अमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिल अमेरिका के कई अहम राज्यों में अटॉर्नी जनरल पद के रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाए हैं, जो 2028 के चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर एक गंभीर बहस शुरू हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी की ओर से मैदान में उतरे कई प्रमुख उम्मीदवार वे राजनेता हैं, जिन्होंने साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों को सार्वजनिक रूप से खारिज किया था। यह स्थिति केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। यदि ये उम्मीदवार अपने-अपने राज्यों में चुनाव जीत जाते हैं, तो वे न केवल छह साल पुराने चुनाव से जुड़े मामलों को दोबारा अदालत में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं, बल्कि साल 2028 के अगले राष्ट्रपति चुनाव के संचालन, सत्यापन और निगरानी में भी उनकी निर्णायक भूमिका होगी। अमेरिका की शासन व्यवस्था में राज्य का अटॉर्नी जनरल सबसे बड़ा कानूनी अधिकारी होता है। इस पद पर आसीन व्यक्ति की यह संवैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह राज्य के गवर्नर और संघीय सरकार दोनों की कानूनी सीमाएं तय करे और उन पर नियंत्रण रखे। चुनावी प्रशासन और मतपत्रों की सुरक्षा से जुड़े कानून अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं, लेकिन अटॉर्नी जनरल की भूमिका हर जगह कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की होती है। बीते कुछ महीनों में यह कार्यालय और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि विभिन्न राज्यों के कानूनी प्रमुखों ने चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण स्थापित करने, मतपत्रों को जब्त करने और अमेरिकी नागरिकों की निजी जानकारियों से भरी मतदाता सूचियों को हासिल करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के प्रयासों का कानूनी स्तर पर विरोध किया है। कानूनी जानकारों का स्पष्ट मानना है कि इस पद पर ऐसे व्यक्ति का होना आवश्यक है जो बिना किसी राजनीतिक दबाव के कानून के शासन और चुनावों के प्रमाणित परिणामों के प्रति निष्ठावान रहे। एरिजोना: वॉरेन पीटरसन और मैरीकोपा का विवादित ऑडिट एरिजोना जैसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्य में स्टेट सीनेटर वॉरेन पीटरसन रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से अटॉर्नी जनरल पद के उम्मीदवार हैं। वॉरेन पीटरसन उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने 2020 के चुनाव नतीजों को लेकर लगातार मुखर विरोध दर्ज कराया था। उस समय उन्होंने एक ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें कांग्रेस से डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में 11 वैकल्पिक इलेक्टोरल वोट स्वीकार करने का आग्रह किया गया था। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी सीनेट से एरिजोना के आधिकारिक निर्वाचकों की सूची को खारिज करने की मांग से जुड़े दस्तावेज का भी समर्थन किया था। वॉरेन पीटरसन की पहचान मैरीकोपा काउंटी में हुए उस चर्चित ऑडिट से भी जुड़ी है, जिसे साइबर निन्जास नामक एक निजी फर्म को सौंपा गया था। इस पूरी प्रक्रिया को मंजूरी दिलाने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही थी। इस ऑडिट में एरिजोना के करदाताओं के लाखों डॉलर खर्च हुए थे, लेकिन जब जांच पूरी हुई तो सामने आया कि जो बाइडन की जीत का अंतर पहले के मुकाबले और अधिक बड़ा था। इस वर्ष की शुरुआत में वॉरेन पीटरसन को एक ग्रैंड जूरी के समन का पालन करना पड़ा, जिसके तहत उन्होंने मैरीकोपा में 2020 के चुनाव की जांच कर रही एफबीआई को साइबर निन्जास ऑडिट से संबंधित दस्तावेज सौंपे। जुलाई में अपने प्राइमरी चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि यदि वे जीतते हैं तो अटॉर्नी जनरल कार्यालय की इलेक्शन इंटीग्रिटी यूनिट का विस्तार करके 2020 के मामले की फिर से कानूनी समीक्षा कराएंगे। उनका कहना था कि लोग समझ जाएंगे कि वे इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं, ठीक उसी तरह जैसे ट्रंप का न्याय विभाग अभी गंभीर है। मौजूदा चुनावी सर्वेक्षणों में वे अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी क्रिस मेयस के साथ बराबरी के मुकाबले में दिखाई दे रहे हैं। जॉर्जिया: ब्रायन स्ट्रिकलैंड और मतपत्रों की कानूनी निगरानी जॉर्जिया 2020 के चुनाव के बाद से ही चुनावी विवादों और कानूनी दावों का बड़ा केंद्र रहा है। यहाँ रिपब्लिकन पार्टी ने ब्रायन स्ट्रिकलैंड को अपना अटॉर्नी जनरल उम्मीदवार बनाया है। साल 2020 में एक राज्य सीनेटर के रूप में ब्रायन स्ट्रिकलैंड ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी। इस विज्ञप्ति में उन्होंने अधिकारियों से 2020 के चुनाव में तथाकथित धोखाधड़ी की गतिविधियों की जांच शुरू करने, जॉर्जिया के चुनाव का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और राज्य में नए मतदान नियम लागू करने का आह्वान किया था। ब्रायन स्ट्रिकलैंड ने ट्रंप प्रशासन के उन प्रयासों के साथ चलने की इच्छा भी जताई है जो 2020 के चुनाव की लगातार जांच से जुड़े हैं। इस साल जब एफबीआई के अधिकारियों ने फुल्टन काउंटी के चुनाव कार्यालयों पर तलाशी अभियान चलाया और 2020 के चुनाव के मतपत्रों को जब्त किया, तब ब्रायन स्ट्रिकलैंड ने इसे पारदर्शिता से भरा कदम करार दिया था। उन्होंने फरवरी में एक्स पर अपनी राय साझा करते हुए कहा था कि फुल्टन काउंटी सही तरीके से चुनाव कराने में सक्षम नहीं है और हर नागरिक को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास होना चाहिए। अटलांटा जर्नल कॉन्स्टिट्यूशन द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक सर्वेक्षण के अनुसार, ब्रायन स्ट्रिकलैंड अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी तान्या मिलर के साथ कड़े मुकाबले में बराबरी पर चल रहे हैं। कैनसस: क्रिस कोबैक का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड अन्य उम्मीदवारों के विपरीत, कैनसस में क्रिस कोबैक पहले से ही अटॉर्नी जनरल के पद पर कार्यरत हैं और नवंबर के चुनाव में अपने पद को बरकरार रखने के लिए दोबारा मैदान में हैं। वे 2022 के चुनाव में इस पद पर विजयी रहे थे और लंबे समय से चुनावी अनियमितताओं के दावों को आगे बढ़ाते रहे हैं। वे साल 2011 से 2019 तक कैनसस के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट भी रह चुके हैं। अपने उस कार्यकाल के दौरान क्रिस कोबैक ने दावा किया था कि राज्य की मतदाता सूची में लगभग 18,000 गैर-नागरिक शामिल हैं। हालांकि, उनका यह दावा एक ऐसे शोध पर आधारित था जिसकी अकादमिक रूप से समीक्षा नहीं हुई थी और उसमें केवल छह ऐसे लोगों की पहचान हुई थी जिन्होंने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया था या ऐसा करने का प्रयास किया था। वर्ष 2017 में जब डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी निष्पक्षता की जांच के लिए एक विशेष आयोग बनाया था, तो उसमें क्रिस कोबैक को भी नियुक्त किया गया था। इस आयोग को बहुत कम समय में बंद करना पड़ा क्योंकि उसे बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला था। साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद, क्रिस कोबैक ने चुनाव परिणाम पलटने की टेक्सास की कानूनी कोशिश में सलाहकार की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उन्होंने मिशिगन बोर्ड ऑफ स्टेट कैनवसर्स की एक सदस्य की भी मदद की थी, जो मिशिगन के 2020 के राष्ट्रपति चुनाव परिणामों को प्रमाणित करने वाले अपने फैसले को वापस लेने का प्रयास कर रही थीं। वर्ष 2022 में चुनावी दावों के समर्थक लिंडेल के साथ कैनसस की एक राजनीतिक रैली में वे मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए थे। हालिया चुनावी सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि क्रिस कोबैक का अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी क्रिस मान के साथ कड़ा और बेहद करीबी मुकाबला चल रहा है। मिशिगन: डग लॉयड और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का विचार मिशिगन में ईटन काउंटी के अभियोजक डग लॉयड ने इस साल रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल की है। इस दौड़ में पहले मैट डीपर्नो भी शामिल थे, जो 2020 के चुनाव के बाद वोटिंग मशीन पर अवैध कब्जा करने और साजिश रचने के गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। मैट डीपर्नो ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है और यह मामला जिला अदालत में विचाराधीन है। डग लॉयड को आमतौर पर चुनावी नतीजों को पूरी तरह खारिज करने वाले कट्टरपंथी नेता के तौर पर नहीं देखा जाता और वे खुद को अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी एली सैविट से अधिक नरमपंथी उम्मीदवार बताते हैं। लेकिन हाल ही में एमआई ट्रू रेड पॉडकास्ट के साथ बातचीत के दौरान जब उनसे 2020 के चुनाव को लेकर मतदाताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पुराने मामलों की नए सिरे से जांच कराने के संकेत दिए। डग लॉयड ने कहा कि उनका मानना है कि अटॉर्नी जनरल के पास यह अधिकार होता है कि वह अपने कार्यालय के जांच अधिकारियों या मिशिगन स्टेट पुलिस का उपयोग करके उन पुराने बिंदुओं की फिर से समीक्षा करा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस तरह के मामलों को अपने हाथ में लेना चाहेंगे। ताजा जनमत सर्वेक्षणों में डग लॉयड और उनके प्रतिद्वंद्वी लविट के बीच कांटे की टक्कर है और दोनों बराबरी पर दिखाई दे रहे हैं। नेवादा: एड्रियाना गुजमैन फ्रेलिक और सेव नेवादा एक्ट की मांग नेवादा में डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पद के लिए वकील एड्रियाना गुजमैन फ्रेलिक को अपना समर्थन दिया है। इस समर्थन का एक प्रमुख कारण यह माना जाता है कि उन्होंने नेवादा में सेव एक्ट का राज्यस्तरीय प्रारूप लागू करने का वादा किया है। यह वही कानून है जिसे ट्रंप राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी कांग्रेस से पारित कराने में सफल नहीं हो सके हैं। इस कानून के तहत मतदाता पंजीकरण के लिए पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिखाना अनिवार्य किया जाता है, जो देश के करोड़ों वैध अमेरिकी नागरिकों के पास तत्काल उपलब्ध नहीं होते। कानूनी और नागरिक अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नियमों से लाखों योग्य नागरिकों के मताधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एड्रियाना गुजमैन फ्रेलिक ने इस वर्ष की शुरुआत में फेसबुक पर लिखा था कि राष्ट्रपति ट्रंप सुरक्षित चुनावों के लिए लड़ रहे हैं जबकि वाशिंगटन इस दिशा में काम करने में देरी कर रहा है। उन्होंने कहा था कि नेवादा को इसके लिए इंतजार नहीं करना चाहिए और वे अटॉर्नी जनरल बनकर मतदाता सूची से गैर-नागरिकों को हटाने, मतदान के दिन ही सभी मतपत्रों की गिनती पूरी करने और सार्वभौमिक डाक मतदान प्रणाली को समाप्त करने के लिए कानून बनाएंगी। इसके साथ ही एड्रियाना गुजमैन फ्रेलिक को जॉय गिल्बर्ट का भी खुला समर्थन प्राप्त है। पूर्व मुक्केबाज और राजनीतिक कार्यकर्ता जॉय गिल्बर्ट 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल के बाहर आयोजित रैली में भी मौजूद थे, जहां वे एलेक्स जोन्स के साथ 1776 के नारे लगाते हुए वीडियो में देखे गए थे। हालांकि, नेवादा के हालिया चुनावी सर्वेक्षणों में एड्रियाना गुजमैन फ्रेलिक अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी निकोल कैनिजारो से 8 अंकों के अंतर से पीछे चल रही हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल पद पर होने वाले इन चुनावों के परिणाम देश की चुनावी व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को सीधे तौर पर बदल सकते हैं। • मतदान के नियमों पर प्रभाव: चुनाव जीतने पर कई उम्मीदवार कड़े नियम लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिसके तहत डाक मतदान पर रोक और पहचान पत्रों की कड़ी जांच शामिल है। इसका सीधा मतलब यह है कि लाखों आम मतदाताओं को वोट डालने के लिए पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र जैसे अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने पड़ सकते हैं। • चुनावी विवादों की पुनरावृत्ति: कई प्रमुख उम्मीदवार 2020 के चुनावी मामलों की दोबारा जांच कराने की तैयारी में हैं। इससे प्रशासनिक स्तर पर भारी कानूनी खर्च बढ़ सकता है और भविष्य के चुनावी नतीजों के प्रमाणीकरण में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। • नागरिक अधिकारों की सुरक्षा: अटॉर्नी जनरल राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है जो केंद्र और राज्य सरकारों के हस्तक्षेप से आम जनता के अधिकारों की रक्षा करता है। यदि इन पदों पर राजनीतिक पूर्वाग्रह वाले उम्मीदवार बैठते हैं तो निष्पक्ष जांच और चुनावी विश्वास कमजोर होने का जोखिम बढ़ जाता है। • 2028 के चुनाव पर असर: अगले राष्ट्रपति चुनाव में मतगणना, मतपत्रों की जब्ती और परिणामों के प्रमाणीकरण में इन अधिकारियों का कानूनी दखल बहुत बड़ा होगा। इससे परिणाम आने के बाद कानूनी टकराव और अदालती मुकदमों की संख्या में भारी इजाफा हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक स्थिति 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से शुरू हुए अविश्वास और कानूनी विवादों के लगातार बने रहने के कारण उत्पन्न हुई है। राज्य स्तर पर चुनावी नियमों और कानूनी अधिकारों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर एक नया रुख देखने को मिल रहा है। • 2020 के चुनाव नतीजों पर मतभेद: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए चुनावी गड़बड़ी के आरोपों को आधार बनाकर कई नेताओं ने अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार की। कई राज्यों में पार्टी का आधार इन आरोपों को राजनीतिक रूप से एक वैध मुद्दे के रूप में देखता है। • अटॉर्नी जनरल के पद की कानूनी शक्ति: पिछले कुछ समय में संघीय जांच एजेंसियों और प्रशासन के दखल को रोकने में राज्य के कानूनी प्रमुखों की भूमिका बेहद अहम साबित हुई है। इस कारण दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस संवैधानिक पद पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए जोर लगा रहे हैं। • कड़े मतदान कानूनों की मांग: कांग्रेस में संघीय स्तर पर नए नियम पारित न हो पाने के कारण राज्य स्तर पर कानून बनाकर डाक मतदान समाप्त करने और कड़े पहचान नियम लागू करने की कोशिशें तेज हुई हैं। सवाल-जवाब 1. यह विवाद किन प्रमुख अमेरिकी राज्यों से जुड़ा हुआ है? यह मामला मुख्य रूप से एरिजोना, जॉर्जिया, मिशिगन, नेवादा और कैनसस जैसे अहम राज्यों से जुड़ा हुआ है। 2. अमेरिकी राज्यों में अटॉर्नी जनरल की चुनावी भूमिका क्या होती है? अटॉर्नी जनरल राज्य का मुख्य कानूनी अधिकारी होता है, जो चुनावी कानूनों की व्याख्या करने, परिणामों के प्रमाणीकरण और कानूनी विवादों की निगरानी करता है। 3. एरिजोना के मैरीकोपा काउंटी में हुए ऑडिट का क्या परिणाम निकला था? निजी फर्म साइबर निन्जास द्वारा किए गए इस ऑडिट में सामने आया था कि जो बाइडन वास्तव में पहले की तुलना में अधिक मतों के अंतर से जीते थे। 4. सेव एक्ट का मुख्य प्रावधान क्या है और इस पर क्या चिंताएं हैं? इस कानून के तहत मतदाता पंजीकरण के लिए पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होता है, जिससे जानकारों के अनुसार लाखों वैध नागरिक मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। 5. कैनसस के अटॉर्नी जनरल क्रिस कोबैक ने मतदाता सूची को लेकर क्या दावा किया था? उन्होंने 18,000 गैर-नागरिकों के मतदाता सूची में होने का दावा किया था, जो एक गैर-समीक्षित अध्ययन पर आधारित था जिसमें केवल छह संदिग्ध मामले मिले थे। https://trendkia.com/politics/ameriki-chunava-2028-chunavi-natijon-ko-nakarane-vale-kai-republican-neta-attorney-general-ki-daura-men-shamila-53230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.