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  "type": "article",
  "title": "इजरायल के आगामी चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक भविष्य पर संकट, ये चार चेहरे तय करेंगे नई दिशा",
  "summary": "इजरायल में आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक साख दांव पर लगी है। गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट, इतामार बेन-ग्विर और मंसूर अब्बास जैसे प्रमुख नेता इस चुनावी मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।",
  "content": "यरुशलम में आगामी 27 अक्टूबर को होने जा रहे इजरायली आम चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी उत्सुकता बनी हुई है। देश के भीतर सुरक्षा ढांचे और युद्ध की रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जिसका सीधा असर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक सफर पर पड़ सकता है। मतदाता इस बात का फैसला करेंगे कि वर्तमान प्रधानमंत्री को सत्ता की कमान सौंपी जाए या फिर देश की राजनीतिक दिशा में कोई बुनियादी बदलाव लाया जाए। हालिया चुनावी सर्वे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गादी आइजेनकोट की अगुवाई वाली याशार! पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।\n\n \n\nइजरायली शासन प्रणाली और नेसेट की संरचना\n\nइजरायल की राजनीतिक व्यवस्था में मतदाता सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पद के लिए मतदान नहीं करते हैं, बल्कि वे राजनीतिक दलों के पक्ष में अपना वोट डालते हैं। इसके बाद विभिन्न दल आपस में मिलकर गठबंधन सरकारों का ताना-बाना बुनते हैं। देश की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। इतिहास में कभी भी किसी एक राजनीतिक दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ है, जिसके कारण चुनाव परिणामों के बाद छोटे और बड़े दलों के बीच आपसी समझौते होना अनिवार्य हो जाता है। आगामी चुनावों में भी यही गठबंधन सरकार के गठन की प्रक्रिया को पूरी तरह से प्रभावित करेंगे।\n\n \n\nबेंजामिन नेतन्याहू का अब तक का राजनीतिक सफर\n\nसत्ताधारी लिकुड पार्टी के प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू 77 वर्ष के हैं और वह इजरायल के इतिहास में सबसे लंबी अवधि तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं। तमाम राजनीतिक संकटों, आंतरिक विवादों और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बावजूद वह लगातार सत्ता में बने हुए हैं। उनके समर्थक राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में उनके लंबे अनुभव और देश की अर्थव्यवस्था पर उनकी पकड़ को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। इसके अलावा, अमेरिका के साथ उनके गहरे संबंध और डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी उनके समर्थकों के बीच एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है।\n\n \n\nकानूनी मुकदमों और सुरक्षा चूक के गंभीर आरोप\n\nदूसरी ओर, नेतन्याहू के विरोधी उन पर 7 अक्टूबर के हमलों से पहले सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक होने और देश की नीतियों को सही ढंग से संचालित न कर पाने का सीधा आरोप लगाते हैं। वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने उनके खिलाफ युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके अतिरिक्त, वह देश के भीतर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वत लेने जैसे गंभीर कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का पुरजोर खंडन किया है।\n\n \n\nगादी आइजेनकोट और मध्यमार्गी राजनीति का उभार\n\nइजरायली सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके 66 वर्षीय गादी आइजेनकोट इस चुनाव में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरे हैं। मोरक्को से आए यहूदी प्रवासियों के कामकाजी परिवार में जन्मे आइजेनकोट ने करीब चार दशक तक सेना की सेवा की है। वर्ष 2022 में राजनीति में कदम रखने वाले आइजेनकोट वर्तमान में मध्यमार्गी याशार! पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। गाजा संघर्ष के दौरान उनके बेटे और दो भतीजों की जान जाने जैसी व्यक्तिगत त्रासदियों ने उनकी सार्वजनिक छवि को भी एक नया आयाम दिया है।\n\n \n\nयुद्ध रणनीति पर मतभेद और राजनीतिक भविष्य\n\nयुद्ध कैबिनेट में पर्यवेक्षक की भूमिका निभाने के बाद आइजेनकोट ने प्रधानमंत्री के साथ रणनीतिक मतभेदों का हवाला देते हुए करीब आठ महीने बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें इजरायल की आक्रामक 'दहिया डॉक्ट्रिन' के निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है, जिसके तहत हमलावर ठिकानों पर भारी सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाता है। यदि वह गठबंधन बनाने में सफल होते हैं, तो वह मिजराही मूल के पहले इजरायली प्रधानमंत्री बन सकते हैं।\n\n \n\nनफ्ताली बेनेट की दक्षिणपंथी वापसी\n\nचौवन वर्षीय नफ्ताली बेनेट धार्मिक और दक्षिणपंथी विचारधारा के नेता हैं, जो यायर लैपिड के साथ मिलकर बेयाखाद गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं। फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के दर्जे का विरोध करने वाले बेनेट वेस्ट बैंक में बस्तियों के निर्माण का समर्थन करते हैं। वर्ष 2013 में संसद में पहुंचने से पहले वह नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2021 में वह सत्ता-साझेदारी समझौते के तहत प्रधानमंत्री की कुर्सी भी संभाल चुके हैं, हालांकि नेतन्याहू से उनके गहरे मतभेद जगजाहिर हैं।\n\n \n\nइतामार बेन-ग्विर के कट्टरपंथी विचार\n\nचालीस वर्षीय इतामार बेन-ग्विर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं और ओत्जमा येहुदित पार्टी की कमान संभालते हैं। अपने विवादास्पद बयानों और कट्टरपंथी विचारों के लिए पहचाने जाने वाले बेन-ग्विर ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा के आरोपियों का अदालत में बचाव करके अपनी पहचान बनाई थी। वह गाजा पट्टी से लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों के पलायन की योजना का समर्थन करने के साथ-साथ वहां दोबारा यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत भी करते हैं।\n\n \n\nमंसूर अब्बास और अरब समुदाय की राजनीतिक भागीदारी\n\nबावन वर्षीय मंसूर अब्बास फिलिस्तीनी-अरब मूल के इजरायली नेता और पेशे से दंत चिकित्सक हैं, जो राअम पार्टी का नेतृत्व करते हैं। वर्ष 2021 में उनकी पार्टी ने इजरायल सरकार में शामिल होकर इतिहास रचा था। अब्बास बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों के बजाय अरब समुदायों के भीतर अपराध नियंत्रण और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर अधिक जोर देते हैं। उन्होंने अपनी सूची में योआव सेगलोविट्ज जैसे यहूदी नेता को भी शामिल कर अपनी पहुंच को व्यापक बनाने का संकेत दिया है।\n\n \n\nनिष्कर्ष और आगामी चुनावों का महत्व\n\nयह चुनावी मुकाबला केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश की भविष्य की सुरक्षा नीति, गाजा संघर्ष के प्रबंधन और घरेलू राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित होगा। नेतन्याहू के अनुभव के सामने उनके प्रतिद्वंद्वियों की रणनीतियां चुनाव परिणामों पर गहरा असर डालेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nइजरायल में होने वाले आगामी चुनावों का परिणाम देश की सुरक्षा नीतियों और क्षेत्रीय कूटनीति पर सीधा असर डालेगा।\n\n• भारत में: भारत के साथ कूटनीतिक और रक्षा सहयोग के मामले में इजरायल के नए नेतृत्व का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। प्रधानमंत्री नेतन्याहू पहले ही भारत जैसे नए देशों के साथ गठजोड़ मजबूत करने की वकालत कर चुके हैं।\n\n• इजरायल में: मतदाताओं के लिए यह चुनाव घरेलू अर्थव्यवस्था, कर नीतियों और युद्धकालीन सुरक्षा उपायों को सीधे प्रभावित करेगा। चुनाव परिणामों के आधार पर गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई नीतियां तय होंगी।\n\n• आर्थिक प्रभाव: राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में इजरायली बाजार और रक्षा क्षेत्र से जुड़े निवेश पर निवेशकों की कड़ी नजर है। नई गठबंधन सरकार के गठन से देश की आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है।\n\n• सुरक्षा नीतियां: चुनाव के बाद आने वाले नतीजे देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे और फिलिस्तीन के प्रति अपनाए जाने वाले रुख को पूरी तरह से बदल सकते हैं। इससे नागरिकों की दैनिक सुरक्षा व्यवस्था और यात्रा नियमों पर भी असर पड़ सकता है।\n\n• गठबंधन सरकार: खंडित जनादेश की संभावना के चलते छोटी पार्टियों और धार्मिक दलों की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ जाएगी। इससे सरकारी नीतियों में कट्टर दक्षिणपंथी या मध्यममार्गी तत्वों का प्रभाव तय होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइजरायल में हो रहे इन चुनावों के पीछे देश की राजनीतिक अस्थिरता और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद उपजे गंभीर सुरक्षा सवाल मुख्य वजह हैं। युद्ध के प्रबंधन और सरकारी नाकामियों को लेकर जनता और राजनीतिक दलों के बीच गहरा असंतोष है।\n\n• सुरक्षा में चूक: हमास के नेतृत्व में हुए हमलों ने इजरायल की खुफिया और रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसी विफलता की जिम्मेदारी को लेकर नेतन्याहू सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है।\n\n• गठबंधन की मजबूरी: इजरायली संसद नेसेट में किसी भी दल को कभी पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिससे सरकार चलाने के लिए हमेशा क्षेत्रीय और छोटे दलों पर निर्भर रहना पड़ता है। यही वजह है कि राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते रहते हैं।\n\n• अंतरराष्ट्रीय दबाव: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने और वैश्विक स्तर पर बढ़ते कूटनीतिक दबाव ने नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को और अधिक जटिल बना दिया है।\n\n• नेतृत्व परिवर्तन की मांग: युद्ध के संचालन और दीर्घकालिक रणनीति के अभाव को लेकर सैन्य पृष्ठभूमि के नेताओं जैसे गादी आइजेनकोट ने मौजूदा प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इजरायल में आगामी चुनाव कब आयोजित किए जाएंगे?\nइजरायल में अगले हफ्ते 27 अक्टूबर को आम चुनाव आयोजित किए जाएंगे।\n\n2. इजरायली संसद का क्या नाम है और इसमें कितनी सीटें हैं?\nइजरायली संसद को नेसेट कहा जाता है और इसमें कुल 120 सीटें हैं।\n\n3. बेंजामिन नेतन्याहू किस राजनीतिक दल का नेतृत्व करते हैं?\nबेंजामिन नेतन्याहू राष्ट्रवादी लिकुड पार्टी के प्रमुख हैं।\n\n4. गादी आइजेनकोट कौन हैं और वह किस पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं?\nगादी आइजेनकोट इजरायल सेना के पूर्व प्रमुख हैं और वर्तमान में मध्यमार्गी याशार! पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं।\n\n5. नफ्ताली बेनेट किस गठबंधन का हिस्सा हैं?\nनफ्ताली बेनेट मध्यमार्गी नेता यायर लैपिड के साथ मिलकर बेयाखाद गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं।\n\n6. इतामार बेन-ग्विर के पास वर्तमान में कौन सा पद है?\nइतामार बेन-ग्विर इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं।\n\n7. मंसूर अब्बास किस पार्टी के प्रमुख हैं?\nमंसूर अब्बास इस्लामवादी राअम पार्टी का नेतृत्व करते हैं।\n\n8. नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई थी?\nवर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने युद्ध अपराधों के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-22",
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