राघव चड्ढा के बाद अब कांग्रेस नेता धर्मवीर गांधी का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब, परिवार के वोट भी कटे पटियाला के पूर्व सांसद धर्मवीर गांधी और उनके परिवार का नाम पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने इसके खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए डिप्टी कमिश्नर के पास अपने जरूरी दस्तावेज जमा किए हैं। पंजाब की राजनीति में उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया है जब एक और बड़े राजनेता का नाम मतदाता सूची से गायब होने का मामला सामने आया है। कुछ दिन पहले ही पंजाब से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से न मिलने की खबरें काफी चर्चा में रही थीं। अब इसी कड़ी में कांग्रेस के एक अन्य दिग्गज नेता और पटियाला से सांसद रह चुके धर्मवीर गांधी का नाम भी नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में देखने को नहीं मिला है। इस बड़ी प्रशासनिक चूक के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है, जिस पर संबंधित नेता ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद हुआ नाम गायब गुरुवार को सामने आई आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, पंजाब में हाल ही में संपन्न हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद धर्मवीर गांधी का नाम मतदाता सूची से बाहर हो गया है। इस पूरी स्थिति पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. गांधी ने हैरानी जताते हुए बताया कि उनके खुद के वोट के साथ-साथ उनके पूरे परिवार के नाम भी इस लिस्ट से पूरी तरह गायब कर दिए गए हैं। एक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ राजनेता के साथ इस तरह की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी होना अपने आप में एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है, जिसके कारण उन्होंने तुरंत इस पर एक्शन लिया है। तीन लोकसभा चुनाव लड़ने वाले नेता का नाम सूची से बाहर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए डॉ. गांधी ने बताया कि वे साल 2000 के आसपास से लगातार इसी स्थायी पते पर निवास कर रहे हैं। उन्होंने इसी विशेष पते और घर से अपने राजनीतिक जीवन में तीन लोकसभा चुनाव लड़े हैं, जिनमें से दो बार उन्हें शानदार जीत भी हासिल हुई थी। यह उनका ऐसा स्थायी पता है जो देश और राज्य के सभी आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में पूरी तरह दर्ज है। इसके बावजूद उनका और उनके परिवार के अन्य सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट में शामिल न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। दस्तावेज जमा कर दर्ज कराई गई औपचारिक आपत्ति इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस सांसद ने तुरंत अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है और अंतिम मतदाता सूची में नाम बहाल करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा कर दिए हैं। वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना पासपोर्ट, कक्षा 10वीं की मार्कशीट और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र डिप्टी कमिश्नर-सह-जिला चुनाव अधिकारी के दफ्तर में सौंपे हैं। ये सभी दस्तावेज सिर्फ उनके ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी जगदंबा कौशल, उनके बेटे निवेंदु प्राशर और उनकी बेटी रोहिणी प्राशर के नाम से भी जमा किए गए हैं ताकि परिवार के सभी सदस्यों के वोट सुरक्षित हो सकें। जब कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने अपना नाम सूची से गायब होने की शिकायत अधिकारियों के सामने रखी, तो उनकी तरफ से यह तर्क दिया गया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में धर्मवीर गांधी और उनके परिवार के जो पुराने विवरण दर्ज थे, वे उनके द्वारा हाल ही में जमा किए गए नए दस्तावेजों से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे हैं। शायद यही तकनीकी विसंगति उनके और उनके परिवार के नाम वोटर लिस्ट से कटने की मुख्य वजह बनी हो। हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से किसी भी व्यक्तिगत मामले पर कोई औपचारिक बयान या प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। चुनाव आयोग की अपील और तय समयसीमा प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि सभी नागरिक समय रहते अपने नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अच्छी तरह जांच लें। जिन लोगों के नाम इस नई ड्राफ्ट सूची में नहीं मिल रहे हैं, वे सभी नागरिक 13 अगस्त से लेकर 12 सितंबर के बीच अपने दावे और जरूरी दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा कर सकते हैं, ताकि आगामी फाइनल वोटर लिस्ट में उनके नाम दोबारा जोड़े जा सकें। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहे और सूचियों में मौजूद त्रुटियों को तय समय के भीतर दुरुस्त किया जा सके। इसका आप पर असर मतदाता सूचियों से प्रमुख नेताओं और आम नागरिकों के नाम गायब होने की यह घटना चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रशासनिक सटीकता के महत्व को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। • भारत में: देश भर के सभी नागरिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि वे समय-समय पर अपनी चुनावी सूचियों की जांच करें ताकि मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े। • पंजाब में: पटियाला और पूरे पंजाब के निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने नाम और दस्तावेजों का सत्यापन अवश्य कराएं। • दस्तावेज सत्यापन: जिन नागरिकों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच अपने दावे और जरूरी दस्तावेज जमा करके सुधार करवा सकते हैं। • पारदर्शिता की मांग: इस तरह की प्रशासनिक त्रुटियों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर जनता के बीच चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते हैं। सवाल-जवाब 1. धर्मवीर गांधी कौन हैं? धर्मवीर गांधी पंजाब के पटियाला से दो बार सांसद रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं। 2. धर्मवीर गांधी का नाम किस सूची से गायब मिला है? उनका नाम पंजाब की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब मिला है। 3. नाम क्यों हटाया गया है? अधिकारियों के अनुसार 2003 की वोटर लिस्ट के विवरण नए जमा दस्तावेजों से मेल नहीं खाते, जिससे यह गड़बड़ी हुई। 4. गांधी ने कौन से दस्तावेज जमा किए हैं? उन्होंने अपना पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट और अन्य जरूरी दस्तावेज डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में जमा किए हैं। 5. किन-किन परिवारिक सदस्यों के नाम सूची में नहीं हैं? धर्मवीर गांधी के अलावा उनकी पत्नी जगदंबा कौशल, बेटे निवेंदु प्राशर और बेटी रोहिणी प्राशर के नाम भी गायब हैं। 6. दावा और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा क्या है? नागरिक 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच अपने दावे और दस्तावेज जमा कर सकते हैं। 7. इससे पहले किस नेता का नाम वोटर लिस्ट से गायब होने की खबर आई थी? इससे पहले बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब होने की खबरें आई थीं। https://trendkia.com/politics/another-punjabi-politician-dharamvir-gandhi-finds-his-name-missing-from-draft-voter-list-27479 TrendKia — Har trend, sabse pehle.