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  "type": "article",
  "title": "आपराधिक मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, सीजेआई सूर्यकांत बोले नियम सबके लिए समान हैं",
  "summary": "राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई की मौखिक मांग पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत के लिए सभी पक्ष बराबर हैं और किसी भी विशेष प्राथमिकता के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।",
  "content": "कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मानहानि के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में त्वरित सुनवाई की गुहार लगाई गई। इस पर सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय व्यवस्था के समक्ष सभी याचिकाकर्ता और पक्षकार पूरी तरह समान हैं। अदालत ने शिकायतकर्ता के पक्ष से कहा कि यदि वे इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनना चाहते हैं, तो उन्हें बिना किसी जल्दबाजी के अदालत की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और जल्द सुनवाई के लिए एक औपचारिक आवेदन दाखिल करना होगा।\n\nपीठ की सुनवाई और वकीलों की दलीलें\nइस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ कर रही थी, जिसमें सीजेआई सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखा। गौरव भाटिया ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले को जल्द से जल्द सुनवाई की सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि लखनऊ की अदालत द्वारा जारी समन पर संज्ञान लिए जाने के फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, लेकिन पिछले पांच महीनों से यह अपील सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो पाई है।\n\nअदालत के भीतर अपनी दलील को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि कानून के समक्ष कोई भी व्यक्ति विशेष या VVIP नहीं होता है। उन्होंने टिप्पणी की कि किसी मामले का पांच महीने तक सूचीबद्ध न होना और सुनवाई न हो पाना न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित संदेश नहीं देता है। गौरव भाटिया की इन दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद संतुलित और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए हर नागरिक और हर पक्ष समान दर्जा रखता है। सीजेआई ने वकील को सलाह दी कि वे जल्द सुनवाई के लिए विधिवत अर्जी दाखिल करें, जिसके बाद अदालत उस पर विचार करेगी और मामले को सुनवाई के लिए प्रस्तुत करेगी।\n\nमानहानि केस की पृष्ठभूमि और विवादित बयान\nराहुल गांधी के खिलाफ यह आपराधिक मानहानि का मामला वर्ष 2022 में दिए गए उनके एक बयान से उपजा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने एक जनसभा में टिप्पणी की थी। 16 दिसंबर 2022 को अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों की पिटाई की है। इस बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।\n\nइस बयान के सार्वजनिक होने के बाद बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने इसे सेना का अपमान माना। उदय शंकर श्रीवास्तव, जो भारतीय सेना में कर्नल के समकक्ष रैंक पर सेवा दे चुके हैं, के लिए यह टिप्पणी अत्यंत पीड़ादायक थी। उन्होंने अपने अधिवक्ता विवेक तिवारी के माध्यम से लखनऊ की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सीमा पर तैनात देश के वीर सैनिकों के संबंध में इस तरह की बयानबाजी से भारतीय सेना की छवि धूमिल हुई है और इससे रक्षा बलों का मनोबल गिरा है।\n\nनिचली अदालत और हाई कोर्ट के कानूनी फैसले\nशिकायत पर सुनवाई करते हुए लखनऊ के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने राहुल गांधी को मानहानि के इस मामले में 24 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश जारी किया। इस समन आदेश को चुनौती देने के लिए राहुल गांधी ने तुरंत इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया और समन को रद्द करने की याचिका दायर की। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली और अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।\n\nइलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 199(1) की व्यापक व्याख्या की। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि \"पीड़ित व्यक्ति\" की परिभाषा केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं है जिस पर सीधे टिप्पणी की गई हो। यदि किसी अपराध या बयान से किसी अन्य व्यक्ति के सम्मान, स्वाभिमान या भावनाओं को गहरा आघात पहुंचता है, तो वह भी कानून की नजर में पीड़ित माना जाएगा। चूंकि शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने एक पूर्व सैन्य अधिकारी के रूप में भारतीय सेना के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया था और वे इस बयान से व्यक्तिगत रूप से आहत हुए थे, इसलिए कोर्ट ने माना कि वे धारा 199 के तहत शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार रखते हैं।\n\nसुप्रीम कोर्ट की पूर्व सुनवाई और वर्तमान स्थिति\nइलाहाबाद हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया था, तो जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की दो जजों की पीठ ने इस पर सुनवाई की थी। उस समय पीठ ने निचली अदालत में चल रही आपराधिक मानहानि की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके साथ ही अदालत ने राहुल गांधी के वकील से कुछ बेहद तीखे सवाल भी पूछे थे।\n\nजस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पूछा था कि देश की सुरक्षा और सेना से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दों को संसद के पटल पर उठाने के बजाय सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस तरह क्यों बयानबाजी की जा रही है। पीठ ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राहुल गांधी के पास अपने इस दावे की पुष्टि के लिए कोई विश्वसनीय दस्तावेज या पुख्ता जानकारी मौजूद थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम रोक की वजह से निचली अदालत में मामला रुका हुआ है। बुधवार को शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग पर सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कर दिया कि नियमित प्रक्रिया के तहत आवेदन आने के बाद ही इस पर आगे की सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह फैसला भारत में न्यायिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और मानहानि कानून (धारा 199 CrPC) के तहत आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को रेखांकित करता है।\n\n• भारत भर में आम नागरिकों पर प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश साफ करता है कि अदालती प्रक्रिया में किसी भी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को बिना तय नियमों के विशेष प्राथमिकता नहीं मिलेगी। इसका मतलब है कि सामान्य याचिकाओं की तरह VVIP से जुड़े मामलों को भी तय प्रक्रिया और औपचारिक अर्जी के माध्यम से ही सुना जाएगा।\n• सशस्त्र बलों और पूर्व सैनिकों पर असर: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस सिद्धांत की पुष्टि होती है कि देश की सेना के सम्मान से जुड़ा बयान देने पर कोई भी पूर्व सैनिक या नागरिक 'पीड़ित व्यक्ति' के रूप में मानहानि की शिकायत दर्ज करा सकता है। इससे सशस्त्र बलों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों के खिलाफ कानूनी राह आसान होती है।\n• सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों पर प्रभाव: इस मामले से राजनीतिक नेताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर बयान देते समय अधिक जिम्मेदारी बरतने का संदेश मिलता है। बिना पुख्ता सबूत या संसद के बाहर सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का जोखिम हमेशा बना रहेगा।\n• अदालती कार्यप्रणाली पर प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मौखिक दलीलों के बजाय लिखित और औपचारिक आवेदनों के जरिए ही जल्द सुनवाई की मांग को स्वीकार किया जाएगा। इससे केस लिस्टिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनुशासन बना रहता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी विवाद वर्ष 2022 में अरुणाचल प्रदेश सीमा पर हुई सैन्य झड़प के बाद राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक सार्वजनिक बयान के कारण शुरू हुआ था, जिसके बाद मानहानि की शिकायत दर्ज की गई।\n\n• विवादित बयान का मुख्य कारण: 16 दिसंबर 2022 को राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों से मारपीट की थी। इस बयान को पूर्व सैन्य अधिकारी ने सेना का अपमान माना।\n• शिकायतकर्ता का कानूनी आधार: बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि सेना के प्रति गहरा आदर रखने के कारण वे इस टिप्पणी से व्यक्तिगत रूप से व्यथित हुए हैं।\n• हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होना: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना कि धारा 199(1) CrPC के तहत कोई भी व्यक्ति जो अपराध से आहत हुआ है, वह पीड़ित माना जा सकता है, जिससे लखनऊ कोर्ट का समन सही ठहराया गया।\n• सुप्रीम कोर्ट में अर्जी का कारण: हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां अंतरिम रोक मिलने के बाद पांच महीने से मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ था, जिसके चलते शिकायतकर्ता ने जल्द सुनवाई की मांग की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के मानहानि केस में क्या निर्देश दिए हैं?\nसीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने शिकायतकर्ता से कहा कि वे जल्द सुनवाई के लिए मौखिक मांग के बजाय एक औपचारिक आवेदन दाखिल करें, क्योंकि अदालत के लिए सभी पक्ष समान हैं।\n\n2. राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत किसने दर्ज कराई थी?\nयह शिकायत बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने अपने अधिवक्ता विवेक तिवारी के माध्यम से लखनऊ अदालत में दर्ज कराई थी।\n\n3. मानहानि का यह मामला किस बयान से जुड़ा हुआ है?\nयह मामला 16 दिसंबर 2022 को दिए गए बयान से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने दावा किया था कि 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के जवानों की पिटाई की थी।\n\n4. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले पर क्या फैसला सुनाया था?\nइलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी और माना कि CrPC की धारा 199 के तहत शिकायतकर्ता 'पीड़ित व्यक्ति' की श्रेणी में आता है।\n\n5. क्या सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई है?\nहाँ, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पहले निचली अदालत की आपराधिक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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