समुद्री शैवाल और मौसमी बदलाव से कराची की हवा में फैली दुर्गंध, सांस के मरीजों की बढ़ी चिंता अरब सागर में फाइटोप्लैंकटन के क्षय और वायुमंडलीय दबाव प्रणाली के चलते कराची के तटीय व आंतरिक इलाकों में सड़ी मछली जैसी दुर्गंध फैल गई है, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अरब सागर के तट पर बसे कराची शहर में तड़के नींद से जागे निवासियों का स्वागत एक तीखी और बेचैन कर देने वाली बदबू ने किया। विशेषकर सागर किनारे बसे मोहल्लों में सड़ी हुई मछली जैसी तीक्ष्ण गंध इतनी सघन थी कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया। सुबह की सैर पर निकले स्थानीय नागरिकों को हवा में असामान्य भारीपन लगा, जो कुछ ही घंटों में तटवर्ती बस्तियों से निकलकर शहर के मध्य और सुदूर इलाकों तक फैल गया। इस अप्रत्याशित वातावरण ने नगरवासियों को सकते में डाल दिया और लोग बदबू के असल स्रोत को लेकर कयास लगाने लगे। अरब सागर में सूक्ष्म शैवाल का क्षय बना मुख्य कारण पर्यावरण और समुद्री वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार इस असहनीय स्थिति के पीछे समुद्र की ऊपरी सतह पर पनपने वाले फाइटोप्लैंकटन नामक सूक्ष्म जीव जिम्मेदार हैं। ये अति सूक्ष्म समुद्री पौधे सामान्यतः नंगी आंखों से नहीं देखे जा सकते, परंतु जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से जुड़े समुद्री संसाधन सलाहकार मुहम्मद मोज्जम खान के स्पष्टीकरण के मुताबिक, मानसूनी मौसम के दौरान पोषक तत्वों की प्रचुरता से इन सूक्ष्म शैवालों की तादाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है। सितंबर के मध्य में जब मानसूनी हवाओं की वापसी शुरू होती है, तब समुद्री पर्यावरण और जलधाराओं के तापमान में तेजी से परिवर्तन आता है। मौसम बदलते ही फाइटोप्लैंकटन की यह भारी आबादी तेजी से नष्ट होकर सड़ने लगती है। बड़े पैमाने पर जैविक क्षय होने के कारण समुद्र से तीखी सल्फरयुक्त गंध उठती है, जो हवा के रुख के साथ तटीय रिहायशी इलाकों की ओर बहने लगती है। मुहम्मद मोज्जम खान ने स्पष्ट किया कि फाइटोप्लैंकटन मुख्य रूप से समुद्र की ऊपरी 100 मीटर की परत में सूर्य के प्रकाश की मदद से पनपते हैं, इसलिए इनका क्षय भी सीधे सतह की हवा को प्रभावित करता है। मौसम के चक्रव्यूह ने हवा को किया स्थिर सिर्फ समुद्री शैवालों का क्षय ही इस समस्या का एकमात्र कारण नहीं रहा, बल्कि असामान्य मौसमी परिस्थितियों ने इस दुर्गंध को शहर के वायुमंडल में कैद कर दिया। पाकिस्तान मौसम विभाग के प्रतिनिधि अंजुम नजीर जैगम और जलवायु परिवर्तन मामलों की विश्लेषक फातिमा यामिन ने वायुमंडलीय कारकों की भूमिका को रेखांकित किया है। फातिमा यामिन के विश्लेषण के अनुसार, भारत में जामनगर तट के निकट बने एक कम दबाव वाले क्षेत्र ने कराची और आसपास के वायु प्रवाह की दिशा को बाधित कर दिया। दक्षिण-पूर्वी मंद हवाओं के चलते औद्योगिक प्रदूषण से उपजी स्मॉग की घनी चादर पहले से ही आसमान पर छाई हुई थी। कम दबाव प्रणाली के कारण हवा की गति अत्यंत धीमी हो गई, जिससे दुर्गंधयुक्त समुद्री हवा शहर के वायुमंडल में बाहर निकलने के बजाय अलग-अलग इलाकों में घूमती रही। मौसम विभाग के प्रतिनिधि अंजुम नजीर जैगम ने उम्मीद जताई कि शाम के समय नियमित समुद्री समीर सक्रिय होने के बाद वायु गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है। पूर्व में भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं तटीय कराची के लिए यह कोई पहली मौसमी चुनौती नहीं है। वर्ष 2024 के दौरान भी इसी प्रकार की दुर्गंध शहर के विस्तृत भूभाग में दर्ज की गई थी। अक्टूबर 2024 के दौरान क्लिफ्टन, डीएचए, कोरंगी और सदर जैसे प्रमुख व्यापारिक व आवासीय क्षेत्रों में नागरिकों ने तीखी सड़ांध की शिकायतें दर्ज कराई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्राकृतिक चक्र है, जो समुद्री बदलावों के साथ प्रकट होता है और हवा की दिशा बदलते ही कुछ दिनों में स्वतः शांत हो जाता है। स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में पारिस्थितिकी विशेषज्ञ रफीउल्लाह के अनुसार, यद्यपि इस गंध से किसी गंभीर विषाक्तता का कोई पुख्ता चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं है, किंतु वायुमंडल में मौजूद धूल और इस प्रकार की तीक्ष्ण सड़ांध के लंबे संपर्क से साइनस, सिरदर्द और सांस की नलियों में जलन पैदा हो सकती है। चिकित्सकों ने संवेदनशील नागरिकों को हवा साफ होने तक अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने का सुझाव दिया है। इसका आप पर असर कराची में अचानक फैली तीखी दुर्गंध और स्मॉग के जमाव ने नागरिकों के दैनिक जीवन, स्वास्थ्य और खुली हवा की गतिविधियों को प्रभावित किया है। • दैनिक दिनचर्या पर असर: तटीय और केंद्रीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तीव्र गंध के कारण सुबह की सैर और बाहरी व्यायाम टालना पड़ रहा है। खिड़कियां और दरवाजे बंद रखकर घर के भीतर एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। • सांस के रोगियों की सुरक्षा: साइनोसाइटिस, अस्थमा और सांस की एलर्जी से पीड़ित व्यक्तियों को हवा में जलन और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। ऐसे संवेदनशील लोग जब तक हवा पूरी तरह सामान्य न हो जाए, तब तक बाहर निकलते समय सुरक्षात्मक मास्क का उपयोग करें। • यात्रा और पर्यटन: समुद्र तटों, जैसे क्लिफ्टन और अन्य समुद्री दर्शनीय स्थलों पर आने वाले आगंतुकों को असहज बदबू का सामना करना पड़ सकता है। शाम के समय जब तक समुद्री हवाएं वातावरण को स्वच्छ न कर दें, तब तक तटवर्ती यात्राएं सीमित करना बेहतर रहेगा। • स्थानीय कारोबार: खुले बाजारों और सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों पर बदबू के कारण ग्राहकों की संख्या में तात्कालिक गिरावट देखी जा सकती है। दुकानदारों को सलाह दी गई है कि वे खाद्य पदार्थों को ढककर रखें ताकि वायुजनित कणों से बचाव हो सके। ऐसा क्यों हुआ कराची के वायुमंडल में फैली यह सड़ांध किसी औद्योगिक दुर्घटना का परिणाम नहीं, बल्कि मानसूनी अंत के बाद समुद्री शैवाल के जैविक क्षय और प्रतिकूल मौसमी प्रणालियों के संगम से उपजी है। • फाइटोप्लैंकटन का भारी क्षय: मानसून में पोषक तत्वों के कारण समुद्र की ऊपरी 100 मीटर की परत में सूक्ष्म शैवाल तेजी से बढ़ते हैं। सितंबर के मध्य में मानसून विदा होते ही समुद्री दशाएं बदलती हैं और ये जीव सामूहिक रूप से मरकर सड़ने लगते हैं, जिससे तीखी जैविक गंध पैदा होती है। • जामनगर के पास कम दबाव क्षेत्र: भारत के जामनगर तट के करीब विकसित हुए कम दबाव के घेरे ने सामान्य वायु परिसंचरण को अवरुद्ध कर दिया। इसके चलते दक्षिण-पूर्वी हवाएं मंद पड़ गईं और समुद्री गंध शहर के वायुमंडल में फंसकर रह गई। • शहरी स्मॉग और शांत वायुमंडल: शहर में मौजूद औद्योगिक व वाहनों के प्रदूषण ने स्मॉग का निर्माण किया हुआ था। हवा की गति मंद होने से यह प्रदूषित और दुर्गंधयुक्त वायु खंड बिखरने के बजाय कराची के रिहायशी इलाकों में घूमता रहा। • प्राकृतिक मौसमी चक्र: यह कोई आकस्मिक विषैली घटना नहीं है बल्कि मौसमी बदलाव से जुड़ी प्राकृतिक परिघटना है। वर्ष 2024 के अक्टूबर माह में भी क्लिफ्टन और कोरंगी जैसे इलाकों में ऐसी ही दुर्गंध दर्ज हुई थी, जो समुद्री हवा के तेज होने पर स्वतः समाप्त हो गई थी। सवाल-जवाब 1. कराची में अचानक सड़ी मछली जैसी बदबू क्यों फैल गई? मानसून के बाद अरब सागर में बड़ी संख्या में मौजूद सूक्ष्म शैवाल यानी फाइटोप्लैंकटन तेजी से सड़ने लगे हैं, जिसकी तीखी गंध हवा के साथ शहर में पहुंच गई। 2. हवा में बदबू इतने लंबे समय तक क्यों रुकी रही? भारत में जामनगर तट के पास बने कम दबाव के क्षेत्र और स्थानीय स्मॉग के कारण हवा का बहाव धीमा हो गया, जिससे बदबूदार हवा शहर के ऊपर ठहरी रही। 3. क्या यह बदबू इंसानी स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक है? विशेषज्ञों के मुताबिक किसी गंभीर विषाक्तता के ठोस प्रमाण नहीं हैं, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से साइनस और सांस की हल्की समस्या हो सकती है। 4. कराची के कौन से इलाके इस गंध से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे? समुद्र किनारे बसे क्षेत्रों के अलावा क्लिफ्टन, डीएचए, कोरंगी और सदर सहित शहर के कई भीतरी इलाकों में तेज गंध महसूस की गई। 5. यह दुर्गंध कब तक समाप्त होने की संभावना है? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार शाम के समय समुद्री हवा सक्रिय होने और कुछ दिनों में शैवाल का क्षय पूरा होने के बाद यह स्थिति स्वतः ठीक हो जाएगी। https://trendkia.com/pakistan/samudri-shaivala-aura-mausami-badalava-se-karachi-ki-hava-men-phaili-durgndha-sansa-ke-marijon-ki-barhi-chinta-34125 TrendKia — Har trend, sabse pehle.