अमित शाह का राजनीतिक सफर, बूथ प्रबंधन से लेकर चाणक्य कहलाने तक की पूरी कहानी भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजनीतिक जीवन, बड़े फैसलों और उनकी कार्यशैली के बारे में जानिए। भारतीय राजनीति में कुछ चेहरे केवल अपनी पहचान बनाते हैं, जबकि कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल देने वाले फैसलों के लिए जाने जाते हैं। एक ऐसा ही प्रमुख नाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का है। संगठन की बारीकियों से लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने तक, संसद में बड़े और कड़े फैसले लेने से लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने तक, अमित शाह का राजनीतिक सफर कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह रहा है। शुरुआती राजनीतिक सफर और संघ से जुड़ाव चट्टान जैसी बड़ी चुनौती हो, बेहद साहसिक फैसले लेने हों या फिर राजनीति की पेचीदगी भरी रणनीति तैयार करने का मौका हो, अमित शाह का स्टाइल हमेशा से सबसे जुदा रहा है। उनका तेज दिमाग, अटल इरादे और ऐक्शनमैन वाली छवि देश के गृह मंत्री की मुख्य पहचान बन चुकी है। उनका चुनावी मैनेजमेंट बेजोड़ माना जाता है और उनकी फैसले लेने की तेजी अद्भुत है। अमित शाह के राजनीतिक जीवन की कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके जुड़ाव से शुरू होती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में उनकी सक्रियता ने उनके नेतृत्व कौशल को निखारा और फिर भारतीय जनता पार्टी के संगठन में वह अपने उरूज पर पहुंच गया। उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तब उत्तर प्रदेश राज्य में पार्टी की रणनीति और उसके संगठनात्मक विस्तार में अमित शाह की भूमिका की विशेष रूप से चर्चा हुई। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनके कार्यकाल और देश के अलग-अलग राज्यों में बीजेपी के प्रभाव को बढ़ाने की उनकी कोशिशों ने उनकी राजनीतिक पहचान को और अधिक मजबूत कर दिया। साल 2019 में अमित शाह देश के केंद्रीय गृह मंत्री बने। उसी साल उन्होंने गांधीनगर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। एक कुशल संगठनकर्ता से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक का यह सफर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में शुमार है। हालांकि अमित शाह की पहचान सिर्फ चुनावी रणनीति तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि गृह मंत्री बनने के बाद उनके सामने ऐसे बड़े फैसले आए जिनका देश की राजनीति और सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है। महत्वपूर्ण राजनीतिक और विधायी पड़ाव अमित शाह के राजनीतिक सफर में कई ऐसे वर्ष और पड़ाव आए हैं जिन्होंने देश की दिशा तय की है। • 1980 का दशक: यह उनका शुरुआती राजनीतिक सफर था, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव हुआ और फिर उन्होंने बीजेपी संगठन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। • 2014: इस वर्ष वह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संगठन और चुनावी प्रबंधन की बेहद अहम जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभाली। • 2019: इस साल वह देश के केंद्रीय गृह मंत्री बने और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधायी फैसलों की कमान संभाली। • 2021: इस साल उन्हें सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई और देश में सहकारी क्षेत्र के लिए एक अलग केंद्रीय मंत्रालय का गठन किया गया। अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन कानून अमित शाह के गृह मंत्री के कार्यकाल का जिक्र हो और अनुच्छेद 370 का नाम न आए, ऐसा कतई संभव नहीं है। 5 अगस्त 2019 को संसद के पटल पर अमित शाह ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के जरिए मिलने वाले विशेष दर्जे को समाप्त करने की पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और राज्य का पुनर्गठन किया गया। यह फैसला भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक और सबसे ज्यादा बहस वाले अध्यायों में शामिल हो गया। इस बड़े फैसले के बाद नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए भी संसद से आसानी से पारित कर लिया गया। सरकार ने इस कानून के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम समुदायों के उन लोगों को भारत की नागरिकता देने का रास्ता साफ किया जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके थे और सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करते थे। आपराधिक न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव इसके बाद देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का दौर शुरू हुआ। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम नाम से तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू कर दिए गए। सरकार ने इन तीनों नए कानूनों को ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर की पुरानी आपराधिक न्याय व्यवस्था से आगे बढ़ने और आज की आधुनिक जरूरतों के हिसाब से न्याय प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया। अमित शाह के कार्यकाल के प्रमुख फैसले उनके अब तक के कार्यकाल में कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं, जिनका देश की आंतरिक सुरक्षा और कानूनों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। • अनुच्छेद 370 (2019): इसके तहत जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे में बड़ा बदलाव किया गया और राज्य का पुनर्गठन किया गया। • सीएए (2019): पड़ोसी देशों के चुनिंदा और निर्दिष्ट समुदायों के पात्र लोगों के लिए देश की नागरिकता का विशेष प्रावधान किया गया। • तीन नए आपराधिक कानून (2024): देश में पुरानी न्याय व्यवस्था को बदलते हुए आपराधिक कानूनों की बिल्कुल नई व्यवस्था को लागू किया गया। संसदीय रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर रुख अमित शाह की कार्यशैली की यह एक मुख्य पहचान रही है कि वह किसी भी मुद्दे को सर्वोच्च राजनीतिक प्राथमिकता बनाते हैं, उसके लिए संसद के भीतर मजबूत रास्ता तैयार करते हैं और फिर सरकार के उस फैसले को पूरे देश के सामने बहुत दृढ़ता के साथ रखते हैं। फैसलों की यही राजनीति अमित शाह को उनके समर्थकों की नजर में एक बेहद निर्णायक नेता के रूप में स्थापित करती है। उनके लिए संसद सिर्फ बहस करने का कोई मंच भर नहीं है, बल्कि राजनीतिक संकल्पों को ठोस कानून में बदलने का एक पक्का रास्ता है। उनके भाषणों में राष्ट्रीय सुरक्षा, संवैधानिक बदलाव, हिंदी भाषा, नक्सलवाद के खात्मे और एक विकसित भारत की राजनीतिक सोच जैसे विषय बार-बार प्रमुखता से सामने आते हैं। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 पर संसद में बोलते हुए उन्होंने सरकार के इस फैसले को लंबे समय से चले आ रहे एक बड़े राजनीतिक संकल्प की पूर्ति के रूप में पेश किया था। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में उनका संदेश हमेशा से बहुत स्पष्ट रहा है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई करने और देश की सुरक्षा से जुड़े हर मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात शामिल है। राजनीति के चाणक्य कहे जाने के पीछे की वजह भारतीय राजनीति में अमित शाह के नाम के साथ अक्सर चाणक्य शब्द जोड़ा जाता है, लेकिन आखिर इस उपमा और उपाधि के पीछे की असली वजह क्या है? उनकी पूरी राजनीतिक शैली में पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़, चुनावी गणित की बेहद गहरी समझ, जमीनी कार्यकर्ताओं के एक विशाल नेटवर्क पर पूरा जोर और किसी भी बड़े लक्ष्य को बिल्कुल छोटे-छोटे स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू करने की कोशिश साफ तौर पर दिखाई देती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल पार्टी के देशव्यापी विस्तार और चुनावी अभियानों के लिहाज से बेहद अहम रहा है। उत्तर प्रदेश में 2014 की ऐतिहासिक लोकसभा जीत के बाद उनकी चुनावी रणनीति की गूंज पूरे राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दी थी। उनकी कार्यशैली का एक और सबसे अहम पहलू यह है कि वह किसी भी बड़े राजनीतिक लक्ष्य को सीधे बूथ स्तर तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करते हैं। किस इलाके में कौन-सा सामाजिक समीकरण फिट बैठता है, किस क्षेत्र में संगठन की ताकत थोड़ी कम है और कहां पर पार्टी कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय करने की सख्त जरूरत है, चुनावी प्रबंधन की इन तमाम बारीकियों पर उनका हमेशा से बहुत बारीक फोकस रहा है। इसका आप पर असर अमित शाह के राजनीतिक फैसलों और संगठनात्मक रणनीतियों का देश के नीतिगत ढांचे, आंतरिक सुरक्षा और विधायी बदलावों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • भारत में: केंद्र सरकार द्वारा लिए जाने वाले बड़े नीतिगत और सुरक्षा संबंधी फैसले देश के हर नागरिक की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से संपूर्ण देश की न्यायिक प्रक्रिया और अदालती कामकाज में आधुनिक बदलाव आए हैं। • गुजरात में: गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र और स्थानीय स्तर पर उनके राजनीतिक फैसलों और विकास कार्यों का सीधा असर क्षेत्रीय मतदाताओं और स्थानीय विकास योजनाओं पर देखा जाता है। ऐसा क्यों हुआ भारतीय राजनीति में अमित शाह के कद और उनकी रणनीतिक सफलताओं के पीछे दशकों का संगठनात्मक परिश्रम और वैचारिक प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक का उनका सफर उनके राजनीतिक कौशल को गढ़ता है। • संगठनात्मक पृष्ठभूमि: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आरएसएस के साथ शुरुआती जुड़ाव ने उन्हें जमीनी स्तर के संगठन की गहरी समझ दी। • रणनीतिक विस्तार: साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की रणनीतिक जीत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक मास्टर रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया। • वैचारिक प्रतिबद्धता: अनुच्छेद 370 और सीएए जैसे मुद्दों पर दशकों से पार्टी द्वारा किए जा रहे वैचारिक संकल्पों को विधायी रूप देना उनकी कार्यशैली का मुख्य आधार रहा है। सवाल-जवाब 1. अमित शाह वर्तमान में किस पद पर हैं? अमित शाह वर्तमान में देश के केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। 2. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 कब हटाया गया था? संसद में अनुच्छेद 370 को हटाने से जुड़ा बड़ा ऐलान 5 अगस्त 2019 को किया गया था। 3. नए आपराधिक कानून देश में कब से लागू हुए हैं? तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं। 4. अमित शाह ने किस वर्ष बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था? अमित शाह ने वर्ष 2014 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था। https://trendkia.com/politics/amita-shaha-political-journey-from-booth-management-to-being-called-chanakya-50542 TrendKia — Har trend, sabse pehle.