बांकीपुर में प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका, दतिया और मांजलपुर के उपचुनाव नतीजों ने बदला सियासी समीकरण देश की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को 2-1 से शिकस्त मिली है, जहां बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने बीजेपी का 30 साल पुराना किला ढहा दिया और दतिया में कांग्रेस जीती, वहीं मांजलपुर में बीजेपी का दबदबा कायम रहा। देश की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक नई सरगर्मी पैदा कर दी है। इन उपचुनावों में विपक्षी गठबंधन के नेता बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं क्योंकि सत्तारूढ़ बीजेपी को 2-1 के अंतर से पिछड़ना पड़ा है। मजेदार बात यह है कि जो विपक्षी नेता कल तक चुनाव परिणामों को लेकर ईवीएम में सेटिंग, वोट चोरी, तथा पुलिस, प्रशासन और सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाते नहीं थकते थे, वे आज इन नतीजों के आते ही अपने सारे पुराने दावों को भूलकर जश्न में डूबे हुए हैं। तीन सीटों के इस चुनावी मुकाबले में जहां बिहार की बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर ने एक बड़ा उलटफेर किया है, वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस के पाले में चली गई है। हालांकि, गुजरात की मांजलपुर सीट पर बीजेपी का मजबूत दबदबा बरकरार रहा, जहां पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की। बांकीपुर में प्रशांत किशोर का ऐतिहासिक प्रदर्शन और वोटों का गणित बिहार की राजधानी पटना की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव नतीजे सबसे ज्यादा चौंकाने वाले रहे। इस सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 64,151 वोट हासिल किए। वहीं, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और बीजेपी के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 44,827 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। इस तरह प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार को 19,324 वोटों के भारी अंतर से पराजित कर दिया। इस उपचुनाव में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को मात्र 14,273 वोट मिले और उनकी ज़मानत तक जब्त हो गई। रेखा गुप्ता को मिले वोट कुल पड़े वोटों का महज 11 प्रतिशत ही थे। यह परिणाम आरजेडी के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है, क्योंकि नवंबर 2025 में संपन्न हुए पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में इसी बांकीपुर सीट पर आरजेडी उम्मीदवार को लगभग 30 प्रतिशत यानी 46,000 वोट मिले थे। महज कुछ महीनों के अंतराल में आरजेडी के वोट बैंक में आई यह भारी गिरावट पार्टी के घटते जनाधार की ओर इशारा करती है। 30 साल बाद ढहा बीजेपी का बांकीपुर किला: इतिहास के आईने में बांकीपुर में बीजेपी की हार को पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट पिछले तीन दशकों से बीजेपी का एक अभेद्य गढ़ रही थी। इस सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो साल 1995 में मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा ने पहली बार इस सीट से चुनाव जीता था, जिसे उस समय पश्चिम पटना सीट के नाम से जाना जाता था। नवीन किशोर सिन्हा साल 2006 में अपने निधन तक लगातार इस सीट से विधायक रहे। वर्ष 2006 में पिता के निधन के बाद हुए उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार बांकीपुर से विधायक चुने गए। इसके बाद से वे लगातार पांच बार इस विधानसभा सीट से चुनाव जीतते रहे। साल 2010 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने आरजेडी उम्मीदवार को शिकस्त दी थी। इसके बाद 2015 और 2020 के आम चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशियों को भारी मतों से हराया। पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन ने आरजेडी उम्मीदवार को पटकनी देकर अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा था। बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और तत्पश्चात राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर जब उपचुनाव हुआ, तो लगभग 30 साल बाद यह सीट बीजेपी के हाथों से फिसल गई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस प्रशांत किशोर की पार्टी 9 महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी, उन्होंने बीजेपी के इस अभेद्य किले में सेंध लगाकर अपनी पहली ऐतिहासिक जीत दर्ज की। दतिया में कांग्रेस का परचम और मांजलपुर में बीजेपी की एकतरफा जीत बांकीपुर के अलावा मध्य प्रदेश की दतिया सीट के उपचुनाव नतीजों ने भी बीजेपी को झटका दिया है। दतिया विधानसभा सीट पर हुए कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को कुल 66,757 वोट हासिल हुए, जबकि बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खाते में 60,741 वोट आए। दूसरी ओर, गुजरात की मांजलपुर सीट पर बीजेपी का राजनीतिक वर्चस्व पूरी तरह कायम रहा। वडोदरा जिले की मांजलपुर सीट पर बीजेपी प्रत्याशी सतीश पटेल ने 55,481 वोट हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की। इस सीट पर दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार भीखाभाई रबारी को केवल 24,851 वोट ही मिल सके। बीजेपी के सतीश पटेल ने कांग्रेस प्रत्याशी को 30,630 वोटों के विशाल अंतर से पराजित करके अपनी सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। विपक्षी नेताओं के तंज और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बांकीपुर और दतिया सीट पर बीजेपी की पराजय के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने इन नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह बीजेपी के अंत की शुरुआत है।" हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि जो नेता खुद अपनी पार्टी के विधायकों और सांसदों को संभालने में असमर्थ हैं, वे दूसरों के खत्म होने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रशांत किशोर को इस बड़ी जीत पर बधाई देते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष की गृह सीट हार गई है। अरविंद केजरीवाल का दावा था कि चंदा चोरी, पेपर लीक और ई20 जैसी नीतियों के कारण मोदी सरकार के प्रति जनता में गहरा असंतोष है, जिससे बीजेपी की ज़मीन खिसक रही है और लोगों का अहंकार टूट रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह डबल इंजन सरकार की डबल हार है। अखिलेश यादव का कहना था कि यह जीत बदलाव की शुरुआत है और अब बीजेपी की सबसे सुरक्षित और पारंपरिक सीटें भी उसे हार से नहीं बचा पाएंगी। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि आने वाले समय में बीजेपी का टिकट लेने वाला उम्मीदवार ड्रोन और दूरबीन से ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा। आरजेडी और विपक्षी गठबंधन के लिए बड़े आत्ममंथन के संकेत भले ही विपक्षी दल बीजेपी की हार पर जश्न मना रहे हों, लेकिन इन उपचुनावों के नतीजे बीजेपी से ज्यादा विपक्षी खेमे, खासकर आरजेडी और कांग्रेस के लिए चिंता का विषय हैं। बांकीपुर सीट पर आरजेडी का वोट शेयर 30 प्रतिशत से गिरकर महज 11 प्रतिशत पर आ जाना और उम्मीदवार की ज़मानत जब्त हो जाना यह दर्शाता है कि पारंपरिक विपक्ष का जनाधार तेजी से खिसक रहा है। जिस प्रशांत किशोर की पार्टी विधानसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई थी, उन्होंने बीजेपी के 30 साल पुराने गढ़ को उखाड़ फेंका, लेकिन तेजस्वी यादव और राहुल गांधी जैसे बड़े चेहरे अपनी पार्टी के वोट बैंक को बचा पाने में नाकाम रहे। ऐसे में यह चुनावी परिणाम सवाल खड़े करते हैं कि क्या बांकीपुर और दतिया में उच्च जातियों के मतदाताओं के मन में बीजेपी को लेकर कोई असंतोष चल रहा है, या फिर जनता अब पारंपरिक दलों के बजाय प्रशांत किशोर जैसे नए विकल्पों को ज्यादा तरजीह दे रही है। इसका आप पर असर • भारत में: तीन राज्यों के इन उपचुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित दलों के अलावा नए और क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्पों का प्रभाव बढ़ रहा है। • बिहार और मध्य प्रदेश में: परंपरागत किले ढहने के बाद अब राजनीतिक दलों को अपनी जमीनी रणनीति, उम्मीदवार चयन और स्थानीय मुद्दों पर नए सिरे से काम करना होगा। सवाल-जवाब 1. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में किसने जीत दर्ज की और किसे कितने वोट मिले? बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट हासिल करके 19,324 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 44,827 वोट मिले। 2. बांकीपुर सीट पर आरजेडी उम्मीदवार का क्या प्रदर्शन रहा? आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को महज 14,273 वोट (लगभग 11% वोट शेयर) मिले और उनकी ज़मानत जब्त हो गई, जबकि पिछले चुनाव में आरजेडी को 30% वोट मिले थे। 3. मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर उपचुनाव का क्या परिणाम रहा? दतिया सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 66,757 वोट हासिल कर बीजेपी के आशुतोष तिवारी (60,741 वोट) को 6,016 वोटों के अंतर से हराया। 4. गुजरात की मांजलपुर सीट पर कौन विजयी रहा? मांजलपुर सीट पर बीजेपी के सतीश पटेल ने 55,481 वोट पाकर कांग्रेस के भीखाभाई रबारी (24,851 वोट) को 30,630 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। 5. बांकीपुर सीट पर बीजेपी का इतिहास क्या रहा है? बांकीपुर सीट पिछले 30 वर्षों से बीजेपी का गढ़ रही थी, जहां 1995 में नवीन किशोर सिन्हा और 2006 से उनके पुत्र नितिन नवीन लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। https://trendkia.com/politics/bankipur-upachunava-men-prashant-kishor-ka-bara-dhamaka-datia-aura-manjalpur-ke-natijon-se-badala-siyasi-ganita-13231 TrendKia — Har trend, sabse pehle.