# अभिषेक बनर्जी पर कसता कानूनी फंदा: PA सुमित रॉय की तलाश में ताला टूटा, 14 और 16 जून को CID के सामने पेशी

> बंगाल पुलिस ने सुबह 4 बजे अभिषेक बनर्जी के कालीघाट घर का ताला तोड़कर करीब 5 घंटे तलाशी ली, निशाने पर उनके PA सुमित रॉय हैं। उधर फर्जी साइन और हेट स्पीच मामलों में CID ने अभिषेक को 14 और 16 जून को भवानी भवन तलब किया है।

**Category:** राजनीति · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/abhisheka-banarji-para-kasata-kanuni-phnda-pa-sumita-roya-ki-talasha-men-tala-tu-388

पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त एक ही नाम के इर्द-गिर्द घूम रही है — अभिषेक बनर्जी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे के खिलाफ जांच एजेंसियों की हलचल अचानक तेज हो गई है। एक तरफ बंगाल पुलिस उनके सबसे करीबी सहयोगी को खोजने उनके घर तक जा पहुंची, तो दूसरी तरफ सीआईडी के नोटिस पर नोटिस उन तक पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि सवाल खुलकर पूछा जाने लगा है — क्या भाइपो की गिरफ्तारी अब महज वक्त की बात है?

## सुबह 4 बजे की दबिश, टूटा घर का ताला

पूरा घटनाक्रम बीती रात की एक मोबाइल लोकेशन से शुरू हुआ। सूत्रों की मानें तो सुमित रॉय के फोन की टावर लोकेशन कालीघाट में अभिषेक बनर्जी के घर के आसपास ट्रेस हुई। इसी सुराग के बूते शालबनी पुलिस और कोलकाता पुलिस की टीम सुबह करीब 4 बजे अभिषेक के कालीघाट स्थित आवास पर पहुंच गई। दरवाजा कई बार खटखटाने और आवाज लगाने के बावजूद जब अंदर से कोई जवाब नहीं आया, तो पुलिस ने घर के मेन गेट का ताला तोड़ दिया और भीतर दाखिल हो गई।

इसके बाद करीब पांच घंटे तक अभिषेक बनर्जी के पूरे घर की छानबीन चली। मकसद सिर्फ एक था — उनके पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय को पकड़ना। लेकिन रॉय वहां नहीं मिले और आखिरकार पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि इस छापेमारी के बाद खुद ममता बनर्जी भी अभिषेक के घर पहुंचीं और काफी देर तक उनसे बातचीत की।

## तीन दिन से क्यों खोजा जा रहा है सुमित रॉय?

सुमित रॉय कोई मामूली नाम नहीं हैं। उन्हें अभिषेक बनर्जी का दायां हाथ माना जाता है। कहा जाता है कि अभिषेक से मिलने का रास्ता पहले सुमित रॉय से होकर गुजरता था — उनकी मर्जी के बिना कोई भी अभिषेक तक नहीं पहुंच पाता था। मगर अब समीकरण पलट चुके हैं। पुलिस बीते तीन-चार दिनों से लगातार रॉय की तलाश में जुटी है।

इस तलाश की जड़ें एक दूसरे मामले में हैं। हाल ही में पश्चिम मेदिनीपुर की शालबनी पुलिस ने टीएमसी के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को जमीन से जुड़े एक भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हाजरा ने अभिषेक के पीए सुमित रॉय को बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। यहीं से रॉय जांच के घेरे में आ गए। आरोप यह भी है कि सुमित रॉय ने चुनाव के दौरान टिकट दिलाने के नाम पर पैसा वसूला। माना जा रहा है कि रॉय के पास ऐसे कई राज दबे हैं, जो सामने आने पर अभिषेक की मुश्किलें कई गुना बढ़ा सकते हैं — और शायद यही वजह है कि अभिषेक बेहद तनाव में बताए जा रहे हैं।

## दो मामले, दो तारीखें — CID के बुलावे

अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सीआईडी का शिकंजा एक नहीं, दो मोर्चों पर कस रहा है। पहला है फर्जी साइन यानी जाली हस्ताक्षर का मामला, जिसमें उनसे 14 जून को पूछताछ होनी है। दूसरा मामला चुनाव के दौरान दिए गए भड़काऊ बयान का है। सीआईडी ने अभिषेक को कथित हेट स्पीच को लेकर नोटिस थमाया है और उन्हें "डीजे वाले बयान" पर सफाई देने के लिए 16 जून को भवानी भवन तलब किया है। गुरुवार शाम यह नोटिस उनके कालीघाट वाले घर पर पहुंचाया गया।

जिस हेट स्पीच मामले में नया समन मिला है, वह अभिषेक के चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है। इस पर चुनाव आयोग के आदेश पर ही एफआईआर दर्ज हुई थी। एक के बाद एक — बैक टू बैक — नोटिस मिलने से अभिषेक बनर्जी का गुस्सा फूट पड़ा है।

## अभिषेक का पलटवार: 'अमित शाह पर कार्रवाई क्यों नहीं?'

सीआईडी की कार्रवाई पर अभिषेक खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर उनका डीजे वाला बयान भड़काऊ है, तो बीजेपी नेताओं के बयानों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। अपनी सफाई में उन्होंने कहा:

> "जिस मामले में ये मुझे नोटिस देने पहुंचे हैं। मैंने कहा था कि 4 तारीख के बाद डीजे बजेगा। मैं सवाल करता हूं कि अगर मैंने सचमुच में कुछ गलत कहा था तो मैंने ये बयान कब दिया है? चुनाव के दौरान। चुनाव जब चल रहे थे, तब कानून-व्यवस्था किसके हाथ में थी? चुनाव आयोग के हाथ में थी। ममता बनर्जी के हाथ में तो कानून-व्यवस्था तब नहीं थी। तो तब मेरे खिलाफ FIR क्यों नहीं की गई। चुनाव आयोग में शिकायत होने पर, आयोग ने मेरे खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। तो उसकी वजह है, अगर मैंने डीजे बजाने की बात कही थी, तो देश के गृहमंत्री ने भी कहा था कि तृणमूल के लोगों को उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे। हर एक्शन का समान और विपरित प्रतिक्रिया होता है। आप बताएं, ज्ञानेश कुमार को अगर मेरे खिलाफ एक्शन लेना पड़ता तो उन्हें अमित शाह के खिलाफ भी कार्रवाई करनी पड़ती।"

## 'अब कोई नहीं बचा सकता' — अपनों का ही हमला

दबाव सिर्फ बाहर से नहीं, अपने ही खेमे से भी पड़ रहा है। टीएमसी से निलंबित नेता रिजु दत्ता ने अभिषेक को लेकर तीखा हमला बोला है। उनका दावा है कि अब अभिषेक को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता और बचने का कोई रास्ता उनके पास नहीं बचा। दत्ता ने यहां तक कहा कि गौ तस्करी से लेकर कोयला तस्करी तक में अभिषेक का नाम जुड़ा है, लिहाजा उनका जेल जाना तय है।

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