# अमेरिका में मतदान केंद्रों पर ICE की हरकतों पर नजर रखने के लिए उतरे हजारों वॉलंटियर्स

> अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों के आसपास संघीय आव्रजन एजेंटों की मौजूदगी की आशंका के बीच, देश भर में नागरिक और स्वयंसेवी संगठन सक्रिय हो गए हैं। वॉलंटियर्स को तैनात किया जा रहा है ताकि किसी भी अनधिकृत कार्रवाई को कैमरे में कैद किया जा सके और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/amerika-men-matadana-kendron-para-ice-ki-harakaton-para-najara-rakhane-ke-lie-utare-hajaron-volunteers-52735 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिका चुनाव, ICE, मध्यावधि चुनाव, आप्रवासी, मतदान केंद्र, कम्युनिटी पेट्रोलिंग

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों के आसपास संघीय आव्रजन एजेंटों के संभावित दखल को रोकने के लिए देश भर में स्वयंसेवकों की भारी फौज तैयार हो गई है। हालिया महीनों में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी ICE की कार्यवाहियों से प्रभावित समुदायों में गहरी चिंता बनी हुई है, जिसके चलते नागरिक अधिकार समूहों और स्थानीय संगठनों ने कमर कस ली है।

 

## कम्युनिटी पेट्रोलिंग और ट्रेनिंग सेशन

ओहायो के कोलंबस शहर में अर्ली वोटिंग लोकेशन एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जो आप्रवासी आबादी से जुड़ा हुआ है। यहाँ के स्थानीय समूहों ने मतदान केंद्रों के करीब गश्त लगानी शुरू कर दी है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि चुनाव के दिन यह संख्या काफी बढ़ जाएगी। इन स्वयंसेवकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है कि वे संघीय एजेंटों की हरकतों को रिकॉर्ड करें और उसकी सूचना तुरंत व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म पर बने समूहों में साझा करें।

 वॉलंटियर्स को यह सिखाया जा रहा है कि वे एजेंटों के बर्ताव पर नजर रखें, उनकी वर्दी की पहचान करें और उनके वाहनों को पहचान सकें। इस तरह के प्रयास देश भर के कई अन्य शहरों में भी बड़े पैमाने पर दोहराए जा रहे हैं। नेशनल लेवल पर कॉमन कॉज, अमेरिकन सिविल लिबरटीज यूनियन और इंडिविजिबल जैसे संगठन ट्रेनिंग सेशन चला रहे हैं, जबकि एरिजोना में लिविंग यूनाइटेड फॉर चेंज और नॉरकैलब रेसिस्ट जैसे स्थानीय दल भी इसमें पूरी तरह जुटे हुए हैं।

 

## सरकारी पक्ष और विशेषज्ञों का रुख

आधिकारिक तौर पर होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर आईस एजेंटों को तैनात करने की कोई योजना नहीं है। विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि आईस खुफिया जानकारी के आधार पर लक्षित कार्रवाई करता है, और यदि किसी मतदान केंद्र पर कोई वास्तविक सार्वजनिक सुरक्षा खतरा उत्पन्न होता है, तो ही ऐसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों ने पिछले छह महीनों के दौरान इस तरह की तैनाती से साफ इनकार नहीं किया है।

 मई के महीने में जब ट्रंप से पूछा गया था कि क्या वे मध्यावधि चुनावों के दौरान नेशनल गार्ड या आईस को उतारेंगे, तो उनका कहना था कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा वह किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, चुनाव मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की व्यापक तैनाती जमीन पर शायद ही देखने को मिले। चुनाव नवाचार और अनुसंधान केंद्र के प्रमुख डेविड बेकर का कहना है कि यह या तो होगा नहीं और यदि कभी हुआ भी, तो वह केवल छिटपुट और आकस्मिक मामलों तक ही सीमित रहेगा।

 

## मतदाताओं में डर और डिजिटल वॉर रूम

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान जिन समुदायों को आईस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, वहाँ के लोग इस खतरे को बहुत वास्तविक मान रहे हैं। नेवादा के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट सिस्को एगुइलर ने बताया कि उनके राज्य में ग्रामीण इलाकों से लेकर लास वेगास तक लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मतदान स्थलों पर संघीय एजेंट मौजूद रहेंगे। वोोटो लातीनो की कार्यकारी निदेशक बीट्रिज लोपेज का भी मानना है कि लातीनो मतदाता इस प्रशासन के निशाने पर हैं क्योंकि वे कई कड़े मुकाबलों वाली सीटों का परिणाम तय करने की क्षमता रखते हैं।

 इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए लातीनो का संगठन चुनाव के दिन एक वॉर रूम संचालित करेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को भटकाने वाले वायरल फर्जी संदेशों की पहचान करना और उनका खंडन करना होगा। इसके अलावा वे इस आशंका के लिए भी तैयार हैं कि मतदान के दिन कुछ इलाकों में घरों पर छापे मारे जा सकते हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बन सकता है।

 

## तनाव कम करने के अनूठे तरीके और डिजिटल ट्रैकिंग

कोलंबस में 614 आईस वॉच जैसे संगठन मतदान केंद्रों के पास के मोहल्लों में छोटे-छोटे समूहों में गश्त कर रहे हैं ताकि कोई अकेला न पड़े। स्वयंसेवकों को तनाव की स्थिति से निपटने के लिए अजीब लेकिन प्रभावी तरीके सिखाए गए हैं, जैसे कि जरूरत पड़ने पर गुनगुनाना या गाना ताकि स्थिति को शांत रखा जा सके। उनका मुख्य उद्देश्य एजेंटों से उलझना नहीं बल्कि उनकी हरकतों का दस्तावेजीकरण करना है ताकि घटनाओं को सार्वजनिक किया जा सके।

 जनवरी में मिनीपोलिस में एलेक्स प्रेट्टी की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद 'आईज ऑन आइस' जूम ट्रेनिंग सेशन में दो लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था, जिसमें एजेंटों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के तरीके सिखाए गए थे। अब वही हुनर इन मध्यावधि चुनावों में काम आ रहा है। एरिजोना में लिविंग यूनाइटेड फॉर चेंज ने स्वयंसेवकों को संवैधानिक रक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया है और एक गुप्त हीट मैप तैयार किया है जिसके जरिए मारिकोपा और पिमा काउंटी में आईस की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है।

 

## सोशल मीडिया पर नजर और भविष्य की रणनीति

कैलिफोर्निया के सटर काउंटी में हाल ही में छह आईस वाहन एक मतदान केंद्र की पार्किंग में देखे गए जिसके बाद स्थानीय संगठन तुरंत सक्रिय हो गए। नॉरकैलब रेसिस्ट के अधिकारियों का कहना है कि जब इस तरह की गतिविधियों पर सामुदायिक ध्यान आकर्षित होता है, तो एजेंट अक्सर वहाँ से चले जाते हैं। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने सफाई दी थी कि वे मैक्सिको के एक अवैध आप्रवासी के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के सिलसिले में वहाँ मौजूद थे।

 इन सभी संगठनों के नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वे किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जमीनी स्तर के ये कार्यकर्ता और नागरिक सुरक्षा ढांचा इस बात की गारंटी दे रहे हैं कि यदि मतदान केंद्रों पर संघीय एजेंटों की सक्रियता बढ़ती है, तो उसकी तस्वीरें और दस्तावेज पलक झपकते ही पूरी दुनिया के सामने आ जाएंगे।

## इसका आप पर असर
अमेरिका में मतदान केंद्रों के पास संघीय एजेंटों की संभावित उपस्थिति से अप्रवासी समुदायों और मतदाताओं पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे मतदान प्रभावित होने की आशंका है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** देश भर के कई राज्यों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं और नागरिक समूहों की मदद ले रहे हैं।
- **स्थानीय स्तर पर:** कोलंबस और फीनिक्स जैसे शहरों में स्थानीय निवासी और वॉलंटियर्स मतदान केंद्रों के बाहर सुरक्षा और दस्तावेजीकरण के लिए गश्त कर रहे हैं।
- **सुरक्षा और निगरानी:** स्वयंसेवक किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सिग्नल और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए अपनी गतिविधियों का समन्वय कर रहे हैं।
- **डिसइन्फॉर्मेशन से बचाव:** विभिन्न संगठन फर्जी खबरों और अफवाहों का मुकाबला करने के लिए चुनाव के दिन विशेष वॉर रूम संचालित करेंगे।
- **कानूनी जागरूकता:** मतदाताओं को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति अमेरिकी प्रशासन की नीतियों और मध्यावधि चुनावों के दौरान मतदान सुरक्षा को लेकर चल रही बहसों के कारण उत्पन्न हुई है।

- **राजनीतिक बयानबाजी:** पिछले छह महीनों से राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों द्वारा मतदान केंद्रों पर सुरक्षा तैनाती की संभावनाओं से इनकार न करने के कारण यह चिंता फैली है।
- **समुदायों की सुरक्षा:** पूर्व में हुई कार्रवाइयों के बाद अप्रवासी समुदायों में बने डर को दूर करने के लिए नागरिक संगठनों ने मोर्चा संभाला है।
- **कानूनी स्थिति:** संघीय कानूनों के तहत मतदान केंद्रों पर सैन्य या आव्रजन बलों की तैनाती प्रतिबंधित है, फिर भी सुरक्षा को लेकर बहस जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. मतदान केंद्रों के पास कौन से संगठन गश्त कर रहे हैं?
614 ICE वॉच, ओहायो गुड नेबर नेटवर्क, इंडिविजिबल और नॉरकैलब रेसिस्ट जैसे दर्जनों स्थानीय और राष्ट्रीय संगठन गश्त कर रहे हैं।

### 2. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का इस मामले में क्या कहना है?
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों को लक्षित करने की कोई योजना नहीं है और एजेंट केवल खुफिया आधारित लक्षित कार्रवाई करते हैं।

### 3. स्वयंसेवक किस तरह से गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं?
वॉलंटियर्स एजेंटों की हरकतों को रिकॉर्ड करते हैं और सिग्नल तथा व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से लाइव जानकारी साझा करते हैं।

### 4. कितने स्वयंसेवक चुनाव के दिन तैनात होंगे?
कोलंबस जैसे शहरों में अकेले चुनाव के दिन लगभग 250 स्वयंसेवक मैदान में मौजूद रहेंगे।

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