# आंध्र प्रदेश निकाय चुनावों में एनडीए का दबदबा, वाईएस जगन मोहन रेड्डी बोले- चंद्रबाबू नायडू की नैतिक हार

> आंध्र प्रदेश के ग्रामीण निकाय चुनावों में एनडीए ने भारी जीत दर्ज की है। हार के बाद वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक हार बताया, जबकि टीडीपी ने इसे सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर करार दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/andhra-pradesh-nikaya-chunavon-men-nda-ka-dabadaba-ys-jagan-mohan-reddy-bole-chandrababu-naidu-ki-naitika-hara-57913 · **Language:** Hindi
**Tags:** आंध्र प्रदेश राजनीति, एनडीए गठबंधन, वाईएस जगन मोहन रेड्डी, चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण, स्थानीय निकाय चुनाव

आंध्र प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की जोड़ी का मजबूत प्रभाव देखने को मिला है। राज्य में हाल ही में संपन्न हुए ग्रामीण निकाय चुनावों के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर एनडीए गठबंधन की पकड़ बेहद मजबूत है। इस बड़ी चुनावी सफलता से पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस को करारा झटका लगा है। जिला परिषद और मंडल परिषद के इन अहम चुनावों में एनडीए समर्थित उम्मीदवारों ने रिकॉर्ड संख्या में जीत हासिल की। हालांकि, इन नतीजों के सामने आने के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है और पराजय के बाद वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने परिणामों को सहजता से स्वीकार करने के बजाय पूरी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि चंद्रबाबू नायडू भले ही कागजों पर चुनाव जीत गए हों, लेकिन जनता की नजरों में यह उनकी नैतिक हार है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव जरूर हारी है, लेकिन उसने आम जनता का सच्चा दिल जीता है।

## राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों में एनडीए की भारी बढ़त
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एनडीए गठबंधन ने जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों यानी जेडपीटीसी की कुल 582 सीटों में से 273 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। इसके अलावा, मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों यानी एमपीटीसी की कुल 7,767 सीटों में से भारी बहुमत के साथ 5,597 सीटें इस गठबंधन के पाले में आई हैं। इन आंकड़ों के भीतर वे सीटें भी शामिल हैं जिन पर उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल की थी। इस पूरे चुनावी प्रदर्शन में तेलुगु देशम पार्टी सबसे आगे रही, जिसने अकेले दम पर 229 जेडपीटीसी और 4,823 एमपीटीसी सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं, पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जनसेना पार्टी के खाते में 36 जेडपीटीसी और 644 एमपीटीसी सीटें आईं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 8 जेडपीटीसी और 130 एमपीटीसी सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराया। इसके मुकाबले वाईएसआर कांग्रेस को केवल 20 जेडपीटीसी और 1,050 एमपीटीसी सीटों से ही संतोष करना पड़ा। इन नतीजों के आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई है।

## चुनाव प्रक्रिया और धांधली को लेकर जगन रेड्डी के गंभीर आरोप
पराजय के बाद वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव परिणामों पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया कि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया से लेकर मतदान और अंततः मतगणना तक हर स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने और कई जिलों में वोटों की गिनती के दौरान हेरफेर करने के गंभीर आरोप लगाए। जगन ने दो टूक शब्दों में कहा कि चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव भले ही जीत लिया हो, लेकिन उन्हें जनता के सामने नैतिक हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनकी पार्टी किसानों, महिलाओं, युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और राज्य में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी यह लड़ाई पूरी मजबूती के साथ आगे भी जारी रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस हार से उनकी पार्टी का मनोबल या हौसला किसी भी रूप में कमजोर नहीं हुआ है और वे जनता के बीच डटे रहेंगे।

## टीडीपी ने इसे सरकार की कल्याणकारी नीतियों की सफलता बताया
विपक्ष की ओर से लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए टीडीपी के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने इन चुनावी नतीजों को एनडीए सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं और विकास के एजेंडे पर जनता की ओर से लगाई गई पक्की मुहर बताया। उन्होंने दावा किया कि इस बार के चुनावों में गठबंधन का स्ट्राइक रेट 90 से 95 प्रतिशत के बीच रहा है। राज्य के करीब 2.6 करोड़ मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस जनादेश ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और भाजपा के केंद्रीय व राज्य नेतृत्व के प्रति जनता के अटूट भरोसे को स्पष्ट कर दिया है। पल्ला श्रीनिवास राव ने वाईएसआर कांग्रेस पर चुनावों को बाधित करने के तमाम प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने अदालत में करीब 63 मामले दायर किए थे। उनके अनुसार, इस बार बैलेट पेपर से आए इन साफ-सुथरे नतीजों ने ईवीएम में गड़बड़ी के पुराने और बेबुनियाद आरोपों का भी करारा जवाब दे दिया है।

## मतदान प्रतिशत में इजाफा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस पूरे चुनाव घटनाक्रम के दौरान टीडीपी के वरिष्ठ नेता अलापति राजेंद्र प्रसाद और स्थानीय विधायक बुर्ला रामनंजनेयुलु ने भी वाईएसआर कांग्रेस पर मतगणना प्रक्रिया में लगातार बाधाएं उत्पन्न करने का गंभीर आरोप लगाया। इस बार के ग्रामीण निकाय चुनावों में जनता का उत्साह काफी अच्छा देखने को मिला और कुल 70.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि साल 2021 के पिछले चुनावों में यह आंकड़ा केवल 60.91 प्रतिशत ही रहा था। वोटों की गिनती को पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरे राज्य में कुल 365 मतगणना केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों के भीतर कुल 9,062 टेबल्स पर मतों की गिनती का कार्य संपन्न हुआ, जिसके लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के बेहद व्यापक और कड़े इंतजाम किए गए थे। इन चुनावी परिणामों के आने के बाद जहां एक ओर आंध्र प्रदेश में एनडीए खेमे का उत्साह सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी ओर वाईएस जगन मोहन रेड्डी के इन तीखे आरोपों ने चुनावी जीत के साथ-साथ राज्य में एक नए राजनीतिक विवाद को भी जोर-शोर से हवा दे दी है।

## इसका आप पर असर
आंध्र प्रदेश के ग्रामीण निकाय चुनावों के इन परिणामों का राज्य के राजनीतिक परिदृश्य और प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** इन परिणामों से राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय दलों और गठबंधन राजनीति के नए समीकरणों को बल मिलता है। यह चुनाव परिणाम यह भी दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनता विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के पक्ष में मतदान कर रही है।
- **आंध्र प्रदेश में:** राज्य के आम नागरिकों और मतदाताओं के लिए इसका अर्थ यह है कि ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों और प्रशासनिक नीतियों को अब और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। चुनाव परिणाम आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
आंध्र प्रदेश के ग्रामीण निकाय चुनावों में एनडीए की इस भारी जीत और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के पीछे कई प्रशासनिक और राजनीतिक कारण जुड़े हुए हैं।

- **कल्याणकारी योजनाएं:** एनडीए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनहितकारी योजनाओं और विकास एजेंडे को ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन मिला, जिससे गठबंधन का स्ट्राइक रेट 90 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गया।
- **बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत:** इस चुनाव में मतदान का आंकड़ा बढ़कर 70.72 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि 2021 में यह 60.91 प्रतिशत था, जो मतदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी को दर्शाता है।
- **प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियां:** चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन से लेकर मतगणना तक दोनों पक्षों के बीच कड़ा संघर्ष और अदालती मामले देखने को मिले, जिससे राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया।

## सवाल-जवाब

### 1. आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों में किस गठबंधन ने जीत हासिल की है?
तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने जिला परिषद और मंडल परिषद चुनावों में भारी जीत दर्ज की है।

### 2. वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव परिणामों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
जगन रेड्डी ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे चंद्रबाबू नायडू की नैतिक हार बताया है और दावा किया कि उनकी पार्टी ने जनता का दिल जीता है।

### 3. इस चुनाव में टीडीपी ने कितनी सीटें जीती हैं?
टीडीपी ने 229 जेडपीटीसी और 4,823 एमपीटीसी सीटों पर जीत हासिल की है।

### 4. इस बार के निकाय चुनावों में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
इस चुनाव में कुल 70.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि 2021 के चुनाव में यह आंकड़ा 60.91 प्रतिशत था।

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