{
  "type": "article",
  "title": "अमित शाह के 10 बड़े फैसले, जिन्होंने बदल दी देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की तस्वीर",
  "summary": "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा, न्याय प्रणाली और सीमा प्रबंधन को पूरी तरह से बदल दिया है।",
  "content": "देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। बात चाहे जम्मू-कश्मीर से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम की हो या फिर देश की न्याय प्रणाली को आधुनिक रूप देने की, कई ऐसे नीतिगत कदम उठाए गए हैं जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के समीकरणों को पूरी तरह से नया आकार दिया है। सीमाओं की चौकसी बढ़ाने से लेकर पूर्वोत्तर के अशांत क्षेत्रों में शांति बहाली तक और उग्रवाद की जड़ों पर प्रहार करने से लेकर सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने तक, गृह मंत्रालय के स्तर पर लिए गए फैसलों ने देश की आंतरिक और बाह्य स्थिति को काफी हद तक मजबूत किया है। इन तमाम फैसलों के दूरगामी परिणामों ने देश की सुरक्षा और विकास की प्राथमिकताओं को एक नई दिशा दी है।\n\nअनुच्छेद 370 की समाप्ति और प्रशासनिक पुनर्गठन\nअगस्त 2019 के दौरान संसद में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया गया। इस प्रावधान के हटने के बाद उस भू-भाग को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इस राजनीतिक फैसले ने देश के उस हिस्से को मुख्यधारा से जोड़ने और वहां प्रशासनिक व्यवस्था को सीधे देश के बाकी हिस्सों की तरह लागू करने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित किया, जिससे वहां के स्थानीय विकास और व्यवस्था में मूलभूत बदलाव आए।\n\nनागरिकता संशोधन कानून के जरिए शरणार्थियों को राहत\nदिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून को अमल में लाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पड़ोसी देशों से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आने वाले शरणार्थियों के लिए नागरिकता के रास्ते आसान बनाना था। इस नियम के दायरे में उन अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को रखा गया, जिन्हें अपने मूल देशों में धर्म के आधार पर भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ा था। इस नीतिगत निर्णय ने मानवीय आधार पर उन पीड़ित लोगों को देश में कानूनी पहचान और सुरक्षा देने का काम किया जो वर्षों से उपेक्षित जीवन जी रहे थे।\n\nआपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव\nदेश के न्याय तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को आखिरकार अलविदा कह दिया गया। उनकी जगह भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS और भारतीय साक्ष्य अधिनियम यानी BSA को लागू किया गया। इन नए कानूनों के लागू होने से अदालती मुकदमों की सुनवाई, पुलिस जांच और अपराधियों को सजा दिलाने की पूरी प्रक्रिया कम समय लेने वाली और आधुनिक तकनीक पर आधारित हो गई, जिससे न्याय मिलने की रफ्तार में भी तेजी आई है।\n\nवामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई\nदेश के केंद्रीय और पूर्वी हिस्सों में फैले नक्सलवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए सुरक्षाबलों ने आक्रामक रणनीतियों का सहारा लिया। संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ-साथ विकासोन्मुखी नीतियों को भी उतनी ही तेजी से लागू किया गया। इन समन्वित अभियानों की वजह से वामपंथी उग्रवाद की नींव हिल गई और देश के इन अंदरूनी हिस्सों में हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वहां के स्थानीय नागरिकों के लिए सामान्य जीवन जीने के रास्ते खुले।\n\nपूर्वोत्तर में बोडो शांति समझौता\nअसम राज्य में दशकों से चले आ रहे अलगाववादी संघर्ष और खून-खराबे के दौर को हमेशा के लिए समाप्त करने के वास्ते 27 जनवरी 2020 को एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता हुआ। केंद्र सरकार, असम सरकार, ABSU और NDFB के प्रतिनिधियों के बीच इस ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते पर मुहर लगाई गई। इस समझौते के जरिए वर्षों पुरानी अशांति को समाप्त करने में बड़ी सफलता मिली और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित शांति और स्थिरता की बहाली सुनिश्चित हो सकी।\n\nआतंकवाद पर आर्थिक और कानूनी प्रहार\nराष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए NIA और UAPA जैसे कानूनों को और अधिक शक्तिशाली तथा प्रभावी बना दिया गया। इन कानूनी संशोधनों के माध्यम से देश की जांच एजेंसियों को घरेलू और बाहरी स्तर पर असामाजिक तथा आतंकवादी तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए अभूतपूर्व अधिकार प्राप्त हुए। इन शक्तियों के मिलने से आतंकी संगठनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने और उनके नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने में बहुत मदद मिली है.\n\nसहकारिता मंत्रालय का गठन और सहकार से समृद्धि\nदेश की ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने के लिए एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए अलग से सहकारिता मंत्रालय का सृजन किया गया। इस नए मंत्रालय के माध्यम से पैक्स यानी PACS के कामकाज का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और देश के कोने-कोने में सहकारिता आंदोलन को अधिक पारदर्शी तथा उपयोगी बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण स्तर पर किसानों और छोटे उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का एक नया और बड़ा मंच मिल रहा है।\n\nसीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा का डिजिटल कवच\nदेश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित, चौकस और अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया गया। इसमें ड्रोन सर्विलांस, स्मार्ट फेंसिंग और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इन तकनीकी उपायों से सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास तो हो ही रहा है, साथ ही साथ सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और तमाम अवैध गतिविधियों पर पैनी तकनीकी नजर रखना भी संभव हो पाया है।\n\nपूर्वोत्तर राज्यों में अन्य ऐतिहासिक शांति समझौते\nपूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में उग्रवाद से जुड़े पुराने और जटिल संघर्षों को सुलझाने के लिए सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण शांति समझौतों और आत्मसमर्पण अभियानों को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसके सकारात्मक परिणाम यह निकले कि हजारों की संख्या में भटके हुए युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा का दामन थामा और अपने-अपने क्षेत्रों के विकास में सक्रिय रूप से योगदान देना शुरू किया।\n\nआपदा प्रबंधन और राहत तंत्र का आधुनिकीकरण\nदेश में किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा या आपातकालीन स्थिति से तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF को अत्याधुनिक साजो-सामान से पूरी तरह लैस किया गया। इसके साथ ही देश भर में एक एकीकृत आपदा चेतावनी तंत्र भी स्थापित किया गया, जिसकी मदद से संभावित आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित किया जा सके और कम से कम समय में अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nगृह मंत्रालय के इन नीतिगत और सुरक्षा संबंधी फैसलों का देश के हर वर्ग और क्षेत्र पर सीधा और गहरा व्यावहारिक प्रभाव पड़ा है।\n\n• भारत में: देश भर के नागरिकों के लिए आंतरिक सुरक्षा का दायरा मजबूत हुआ है और आतंकवाद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से अदालती मुकदमों के निस्तारण में तेजी आई है और आम आदमी को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।\n• जम्मू-कश्मीर में: अनुच्छेद 370 हटने और पुनर्गठन के बाद से इस क्षेत्र में प्रशासनिक एकरूपता आई है और विकास कार्यों को सीधी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। स्थानीय स्तर पर व्यापार, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए रास्ते खुले हैं।\n• पूर्वोत्तर में: बोडो शांति समझौते और अन्य समझौतों के बाद से हिंसा का दौर थमा है और सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटा है। क्षेत्रों में विकास कार्यों के पहुंचने से युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए अवसर पैदा हुए हैं।\n• सीमावर्ती क्षेत्रों में: स्मार्ट फेंसिंग और ड्रोन सर्विलांस जैसी आधुनिक तकनीकों के तैनाती से घुसपैठ की घटनाओं पर लगाम लगी है। इससे सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत उनका विकास हो रहा है।\n• ग्रामीण अर्थव्यवस्था में: सहकारिता मंत्रालय के गठन और पैक्स के आधुनिकीकरण से किसानों और ग्रामीण उत्पादकों को सीधा वित्तीय लाभ मिल रहा है। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ने से ग्रामीण ऋण और कृषि सहायता तक पहुंच आसान हुई है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइन कड़े और ऐतिहासिक फैसलों के पीछे लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतें, पुरानी कानूनी व्यवस्थाओं की कमियां और आंतरिक स्थिरता को मजबूत करने का राजनीतिक संकल्प था।\n\n• ऐतिहासिक और कानूनी विसंगतियां: देश की सुरक्षा में आ रही बाधाओं और औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को हटाने की लंबे समय से मांग थी, जिन्हें आधुनिक समय की जरूरतों के अनुकूल बदला जाना आवश्यक था।\n• अलगाववाद और आतंकवाद की चुनौती: जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में दशकों से चल रहे संघर्ष, उग्रवाद और आतंकवाद की फंडिंग को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता थी।\n• सीमा पार से सुरक्षा खतरे: सीमाओं पर बढ़ती घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए पारंपरिक सुरक्षा के बजाय डिजिटल तकनीक और आधुनिक सर्विलांस प्रणालियों को अपनाना अनिवार्य हो गया था।\n• ग्रामीण और कृषि क्षेत्र की उपेक्षा: देश की रीढ़ माने जाने वाले कृषि और ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूत करने के लिए एक समर्पित संस्थागत ढांचे का अभाव था, जिसे पूरा करने के लिए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अनुच्छेद 370 को कब समाप्त किया गया था?\nअगस्त 2019 में संसद के माध्यम से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया था।\n\n2. नागरिकता संशोधन कानून कब लागू हुआ था?\nदिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून को लागू किया गया था।\n\n3. बोडो शांति समझौता कब साइन हुआ था?\nबोडो शांति समझौते पर 27 जनवरी 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे।\n\n4. सहकारिता मंत्रालय के गठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nसहकारिता मंत्रालय का गठन ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया गया है।\n\n5. औपनिवेशिक कानूनों की जगह किन नए कानूनों को लाया गया है?\nपुराने कानूनों की जगह BNS, BNSS और BSA को लागू किया गया है।\n\n6. एनआईए और यूएपीए कानूनों में बदलाव क्यों किए गए?\nआतंकवाद के वित्तपोषण और राष्ट्र-विरोधी ताकतों पर प्रभावी ढंग से नकेल कसने के लिए इन्हें मजबूत किया गया।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/amit-shah-ke-10-bade-faisle-jinhone-badal-di-desh-ki-suraksha-ki-tasveer-50564",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-22",
  "tags": [
    "अमित शाह",
    "अनुच्छेद 370",
    "राष्ट्रीय सुरक्षा",
    "सहकारिता मंत्रालय",
    "यूएपीए",
    "नागरिकता संशोधन कानून"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}