# ऑनलाइन गेमिंग के जरिए साइबर ठगी का नया खतरा, ग्रेटर नोएडा में परिवार ने गंवाए 29 लाख रुपये, प्रोफेसर आरबी सिंह ने दिए अहम सुरक्षा टिप्स

> ग्रेटर नोएडा में गेमिंग ऐप के जरिए 29 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आने के बाद प्रोफेसर आरबी सिंह ने अभिभावकों के लिए डिजिटल सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

**Type:** article · **Category:** पेरेंटिंग · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/parenting/nalaina-geminga-ke-jarie-saibara-thagi-ka-naya-khatara-greater-noida-men-parivara-ne-gnvae-29-lakha-rupaye-professor-rb-singh-ne-d-18915 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, प्रोफेसर आरबी सिंह, ग्रेटर नोएडा, पेरेंटिंग टिप्स, डिजिटल सुरक्षा

स्मार्टफोन अब बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जहां ऑनलाइन पढ़ाई और कोचिंग से लेकर मनोरंजन तथा गेमिंग तक की गतिविधियां मोबाइल पर ही संचालित होती हैं। हालांकि, तकनीक की इस सुलभता के साथ गंभीर डिजिटल खतरे भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक परिवार को उस समय भारी आर्थिक चपत लगी, जब मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान अनजाने में हुए भुगतानों के कारण उनके बैंक खाते से लगभग 29 लाख रुपये गायब हो गए। इस चौंकाने वाली घटना के बाद साइबर मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर आरबी सिंह ने माता-पिता को सतर्क रहने और बच्चों द्वारा उपयोग किए जा रहे मोबाइल उपकरणों पर सख्त निगरानी रखने की सलाह दी है।

## गेमिंग ऐप डाउनलोड करते समय परमिशन का जोखिम
प्रोफेसर आरबी सिंह का कहना है कि इंटरनेट और ऐप स्टोर पर अनगिनत ऐसे गेम मौजूद हैं जो देखने में बेहद आकर्षक और सामान्य लगते हैं। बच्चे बिना किसी झिझक के इन्हें अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड कर लेते हैं। इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया के दौरान ये ऐप उपयोगकर्ता से विभिन्न प्रकार की परमिशन यानी स्वीकृतियां मांगते हैं, जिनमें कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स, स्टोरेज और लोकेशन शामिल हैं। जब बच्चे बिना सोचे-समझे इन सभी परमिशन को अनुमति दे देते हैं, तो डिवाइस में मौजूद संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा और बैंकिंग विवरण अनधिकृत तत्वों के हाथों में जाने का जोखिम बढ़ जाता है। विशेष रूप से उन मोबाइल फोन पर अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जिनका उपयोग परिवार के सदस्य यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से लेनदेन के लिए करते हैं। अभिभावकों को बच्चों को स्पष्ट रूप से यह सिखाना चाहिए कि किसी भी नए ऐप को डाउनलोड करने या परमिशन स्वीकार करने से पहले घर के बड़ों की अनुमति अनिवार्य है।

## माइक्रो-ट्रांजेक्शन और धीरे-धीरे बैंक खाता खाली होने का तरीका
साइबर अपराध की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर आरबी सिंह ने स्पष्ट किया कि वित्तीय ठगी करने वाले अपराधी हमेशा एक ही बार में पूरा पैसा नहीं निकालते। अधिकांश मामलों में वे छोटी-छोटी रकम के बार-बार भुगतान कराने की रणनीति अपनाते हैं। ऑनलाइन गेम बच्चों को अगले स्तर तक पहुंचने, डिजिटल कॉइन्स खरीदने, नए वर्चुअल हथियार हासिल करने या आकर्षक गेमिंग कैरेक्टर अनलॉक करने का लालच देते हैं। बच्चे इन फीचर्स को पाने के लिए बार-बार छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन करते रहते हैं। यदि माता-पिता अपने बैंक खाते के मैसेज और स्टेटमेंट की नियमित जांच नहीं करते, तो इन कटौतियों का पता तुरंत नहीं चलता। परिणाम यह होता है कि महज 5 से 6 दिनों के भीतर बैंक खाते से लाखों रुपये की पूरी जमापूंजी साफ हो जाती है, और परिवार को इसका अहसास तब होता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।

## ब्लैकमेलिंग और बच्चों पर मानसिक दबाव की गंभीर समस्या
ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा खतरा केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा करता है। जब किसी बच्चे को अहसास होता है कि उससे अनजाने में कोई बड़ी वित्तीय गलती या भुगतान हो गया है, तो वह डांट और सजा के डर से इस बात को अपने माता-पिता से छिपाने की कोशिश करता है। इस स्थिति का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बच्चे को डराने, धमकाने या ब्लैकमेल करने का प्रयास करते हैं। यह निरंतर मानसिक दबाव बच्चों के कोमल मन पर अत्यंत हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। प्रोफेसर आरबी सिंह का मानना है कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ संवाद का एक ऐसा खुला और दोस्ताना माहौल बनाना चाहिए, जहां बच्चा बिना किसी भय के अपनी गलती स्वीकार कर सके। यदि कोई ऑनलाइन धमकी या ब्लैकमेलिंग की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत परिवार और संबंधित साइबर पुलिस अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए।

## मोबाइल की निगरानी और साइबर फ्रॉड से बचाव के कारगर उपाय
वर्तमान शैक्षणिक व्यवस्था में बच्चों को मोबाइल फोन उपलब्ध कराना अभिभावकों की मजबूरी बन गया है, लेकिन इसके साथ ही नियमित मॉनिटरिंग भी अनिवार्य है। प्रोफेसर आरबी सिंह ने बताया कि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही यह समझाया जाना चाहिए कि पारिवारिक स्मार्टफोन में संवेदनशील वित्तीय जानकारी होती है। साइबर ठगी से सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है

- **ओटीपी (OTP) की गोपनीयता:** बच्चों को सख्त हिदायत दें कि बैंक, यूपीआई या किसी भी अन्य डिजिटल सेवा से प्राप्त होने वाला वन टाइम पासवर्ड किसी भी परिस्थिति में किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- **अपरिचित लिंक पर क्लिक न करने की हिदायत:** व्हाट्सएप (WhatsApp), एसएमएस (SMS) या सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी संदिग्ध लिंक को बिना जांच-पड़ताल के न खोलें।
- **परमिशन की समीक्षा:** किसी भी ऐप द्वारा मांगी जाने वाली कैमरा, कॉन्टैक्ट्स और स्टोरेज परमिशन को बिना समझे अलाउ न करें।
- **बैंक खातों का नियमित ऑडिट:** अभिभावक अपने बैंक खातों के लेनदेन और एसएमएस अलर्ट पर प्रतिदिन नजर रखें ताकि किसी भी अनधिकृत ट्रांजेक्शन की पहचान तुरंत हो सके।
- **पैरेंटल कंट्रोल और खर्च सीमा:** बच्चों के उपकरणों पर आयु-उपयुक्त पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग्स लागू करें और इन-ऐप खरीदारी पर पासवर्ड तथा क्रेडिट लिमिट तय करें।
- **सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार:** यदि बच्चे से कोई गलत भुगतान हो जाए, तो उस पर गुस्सा करने के बजाय स्थिति को समझें और तुरंत बैंक तथा साइबर सेल को सूचित करें।
- **ब्लैकमेलिंग की स्थिति में त्वरित कार्रवाई:** किसी भी ऑनलाइन धमकी का सामना करने पर मामले को दबाने के बजाय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद लें।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन पढ़ाई का इस्तेमाल करने वाले हर परिवार के लिए यह खबर सतर्क रहने का सीधा संकेत है कि इन-ऐप खरीदारी और बैंक खातों की निगरानी में ढिलाई भारी नुकसान करा सकती है।

**ग्रेटर नोएडा में:** स्थानीय निवासियों और अभिभावकों को बच्चों को दिए गए मोबाइल फोन की परमिशन और यूपीआई ऐप्स की तुरंत जांच करने की सलाह दी जाती है ताकि ऐसी ठगी का शिकार होने से बचा जा सके।

## सवाल-जवाब

### 1. ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड का क्या मामला सामने आया है?
ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान अनजाने में हुए भुगतानों के कारण एक परिवार के बैंक खाते से लगभग 29 लाख रुपये कट गए।

### 2. साइबर ठग 5-6 दिनों में बैंक खाता कैसे खाली कर देते हैं?
अपराधी एक साथ सारा पैसा निकालने के बजाय गेमिंग फीचर्स के लालच में बच्चों से छोटे-छोटे बार-बार भुगतान कराते हैं, जिससे 5-6 दिनों में पूरा खाता खाली हो जाता है।

### 3. ऐप डाउनलोड करते समय परमिशन देने से क्या खतरा होता है?
यदि बिना समझे कैमरा, कॉन्टैक्ट्स और स्टोरेज की परमिशन दे दी जाए तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग डिटेल्स और निजी जानकारी साइबर ठगों के पास पहुंच सकती है।

### 4. अगर बच्चा गेमिंग में गलती से पेमेंट कर दे तो अभिभावकों को क्या करना चाहिए?
अभिभावकों को बच्चे को डांटने के बजाय स्थिति को समझना चाहिए, तुरंत बैंक से संपर्क कर ट्रांजेक्शन रोकना चाहिए और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

### 5. बच्चों को ऑनलाइन साइबर ठगी से बचाने के लिए क्या मुख्य कदम उठाने चाहिए?
मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल लगाएं, ओटीपी शेयर न करने की हिदायत दें, बैंक खातों की नियमित जांच करें और बिना पूछे ऐप डाउनलोड न करने की आदत डालें।

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