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  "type": "article",
  "title": "उत्तरी अरब सागर में जहाजों की भिड़ंत के तुरंत बाद पाकिस्तानी नौसेना ने शुरू किया मिसाइल व तोप अभ्यास",
  "summary": "भारतीय और पाकिस्तानी युद्धपोतों के बीच हालिया टक्कर के बाद तनाव के बीच पाकिस्तान ने उत्तरी अरब सागर में दस दिवसीय लाइव हथियार परीक्षण शुरू किया है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय और पाकिस्तानी युद्धपोतों के बीच हुई हालिया टक्कर से उपजा कूटनीतिक तनाव अभी थमा भी नहीं था कि इस्लामाबाद ने उसी समुद्री पट्टी में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों ने उत्तरी अरब सागर के एक विस्तृत जलक्षेत्र में सतह और पानी के भीतर मार करने वाले हथियारों से दस दिनों तक चलने वाली लाइव फायरिंग का आगाज किया है। इस सैन्य गतिविधि की समयसीमा 18 सितंबर से 28 सितंबर तक तय की गई है, जो कुल 420 किलोमीटर के विशाल समुद्री दायरे में फैली हुई है।\n\nविस्तृत समुद्री हिस्से में लाइव हथियारों का परीक्षण\nकराची स्थित नेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस के आधिकारिक दस्तावेजों के हवाले से जारी समुद्री चेतावनी में स्पष्ट किया गया है कि 18 सितंबर को जारी परामर्श के अनुसार तीन विशिष्ट समुद्री जोन तय किए गए हैं। इन तीनों सुरक्षित क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों और अन्य नौकाओं की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी गई है। यह वही व्यापक जलक्षेत्र है जहां महज कुछ दिन पूर्व दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के अग्रिम पंक्ति के पोत बेहद खतरनाक तरीके से एक-दूसरे के निकट आ गए थे। विश्लेषक डेमियन साइमन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस सैन्य अभ्यास के संदर्भ में जारी अधिसूचना का विवरण साझा किया है।\n\n \n\n15 सितंबर की टक्कर और नई दिल्ली की कूटनीतिक आपत्ति\nइस पूरे विवाद की जड़ 15 सितंबर की वह घटना है जब भारतीय नौसेना का प्रमुख निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत आईएनएस कोलकाता नियमित गश्त पर तैनात था। नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी गश्ती पोत पीएनएस हुनैन तेज गति से आगे बढ़ते हुए भारतीय पोत के खतरनाक रूप से करीब आ गया और अनुचित तरीके से आगे निकलने के प्रयास में दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई। भारत ने इस कदम को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना और गैर-पेशेवर करार देते हुए स्पष्ट किया कि यह हरकत 1991 के द्विपक्षीय समझौते के अनुच्छेद 10 की खुली अवहेलना है।\n\nउक्त समझौते के नियम स्पष्ट करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों के बीच कम से कम 3 समुद्री मील यानी लगभग 5.6 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी अनिवार्य रूप से बनी रहनी चाहिए। इस गंभीर उल्लंघन पर भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार आईएनएस कोलकाता को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा और वह अपने मिशन पर समुद्र में तैनात रहा, जबकि पीएनएस हुनैन क्षतिग्रस्त होकर तुरंत अपने बेस पर लौटने के लिए विवश हुआ।\n\nइस्लामाबाद का पलटवार और सीस्पार्क-26 का संदर्भ\nदूसरी ओर, इस्लामाबाद प्रशासन ने इस संपूर्ण घटनाक्रम का दोष भारतीय नौसेना के आक्रामक युद्धाभ्यास पर मढ़ने का प्रयास किया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि यह घटना उनके विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर घटी, जहां उनकी नौसेना का वार्षिक युद्धाभ्यास सीस्पार्क-26 पहले से संचालित हो रहा था। टकराव वाली जगह के इतने करीब तुरंत बाद 18 से 28 सितंबर के बीच नए सिरे से हथियारों की लाइव टेस्टिंग शुरू करने को रणनीतिक दायरे में दबाव बनाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nअरब सागर में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों की भिड़ंत और तुरंत बाद शुरू हुए हथियार परीक्षण से समुद्री गलियारों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ गई है।\n\n• वाणिज्यिक जहाजों के लिए: तीन घोषित फायरिंग क्षेत्रों से दूर रहने के निर्देश के कारण कार्गो पोतों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। 18 से 28 सितंबर के दौरान मार्ग में बदलाव से यात्रा समय में मामूली बढ़ोतरी संभव है।\n• तटीय सुरक्षा के लिए: भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी समुद्री सीमा और अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में निगरानी तंत्र को और सख्त कर रही हैं। किसी भी अप्रत्याशित खतरे को टालने के लिए तटरक्षक बल और नौसेना अलर्ट मोड पर तैनात हैं।\n• मछुआरों की सुरक्षा पर: गहरे समुद्र में जाने वाली मछली पकड़ने वाली नौकाओं को 420 किलोमीटर के अभ्यास क्षेत्र से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है। सीमाओं के पास अनावश्यक जोखिम से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन दिशा-निर्देश जारी कर रहा है।\n• कूटनीतिक संबंधों में: 1991 के सुरक्षा समझौते के उल्लंघन को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खी और बढ़ सकती है। दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक बयानों के जरिए जवाबदेही तय करने का दबाव बना रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम 15 सितंबर को दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच हुए शारीरिक टकराव और उसके बाद शुरू हुए शक्ति प्रदर्शन से उपजा है।\n\n• जहाजों की सीधी भिड़ंत: भारतीय पक्ष के अनुसार पीएनएस हुनैन ने आईएनएस कोलकाता के बेहद करीब आकर खतरनाक ढंग से ओवरटेक करने की कोशिश की, जिससे दोनों पोत टकरा गए। नई दिल्ली ने इसे द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन बताया है।\n• 1991 के समझौते का उल्लंघन: दोनों देशों के बीच 1991 में हुए समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय जल में जहाजों के बीच न्यूनतम 3 समुद्री मील (लगभग 5.6 किमी) की दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। भारत का आरोप है कि पाकिस्तानी पोत ने इस नियम की अवहेलना की।\n• पाकिस्तानी नौसेना का शक्ति प्रदर्शन: टकराव के तुरंत बाद पाकिस्तान ने 18 से 28 सितंबर तक 420 किमी क्षेत्र में लाइव फायरिंग अभ्यास घोषित कर दिया। इससे पहले वहां उनका सीस्पार्क-26 अभ्यास भी संचालित हो रहा था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अरब सागर में किन दो युद्धपोतों के बीच टक्कर हुई थी?\nभारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस कोलकाता और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज पीएनएस हुनैन के बीच टक्कर हुई थी।\n\n2. यह समुद्री टकराव किस तारीख को हुआ था?\nयह घटना 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में घटी थी।\n\n3. पाकिस्तान का लाइव फायरिंग अभ्यास कब से कब तक चलेगा?\nपाकिस्तानी नौसेना का यह अभ्यास 18 सितंबर से 28 सितंबर तक निर्धारित किया गया है।\n\n4. यह सैन्य अभ्यास कितने बड़े समुद्री क्षेत्र में फैला हुआ है?\nयह लाइव फायरिंग अभ्यास लगभग 420 किलोमीटर के समुद्री इलाके में फैला हुआ है।\n\n5. 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते का कौन सा नियम तोड़ा गया?\nसमझौते के अनुच्छेद 10 के अनुसार दोनों देशों के युद्धपोतों को एक-दूसरे से कम से कम 3 समुद्री मील (लगभग 5.6 किमी) की दूरी रखनी चाहिए।\n\n6. टक्कर के बाद दोनों जहाजों की क्या स्थिति रही?\nआईएनएस कोलकाता सुरक्षित रहा और अपनी ड्यूटी पर तैनात रहा, जबकि पीएनएस हुनैन को नुकसान के बाद बंदरगाह लौटना पड़ा।",
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  "category": "पाकिस्तान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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    "भारतीय नौसेना",
    "पाकिस्तानी नौसेना",
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    "लाइव फायरिंग अभ्यास"
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