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  "title": "एससीओ शिखर सम्मेलन में शहबाज शरीफ ने उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा, भारत का कड़ा रुख बरकरार",
  "summary": "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाते हुए पानी को राजनीतिक हथियार न बनाने की अपील की है। हालांकि, पहलगाम हमले के बाद भारत अपने कड़े फैसले पर अडिग है।",
  "content": "शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच पर क्षेत्रीय नेताओं की उपस्थिति में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के साथ जारी सिंधु जल संधि विवाद का मुद्दा उठाया। अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया और पानी को साझा संसाधन बताते हुए इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील की। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर की गई अपील के बावजूद भारत अपने कड़े रुख से पीछे नहीं हटा है और सिंधु के पानी के प्रवाह को लेकर अपना सख्त फैसला बरकरार रखे हुए है।\n\nपानी को राजनीतिक हथियार न बनाने की अपील\nएससीओ बैठक को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि जल संसाधन इस क्षेत्र के सभी देशों की मुख्य जीवन रेखा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए साझा पानी को लेकर पड़ोसी देशों के बीच आपसी सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की मूल भावना तथा उनमें लिखे शब्दों का पूर्ण सम्मान करते हुए उन्हें लागू करने पर बल दिया। पाकिस्तान का यह बयान भारत द्वारा सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन पर उठाए गए सख्त कदमों के संदर्भ में देखा जा रहा है।\n\nपहलगाम हमले के बाद भारत का सख्त रुख\nभारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि लंबे समय से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे की मुख्य व्यवस्था रही है। पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि यह संधि दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी आधार है और इसे पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। हालांकि, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी के बहाव को नियंत्रित करने और संधि के प्रावधानों पर सख्त रुख अपनाने का निर्णायक कदम उठाया था। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य वैश्विक नेताओं की उपस्थिति वाले इस मंच पर शहबाज शरीफ के वक्तव्य के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा और जल समझौते पर उसकी नीति अपरिवर्तित रहेगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटनाक्रम भारत की जल सुरक्षा और विदेश नीति के रुख को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।\n\n• भारत में: सीमा पार जल संसाधनों पर सख्त नियंत्रण से देश की कृषि और पनबिजली परियोजनाओं को अधिक जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे उत्तरी राज्यों में किसानों और ऊर्जा क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।\n• कूटनीतिक प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दबाव के बावजूद भारत का कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी नीतियों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। इससे वैश्विक स्तर पर भारत के कूटनीतिक रुख को मजबूती मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शहबाज शरीफ ने एससीओ मंच पर क्या मुद्दा उठाया?\nशहबाज शरीफ ने भारत के साथ चल रहे सिंधु जल संधि विवाद को उठाया और पानी को राजनीतिक हथियार न बनाने की अपील की।\n\n2. भारत ने सिंधु जल पर सख्त रुख क्यों अपनाया?\nभारत ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा चिंताओं के कारण पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी के बहाव पर कड़ा फैसला लिया।\n\n3. 1960 की सिंधु जल संधि क्या है?\nयह भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई एक ऐतिहासिक जल बंटवारा संधि है, जो दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के उपयोग को तय करती है।\n\n4. एससीओ सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता मौजूद थे?\nसम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित शंघाई सहयोग संगठन के कई प्रमुख सदस्य देशों के नेता शामिल थे।",
  "url": "https://trendkia.com/pakistan/sco-shikhara-sammelana-men-shehbaz-sharif-ne-uthaya-sindhu-jala-sndhi-ka-mudda-india-ka-kara-rukha-barakarara-26099",
  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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    "सिंधु जल संधि",
    "शहबाज शरीफ",
    "भारत पाकिस्तान संबंध",
    "एससीओ सम्मेलन",
    "शी जिनपिंग",
    "पहलगाम हमला"
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  "site": "TrendKia"
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