{
  "type": "article",
  "title": "अमरावती अस्पताल के NICU में आग से 3 नवजात शिशुओं की मौत, पुरानी सुरक्षा रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालने पर सरकार घिरी",
  "summary": "अमरावती के जिला महिला अस्पताल में एनआईसीयू वेंटिलेटर में धमाके से लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की जान चली गई, जिसके बाद विपक्ष ने सुरक्षा ऑडिट और 2021 की रिपोर्ट पर कार्रवाई न होने को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है।",
  "content": "महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब नवजात गहन देखभाल इकाई यानी एनआईसीयू (NICU) विभाग में अचानक आग लग गई। इस भीषण हादसे में तीन नवजात शिशुओं की जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए हैं। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, एनआईसीयू वार्ड में रखे एक वेंटिलेटर में हुए अचानक विस्फोट की वजह से यह आग फैली। अस्पताल के भीतर हुए इस दुखद हादसे के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है और विपक्षी नेताओं ने मौजूदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र और स्वास्थ्य विभाग की आपराधिक लापरवाही करार दिया है।\n\nसुरक्षा ऑडिट और कड़ी कार्रवाई की मांग\nइस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चे के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के कारण अपने नवजात को खो देने का दर्द बयां करना मुश्किल है। सुप्रिया सुले ने कहा, \"यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था में लापरवाही का नमूना है।\" उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और गहन जांच कराने की मांग रखी। इसके साथ ही उन्होंने दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से फायर ऑडिट और चिकित्सा उपकरणों का सेफ्टी चेक पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने मृत शिशुओं के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायल बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की।\n\n2021 की रिपोर्ट और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल\nएनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने इस दुर्घटना पर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी सरकारी संस्थान में ऐसी भयानक घटनाएं घटती हैं, तो हमेशा गरीब और असहाय लोगों को ही अपनी जान गंवानी पड़ती है। सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, \"इस सरकार में गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है।\" उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग केवल बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों का ध्यान रखते हैं, जबकि आम जनता की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।\n\nरोहित पवार ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों और छात्रावासों में लगभग 44,000 बच्चों की अकाल मौत हो चुकी है। इन मौतों के पीछे कुपोषण, गंभीर बीमारियों, हादसों और सांप के काटने जैसे विभिन्न कारण शामिल हैं, लेकिन सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वर्ष 2021 की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि तब भी इसी तरह का एक बड़ा अस्पताल हादसा हुआ था। उसके बाद सरकार ने राज्य भर के अस्पतालों का विस्तृत ऑडिट करने और जरूरी सुरक्षा सुधारों की सिफारिश करने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। हालांकि, समिति की उन सिफारिशों पर कोई अमल नहीं किया गया और रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी रही। उन्होंने मांग की कि सरकार उस 2021 की रिपोर्ट के आधार पर छह महीने का विशेष एक्शन प्लान लागू करे और सार्वजनिक रूप से बताए कि राज्य के हर तालुका स्तर के सरकारी अस्पताल में क्या सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं।\n\nअस्पताल की जमीनी हकीकत और बुनियादी सुविधाओं का अभाव\nघटना की जानकारी मिलते ही पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता यशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने अमरावती के जिला महिला अस्पताल का दौरा किया और जमीनी स्थितियों का जायजा लिया। अस्पताल परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल के पास बुनियादी सुरक्षा साधन तक मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि मौके पर दमकल की गाड़ियां और जरूरी अग्निशमन उपकरण समय पर उपलब्ध नहीं हो सके, जो कि सीधे तौर पर सत्तापक्ष की विफलता को दर्शाता है।\n\nयशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, \"अक्सर लोगों के फोन आते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर ही मौजूद नहीं हैं।\" उन्होंने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों को खुद अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को बुलाना पड़ता है। उन्होंने हाल ही की एक दर्दनाक घटना का हवाला देते हुए बताया कि कुछ दिन पहले एक गर्भवती महिला इलाज के लिए इस अस्पताल में आई थी। लेकिन डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों द्वारा समय पर ध्यान न दिए जाने के कारण उस महिला के बच्चे की पेट में ही मौत हो गई थी। विपक्षी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि अगर अस्पताल प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से सबक लिया होता और सुरक्षा ऑडिट पर अमल किया होता, तो आज इन तीन मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: यह हादसा सरकारी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच तथा सेफ्टी ऑडिट के महत्व को रेखांकित करता है।\n• महाराष्ट्र में: राज्य भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में अग्निशमन उपकरणों और वेंटिलेटर जैसे मेडिकल गैजेट्स के तत्काल सुरक्षा परीक्षण की मांग तेज हो गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमरावती के अस्पताल में आग लगने की मुख्य वजह क्या थी?\nअमरावती जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में रखे एक वेंटिलेटर में अचानक हुए विस्फोट के कारण यह आग लगी।\n\n2. इस हादसे में कुल कितने बच्चों की जान गई है?\nइस दर्दनाक हादसे में तीन नवजात शिशुओं की जान चली गई, जबकि कुछ अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।\n\n3. एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने क्या मांगें रखी हैं?\nसुप्रिया सुले ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और महाराष्ट्र के सभी अस्पतालों का तत्काल फायर तथा मेडिकल इक्विपमेंट ऑडिट कराने की मांग की है।\n\n4. विधायक रोहित पवार ने 2021 की समिति रिपोर्ट को लेकर क्या दावा किया?\nरोहित पवार ने कहा कि 2021 के अस्पताल हादसे के बाद गठित विशेष समिति ने ऑडिट रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।\n\n5. पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने अस्पताल प्रशासन पर क्या आरोप लगाए?\nयशोमती ठाकुर ने अस्पताल में दमकल सुविधाओं के अभाव, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और लापरवाही के कारण नवजात शिशुओं की जान जाने का आरोप लगाया।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/amravati-aspatala-ke-nicu-men-aga-se-3-navajata-shishuon-ki-mauta-purani-suraksha-riporta-thnde-baste-men-dalane-para-sarakara-ghi-21113",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-24",
  "tags": [
    "अमरावती अस्पताल आग",
    "महाराष्ट्र राजनीति",
    "सुप्रिया सुले",
    "रोहित पवार",
    "यशोमती ठाकुर",
    "एनआईसीयू हादसा"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}