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  "type": "article",
  "title": "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के इस्लामाबाद मार्च से पहले रावलपिंडी में धारा 144, राजधानी के रास्तों पर कंटेनर लगाकर नाकेबंदी",
  "summary": "इमरान खान की रिहाई को लेकर इस्लामाबाद बढ़ रहे पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के लॉन्ग मार्च के बीच रावलपिंडी में 30 दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। राजधानी के मुख्य रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद किया गया है और सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं।",
  "content": "पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और चिकित्सीय सुविधाओं की मांग को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का विशाल काफिला राजधानी इस्लामाबाद की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके मद्देनजर रावलपिंडी प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे शहर में 30 दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी है। खुफिया एजेंसियों से संवेदनशील ठिकानों पर सुरक्षा संबंधी खतरों की चेतावनी मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है। इस आदेश के तहत 8 नवंबर 2026 तक शहर में पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने, किसी भी तरह की रैली, धरने, प्रदर्शन और बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।\n\nसातवें दिन में पहुंचा खैबर पख्तूनख्वा से निकला विरोध मार्च\nपीटीआई का यह सरकार विरोधी लॉन्ग मार्च शनिवार को अपने सातवें दिन में पहुंच गया। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 4 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत इलाके से हुई थी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इस मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं और इसमें हजारों की तादाद में समर्थक मौजूद हैं। यह काफिला अलग-अलग पड़ावों से गुजरते हुए आगे बढ़ रहा है। अब तक यह मार्च करक, कोहाट और पेशावर के रास्तों को पार कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का प्रमुख उद्देश्य जेल में बंद इमरान खान को रिहा कराना और उन्हें तुरंत जरूरी मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराना है। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने स्पष्ट किया है कि जब सभी प्रदर्शनकारी स्वाबी में एकत्रित हो जाएंगे, तब इस्लामाबाद में दाखिल होने की पुख्ता रणनीति और अगले चरण का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।\n\nराजधानी की सीमाओं पर शिपिंग कंटेनर और कड़े सुरक्षा इंतजाम\nदूसरी तरफ शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों को किसी भी हाल में राजधानी में प्रवेश न करने देने का कड़ा रुख अपनाया है। इस्लामाबाद के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। शहर में प्रवेश करने वाले रास्तों, विशेष रूप से श्रीनगर हाईवे और जीटी रोड पर रेत से भरे भारी शिपिंग कंटेनर खड़े कर दिए गए हैं ताकि काफिले की आवाजाही को रोका जा सके। प्रमुख चौराहों और सीमाओं पर पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी टुकड़ियां तैनात की गई हैं। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अटक से आगे पंजाब प्रांत की सीमा में कदम नहीं रखने दिया जाएगा। सुरक्षा कारणों के चलते खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के चुनिंदा इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी तौर पर बंद रखा गया है।\n\nअनुच्छेद 245 के तहत सेना की तैनाती और संवेदनशील ठिकानों की निगरानी\nरावलपिंडी में प्रशासनिक सख्ती का दायरा केवल पुलिस तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां सेना की मौजूदगी पहले से तय है। पाकिस्तान सरकार ने पूर्व में ही संविधान के अनुच्छेद 245 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी थी। यह तैनाती 21 अगस्त 2026 से छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी की गई थी। अब धारा 144 के नए आदेशों के बाद स्थानीय प्रशासन ने शहर भर में राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सभी संवेदनशील ठिकानों पर निगरानी के विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nरावलपिंडी और इस्लामाबाद क्षेत्र में धारा 144 और नाकेबंदी लागू होने से आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही, इंटरनेट कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है।\n\n• दैनिक आवागमन पर प्रभाव: जीटी रोड और श्रीनगर हाईवे पर कंटेनर लगने से रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों के पूरी तरह बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों से घंटों का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है।\n• संचार और इंटरनेट सेवाएं: खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के कुछ इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद रहने से स्थानीय नागरिक ऑनलाइन कामकाज और आवश्यक संचार से कटे हुए हैं। छात्रों, दफ्तर के कर्मचारियों और व्यापारियों को नेटवर्क बहाली का इंतजार करना पड़ रहा है।\n• सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक: रावलपिंडी में 8 नवंबर 2026 तक पांच से अधिक व्यक्तियों के जमावड़े और रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। आम नागरिकों को किसी भी सार्वजनिक आयोजन या प्रदर्शन का हिस्सा बनने से बचने की सलाह दी गई है।\n• कानून-व्यवस्था और सुरक्षा निगरानी: शहर में सेना और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी बढ़ने से संवेदनशील इलाकों में सख्त जांच अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय निवासियों को आवाजाही के दौरान पहचान पत्र साथ रखने और सुरक्षा जांच में सहयोग करने की जरूरत है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह प्रशासनिक और सुरक्षात्मक कदम पीटीआई द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और चिकित्सीय देखभाल की मांग को लेकर निकाले जा रहे बड़े विरोध मार्च के कारण उठाया गया है।\n\n• इमरान खान की रिहाई की मांग: पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के कार्यकर्ता जेल में बंद इमरान खान की रिहाई और उन्हें तत्काल उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राजधानी पर दबाव बना रहे हैं। यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा से शुरू होकर तेजी से इस्लामाबाद की सीमा की ओर बढ़ रहा है।\n• खुफिया एजेंसियों की सुरक्षा चेतावनी: रावलपिंडी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील सरकारी और रणनीतिक ठिकानों पर सुरक्षा संबंधी खतरों की खुफिया सूचनाएं मिली हैं। इसी आशंका के चलते शहर में एहतियातन 30 दिनों के लिए धारा 144 लागू की गई।\n• राजधानी में प्रवेश रोकने की सरकारी नीति: केंद्र की शहबाज सरकार प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में दाखिल होने देने के पक्ष में नहीं है। मार्च को रोकने के लिए पंजाब सीमा पर नाकेबंदी की गई है और पहले से तैनात सेना की टुकड़ियों को सतर्क रखा गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रावलपिंडी में धारा 144 क्यों लागू की गई है?\nपीटीआई के लॉन्ग मार्च और संवेदनशील ठिकानों पर सुरक्षा खतरों की खुफिया चेतावनी के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू की गई है।\n\n2. धारा 144 के तहत रावलपिंडी में किन चीजों पर रोक है?\nपांच से अधिक लोगों के एकत्र होने, रैलियों, धरनों, प्रदर्शनों और बिना अनुमति ड्रोन के इस्तेमाल पर 8 नवंबर 2026 तक रोक लगाई गई है।\n\n3. पीटीआई का यह लॉन्ग मार्च कब और कहां से शुरू हुआ था?\nयह विरोध मार्च 4 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत से शुरू हुआ था।\n\n4. इस लॉन्ग मार्च का नेतृत्व कौन कर रहा है और उनकी मुख्य मांगें क्या हैं?\nमार्च का नेतृत्व खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं, और मुख्य मांग जेल में बंद इमरान खान की रिहाई व उनके लिए मेडिकल सुविधाएं हैं।\n\n5. इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?\nश्रीनगर हाईवे और जीटी रोड पर रेत से भरे बड़े शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं तथा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है।\n\n6. रावलपिंडी में सेना की तैनाती किस आधार पर की गई है?\nपाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तीन कंपनियों को 21 अगस्त 2026 से छह महीने के लिए तैनात करने की मंजूरी दी गई थी।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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