# बाराबंकी जनसभा में योगी आदित्यनाथ ने खोला पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का राज, बताया कैसे बचाए 3400 करोड़ रुपये

> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी की जनसभा में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण का किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे बिना जमीन के आवंटित हुए 15,200 करोड़ रुपये के पुराने टेंडर को रद्द करके, उनकी सरकार ने इस प्रोजेक्ट को 11,800 करोड़ रुपये में पूरा किया।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/barabanki-janasabha-men-yogi-adityanath-ne-khola-purvanchal-expressway-ka-raja-bataya-kaise-bachae-3400-karora-rupaye-9141 · **Language:** Hindi
**Tags:** योगी आदित्यनाथ, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बाराबंकी जनसभा, उत्तर प्रदेश राजनीति, समाजवादी पार्टी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़ा एक हैरान करने वाला किस्सा साझा किया है। मुख्यमंत्री ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए खुलासा किया कि कैसे उनकी सरकार ने पिछली सरकार द्वारा आवंटित किए गए टेंडर को रद्द करके राज्य के खजाने के करोड़ों रुपये बचाए। उन्होंने विस्तार से बताया कि जिस महात्वाकांक्षी सड़क परियोजना को समाजवादी पार्टी 15,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से पूरा करने की तैयारी कर रही थी, उसी प्रोजेक्ट को वर्तमान सरकार ने केवल 11,800 करोड़ रुपये में पूरा करके दिखाया।

## बिना जमीन अधिग्रहण के ही शिलान्यास
सीएम योगी ने अपने संबोधन में बताया कि जब उनकी सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, तो उन्हें पता चला कि समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पहले ही इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर चुकी थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था। पिछली सरकार ने आनन-फानन में टेंडर भी आवंटित कर दिए थे, जिसका कुल एस्टीमेट 15,200 करोड़ रुपये रखा गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब छह महीने बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ, तो उन्होंने अधिकारियों से देरी का कारण पूछा। इसके बाद जो सच्चाई सामने आई, वह चौंकाने वाली थी। अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रोजेक्ट के टेंडर बांटे जा चुके हैं, उसके लिए अभी तक जमीन का अधिग्रहण ही नहीं किया गया है।

## दो साल में जमीन अधिग्रहण और दोबारा टेंडर
बिना जमीन के चल रहे इस हवा-हवाई प्रोजेक्ट की सच्चाई जानने के बाद, मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पुराने टेंडर को पूरी तरह से रद्द करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया कि पहले एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक जमीन का अधिग्रहण पूरा किया जाए, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। पूरे दो साल की कड़ी मेहनत के बाद जब जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो गया, तब प्रधानमंत्री को आमंत्रित करके नए सिरे से इस प्रोजेक्ट का विधिवत शिलान्यास करवाया गया। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ।

## दोबारा टेंडर में भी शक और फिर से नीलामी
शिलान्यास के बाद जब नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए गए, तो एक बार फिर से लागत का अनुमान 15,200 करोड़ रुपये ही आया। यह देखकर सीएम योगी को शक हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ी तो नहीं हो रही है। उन्होंने बिना कोई देरी किए इस दूसरे टेंडर को भी तुरंत निरस्त कर दिया। इसके बाद सरकार ने एक नई रणनीति अपनाई और तकनीकी तथा वित्तीय बोलियां एक साथ आमंत्रित कीं। मुख्यमंत्री ने जनता को बताया कि इस पारदर्शी प्रक्रिया का नतीजा यह रहा कि जो प्रोजेक्ट पहले 15,200 करोड़ रुपये का बताया जा रहा था, उसे उनकी सरकार ने 11,800 करोड़ रुपये में तैयार करवा दिया।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया और भ्रष्टाचार पर लगाम लगने से सरकारी खजाने के हजारों करोड़ रुपये बचते हैं, जिनका उपयोग अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।
- **उत्तर प्रदेश में:** पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण से राज्य के पूर्वी हिस्सों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, जिससे स्थानीय व्यापार और रियल एस्टेट को बड़ा फायदा मिल रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह जनसभा कहां संबोधित की थी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह जनसभा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में संबोधित की थी।

### 2. मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में किस प्रोजेक्ट का जिक्र किया?
सीएम योगी ने अपने भाषण में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण और उसके टेंडर प्रक्रिया का जिक्र किया।

### 3. समाजवादी पार्टी की सरकार में इस प्रोजेक्ट का एस्टीमेट कितना था?
पिछली सरकार ने इस प्रोजेक्ट का एस्टीमेट 15,200 करोड़ रुपये तय किया था।

### 4. वर्तमान सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को कितने रुपये में पूरा किया?
वर्तमान सरकार ने इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को महज 11,800 करोड़ रुपये में पूरा करवा दिया।

### 5. सीएम योगी ने पहली बार टेंडर क्यों कैंसिल किया था?
उन्होंने पहला टेंडर इसलिए निरस्त किया क्योंकि बिना जमीन अधिग्रहण किए ही प्रोजेक्ट का टेंडर जारी कर दिया गया था।

### 6. जमीन अधिग्रहण में कितना समय लगा?
एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने में दो वर्ष का समय लगा था।

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