अपने राजनीतिक वजूद के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखती है।

## राजनीतिक साजिश और सैन्य दखल की आशंका
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केवल प्रशासनिक सुधार की मांग नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर से उठ रही सुगबुगाहट कुछ और ही इशारा करती है। पार्टी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र हो सकता है। पार्टी को इस बात की गहरी आशंका है कि प्रशासनिक बदलाव का मुखौटा पहनकर उसकी राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जिसमें देश के शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका हो सकती है। इस तरह के कदमों से देश की नागरिक राजनीति और सेना के बीच तनाव बढ़ने की पूरी संभावना है, जिससे एक नया विवाद जन्म ले सकता है।

## लंदन में बैठकों का दौर और गृह मंत्री की एंट्री
इसी बीच, पाकिस्तानी सियासत के अहम चेहरे इन दिनों लंदन में डेरा डाले हुए हैं। आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो की मौजूदगी के दौरान ही देश के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी राष्ट्रपति जरदारी से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में मोहसिन नकवी को सेना के बेहद करीब माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस गुप्त मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच देश के मौजूदा राजनीतिक तनाव को कम करने और कई अन्य संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों से साफ है कि पर्दे के पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

## पीपुल्स पार्टी के लिए सिंध का महत्व
इस पूरे विवाद के केंद्र में सिंध की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति है। सिंध पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का सबसे मजबूत और पुराना गढ़ माना जाता है। यही मुख्य वजह है कि पार्टी को यह डर सता रहा है कि यदि सिंध का नक्शा बदला गया, तो उसकी सियासी ताकत पर सीधा असर पड़ेगा। प्रांत के हिस्से अलग होने की स्थिति में विधानसभा में पार्टी की मौजूदा पकड़ और बहुमत प्रभावित हो सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो सिंध केवल पीपुल्स पार्टी के लिए एक राज्य भर नहीं है, बल्कि यह उसकी राष्ट्रीय राजनीतिक ताकत और प्रभाव का सबसे बड़ा आधार स्तंभ है।

## सिंध विधानसभा का कड़ा रुख
इस गरमागरम माहौल के बीच सिंध विधानसभा ने भी कड़ा कदम उठाते हुए प्रांत को बांटने या नए प्रशासनिक इलाके बनाने के सभी प्रस्तावों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने विधानसभा के पटल पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उनकी सरकार सिंध की भौगोलिक अखंडता और उसकी जमीन से कभी कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह सवाल भी उठाया कि आखिर वह कौन लोग हैं जो सिंध को विभाजित करना चाहते हैं और कौन इसके पीछे खड़े हैं। उनका साफ कहना था कि अगर सिंध की सीमाओं में कोई भी फेरबदल करना है, तो उस पर खुली चर्चा केवल विधानसभा और स्थापित संवैधानिक प्रक्रियाओं के दायरे में ही होनी चाहिए।

## क्या पाकिस्तान में किसी बड़े खेल की तैयारी है
मौजूदा हालात को देखते हुए पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या सिंध के बंटवारे की सुगबुगाहट महज प्रशासनिक सुधार की पहल है, या फिर इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक खेल खेला जा रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने फिलहाल अपना पाला खींचते हुए बगावत का बिगुल फूंक दिया है और विभाजन के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ी नजर आ रही है। पार्टी के लिए यह लड़ाई सिर्फ जमीन के एक टुकड़े की नहीं है, बल्कि यह उसकी सत्ता, उसकी पहचान और उसके सबसे सुरक्षित राजनीतिक किले को बचाने की जंग है। दूसरी तरफ, देश का सैन्य नेतृत्व भी अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहेगा, जिससे आने वाले दिनों में यह राजनीतिक ड्रामा और अधिक गहराने के पूरे आसार हैं।

## इसका आप पर असर
पाकिस्तान में सिंध के संभावित बंटवारे और राजनीतिक उठापटक का असर सीधे तौर पर वहां की आम जनता और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा।

- **भारत में:** इस राजनीतिक घटनाक्रम का भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन पड़ोसी देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य-नागरिक तनाव पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रखती हैं।
- **पाकिस्तान में:** सिंध के स्थानीय नागरिकों और कारोबारियों के बीच प्रशासनिक बदलाव की खबरों से अनिश्चितता का माहौल बन सकता है, जिससे रोजमर्रा की प्रशासनिक सेवाएं और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
- **राजनीतिक स्तर पर:** पीपुल्स पार्टी और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच बढ़ते तनाव से सिंध क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हड़तालें देखने को मिल सकती हैं, जिससे आम जनता की आवाजाही बाधित हो सकती है।
- **कानून व्यवस्था:** राजनीतिक दलों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की स्थिति में कराची और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. सिंध के बंटवारे को लेकर हाल ही में बैठक कहां हुई थी?
यह अहम बैठक लंदन में हुई थी, जहां पीपीपी नेतृत्व ने चर्चा की।

### 2. लंदन की बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ था?
इस बैठक में बिलावल भुट्टो जरदारी, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और बख्तावर भुट्टो जरदारी शामिल थीं।

### 3. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का सिंध के बंटवारे पर क्या रुख है?
पीपीपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सिंध की सीमाओं में किसी भी बदलाव या बंटवारे का कड़ा विरोध करेगी।

### 4. सिंध विधानसभा ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
सिंध विधानसभा ने प्रांत को बांटने या नए प्रशासनिक इलाके बनाने के सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया है।

### 5. मुराद अली शाह ने विधानसभा में क्या बयान दिया?
मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि उनकी सरकार सिंध की जमीन और एकता से कोई समझौता नहीं करेगी।

### 6. लंदन में राष्ट्रपति जरदारी से किस मंत्री ने मुलाकात की?
गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लंदन में आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की।

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