सूरत में रैगिंग के कारण रेजिडेंट डॉक्टर की मौत, जानिए बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के खास उपाय सूरत सिविल अस्पताल में सीनियर डॉक्टरों की रैगिंग से परेशान होकर अरावली के 30 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पांड्या ने अपनी जान दे दी। इस दुखद घटना के बाद 4 सीनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है, जिसने बच्चों की मानसिक मजबूती और पैरेंटिंग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुजरात के सूरत सिविल अस्पताल में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अरावली क्षेत्र के रहने वाले 30 वर्षीय होनहार रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पांड्या ने हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में यह बात उजागर हुई है कि हर्ष अपने सीनियर डॉक्टरों द्वारा लगातार की जा रही अत्यधिक रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का शिकार थे। मामला सामने आने और तूल पकड़ने के बाद एंटी-रैगिंग टीम ने गहन पूछताछ की, जिसके आधार पर घटना में शामिल 4 सीनियर डॉक्टरों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। कम उम्र में एक डॉक्टर की इस तरह से जान चले जाने की घटना ने अभिभावकों के मन में गहरा डर और गंभीर सवाल पैदा कर दिए हैं। माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को शिक्षा, करियर और आर्थिक सफलता हासिल करने के योग्य तो बनाते हैं, लेकिन जीवन की कठिन परिस्थितियों और मानसिक दबाव से मुकाबला करने की कला सिखाना भूल जाते हैं। यह त्रासदी हमें आगाह करती है कि बच्चों को सिर्फ सफल बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें विपरीत परिस्थितियों में मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी उतना ही आवश्यक है। घर को बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाएं जब कोई बच्चा बाहर उत्पीड़न, रैगिंग या किसी भी प्रकार के तनाव से गुजरता है, तो उसे सबसे पहले एक ऐसे वातावरण की तलाश होती है जहाँ वह बिना किसी झिझक के अपनी बात कह सके। माता-पिता को बचपन से ही बच्चों के साथ ऐसा तालमेल बनाना चाहिए कि उन्हें लगे कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो, उनका परिवार उनके साथ खड़ा रहेगा। जब बच्चों को यह भरोसा होता है कि उनके माता-पिता उनकी मजबूरियों को समझेंगे और फैसला सुनाने के बजाय उनका मार्गदर्शन करेंगे, तो वे आत्मघाती कदम उठाने के बजाय अपने परिवार से बात करना पसंद करते हैं। अन्याय सहने के बजाय विरोध करना सिखाएं अधिकांश मामलों में छात्र सीनियर्स या प्रभावशाली लोगों का अत्याचार केवल इसलिए चुपचाप सहते रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आवाज उठाने से उनका करियर, डिग्री या भविष्य बर्बाद हो जाएगा। बच्चों को यह स्पष्ट रूप से समझाना जरूरी है कि सहनशीलता और अत्याचार सहने में बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्हें सिखाएं कि किसी भी गलत व्यवहार या दबाव के खिलाफ बिना डरे ‘ना’ कहना उनका अधिकार है। उन्हें सही अधिकारियों के पास अपनी शिकायत दर्ज कराने और न्याय के लिए खड़े होने का साहस बचपन से ही देना चाहिए। सफलता से अधिक मानसिक सहनशीलता को महत्व दें आज के दौर में असफलता या पिछड़ जाने को एक गंभीर अपराध की तरह देखा जाने लगा है। अभिभावकों को अपने बच्चों के मन से यह डर पूरी तरह निकालना होगा। उन्हें यह समझाना चाहिए कि कोई भी डिग्री, परीक्षा, नौकरी या करियर इंसान की जिंदगी से बड़ा नहीं हो सकता। बच्चों में चुनौतियों का सामना करने और गिरकर दोबारा खड़े होने की क्षमता विकसित करें। इसके साथ ही, उन्हें यह भी बताएं कि तनाव, अवसाद या अकेलेपन की स्थिति में किसी विशेषज्ञ, काउंसलर या परिजनों से मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि बुद्धिमानी है। ओवर-प्रोटेक्टिव रवैये से बचें और स्वयं निर्णय लेने दें अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान खुद ही निकाल देते हैं। इस अत्यधिक सुरक्षात्मक रवैये के कारण बच्चे बड़े होकर अचानक आने वाली मुश्किलों को संभालने में असमर्थ हो जाते हैं। बच्चों को छोटी-छोटी चुनौतियों का सामना खुद करने का अवसर दें ताकि उनमें आत्मविश्वास पैदा हो सके। सूरत सिविल अस्पताल की यह घटना हर अभिभावक के लिए एक चेतावनी है। कानून और नीतियां अपनी जगह हैं, लेकिन माता-पिता के रूप में हमें अपने बच्चों को मानसिक रूप से इतना सशक्त बनाना होगा कि वे किसी भी मोड़ पर टूटने के बजाय हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला कर सकें। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों में एंटी-रैगिंग नियमों को सख्ती से लागू करने तथा छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करती है। गुजरात में: सूरत सिविल अस्पताल की इस दुखद घटना के बाद राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और हॉस्टल परिसरों में छात्र सुरक्षा और एंटी-रैगिंग निगरानी व्यवस्था को कड़ा किया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. सूरत में किस रेजिडेंट डॉक्टर की मृत्यु हुई है? अरावली के रहने वाले 30 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पांड्या की सूरत सिविल अस्पताल में मृत्यु हुई है। 2. डॉक्टर हर्ष पांड्या की मौत की मुख्य वजह क्या पाई गई? जांच में सामने आया कि सीनियर डॉक्टरों द्वारा उनके साथ हद से ज्यादा रैगिंग और उत्पीड़न किया जा रहा था, जिससे परेशान होकर उन्होंने फांसी लगा ली। 3. इस मामले में प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है? एंटी-रैगिंग टीम की पूछताछ और जांच के बाद घटना से जुड़े 4 सीनियर डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया है। 4. अभिभावक बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं? माता-पिता को घर का माहौल पारदर्शी और सुरक्षित बनाना चाहिए, बच्चों को अन्याय के खिलाफ बोलना सिखाना चाहिए और सफलता से ज्यादा मानसिक सहनशीलता पर जोर देना चाहिए। 5. उत्पीड़न या रैगिंग का सामना करने पर छात्रों को क्या करना चाहिए? छात्रों को बिना डरे तुरंत अपने परिजनों, कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति या संबंधित अधिकारियों को शिकायत दर्ज करानी चाहिए। https://trendkia.com/parenting/surat-men-raiginga-ke-karana-rejidenta-doktara-ki-mauta-janie-bachchon-ko-manasika-rupa-se-majabuta-banane-ke-khasa-upaya-15637 TrendKia — Har trend, sabse pehle.