# आनंद शर्मा और शशि थरूर ने राहुल गांधी के सहयोगियों को दिखाया आईना, कहा- भारत में तख्तापलट जैसी कोई गुंजाइश नहीं

> कांग्रेस नेताओं आनंद शर्मा और शशि थरूर ने रिजीम चेंज की बात करने वालों को आड़े हाथों लिया है। वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/anand-sharma-aura-shashi-tharoor-ne-rahul-gandhi-ke-sahayogiyon-ko-dikhaya-aina-kaha-bharata-men-takhtapalata-jaisi-koi-gunjaisha--49503 · **Language:** Hindi
**Tags:** राहुल गांधी, आनंद शर्मा, शशि थरूर, स्मृति ईरानी, शिवराज सिंह चौहान, कांग्रेस, बीजेपी, राजनीति

कांग्रेस पार्टी के भीतर ही राहुल गांधी के नेतृत्व और उनके सहयोगियों द्वारा दिए जा रहे बयानों पर बड़ा वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भले ही विपक्ष की अगुवाई कर रहे हों, लेकिन उनकी ही पार्टी के कद्दावर नेताओं ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि देश में किसी भी प्रकार के तख्तापलट या रिजीम चेंज की बात की जाए। कांग्रेस के सीनियर लीडर आनंद शर्मा ने ऐसे बयानों को पूरी तरह गैर-जिम्मेदार करार दिया है और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो लोग इस तरह के ख्वाब देख रहे हैं, वे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना से पूरी तरह अनजान हैं। आनंद शर्मा के मुताबिक एक लोकतांत्रिक देश में सिर्फ निष्पक्ष चुनावों के जरिए सरकारें चुनी जाती हैं और बदली जाती हैं, जबकि तख्तापलट जैसी अवधारणा का यहाँ कोई स्थान नहीं होता है।

 

## शशि थरूर का समर्थन और नेपाल-बांग्लादेश वाली तुलना पर तंज
 कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी आनंद शर्मा के इन विचारों का पूरी तरह समर्थन किया है। शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र है जहाँ सत्ता परिवर्तन केवल और केवल जनता के वोटों के माध्यम से संभव है। जो लोग भारत की तुलना पड़ोसी देशों से करने की कोशिश कर रहे हैं, वे भारी गलतफहमी के शिकार हैं। शशि थरूर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत में रिजीम चेंज जैसी कोई व्यवस्था नहीं हो सकती क्योंकि यह बांग्लादेश नहीं बल्कि भारत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली लड़ाई स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए है, ताकि नागरिकों को अपने मताधिकार का पूरा हक मिल सके और वे अपनी पसंद की सरकार चुन सकें, भले ही वे सरकार के मौजूदा नुमाइंदों को नापसंद ही क्यों न करते हों। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का रिजीम चेंज की भाषा से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। इस बीच, यह बयानबाजी उस घटनाक्रम के बाद तेज हुई है जब **वकील प्रशांत भूषण ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे और रिजीम चेंज लाकर ही दम लेंगे।**

 

## शिवराज सिंह चौहान का राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा प्रहार
 जब कांग्रेस पार्टी के अपने वरिष्ठ नेताओं ने ही रिजीम चेंज के इस नैरेटिव की हवा निकाल दी, तो भारतीय जनता पार्टी को राहुल गांधी पर हमला करने का एक और मौका मिल गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता 99 बार अपनी राजनीतिक लॉन्चिंग के क्वालिटी चेक में बुरी तरह फेल हो चुके हैं, वे आज बीजेपी की एक्सपायरी डेट तय करने चले हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से हर संभव दांव आजमा लिए, लेकिन देश की जनता ने हर बार राहुल गांधी के प्रयासों को धराशायी कर दिया है। शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि आज देश के प्रत्येक नागरिक का नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अटूट विश्वास है और जब तक यह जनसमर्थन और भरोसा कायम है, तब तक विपक्ष के नेता इसी तरह हताशा और बौखलाहट में बयान देते रहेंगे।

 

## स्मृति ईरानी ने लगाया गंभीर आरोप
 इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी भी पीछे नहीं रहीं और उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी को अपनी तीखी आलोचना का निशाना बनाया। स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी का असली चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। अतीत में वह तथाकथित टुकड़े-टुकड़े गैंग के पैरोकार रहे हैं और अब बांग्लादेश जैसे मॉडल को देश में लागू करके रिजीम चेंज करने के खतरनाक ख्वाब देख रहे हैं। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि बांग्लादेश में किस तरह से अल्पसंख्यकों और हिंदुओं का नरसंहार हुआ था। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी और उनके राजनीतिक सहयोगी उसी तर्ज पर रिजीम चेंज के नाम पर भारत में भी हिंदुओं का नरसंहार करवाना चाहते हैं?

## इसका आप पर असर
देश के राजनीतिक घटनाक्रम का असर आम नागरिकों और दैनिक गतिविधियों पर सीधे तौर पर तो नहीं पड़ता, लेकिन यह देश की राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत दिशा को जरूर प्रभावित करता है।

- **भारत में:** देश भर के नागरिकों के लिए इस प्रकार की बयानबाजी से राष्ट्रीय राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण और तेज हो सकता है। आम जनता को चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर बहस के बीच अपनी रोजमर्रा की चिंताओं और आर्थिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के रुख का सामना करना पड़ता है।

- **राजनीतिक स्तर पर:** राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं के लिए यह घटना कांग्रेस पार्टी के आंतरिक मतभेदों को स्पष्ट करती है। इस तरह के आंतरिक विरोधाभास आगामी चुनावों में विपक्ष की रणनीति और उनके सांगतिक तालमेल को प्रभावित कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा राजनीतिक विवाद हाल ही में विपक्षी खेमे और बाहर से आए कुछ बयानों के कारण उपजा है, जिसमें सरकार के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए व्यवस्था परिवर्तन की बात की गई थी।

- **विवादास्पद बयान:** हाल ही में कुछ वकीलों और नेताओं द्वारा देश में रिजीम चेंज लाने की खुली बातें कही गईं, जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई।

- **पार्टी के भीतर मतभेद:** कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का यह मानना था कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ है, जिससे पार्टी के भीतर ही वैचारिक स्पष्टता लाने की जरूरत महसूस हुई।

- **सत्तारूढ़ दल की प्रतिक्रिया:** बीजेपी ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए विपक्ष की कमजोरियों और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए, जिससे यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का मुख्य विषय बन गया।

## सवाल-जवाब

### 1. आनंद शर्मा ने रिजीम चेंज की बात करने वालों के बारे में क्या कहा?
आनंद शर्मा ने ऐसे नेताओं को गैर-जिम्मेदार करार देते हुए कहा कि जो लोग रिजीम चेंज का ख्वाब देख रहे हैं, वे लोकतंत्र का सही अर्थ नहीं जानते।

### 2. शशि थरूर ने भारत की तुलना किन देशों से करने वालों को गलत बताया?
शशि थरूर ने कहा कि जो लोग भारत को नेपाल और बांग्लादेश बनाने की बात करते हैं, वे किसी बड़ी गलतफहमी के शिकार हैं।

### 3. शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर क्या तंज कसा?
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो नेता 99 बार अपनी लॉन्चिंग के क्वालिटी चेक में फेल हो चुके हैं, वे बीजेपी की एक्सपायरी डेट बता रहे हैं।

### 4. स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर क्या गंभीर आरोप लगाया?
स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले टुकड़े-टुकड़े गैंग को सपोर्ट करते थे और अब बांग्लादेश मॉडल अपनाकर रिजीम चेंज करना चाहते हैं।

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