खिलौनों के फैलाव से परेशान माता-पिता अपनाएं नया तरीका, फर्श का एक कोना सुलझाएगा बच्चों के कमरे की अव्यवस्था बच्चों के कमरे में बार-बार सामान बिखरने की वजह स्टोरेज की कमी नहीं बल्कि जटिल व्यवस्था होती है। फर्श पर एक आसान अस्थायी जगह बनाकर इस समस्या को हमेशा के लिए नियंत्रित किया जा सकता है। छोटे बच्चों के कमरों की सबसे बड़ी मुश्किल यह होती है कि कुछ ही घंटों की मेहनत के बाद साफ किया गया कमरा दोबारा खिलौनों, कपड़ों और खुली किताबों से भर जाता है। अधिकतर घरों में माता-पिता को लगता है कि अलमारी छोटी पड़ रही है या सामान रखने के लिए नया फर्नीचर खरीदना जरूरी है। असलियत में परेशानी सामान की अधिकता नहीं, बल्कि बच्चों के लिए उसे वापस रखने की पूरी प्रक्रिया का भारी लगना है। जब भी किसी खिलौने या किताब को रखने के लिए भारी अलमारी के पल्ले खोलने पड़ें या ऊंचे शेल्फ तक पहुंचना पड़े, तो बच्चे आलस में आकर सामान फर्श पर ही छोड़ देते हैं। इस बिखराव को रोकने के लिए भारी बदलाव करने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक आसान आदत और कमरे का एक छोटा सा हिस्सा पूरी तस्वीर बदल सकता है। इसी व्यावहारिक उपाय को रिटर्न जोन के नाम से समझा जा सकता है। यह बच्चे के अपने कमरे में तैयार की गई एक ऐसी सुलभ जगह होती है, जहां दिनभर इस्तेमाल होने वाला सामान तुरंत रखा जा सके। इसका मकसद हर चीज को उसी पल उसकी मूल जगह तक पहुंचाने का दबाव खत्म करना है, ताकि बाद में थोड़ा सा वक्त निकालकर सब कुछ व्यवस्थित किया जा सके। रिटर्न जोन की अवधारणा और इसके काम करने का तरीका कमरे के किसी हिस्से में तैयार किया गया यह दायरा पूरी तरह से एक अस्थायी पड़ाव की तरह काम करता है। इसका उद्देश्य कभी भी सामान को हमेशा के लिए वहां जमा करना नहीं होता। अक्सर देखा जाता है कि खेल खत्म होने के तुरंत बाद बच्चे को स्कूल, ट्यूशन या भोजन के लिए तैयार होना पड़ता है। ऐसे हड़बड़ी वाले पलों में अगर बच्चे से कहा जाए कि वह हर एक खिलौना उसके मूल डिब्बे में सहेजकर रखे, तो वह आनाकानी करने लगता है या चीजें बिखरी छोड़ देता है। इसके विपरीत, यदि बच्चे को केवल इतना निर्देश मिले कि वह सामान को उस तय अस्थायी दायरे में डाल दे, तो कमरा तुरंत फैलने से बच जाता है। बाद में जब भी माता-पिता या बच्चे के पास पांच से दस मिनट की फुर्सत हो, तब उस जगह से सामान उठाकर उसकी असली अलमारी या रैक में पहुंचाया जा सकता है। इससे कमरे में चारों तरफ फैलने वाली अव्यवस्था पर फौरन रोक लग जाती है। फर्श पर जगह तय करने के व्यावहारिक फायदे इस व्यवस्था को लागू करने के लिए फर्श पर किसी ऐसे कोने का चुनाव करना चाहिए जो बच्चे के आने-जाने के रास्ते में स्वाभाविक रूप से पड़ता हो। वहां पर कोई खुली टोकरी, हल्का प्लास्टिक बास्केट या छोटा मैट बिछाया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि इस जगह तक बच्चे का हाथ आसानी से पहुंचे और कोई भी चीज वहां रखने में उसे कोई अतिरिक्त मशक्कत न करनी पड़े। बच्चों का स्वभाव सरलता पसंद करता है। अगर किसी किताब को वापस रखने के लिए अलमारी का ताला खोलना हो, भारी दराज खींचना हो या अलग-अलग खानों में चीजें छांटनी हों, तो बच्चा काम से बचने की कोशिश करेगा। फर्श पर रखी एक खुली टोकरी इस पूरी रुकावट को खत्म कर देती है। बच्चा बिना किसी झंझट के हाथ की चीज तुरंत वहां छोड़ देता है, जिससे फर्श पर बिखराव नहीं होता। किन चीजों को जगह दें और किसे रखें दूर इस अस्थायी व्यवस्था को अपनाते समय इस बात की स्पष्ट सीमा तय होनी चाहिए कि वहां क्या रखा जाएगा और क्या नहीं। यह पूरे घर का कबाड़खाना या हर तरह की वस्तु का पक्का ठिकाना नहीं बन सकता। यहां केवल वही वस्तुएं रखी जानी चाहिए जिनका उपयोग दिन में कई बार होता है • दिनभर में बार-बार पढ़ी जाने वाली कहानियों की किताबें और कॉमिक्स। • पसंदीदा खिलौने, बोर्ड गेम्स या ब्लॉक सेट्स। • ड्राइंग शीट, रंग और पेंसिल बॉक्स जैसे स्टेशनरी का सामान। • छोटे कुशन या खेलने के हल्के कपड़े। इसके साथ ही कुछ चीजों को इस जगह से पूरी तरह अलग रखना अनिवार्य है। उतारे हुए मैले कपड़ों के लिए अलग से लॉन्ड्री बास्केट की व्यवस्था होनी चाहिए, उन्हें यहां नहीं मिलाना चाहिए। खाने-पीने की चीजें, पानी की बोतलें या कोई भी ऐसा सामान जिससे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता हो या जिसे उसकी पहुंच से दूर रखना जरूरी हो, उसे इस दायरे में कभी न आने दें। सफाई को बड़ा काम बनाने के बजाय छोटा नियम बनाएं माता-पिता को अक्सर यह शिकायत रहती है कि बार-बार टोकने के बावजूद बच्चे कमरा साफ नहीं करते। पूरा कमरा एक साथ साफ करने का निर्देश बच्चों को एक बहुत बड़े बोझ जैसा लगता है। इसके समाधान के लिए केवल एक छोटा सा नियम लागू करना चाहिए, जैसे ही खेल या पढ़ाई खत्म हो, जो वस्तु हाथ में है उसे फर्श की टोकरी में रख दो। रात को सोने से पहले या शाम के किसी तय वक्त पर पांच मिनट का समय निर्धारित किया जा सकता है। उस दौरान माता-पिता और बच्चे मिलकर उस टोकरी के सामान को उसकी स्थायी जगह पर पहुंचा सकते हैं। इससे सफाई एक पहाड़ जैसा काम बनने के बजाय छोटे-छोटे आसान चरणों में बंट जाती है, जिससे बच्चे पर कोई मानसिक दबाव नहीं पड़ता। नया फर्नीचर खरीदने से पहले अपनाएं यह तरकीब अगर मौजूदा अलमारी में सामान रखने की बुनियादी जगह मौजूद है और दिक्कत केवल फर्श पर फैले खिलौनों की है, तो तुरंत बाजार जाकर महंगा स्टोरेज या नई अलमारी खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले फर्श पर इस अस्थायी दायरे की व्यवस्था बनाकर देखें कि बच्चे के व्यवहार और कमरे की स्वच्छता में कितना फर्क पड़ता है। इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि बच्चा धीरे-धीरे जिम्मेदारी और व्यवस्था के महत्व को समझने लगता है। हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसलिए शुरुआत के दिनों में छोटे बच्चों को माता-पिता के मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता पड़ सकती है। कुछ दिनों के अभ्यास के बाद यह उनकी स्वाभाविक आदत का हिस्सा बन जाता है। इसका आप पर असर कमरे में एक साधारण अस्थायी व्यवस्था बनाकर आप बच्चों में बिना किसी डांट-फटकार के सफाई की आदत डाल सकते हैं और फालतू फर्नीचर पर होने वाला खर्च बचा सकते हैं। • दैनिक समय की बचत: बच्चों का कमरा समेटने में दिनभर बार-बार लगने वाला आधा घंटा घटकर सिर्फ पांच से दस मिनट रह जाता है। माता-पिता को दिनभर खिलौनों के पीछे भागने और झुंझलाने से हमेशा के लिए राहत मिल जाती है। • अनावश्यक खर्च पर रोक: माता-पिता को नई अलमारी या महंगे प्लास्टिक स्टोरेज ड्रॉर खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। घर में पहले से मौजूद किसी साधारण डलिया, टोकरी या कपड़े के मैट से यह पूरी व्यवस्था तुरंत शुरू हो जाती है। • बच्चों का व्यावहारिक विकास: जटिल नियमों के बजाय यह तरीका बच्चों को खेल-खेल में अपनी जिम्मेदारी संभालने का मौका देता है। इससे बच्चे बिना किसी मानसिक तनाव के खुद अपनी चीजें सहेजना सीखते हैं। • घर का शांत माहौल: हर रोज कमरे की अव्यवस्था को लेकर होने वाली बहस और डांट पूरी तरह बंद हो जाती है। घर का वातावरण अनुशासित और तनावमुक्त बना रहता है। ऐसा क्यों हुआ बच्चों के कमरे में बार-बार सामान बिखरने का मुख्य कारण सामान की अधिकता नहीं, बल्कि बच्चों की शारीरिक पहुंच और मनोविज्ञान के विपरीत बनी जटिल भंडारण प्रणाली है। • पहुंच की असुविधा: पारंपरिक अलमारियां, भारी दराज और ऊंचे शेल्फ छोटे बच्चों की स्वाभाविक शारीरिक पहुंच और सहूलियत के अनुकूल नहीं होते। जब सामान वापस रखने में अत्यधिक शारीरिक प्रयास करना पड़ता है, तो बच्चे तुरंत चीजों को वहीं छोड़ देते हैं। • एकमुश्त सफाई का मानसिक दबाव: खेल खत्म होते ही पूरे कमरे को तुरंत समेटने का निर्देश बच्चों को एक भारी और मुश्किल कार्य प्रतीत होता है। नतीजा यह निकलता है कि बच्चे काम को टालते रहते हैं और अव्यवस्था बढ़ती चली जाती है। • दिनभर बार-बार इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं: खिलौने, किताबें और रंग दिनभर में कई बार निकाले जाते हैं, जिससे उन्हें बार-बार बंद अलमारी में सहेजना अव्यावहारिक हो जाता है। सुलभ अस्थायी व्यवस्था न होने पर ये चीजें स्वाभाविक तौर पर फर्श पर ही जमा हो जाती हैं। सवाल-जवाब 1. बच्चों के कमरे में रिटर्न जोन क्या होता है? यह कमरे के फर्श पर बनाई गई एक आसान और सुलभ जगह होती है, जहां बच्चा दिन में इस्तेमाल किए गए खिलौनों और किताबों को तुरंत अस्थायी रूप से रख सकता है। 2. रिटर्न जोन के लिए किस तरह की चीजें इस्तेमाल की जा सकती हैं? इसके लिए फर्श के किसी कोने में एक साधारण खुली टोकरी, हल्का प्लास्टिक बास्केट या छोटा फैब्रिक मैट रखा जा सकता है। 3. इस जगह पर कौन सा सामान रखना चाहिए? यहां केवल दिनभर में बार-बार इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं जैसे खिलौने, कहानी की किताबें, ड्राइंग का सामान और छोटे कुशन रखे जाने चाहिए। 4. किन चीजों को इस अस्थायी जगह से दूर रखना जरूरी है? गंदे कपड़े, खाने-पीने की चीजें और कोई भी ऐसा असुरक्षित सामान जिसे बच्चे की पहुंच से दूर रखना हो, उसे इसमें बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। 5. क्या बच्चों का कमरा व्यवस्थित करने के लिए नई अलमारी खरीदना जरूरी है? नहीं, अगर अलमारी में पर्याप्त जगह है तो नया फर्नीचर खरीदने के बजाय इस आसान आदत और अस्थायी व्यवस्था को अपनाना ज्यादा असरदार साबित होता है। 6. इस जगह से सामान को उसकी सही जगह पर कब रखना चाहिए? दिन के किसी शांत समय या रात में सोने से पहले माता-पिता और बच्चे मिलकर पांच से दस मिनट में सारा सामान उसकी मूल अलमारी में रख सकते हैं। https://trendkia.com/parenting/khilaunon-ke-phailava-se-pareshana-mata-pita-apanaen-naya-tarika-pharsha-ka-eka-kona-sulajhaega-bachchon-ke-kamare-ki-avyavastha-41678 TrendKia — Har trend, sabse pehle.