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  "type": "article",
  "title": "AI चैटबॉट से बच्चों के भावनात्मक लगाव पर रोक लगाने के लिए यूरोपियन यूनियन ने पेश किया कड़ा कानून",
  "summary": "नए प्रस्तावित EU किड्स एक्ट के तहत, टेक कंपनियों पर अपने वैश्विक टर्नओवर का 6 प्रतिशत तक जुर्माना लग सकता है यदि वे बच्चों को भावनात्मक AI चैटबॉट की लत से बचाने के लिए सख्त नियम लागू नहीं करती हैं।",
  "content": "यूरोपियन यूनियन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके विकास पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। एक नए प्रस्तावित कानून, जिसे 'EU किड्स एक्ट' नाम दिया गया है, के तहत यूरोपियन यूनियन 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों के साथ बातचीत के दौरान चैटबॉट द्वारा मानवीय भावनाओं या आपसी संबंधों की नकल करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। इस कठोर नियामक कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मशीनों के साथ भावनात्मक रूप से निर्भर होने से रोकना है, ताकि उनका वास्तविक सामाजिक विकास प्रभावित न हो।\n\nगुरुवार को पेश किए गए इस विधायी प्रस्ताव में न केवल चैटबॉट बल्कि सोशल मीडिया और वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर भी नाबालिगों की पहुंच को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। इस मसौदे के अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों को अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की निगरानी के बिना चैटबॉट का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यदि कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने उत्पादों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े पुख्ता इंतजाम नहीं करता है, तो उस पर उसके वैश्विक सालाना टर्नओवर का 6 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।\n\nबच्चों की प्राइवेसी के लिए चैटबॉट की याददाश्त पर रोक\nइस नए कानून का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा चैटबॉट की डेटा स्टोर करने की क्षमता से जुड़ा है। यूरोपियन यूनियन में काम करने वाले चैटबॉट को अब नाबालिगों के साथ हुई अलग-अलग बातचीत के विवरण को अपनी मेमोरी में रखने की अनुमति नहीं होगी। यूरोपियन कमीशन को डर है कि यदि ये सिस्टम बच्चों के साथ हुई पुरानी बातचीत को याद रखेंगे, तो वे समय के साथ बच्चों का बेहद संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा कर लेंगे। इसके अलावा, लगातार बनी रहने वाली याददाश्त से बच्चों में मशीनों के साथ बातचीत करने की अस्वस्थ और हानिकारक आदतें मजबूत हो सकती हैं, जिससे वे वास्तविक इंसानों से दूर हो सकते हैं।\n\nइसके साथ ही, नए प्रस्तावों में टेक कंपनियों द्वारा इन टूल्स को प्रमोट करने के तरीकों पर भी लगाम कसी गई है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स, वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपनी सेवाओं पर एआई चैटबॉट को खुद-ब-खुद सक्रिय करने या बच्चों को इनका उपयोग करने के लिए उकसाने की अनुमति नहीं होगी। इसके तहत, किसी भी नाबालिग की कॉन्टैक्ट लिस्ट में चैटबॉट या एआई साथियों को सबसे ऊपर पिन करने पर प्रतिबंध रहेगा, जैसा कि पूर्व में स्नैपचैट जैसी कंपनियों द्वारा किया जाता रहा है।\n\nनशे की तरह लत लगाने वाले डिजाइन के खिलाफ उठती आवाजें\nहालांकि यह नया प्रस्ताव केवल उन्हीं एआई चैटबॉट और डिजिटल साथियों तक सीमित है जो नाबालिगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक स्थिति के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं, लेकिन कुछ मानवाधिकार संगठन इसे और व्यापक बनाने की मांग कर रहे हैं। ब्रसेल्स स्थित वकालत समूह 'यूरोपियन डिजिटल राइट्स' के नीति सलाहकार सिमियोन डी ब्रोवर ने बच्चों की सुरक्षा के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों को केवल युवाओं तक सीमित रखना तर्कसंगत नहीं है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को ऐसे एआई सिस्टम से सुरक्षा मिलनी चाहिए जो जानबूझकर उपयोगकर्ताओं को अपना आदी बनाने या उनमें भावनात्मक निर्भरता पैदा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इस संबंध में, यूरोपियन यूनियन इस साल के अंत में 'डिजिटल फेयरनेस एक्ट' पेश करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें इस तरह के एडिक्टिव डिजाइन पर व्यापक रूप से रोक लगाने के प्रावधान होंगे।\n\nयूरोपियन कमीशन की चिंताएं बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास पर आधारित हैं। अधिकारियों का मानना है कि चैटबॉट पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों के स्वाभाविक विकास को बाधित कर सकती है और इंसानों के साथ उनके पारस्परिक संबंधों को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, चैटबॉट द्वारा नाबालिगों को दी जाने वाली सलाह भी चिंता का विषय है। कमीशन ने चेतावनी दी है कि ये चैटबॉट अक्सर बच्चों को उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास को लेकर खतरनाक सलाह दे देते हैं, जिससे बच्चों में जोखिम भरे व्यवहार की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।\n\nबढ़ती निर्भरता और डीपफेक का खतरा\nगुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने टेक कंपनियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आंकड़े भी इस गंभीर स्थिति की पुष्टि करते हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और आयरलैंड में इप्सोस बीवीए द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि 11 से 25 वर्ष की आयु के लगभग आधे यूरोपीय युवाओं ने एआई चैटबॉट के साथ अपनी बेहद निजी और संवेदनशील बातें साझा की हैं। इस खतरे को देखते हुए केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और यूके भी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाकर नाबालिगों की चैटबॉट तक पहुंच को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।\n\nचैटबॉट के जरिए तैयार किए जाने वाले डीपफेक भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। बुधवार को दिए गए अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था कि यह स्वीकार्य नहीं है कि युवा लड़कियों की तस्वीरों का इस्तेमाल एआई द्वारा अश्लील चित्र बनाने के लिए किया जाए और यूरोप के पास इस पर कार्रवाई करने की पूरी शक्ति है। हालांकि, अगस्त से लागू यूरोपियन यूनियन के एआई एक्ट के तहत एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री पर लेबल लगाना अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान में यह नियम केवल व्यावसायिक उपयोग के लिए बनाए गए डीपफेक पर ही लागू होता है।\n\nपढ़ाई-लिखाई पर असर और गिरता शैक्षणिक स्तर\nडिजिटल भटकाव के कारण बच्चों के बुनियादी कौशल और शैक्षणिक स्तर में भी गिरावट देखी जा रही है। 91 देशों में 'आर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट' (OECD) द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि जो बच्चे स्कूल के काम के लिए एआई चैटबॉट का उपयोग करते हैं, उनके टेस्ट स्कोर उन बच्चों की तुलना में काफी कम आते हैं जो इन टूल्स का उपयोग नहीं करते हैं।\n\nइस गिरावट और बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ने वाले असर को लेकर स्वतंत्र नेटवर्क 'EU किड्स ऑनलाइन' के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में लिखा है कि वर्तमान जेनेरेटिव एआई टूल्स के निर्माण के दौरान बच्चों के अधिकारों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। नए विधायी प्रस्तावों के जरिए यूरोपियन यूनियन अब इन कमियों को दूर करना चाहता है ताकि टेक कंपनियां मुनाफे के बजाय बच्चों के सुरक्षित भविष्य को प्राथमिकता दें।\n\nइसका आप पर असर\nयह ऐतिहासिक प्रस्ताव बच्चों के तकनीक के साथ जुड़ाव के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा, जिससे टेक कंपनियों को अपने ऐप्स को आकर्षक बनाने के बजाय सुरक्षित बनाने पर ध्यान देना होगा।\n\n• अभिभावकों के लिए: ये नए नियम आपको अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण और मानसिक शांति प्रदान करेंगे। अब आपको 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा बिना निगरानी के अत्यधिक प्रभावशाली वर्चुअल चैटबॉट के इस्तेमाल की चिंता नहीं सताएगी।\n• युवा उपयोगकर्ताओं के लिए: किशोरों को अब इंटरनेट पर एक कम दखल देने वाला माहौल मिलेगा जहां AI साथी उन्हें बातचीत के लिए खुद-ब-खुद मजबूर नहीं करेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य युवाओं में वास्तविक दुनिया के सामाजिक संबंधों को बढ़ावा देना और डिजिटल अकेलेपन को कम करना है।\n• शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए: छात्र अपनी पढ़ाई की आदतों में सुधार देख सकते हैं क्योंकि स्कूल और परिवार अब होमवर्क के लिए जेनेरेटिव AI पर निर्भरता कम करेंगे। इस बदलाव से बच्चों में गंभीर रूप से सोचने और स्वतंत्र रूप से समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित होगी।\n• वैश्विक टेक मानकों के लिए: टेक कंपनियां विभिन्न देशों के नियमों का पालन करने के लिए इन सुरक्षा उपायों को वैश्विक स्तर पर लागू कर सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, यूरोपियन यूनियन से बाहर रहने वाले उपयोगकर्ताओं को भी अधिक सुरक्षित और कम लत लगाने वाले ऐप डिजाइन मिलेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nEU किड्स एक्ट का प्रस्ताव नाबालिगों पर जेनेरेटिव AI के नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंताओं और वैज्ञानिक शोधों का परिणाम है। नीति निर्माता उन वर्चुअल साथियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं जिन्हें मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए डिजाइन किया गया है।\n\n• भावनात्मक हेरफेर: टेक कंपनियों ने ऐसे AI साथी तैयार किए हैं जो मानवीय अंतरंगता की नकल करते हैं, जिससे कई नाबालिग इनके साथ गहरे मनोवैज्ञानिक संबंध बना लेते हैं। इस कृत्रिम अंतरंगता ने बच्चों के वास्तविक सामाजिक संबंधों को प्रभावित करने की गंभीर चिंता पैदा की है।\n• खतरनाक सलाह: चैटबॉट्स ने कई बार मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत संकटों को लेकर युवा उपयोगकर्ताओं को बेहद अनुचित सलाह दी है। सुरक्षा घेरे की इस कमी के कारण नाबालिग अक्सर वास्तविक जीवन में जोखिम भरे और आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।\n• गिरता शैक्षणिक स्तर: वैश्विक अध्ययनों से पता चलता है कि स्कूल के काम के लिए AI चैटबॉट का उपयोग करने वाले छात्र अक्सर परीक्षाओं में कम अंक प्राप्त करते हैं। सरकारें इस डिजिटल भटकाव और सोचने-समझने की क्षमता में आ रही गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय हुई हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रस्तावित EU किड्स एक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइसका मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशोरों को AI चैटबॉट के प्रति अस्वस्थ भावनात्मक निर्भरता विकसित करने से रोकना है।\n\n2. 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए क्या नियम हैं?\n13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने माता-पिता या अभिभावकों की सीधी निगरानी के बिना AI चैटबॉट का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।\n\n3. इन नियमों का उल्लंघन करने पर टेक कंपनियों को क्या सजा मिल सकती है?\nबच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न करने पर टेक कंपनियों पर उनके वैश्विक सालाना टर्नओवर का 6 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।\n\n4. यूरोपियन यूनियन चैटबॉट की याददाश्त पर प्रतिबंध क्यों लगाना चाहता है?\nकमीशन का मानना है कि चैटबॉट में बातचीत की यादें स्टोर होने से बच्चों का संवेदनशील डेटा इकट्ठा हो सकता है और उनकी अस्वस्थ आदतें मजबूत हो सकती हैं।\n\n5. क्या स्कूल के काम के लिए AI चैटबॉट का उपयोग करने वाले छात्रों का प्रदर्शन बेहतर होता है?\nनहीं, 91 देशों में किए गए OECD के शोध से पता चलता है कि स्कूल के काम के लिए AI चैटबॉट का उपयोग करने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर अन्य बच्चों से कम आते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/ai-chaitabota-se-bachchon-ke-bhavanatmaka-lagava-para-roka-lagane-ke-lie-european-union-ne-pesha-kiya-kara-kanuna-32966",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-17",
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    "एआई चैटबॉट",
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    "डिजिटल प्राइवेसी"
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