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  "type": "article",
  "title": "अवैध मतदान की पड़ताल के लिए आव्रजन एजेंसी बना रही डेटा टूल, आंतरिक पत्राचार में पैलेंटिर प्रणाली का हुआ उल्लेख",
  "summary": "सार्वजनिक हुए अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि आव्रजन अधिकारी मतदाता सूची के विश्लेषण और संभावित जांच के लिए विशेष डिजिटल तकनीकों को तैयार करने में जुटे हैं।",
  "content": "अमेरिकी आव्रजन एजेंसी के आंतरिक पत्राचार से यह बात सामने आई है कि चुनाव में गैर-नागरिकों की कथित भागीदारी की जांच के लिए उन्नत निगरानी और डेटा विश्लेषण तकनीकों की तैयारी की जा रही है। सूचना की स्वतंत्रता कानून के जरिए हासिल किए गए रिकॉर्ड्स को एक कानूनी वकालत समूह, डेमोक्रेसी फॉरवर्ड द्वारा सार्वजनिक किया गया है। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने 150 से अधिक गैर-लाभकारी संगठनों की यह देखने के लिए जांच की कि क्या वे गैर-नागरिकों को मतदाता के रूप में पंजीकृत करने में मदद कर रहे थे। इसके अलावा, दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) अब मतदाता धोखाधड़ी की संघीय जांचों के केंद्र में आ गया है।\n\nजांच शाखा और नवाचार प्रयोगशाला की सक्रिय भूमिका\nआव्रजन एजेंसी की मुख्य घटक शाखा, होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स (HSI), चुनावी धांधली की पड़ताल में सबसे आगे रखी गई है। इस पूरी कवायद में उसकी नवाचार शाखा, जिसे आंतरिक रूप से आई-लैब के नाम से जाना जाता है, विशेष जांच उपकरण विकसित करने पर काम कर रही है। कानून और डेटा मामलों की विशेषज्ञ तथा फोर्डहम लॉ स्कूल की एसोसिएट प्रोफेसर चिन्मयी शर्मा का मानना है कि एजेंसी एक ऐसा तंत्र तैयार करना चाहती है जो जांच के दायरे में आने वाले संभावित व्यक्तियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने में पूरी तरह सक्षम हो सके। उनका कहना है कि ऐसे में पहले से मौजूद ढांचे और डेटा स्रोतों का विस्तार करना एक स्वाभाविक रणनीति मानी जाती है।\n\nसामने आए पत्राचार के अनुसार, 26 मई को ट्रांसनेशनल संगठित अपराध रोधी इकाई के एक कर्मचारी ने वोटर फ्रॉड विषय के साथ भेजे संदेश में लिखा कि आई-लैब न्याय विभाग की मतदाता सूचियों और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं के डेटा के विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस संदेश में बताया गया कि आपराधिक रिकॉर्ड को फिलहाल अलग रखा गया है और उसे जोड़ने के प्रयास चल रहे हैं। ईमेल में यह भी स्पष्ट किया गया कि आई-लैब के साथ तालमेल का मकसद मतदाता सूची की जानकारी को एलीट (ELITE) प्रवर्तन प्रणाली में शामिल करना है, जिससे जांच की रूपरेखा, सुराग प्रबंधन और विश्लेषणात्मक समीक्षा को मजबूत किया जा सके।\n\nएलीट प्रणाली और प्रौद्योगिकी प्रदाता का रुख\nएलीट प्रणाली का पूरा नाम एन्हैंस्ड लीड्स आइडेंटिफिकेशन एंड टारगेटिंग फॉर एनफोर्समेंट है। इस तकनीक के बारे में साल की शुरुआत में जनवरी में आई मीडिया जानकारियों से पता चला था कि इसके जरिए आव्रजन अधिकारी निर्वासन के संभावित लक्ष्यों के नक्शे तैयार कर सकते हैं, उनकी फाइलें खोल सकते हैं और संबंधित पते की विश्वसनीयता का स्कोर देख सकते हैं। यह तकनीक सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनी पैलेंटिर द्वारा समर्थित बताई जाती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर कंपनी का पक्ष बिल्कुल अलग है। पैलेंटिर के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के किसी भी डेटा को कभी भी एलीट प्रणाली में एकीकृत नहीं किया गया है।\n\nइसके बावजूद, 7 जुलाई को साझा किए गए एक अन्य आंतरिक ईमेल में फ्रॉड डब्ल्यूएआर नाम का अटैचमेंट शामिल था, जो एजेंसी की साप्ताहिक गतिविधि रिपोर्ट का हिस्सा था। इस संदेश में एक सरकारी कर्मचारी ने चुनावी अखंडता जांच से जुड़ा अपडेट साझा करते हुए बताया कि छह राज्यों—कनेक्टिकट, जॉर्जिया, केंटकी, मिसौरी, मिशिगन और न्यू मैक्सिको—के डेटा को आई-लैब द्वारा विश्लेषित और संवर्धित किया जा चुका है और उन्हें एलीट में पैलेंटिर प्रविष्टि के लिए लंबित रखा गया है। हालांकि, इन दस्तावेजों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वास्तव में किस सामग्री को संवर्धित किया गया था, लेकिन उसी बातचीत में एक अधिकारी ने लिखा कि यह अपडेट व्हाइट हाउस को भेजा जाएगा।\n\nसरकारी एजेंसियों की प्रतिक्रिया और राजनीतिक परिदृश्य\nपूरे घटनाक्रम पर संघीय एजेंसियों ने अपने जांच के तौर-तरीकों की गोपनीयता का हवाला दिया है। आव्रजन एजेंसी के एक प्रवक्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग अपनी जांच पद्धतियों और तकनीकों के अस्तित्व का खुलासा नहीं करता है। वहीं, गृह सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि वह सक्रिय जांचों पर सीधी टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन चुनावी धोखाधड़ी की जहां भी आशंका हो, उसकी पड़ताल सक्रियता से की जा रही है। गैर-नागरिक मतदाताओं पर नजर रखने के लिए एलीट के संभावित उपयोग के मुद्दे पर व्हाइट हाउस ने कोई औपचारिक बयान नहीं दिया।\n\nअगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले गैर-नागरिकों द्वारा वोट डाले जाने का दावा ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक चर्चा का एक अहम हिस्सा बना हुआ है। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य दिखाते हैं कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान करने के मामले अत्यंत दुर्लभ हैं। गृह सुरक्षा विभाग, जिसके प्रमुख सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन हैं, ऐसे मामलों को खोजने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है, लेकिन अब तक केवल मुट्ठी भर संभावित मामलों की ही पहचान हो सकी है। इसी सप्ताह न्याय विभाग ने विदेशी नागरिकों द्वारा कथित तौर पर मतदान से जुड़े अपराध करने के 16 मामलों में आरोप दर्ज करने की घोषणा की, जिनमें शामिल सभी लोग वैध स्थायी निवासी थे। इससे पहले, एक व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया था कि नेतृत्व के निर्देश पर काम कर रहे संघीय कर्मचारियों ने अवैध रूप से पंजीकृत मतदाताओं की तलाश के दौरान राज्य की वेबसाइटों की खोज कर नियमों का उल्लंघन किया हो सकता है।\n\nदीर्घकालिक तकनीकी क्षमताएं और संस्थागत आधार\nमध्यावधि चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी के बीच आव्रजन विभाग पृष्ठभूमि में ऐसे तकनीकी ढांचों पर काम करता नजर आ रहा है जो लंबे समय तक काम आ सकें। 26 मई के ईमेल में इस बात पर जोर दिया गया था कि एजेंसी अब व्यक्तिगत सुरागों के बजाय संगठनात्मक और नेटवर्क-आधारित जांच दृष्टिकोण को रणनीतिक प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस भाषा से संकेत मिलता है कि यह प्रणाली उस समय पूरी तरह सक्रिय या संचालन से ठीक पहले की स्थिति में नहीं थी, बल्कि इसे भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा था।\n\nचिन्मयी शर्मा का विश्लेषण है कि गृह सुरक्षा विभाग के तहत मतदाता जांच तंत्र का निर्माण इसलिए चुना गया क्योंकि इस विभाग के पास जरूरी अधिकार, बुनियादी ढांचा, वेंडर संबंध और अनुबंध सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। इन तमाम संसाधनों का एक साथ उपयोग करने से किसी भी नई निगरानी व्यवस्था को तेजी से स्थापित करने में मदद मिलती है। फिलहाल, सार्वजनिक हुए इन दस्तावेजों ने अमेरिकी चुनावी तंत्र में आव्रजन एजेंसियों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी आव्रजन एजेंसी द्वारा मतदाता डेटा और निगरानी तकनीकों के उपयोग से नागरिक अधिकारों और मतदाता पंजीकरण की प्रक्रियाओं पर गहरा असर पड़ सकता है।\n\n• नागरिक अधिकारों पर प्रभाव: आव्रजन डेटाबेस और चुनावी सूचियों के मिलान से वैध मतदाताओं के नाम गलती से संदेह के घेरे में आने का जोखिम बढ़ सकता है। इसके चलते जमीनी स्तर पर काम करने वाले सहायता समूहों की पंजीकरण गतिविधियों पर जांच का दबाव बढ़ सकता है।\n• गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए कानूनी जोखिम: सरकार द्वारा 150 से अधिक नागरिक सहायता समूहों की जांच करने से मतदाता जागरूकता अभियानों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इन संगठनों को अपने पंजीकरण अभियानों के दौरान कड़े दस्तावेजी नियमों और प्रशासनिक सवालों का सामना करना पड़ सकता है।\n• प्रवासी और स्थायी निवासियों के लिए सावधानी: ग्रीन कार्ड धारकों और वैध प्रवासियों को अपने नागरिकता दस्तावेजों और पते के रिकॉर्ड को पूरी तरह अद्यतन रखना होगा। कानून के तहत मतदान से जुड़े किसी भी गलत कदम पर तत्काल कानूनी और आव्रजन कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।\n• चुनावी गोपनीयता और डेटा सुरक्षा: राज्य स्तर की मतदाता सूचियों का उपयोग संघीय सुरक्षा प्रणालियों में होने से व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी। राज्यों के चुनाव अधिकारियों को अपने डेटा साझाकरण नियमों की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि सार्वजनिक किए गए आंतरिक ईमेल से पता चला कि संघीय सुरक्षा एजेंसियां मध्यावधि चुनावों से पहले गैर-नागरिक मतदान के दावों की जांच के लिए अपने तकनीकी तंत्र को विस्तार दे रही थीं।\n\n• दस्तावेजों का सार्वजनिक होना: डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक कानूनी वकालत समूह द्वारा सूचना की स्वतंत्रता कानून के तहत मांगी गई जानकारी के बाद ये आंतरिक पत्राचार सामने आए। इन ईमेलों ने स्पष्ट किया कि आव्रजन जांच शाखा ने चुनावी जांचों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।\n• राजनीतिक प्राथमिकताएं और चुनावी दबाव: मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक नेतृत्व द्वारा गैर-नागरिकों के अवैध मतदान के नैरेटिव को प्रमुखता से उठाया गया। इसी के चलते गृह सुरक्षा विभाग के तहत इस दिशा में सक्रिय जांच तंत्र तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई।\n• संस्थागत क्षमताओं का उपयोग: विशेषज्ञों के मुताबिक गृह सुरक्षा विभाग के पास पहले से व्यापक निगरानी ढांचा, डेटा पहुंच और निजी वेंडर अनुबंध मौजूद हैं। इन्हीं मौजूदा तकनीकी प्रणालियों का लाभ उठाने के लिए इस जांच को सामान्य न्याय विभाग के दायरे से बढ़ाकर सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला तक फैलाया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह मामला किस खुलासे से सामने आया है?\nडेमोक्रेसी फॉरवर्ड द्वारा सूचना की स्वतंत्रता कानून के तहत हासिल किए गए आंतरिक सरकारी ईमेलों से पता चला कि आव्रजन अधिकारी मतदाता धोखाधड़ी की जांच के लिए तकनीकें विकसित कर रहे हैं।\n\n2. एलीट (ELITE) प्रणाली क्या है?\nयह एन्हैंस्ड लीड्स आइडेंटिफिकेशन एंड टारगेटिंग फॉर एनफोर्समेंट प्रणाली है, जिसे आव्रजन अधिकारी लक्ष्यों की पहचान, केस फाइल देखने और पते के विश्वसनीयता स्कोर के लिए उपयोग करते हैं।\n\n3. क्या पैलेंटिर ने मतदाता सूची के एकीकरण की पुष्टि की है?\nनहीं, पैलेंटिर के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के डेटा को कभी भी एलीट प्रणाली में शामिल नहीं किया गया है।\n\n4. आंतरिक रिपोर्ट में किन छह अमेरिकी राज्यों का उल्लेख किया गया था?\nआंतरिक ईमेल में कनेक्टिकट, जॉर्जिया, केंटकी, मिसौरी, मिशिगन और न्यू मैक्सिको के डेटा के संवर्धन का उल्लेख किया गया था।\n\n5. न्याय विभाग ने हाल ही में कितने मामलों में आरोप तय किए हैं?\nन्याय विभाग ने विदेशी नागरिकों द्वारा मतदान से जुड़े अपराधों के कथित 16 मामलों में आरोप दर्ज किए हैं, जिनमें सभी वैध स्थायी निवासी थे।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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