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  "type": "article",
  "title": "अमेरिका में इमीग्रेशन एजेंसी का 50 लाख डॉलर का प्रोजेक्ट, सभी 50 राज्यों से वोटर डेटा जुटाने की तैयारी",
  "summary": "अमरीकी एजेंसी आइस देश भर के मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन और वोटिंग इतिहास हासिल करने के लिए एक विशाल राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर रही है, जिससे प्राइवेसी और राज्यों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।",
  "content": "संयुक्त राज्य अमेरिका में आव्रजन और सीमा प्रवर्तन एजेंसी (आइस) देश भर के मतदाताओं की प्राइवेसी से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। एजेंसी ने देश के सभी 50 राज्यों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मतदाता पंजीकरण फ़ाइलों और वोटिंग इतिहास के डेटा को हासिल करने और सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए एक बहु-स्तरीय ठेके की प्रक्रिया शुरू की है। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स (एचएसआई) के तहत धोखाधड़ी की पहचान करना और डेटा का विश्लेषण करना बताया जा रहा है। इस कदम से अमेरिका में नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत डेटा प्राइवेसी को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।\n\nफेडरल कांट्रैक्ट के नियम और बजट आवंटन\nप्रशासनिक दस्तावेजों के अनुसार, इस पहल के तहत शुरुआती चरण में एजेंसी कुछ विशिष्ट राज्यों की सूची ठेकेदार को सौंपेगी, जहां से वोटर डेटा एकत्र किया जाएगा। हालांकि, कांट्रैक्ट पाने वाली कंपनी के पास अमेरिका के सभी 50 राज्यों से डेटा हासिल करने की पूरी तकनीकी क्षमता होनी आवश्यक है। एजेंसी का लक्ष्य हर प्रकार के संघीय चुनावों का इतिहास प्राप्त करना है, जिसमें आम चुनाव, प्राइमरी इलेक्शन, रनऑफ और विशेष चुनाव शामिल हैं। इस डेटा संग्रहण में मतदाता की राजनीतिक पार्टी से जुड़ी जानकारी भी शामिल हो सकती है। हालांकि शुरुआती कांट्रैक्ट दस्तावेज में कहा गया है कि ठेकेदार को सीधे तौर पर पार्टी संबद्धता का डेटा एकत्र करने के लिए नहीं कहा जाएगा, लेकिन होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स के सेक्शन चीफ माइकल रॉयर या किसी अधिकृत कांट्रैक्टिंग अधिकारी के लिखित निर्देश पर इसे तुरंत जोड़ा जा सकता है।\n\nहाल ही में जारी अधिग्रहण पूर्वानुमान दस्तावेजों से पता चलता है कि इस सरकारी कांट्रैक्ट की अनुमानित कीमत 20 लाख डॉलर से लेकर 50 लाख डॉलर (लगभग 16.5 करोड़ से 41.5 करोड़ रुपये) के बीच रखी गई है। इस अंतिम कांट्रैक्ट समझौते को आधिकारिक तौर पर जारी किए जाने की संभावना है, जिसकी समय सीमा 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। इस समय सीमा को देखते हुए माना जा रहा है कि कांट्रैक्ट बहुत जल्द आवंटित कर दिया जाएगा। जब इस विषय पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।\n\nप्राइवेसी की चिंताएं और राज्यों के अधिकारों पर बहस\nनागरिक अधिकारों के विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों ने इस राष्ट्रीय डेटाबेस पर गहरी चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी संबद्धता और व्यक्तिगत मतदान इतिहास को एक केंद्रीय संघीय एजेंसी के पास जमा करने से मतदाताओं के गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होता है। अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया पारंपरिक रूप से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है, न कि संघीय सरकार के। विस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स ने इस योजना का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि मतदान राज्यों का संवैधानिक मामला है और इसमें केंद्र सरकार या राष्ट्रपति को हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। उन्होंने इस तरह के कदमों को चुनाव प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े करने वाला करार दिया।\n\nराज्यों पर प्रशासनिक दबाव और फंडिंग रोकने की धमकियां\nयह नई पहल होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और प्रशासन द्वारा आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले अपनाए जा रहे सख्त रुख का हिस्सा है। इससे पहले न्याय विभाग ने भी राज्यों से बिना संपादन वाला पूरा वोटर रोल डेटा देने की मांग की थी, लेकिन कई राज्य सरकारों और स्थानीय अदालतों ने इसे देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके जवाब में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने राज्यों पर जांच में सहयोग करने का भारी प्रशासनिक दबाव बनाया। यहां तक कि चुनाव संबंधी नीतियों को लागू न करने वाले राज्यों को मिलने वाली आपातकालीन तैयारी और आतंकवाद-विरोधी फंडिंग रोकने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके अतिरिक्त, अवैध मतदान के संदेह में लोगों को देश से बाहर निकालने (डिपोर्टेशन) की चेतावनियां भी दी गईं, भले ही संबंधित व्यक्ति का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न हो। हालांकि सरकारी दावों के विपरीत, गैर-नागरिकों द्वारा वोट डालने की घटनाएं बेहद दुर्लभ पाई गई हैं। हाल ही में जॉर्जिया राज्य में हुई एक विस्तृत जांच में भी ऐसे नगण्य मामले ही सामने आए थे।\n\nचुनावी धोखाधड़ी की जांच का नया अभियान\nआगामी चुनाव से पहले होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने कुछ चुनिंदा राज्यों में कथित चुनावी गड़बड़ियों की जांच के लिए एक नया विशेष अभियान शुरू किया है। आंतरिक दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होता है कि इस अभियान के तहत जांच अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर इंटरव्यू करेंगे, सुरागों का पीछा करेंगे और अभियोजन पक्ष को जल्द से जल्द कानूनी समीक्षा के लिए मामले सौंपेंगे।\n\nव्यापक डेटा संग्रह का पुराना इतिहास\nयह पहला मौका नहीं है जब आव्रजन एजेंसी ने नागरिकों के व्यक्तिगत और चुनावी रिकॉर्ड तक पहुंच बनाने का प्रयास किया है। इससे पहले जुलाई महीने में एजेंसी ने थॉमसन रॉयटर्स के 'क्लियर' डेटाबेस का उपयोग करने के लिए 12.5 करोड़ डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का एक बड़ा सौदा किया था। उस डेटाबेस में नागरिकों के नाम, पते, संपत्ति के रिकॉर्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सोशल मीडिया प्रोफाइल और सार्वजनिक व निजी स्रोतों से एकत्र वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा शामिल थे। इसके अलावा जून में एजेंसी के अधिकारियों ने सीधे टेक्सास और नॉर्थ कैरोलिना के दो काउंटियों के स्थानीय चुनाव अधिकारियों से व्यक्तिगत वोटर रोल हासिल किए थे।\n\nइतना ही नहीं, पिछले वर्ष सामने आई जानकारियों के अनुसार, एक अन्य तकनीकी पहल 'डोज' (DOGE) के तहत सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन, आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस), होमलैंड सिक्योरिटी और पेन्सिलवेनिया व फ्लोरिडा के मतदान डेटा को मिलाकर एक विशाल मास्टर डेटाबेस तैयार किया जा रहा था। होमलैंड सिक्योरिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि विभिन्न विभागों के डेटा को आपस में क्रॉस-रेफरेंस करके नागरिकों की व्यापक प्रोफाइलिंग की जा रही है, जिसका वास्तविक उद्देश्य किसी वित्तीय बर्बादी या धोखाधड़ी को रोकने के बजाय बड़े पैमाने पर जानकारी जमा करना है।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले से अमेरिकी चुनाव प्रणाली, प्राइवेसी और नागरिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: अमेरिकी आव्रजन और डेटा सुरक्षा नीतियों पर नजर रखने वाले नीति निर्माताओं और प्रवासियों के लिए यह निर्णय डेटा प्राइवेसी पर अंतरराष्ट्रीय बहसों को प्रभावित कर सकता है।\n• अमेरिका में: देश भर के लगभग 16 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी और वोटिंग इतिहास अब एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी के पास जा सकता है, जिससे उनकी प्राइवेसी पर खतरा बढ़ गया है।\n• प्रवासी भारतीय और प्रवासियों के लिए: ग्रीन कार्ड धारकों या प्राकृतिक रूप से नागरिक बने प्रवासियों के लिए वोटर लिस्ट की कड़ी जांच और डिपोर्टेशन की चेतावनियों के कारण प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सख्त हो सकती हैं।\n• राज्य सरकारों के लिए: अमेरिकी राज्यों का अपने स्थानीय चुनाव डेटा पर अधिकार कमजोर हो सकता है, क्योंकि केंद्रीय एजेंसियां फंडिंग रोकने का दबाव बना रही हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आइस (ICE) का नया कांट्रैक्ट क्या है?\nयह 20 लाख से 50 लाख डॉलर का एक सरकारी कांट्रैक्ट है, जिसके तहत अमेरिका के सभी 50 राज्यों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वोटर रजिस्ट्रेशन और वोटिंग इतिहास का डेटा एकत्र किया जाएगा।\n\n2. इस डेटाबेस को बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या बताया गया है?\nगृह सुरक्षा जांच (HSI) इकाई के अनुसार, इसका उद्देश्य चुनावी धोखाधड़ी की पहचान करना और डेटा का विश्लेषण करना है।\n\n3. क्या इस डेटा में मतदाताओं की पार्टी संबद्धता भी शामिल होगी?\nशुरुआती कांट्रैक्ट में सीधे पार्टी डेटा नहीं मांगा गया है, लेकिन कांट्रैक्टिंग ऑफिसर के लिखित आदेश पर इसे कभी भी जोड़ा जा सकता है।\n\n4. राज्य सरकारों और विस्कॉन्सिन के गवर्नर ने क्या प्रतिक्रिया दी है?\nविस्कॉन्सिन के गवर्नर टोनी एवर्स और कई राज्यों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि मतदान राज्यों का विषय है और इसमें संघीय सरकार का हस्तक्षेप गलत है।\n\n5. क्या अमेरिका में गैर-नागरिकों द्वारा वोट डालने के बड़े मामले मिले हैं?\nनहीं, जॉर्जिया समेत विभिन्न राज्यों में हुई जांच से स्पष्ट हुआ है कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान के मामले बेहद नगण्य और दुर्लभ हैं।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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    "वोटर डेटाबेस",
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