बच्चों के गलती करने पर उन पर चिल्लाने के बजाय अपनाएं ये चार सकारात्मक तरीके, बिना डर के सीखेंगे सबक बच्चों की हर छोटी-बड़ी गलती पर डांटने के बजाय यदि सकारात्मक बातचीत की जाए, तो वे बिना डरे अपनी गलती सुधारना सीख जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे चार प्रभावी तरीकों के बारे में जो पेरेंटिंग को आसान बनाते हैं। छोटे बच्चों द्वारा गलतियां किया जाना उनके सीखने और विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। कभी-कभी वे जल्दबाजी में कोई चीज तोड़ देते हैं, अपना होमवर्क स्कूल में भूल जाते हैं या फिर किसी बात पर ऐसा रवैया अपना लेते हैं जो अभिभावकों को नागवार गुजरता है। ऐसे पलों में तुरंत गुस्सा होने या चीखने-चिल्लाने के बजाय यदि माता-पिता संयम रखकर संवाद स्थापित करें, तो बच्चे अपनी गलती को ज्यादा गहराई से समझ पाते हैं। इससे दोनों के बीच आपसी विश्वास और जुड़ाव भी मजबूत होता है। गलती सुधारने के उपायों पर करें चर्चा बच्चे से यह पूछने के बजाय कि उसने ऐसा क्यों किया, उससे यह जानना बेहतर होता है कि अब इस स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि उसने कोई वस्तु गिराकर तोड़ दी है, तो उसे डांटने के बजाय सफाई करने में अपनी मदद के लिए कहें। इससे उसे यह सीख मिलती है कि अपनी गलती की जिम्मेदारी खुद उठाना कितना जरूरी है। बच्चे के बर्ताव के पीछे छिपी वजह को समझें हर गलत व्यवहार के पीछे कोई न कोई ठोस कारण जरूर होता है। संभव है कि बच्चा बहुत थका हुआ हो, किसी बात से मानसिक रूप से परेशान हो या फिर उसे समझ न आया हो कि उस परिस्थिति का सामना कैसे किया जाए। इसलिए बिना किसी नतीजे पर पहुंचे उसकी बात को ध्यान से सुनें। जब बच्चों को यह अहसास होता है कि उनके माता-पिता उनकी भावनाओं को समझना चाहते हैं, तो वे अपनी समस्या खुलकर साझा करते हैं। इससे केवल गलती पर फोकस करने के बजाय उसकी मूल जड़ तक पहुंचने में मदद मिलती है। गलतियों को सीखने का माध्यम बनाएं बच्चों को यह अहसास कराना बहुत आवश्यक है कि गलती कर देने से वे बुरे नहीं बन जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें यह भी समझाएं कि एक ही भूल को बार-बार दोहराने से बचने के लिए उससे सबक लेना जरूरी है। इस प्रकार का दृष्टिकोण बच्चे के मन में डर या हीन भावना पैदा करने के बजाय उसमें जिम्मेदारी का भाव जगाता है। उसे यह सिखाएं कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर वह अपने किस तरीके में बदलाव ला सकता है। मुश्किल समय में बच्चे का साथ दें हर गलती पर बच्चे को तन्हा छोड़ने या केवल सजा देने के बजाय उसे समस्या के समाधान तक पहुंचने का रास्ता दिखाएं। यदि वह पढ़ाई से जुड़ी किसी बात में गलती कर रहा है, अपना कमरा व्यवस्थित नहीं रख पा रहा है या किसी काम को लेकर तनाव में है, तो उससे प्रेम से पूछें कि उसे किस तरह के सहयोग की आवश्यकता है। इससे उसे यह मानसिक सुरक्षा मिलती है कि गलती होने पर भी उसके माता-पिता उसके विरोधी नहीं बल्कि मददगार बनकर साथ खड़े हैं। इसका आप पर असर बच्चों की परवरिश में सकारात्मक और शांत संवाद अपनाने से उनके मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है और वे अधिक आत्मनिर्भर बनते हैं। • भारत में: माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद बेहतर होने से घरेलू तनाव कम होता है और बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। • दैनिक जीवन में: बच्चों को डांटने के बजाय समाधान सिखाने से वे भविष्य में समस्याओं का सामना अधिक समझदारी के साथ करते हैं। सवाल-जवाब 1. बच्चों के गलती करने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? तुरंत डांटने के बजाय शांत रहकर बच्चे से बातचीत करनी चाहिए। 2. बच्चे को जिम्मेदारी का अहसास कैसे कराएं? उसे गलती सुधारने और सफाई या ठीक करने के काम में शामिल करके। 3. व्यवहार के पीछे की वजह कैसे जानें? बिना किसी नतीजे पर पहुंचे बच्चे की बात ध्यान से सुनें। 4. बच्चे को मदद का भरोसा कैसे दिलाएं? उससे पूछें कि उसे किस तरह की मदद चाहिए ताकि उसे लगे कि आप उसके साथ हैं। https://trendkia.com/parenting/bachchon-ke-galati-karane-para-una-para-chillane-ke-bajaya-apanaen-ye-chara-sakaratmaka-tarike-bina-dara-ke-sikhenge-sabaka-29232 TrendKia — Har trend, sabse pehle.